आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
आम आदमी पार्टी ‘आप’ को आयकर विभाग ने कारण बताओ नोटिस भेजा है। आयकर विभाग ने आप से पूछा है कि 30.67 करोड़ रुपये आपसे क्यों न वसूले जाएँ। आयकर विभाग के नोटिस पर आप ने कहा है कि हमारा चंदा पवित्र है और ये शत्रुतापूर्ण कार्रवाई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय खजांची दीपक बाजपाई ने कहा कि ‘आयकर का ये नोटिस बोगस और आधारहीन है। हमारा चंदा पूरी तरह पारदर्शी और पहली बार किसी पाटी के चंदे को गैरकानूनी ठहराया गया है’ आयकर विभाग ने 7 दिसंबर को पार्टी से पक्ष रखने को कहा है।
26 नवंबर 2017 को आम आदमी
पार्टी की स्थापना के 5 साल पूरे हुए. इस मौके पर पार्टी की तरफ से दिल्ली
के रामलीला मैदान में 26 नवंबर को एक रैली का आयोजन भी किया गया था. इसके
ठीक एक दिन बाद ही आम आदमी पार्टी को आय कर विभाग ने 30.67 करोड़ रुपये का
टैक्स नोटिस भेजा. विभाग ने पार्टी से पूछा है कि 13 करोड़ की अघोषित
संपत्ति के बारे में विभाग को सूचना क्यों नहीं दी. इसके अलावा विभाग ने उन
462 दान दाताओं का रिकॉर्ड नहीं रखने पर भी सवाल पूछे है, जिन्होंने करीब 6
करोड़ रुपये दान दिए हैं.
इस
नोटिस में आयकर विभाग ने उन दानदाताओं की लिस्ट थमाई है जिन्होंने 20,000
रुपये से ज्यादा का चंदा दिया है. आय कर विभाग ने यह नोटिस वित्त वर्ष
2014-15 और 2015-16 के लिए जारी किया है. विभाग ने असेसमेंट के दौरान कुल
68.44 करोड़ रुपये की आय भी पार्टी के खाते में जोड़ी है. नोटिस के मुताबिक
पार्टी को जवाब देने के लिए कुल 34 बार मौके दिए गए हैं. लेकिन, पार्टी ने
ठोस जवाब नहीं दिया. ये नोटिस आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किलें ला सकती
है.
गौरतलब है कि इसी साल
मई में आय कर विभाग ने आम आदमी पार्टी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था
कि आप पर कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाय? आयकर विभाग ने आम आदमी पार्टी
से 16 मई तक इसका जवाब देने को कहा था. आम आदमी पार्टी ने अपने चंदे का ठीक
ब्योरा न तो चुनाव आयोग को दिया और न ही आयकर विभाग को दिया था. आम आदमी
पार्टी पर बैंक खाते का ब्योरा, पार्टी की वेबसाइट पर दिया गया फंड का
ब्योरा और आयकर विभाग को दिया गया ब्योरा अलग-अलग रखने का आरोप है. आयकर
विभाग के नोटिस पर आप ने कहा है कि हमारा चंदा सही है. ये आरोप आधारहीन है.
आयकर विभाग के नोटिस में ‘आप’ पर चंदा नियमों के अनुकूल ना होने का आरोप लगाया है। इनकम टैक्स विभाग ने आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाए हैं उन्होंने साल 2014-15 के दौरान चंदे की जानकारी छुपाई है।स्मरणीय हो, सोनिया गाँधी की टीम में सम्मिलित होने होने से पूर्व अरविन्द केजरीवाल स्वयं आयकर विभाग में थे। किस धन को कहाँ और किस तरह प्रयोग करना चाहिए, इस बात का भी उन्हें ज्ञान होगा। दूसरे, वह शायद इस शंका में होंगे कि विभाग से कोई सहानुभूति मिल जाएगी। परन्तु अब सत्ता में परिवर्तन हो चूका है, और वह पार्टी सत्ता में है,जिसके नेताओं पर झूठे आरोप लगाने से नहीं चूकते। इतना ही नहीं, प्रधानमन्त्री मोदी पर भी आरोप लगाने से नहीं चूकते। अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस का समर्थन। एक नयी पार्टी एक राज्य से दूसरे राज्य से तीसरे,चौथे यानि हर राज्य में उम्मीदवार खड़े करना, धूमधड़ाके से प्रचार मुफ्त में नहीं होता। एक दिन सम्भव यह भी सच्चाई सामने आ जाए कि कांग्रेस से किस रूप में सहायता मिली। विदेशों में भी कोई सड़क पर पोटली लिए नहीं बैठा होता, कि भारत में कोई पार्टी बनेगी तो उसे खड़ा करने में यह पोटली दान में दे देंगे। देश इतने दल हैं, लेकिन जितनी तेजी से इस पार्टी ने पूरे देश में अपना जाल बिछाया है, जरूर दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली दिख रही है, जरुरत है गम्भीर जाँच की। ये हैं आरोप
- आम आदमी पार्टी ने अपने खाते में 13.16 करोड़ रुपये के चंदे की जानकारी नही लिखी
- आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग को दी चंदे की जानकारी में 461 दान देने वालों की नाम और पते की जानकारी नही दी जिन्होंने 6.26 करोड़ रुपये दिए
- जांच के दौरान पता चला कि ‘आप’ ने 36.95 करोड़ रुपये के चंदे की जानकारी वेबसाइट पर नही दी और पकड़े जाने पर वेबसाइट से सारी डिटेल हटा ली
- 29.13 करोड़ रुपये का चंदा चुनाव आयोग को नही बताया
- ‘आप’ ने हवाला ऑपरेटर से 2 करोड़ रुपये का चंदा लिया
- ‘आप’ ने जांच भटकाने की कोशिश की जबकि उनको 34 मौके दिए गए अपनी सफ़ाई पेश करने के
ये नोटिस साल 2014-15 के दौरान लिए गए चंदे के लिए आया है। इसमें अप्रैल 2014 के दौरान 2 करोड़ रुपये का चंदा भी शामिल है जिस पर काफ़ी लंबे समय से विवाद है। आरोप है कि ये चंदा काला धन है जिसको हवाला के ज़रिए पार्टी को चंदे के रूप में दिया गया।
फरवरी 2015 में जब दिल्ली में विधानसभा चुनाव चल रहे थे उसी समय के मामले सामने आया था जिस पर खुद पीएम मोदी ने कहा था ‘काली रात का काला धन’ और आम आदमी पार्टी का दावा है कि उन्होंने पूरे नियमों के तहत ये चंदा लिया था।
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