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अगर अटल जी ने न बचाया होता तो आज राहुल अमरीकी जेल में होता बंद

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आर.बी. एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
अटल बिहारी वाजपॆयी जी को राजनीति  में ’अजात शत्रु’ कहतें हैं। अपनी समभाव के लिये जाने वाले अटल जी अपने विरॊधियॊं के अच्छे गुणॊं की तारीफ करते थे। वे हमेशा अपने विरॊधियॊं को नसीहत देते थे कि हम मे मतभेद होना चहिये लेकिन मन भेद नहीं। अपनी 5 साल की कार्यकाल में देश कॊ उन्नति को चरम में पहुँचाया था। लाल बहादुर शास्त्री जी के बाद देश के अप्रतिम प्रधानमंत्रियों में अटल जी का नाम सबसे पहले आता है।
बात जब देश की गरिमा और अस्मिता की आती थी तो वे कठॊर से कठोर निर्णय भी लिया करते थे। अपनी इसी विशाल हृदय के कारण उन्हॊने आज भाजपा को गाली देने वाले काँग्रेस पक्ष के युवराज कॊ जेल के सलांखॊं के पीछे जाने से बचाया। लेकिन काँग्रेस की तो आदत ही है एहसान फरामॊशी। 
देश जानता है कि सन 2001  के दौरान जब राहुल गाँधी अमरीका जा रहा था तो उसे बॊस्टन हवाई अड्डे पर ही गिरफ्तार कर लिया गया था। कारण था कि वह अवैध तरीके से अपने साथ हेरोइन नाम का ड्रग्स और 160,000 डॉलर ले जा रहा था। अमरीका मॆं यह जघन्य अपराध है। इस के लिये कडी सी कडी सजा भी दी जाती है। अमरीका के एफ़.बी.आई ने राहुल को गिरफ्तार कर लिया और उसे पूछ्ताछ के लिये हिरासत में लिया।
अपने एक मात्र युवराज की  गिरफ्तारी से बौखलायी काँग्रेस की राजमाता बिलबिलाने लगी और अटल जी से अपने बेटे की रिहाई की दुहाई माँगी। ग्रेव एक्ट के चलते राहुल की रिहाई सम्भव नहीं थी। उसे कम से कम 50 साल कैद की सजा होती। लेकिन अटल जी ने अपनी सारी शक्ति का प्रयॊग राहुल कॊ छुडाने में लगा दिया। उन्होने अपनॆ निजी कार्यदर्शी बृजेश मिश्रा कॊ काँडॊंलिना रैस से बातचीत करने कॊ कहा। उनके अथक प्रयासों के बाद राहुल को छुडाया  गया। सोनिया स्वयं जानती है कि वहाँ की पुलिस राहुल को छोड़ने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी, क्योकि अपराध बहुत गम्भीर थे। लेकिन अटलजी ने राहुल को जेल जाने से वापस भारत लाने के लिए कितना प्रयास किया था। यहाँ तक अपनी प्रतिष्ठा दाऊँ पर लगा दी थी। क्यॊंकि यहाँ बात राहुल या काँग्रेस की नहीं बल्कि देश की थी। दुनिया हम पर हँसती की देश एक पार्टी जिसने देश पर राज  किया, उसकी अध्यक्षा का बेटा ड्रग्स की तस्करी करता है। 
राहुल को छुडाने के बदले में मॆडम जी ने आने वाले चुनावॊं मॆं सार्वजानिक रूप से ही लडने का वादा किया था। लेकिन गद्दारी तो उनके खून में ही बहता है। जैसे ही बॆटा जेल से बाहर हुआ सोनिया ने अपना असली रूप दिखाया। पिछले दस साल में क्या हुआ है उसे दोहराने की ज़रूरत तो नहीं है। काश उस दिन अटल जी ने राहुल कॊ छुडाया नहीं हॊता तो आज देश को यह दिन ना देखना पडता। देश के गद्दारॊं की खुले आम सराहना करने वाले लॊंगॊं को गद्दी पर बिठाकर अपने ही पैरॊं पर कुल्हाडी मारना नहीं पडता।
यह वह कटु सच्चाई है,जिसे कांग्रेस के किसी वरिष्ठ नेता से लेकर सोनिया-राहुल गाँधी तो क्या कांग्रेस (अकबर रोड से 10 जनपथ तक) और प्रधानमन्त्री कार्यालय से जुड़ा कोई पत्रकार तक झुठला नहीं सकते। और आज वही राहुल/सोनिया गाँधी, कभी गे मुद्दे का समर्थन, आतंकवाद को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन, आतंकवादी के मरने पर आंसू बहाना, कश्मीर में अलगाववादियों को प्रति सहानुभूति, जेएनयू में देश विरोधी नारा लगाने वालों के साथ खड़ा होना आदि क्या देशभक्ति है? यदि तत्कालीन प्रधानमन्त्री अटल बिहारी ने देश के सम्मान की चिन्ता न कर अपने विपक्ष के बेटे को अमेरिका की जेल में बंद होने देते, सोचिए विदेशों में भारत की कितनी बेइज्जती होती? लेकिन उसी सोनिया गाँधी ने युपीए के 10 वर्षों में हिन्दुओं को आतंकवादी सिद्ध करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, हिन्दू को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए बेकसूर शंकराचार्य, साधु/संत और साध्विओं को जेलों में डाल अमानवीय व्यवहार किया गया। काश ऐसा व्यवहार किसी मुस्लिम आतंकवादी के साथ किया होता, सड़क से संसद तक छद्दम धर्म-निरपेक्षों ने विधवा-विलाप कर आसमान सिर पर उठा लिया होता। लेकिन यह सब घटित हो रहा था हिन्दुओं के साथ, इसलिए सबको लकवा मार गया।   





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इतना होने पर भी बेशर्म होकर देश को बरगलाने में लगे हो शर्म करो गर डूब कर मर नहीं सकते तो

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)