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नॉस्त्रेदमस और अधेड़ उम्र (नरेन्द्र मोदी)

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जिसने भी नॉस्त्रेदमस की भविष्यवाणियों का अध्य्यन किया हुआ है, उनके लिए 2014 चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले नहीं थे। इस फ़्रांसिसी ज्योतिष ने 1555 में ही भविष्यवाणी कर दी थी कि भारत में 2014 के चुनाव में एक नई पार्टी सत्ता में आएगी। जिसका नेतृत्व समुद्र तट से एक अधेड़ आयु का सख्त प्रशासक के हाथ होगा। उसका हर तरफ से घोर विरोध होगा, फिर भी सत्ताधिकारी बन, वह देश में 2025 तक राज्य करेगा और जिस बुलन्दी पर वह देश को लेकर चलेगा, उसके बाद आने वाला देश को उसी दिशा और मार्ग पर लेकर जाएगा, जो दिशा वह अधेड़ उम्र का शासक लेकर चल रहा होगा। विश्व में भारत का डंका बजेगा। गुलाम हुआ भारत अपनी वास्तविक आज़ादी में विश्व पर राज्य करेगा। भारत की सीमाएँ रामायण और महाभारत के युग तक फैली सीमाओं तक लेकर जाएगा। सर्वप्रथम यह भविष्यवाणियाँ Organiser साप्ताहिक में किश्तों में प्रकाशित हुई थी। हिन्दुत्व की बात आने पर अन्य समाचार पत्र-पत्रिकाओं में इस साप्ताहिक को खरीदने की होड़ लग गयी थी। भविष्यवाणी सम्बन्धित पूर्व अंक भी रद्दी में बिकने से वंचित रह गए। 
पिताश्री एम.बी.एल.निगम 
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केवल रतन मलकानी ,
विश्व चर्चित
मुख्य सम्पादक, Organiser 
Image result for modi photoनॉस्त्रेदमस की गुलामी वाली बात हज़म नहीं हो रही थी, पत्रकारिता में लगभग नवजात शिशु समान ही थे।अनुभव होते-होते ज्ञात हुआ कि केवल कुछ वर्षों को छोड़, वास्तव में भारत आज़ाद होते हुए भी एक गुलाम देश बना हुआ था। घर पर पिताश्री मगन बिहारी लाल निगम एवं कार्यालय में विश्व चर्चित मुख्य संपादक केवल रतन मलकानी की छत्रसाया में अर्जित ज्ञान से ज्ञात हुआ कि वास्तव में स्वतन्त्र भारत परिवर्तित गुलाम है। नेहरू-इन्दिरा गाँधी एक मुस्लिम, राजीव-सोनिया एक ईसाई। डॉ मनमोहन सिंह एक सिख जरूर थे, लेकिन प्रधानमंत्री केवल नाम के ही थे। होता वही था, जो उनके आका चाहते थे। उन बेचारों के सामने एक विकट समस्या थी। उनके दर्द को कोई नहीं समझ सकता, केवल वही समझ सकते हैं। हिन्दुओं को अपमानित किया जा रहा था, उन्हें आतंकवादी घोषित करने की घिनौनी राजनीति चल रही थी। गौरवविंत हिन्दू इतिहास को अँधेरे कमरों में फेंक दिया गया था। हमारे पूर्व हिन्दू सम्राटों ने विश्व चर्चित भवन, किले एवं गगनचुम्बी स्तम्भ बनवाए। लेकिन चाँदी के चंद टुकड़ों की खातिर उन सब पर मुगलों का नाम लिख दिया गया। 2014 चुनाव के दौरान एक हिंदी पाक्षिक को सम्पादित करते अपने स्तम्भ "झोंक आँखों में धूल -- चित्रगुप्त" में तत्कालीन प्रधानमन्त्री डॉ मनमोहन सिंह से शीर्षक "प्रधानमन्त्री राष्ट्र को जवाब दो" में इन्ही ऐतिहासिक मुद्दों पर जवाब माँगा था। जबकि कुछ ही माह पूर्व लाल किले से सम्बन्धित लिखने पर मौहल्ले में ही अपमानित दृष्टि से देखा जाने लगा था, लेकिन "प्रधानमन्त्री राष्ट्र को जवाब दो" ने उन विरोधियों की दृष्टि में काफी अंतर ला दिया। उस हिन्दू इतिहास की बात कहने वाले को साम्प्रदायिक करार दिया जाने लगा था। तुष्टिकरण चरम सीमा पर था।  लेकिन समय बड़ा बलवान होता है।
अवलोकन करिये:--

SOMETIME back I used to receive a pamphlet titled “ SHAKTI SANDESH ” published from Calcutta and now another paper from Shri R.V.Bhasin , Ad...
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आतंकवाद मुद्दा 
अब हालाँकि बहुत ज्योतिष 2019 में मोदी सरकार की वापसी की भविष्यवाणियाँ कर रहे हैं, लेकिन उन्हें झूठलाया भी नहीं जा सकता। 1555 की भविष्यवाणियाँ आज सत्यापित हो रही हैं। आज विश्व भारत को एक सम्मानित दृष्टि से देख रहा है। कल तक जिस आतंकवाद मुद्दे को कोई देश गम्भीरता से नहीं लेता था, आज इस अधेड़ उम्र(मोदी) ने जिस तरह विश्व पटल पर इस मुद्दे को उछाला, विश्व मन्थन करने को मजबूर हुआ और भारत के इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा मानने को विवश हो गए। जात-पात, धर्म, तुष्टिकरण की राजनीति हाशिए पर आनी शुरू हो गयीं, जबकि इस अधेड़ उम्र(मोदी) को अभी केवल तीन ही वर्ष हुए हैं। यानि नॉस्त्रेदमस की भविष्यवाणियाँ भारत में हर समस्या एवं मुद्दे पर सटीक बैठ रही हैं।बहुत लोग इस अधेड़ उम्र के खून के प्यासे हैं, लेकिन बड़ी-बड़ी महान शक्तियाँ इस अधेड़ उम्र पर आशीर्वाद बनाए हुए हैं। अक्सर अपने लेखो में यदाकदा लिखता रहता हूँ। 
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स्मरण आता है आशुतोष जी महाराज का 2014 चुनाव के दौरान, समाधि पर जाने से पूर्व, दिए एक प्रवचन में कथन "बिहार में नरेन्द्र मोदी बारूद के ढेर पर भाषण देगा, लेकिन उसे कुछ नहीं होगा।" वास्तव में यह अधेड़ उम्र(नरेन्द्र मोदी) पता नहीं कितनी अग्नि-परीक्षाओं को झेलता आया है। "मौत का सौदागर", "खून का दलाल" आदि आदि न जाने कितना कलंकित किया गया था। लेकिन स्वर्ण अग्नि में जल कर ही कुन्दन बनता है। प्रस्तुत है  डॉ प्रवीण पाटिल की भविष्यवाणी :-         
2014 के चुनावों ने हमेशा के लिए भारतीय चुनावों की कथा बदल दी. एक जाति आधारित वोट बैंक राजनीति में, पहली बार भारतीयों ने आम चुनावों में विकास के नारे के लिए मतदान किया. वे सभी नेताओं की दुकाने बंद हो गयी जो वोट बैंक की राजनीति के नाम पर चमकने की कोशिश में रहते थे.
चूंकि मोदी सत्ता में आए, मुलायम से ममता बनर्जी के हर धर्मनिरपेक्ष नेता कांग्रेस और ओवैसी ने ऐसे सवाल उठाए और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ प्रचार शुरू कर दिया. वे लोग ऐसे मुद्दे पर बात करते थे जिससे देश का माहौल बिगड़े. मुसलमानों और दलितों पर हमले 2014 के बाद से ही चर्चा के मुद्दे बन गए थे, क्योंकि यह संयोजन उन्हें सत्ता में वापस ला सकता था.
और इस तरह वे 2019 के चुनावों के लिए एक रास्ता तैयार कर रहे थे. लेकिन वे जनता ने शायद उनके यह मुद्दे को नाकार दिया और एक बार फिर उनके तरीके गलत साबित होने जा रहे है क्योंकि जनता विकास चाहती है और विकास सिर्फ मोदी और भाजपा ही ला सकती है.
तो, 2019 चुनावों का क्या परिणाम होगा? यहां एक ऐसा विश्लेषण सामने आया है जिसे देख कर कांग्रेस एक बार फिर निराश हो जाएगी. जिस व्यक्ति ने यह विश्लेषण किया गया है उसका विश्लेषण आज तक गलत साबित नहीं हुआ है.
डॉ. प्रवीण पाटिल ने अपने ट्विटर अकाउंट यह जानकारी दी है. इनके पास भविष्यवाणी हमेशा सही होने का रिकॉर्ड है. देखे उन्होंने क्या लिखा है…
At our data labs we have a hearty laugh every evening at Economic gloom, Political doom, Rahul Gandhi boom and Yashwant Sinha zoom et al.
At our data labs we have a hearty laugh every evening at Economic gloom, Political doom, Rahul Gandhi boom and Yashwant Sinha zoom et al.
BTW, yours truly was in Barkagaon in 2004; former FM saheb was as clueless about the impending doom then as he is about India now!!
It takes special powers of blindness to lose an assembly segment in your own parliamentary seat by over 40K votes, and he possessed that!
BJP+ is possibly heading towards 50%+ vote share across India in the next 2 years; 2019 could see 1 out of every 2 voters rooting for Modi!
2019 will probably be defined by an India of 99% homes with bijlee + 90% with toilets + 87% with cooking gas + near 100% bank accounts
2019 will probably be defined by an India of 99% homes with bijlee + 90% with toilets + 87% with cooking gas + near 100% bank accounts
It has taken 70 years of independence for ordinary Indians to invest their faith in one man and not be failed!
BJP+ is possibly heading towards 50%+ vote share across India in the next 2 years; 2019 could see 1 out of every 2 voters rooting for Modi!
अब इनकी सब बातें गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि डॉ. प्रवीण पाटील एक एसी चैम्बर में बैठे पत्रकार नहीं हैं, जिनके चेहरे पर ल्यूटीन स्टैम्प लगा हुआ है. वह अपनी टीम के उन स्थानों पर काम कर रहे हैं जिनके बारे में ल्यूटेन पत्रकारों ने भी सुना नहीं है. इस व्यक्ति के पास एक ट्रैक रिकॉर्ड है और नीचे दी गई छवि दिखाती है कि हमेशा सही अनुमान लगाने का ट्रैक रिकॉर्ड:
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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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