वैसे अमर सिंह कोई नयी बात नहीं बोल रहे, इस सच्चाई को उनके घोर विरोधी तक भलीभांति मानते हैं। लेकिन विरोध करना विरोधियों का काम है।
पत्रकारों से बातचीत में अमर सिंह ने कहा कि मीडिया बार-बार कहती है कि गुजरात हार जायेंगे तो क्या होगा लेकिन जहां मैं खड़ा हूं वो राहुल गांधी का गृह राज्य है। पंजा उनका निशान है और पंजे को पांच वोट मिले लेकिन वो खत्म नहीं हुए तो राजनीति में मोदी जैसे चतुर खिलाड़ी कभी खत्म नहीं होते।
आतंकवादियों से अहमद पटेल के साथ उनके संबंध पर अमर सिंह ने कहा कि चुनाव के मौकों पर ये सामान्य जेहादी प्रक्रिया हो गयी है। उन्होंने कहा कि सभी को याद होगा पूर्व सीएम अखिलेश के नाक के नीचे लखनऊ में आतंकवादियों ने गोलियां चलायी थी और प्रधानमंत्री मोदी को उस समय आतंकवादी कहा जा रहा था। जब भी चुनाव होता है आतंकवादी सक्रीय हो जाते हैं और इसके पीछे हर वो राजनेता जो वोट बैंक की राजनीति के कारण तुष्टिकरण की राजनीति करता हैं, धर्म निरपेक्षता की राजनीति करता है उसकी पूरी जमात है।
मैं किसी एक का नाम नहीं लूंगा ऐसी पूरी जमात को कहूंगा कि अपराधी का कोई मजहब नहीं होता। मैं यह नहीं कहूंगा कि मुस्लिम राष्ट्रवादी नहीं है लेकिन दुर्भाग्य से पकड़े जाने वाला हर आतंकवादी मुसलमान जरूर होता है।
महानगर के कैंटोमेंट स्थित एक होटल पहुंचे अमर सिंह ने गुजरात चुनाव में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के बढ़ते वर्चस्व पर कहा कि चुनाव में बड़े चेहरे भी विफल होते हैं। हार्दिक पटेल से भी बहुत बड़ा चेहरा विश्वनाथ प्रताप सिंह का था। वही वीपी सिंह जिनके नाम से नारों से यूपी की फिजा गूंजी थी कि ‘राजा नहीं फकीर है देश का तकदीर है।’ लेकिन जब मत पेटिया खुलीं तो जीरो बटा सन्नाटा मिला। उन्होंने कहा कि मोदी के विरोधियों का यह नया फन नहीं है ये जब भी चुनाव होता है वो पटीदारों की एक बैसाखी खड़ी कर देते हैं कि मतों का विभाजन हो और उससे सीधा नुकसान मोदी को हो। लेकिन तीनों बार वो विभाजन की बैसाखी को बड़ी सरलता से तोड़ देते हैं। हार्दिक पटेल को मैं बड़ी हार्दिकता से कहना चाहूंगा कि जब केशुभाई पटेल जैसा बड़ा चेहरा कांग्रेस की बैसाखी बनकर असफल हो गये और उस बैसाखी को सुगमता से तोड़कर पिछले तीन बार से मोदी लगातार सफल हो रहे हैं।
मोदी जी की समस्या खुद मोदी जी है क्योंकि उनके क्षमता से आधे स्तर का भी कोई व्यक्ति गुजरात में नहीं उभर पाया है। अमर सिंह ने गुजरात में भाजपा की तरफ से चुनाव प्रचार करने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि मौका मिलेगा तो भाजपा की तरफ से वो प्रचार करने से नहीं चूकेंगे। अमर सिंह का कहना रहा कि देश में इस समय जो नेतृत्व सामने है वो पहले से दसवें स्थान तक मोदी का कोई मुकाबला नहीं है। वो इसलिए नहीं कि भाजपा के नेता बल्कि इसलिए कि वो स्वाभावकि रूप से देश की आकांक्षा के अनुरूप उनकी अनुकुलता है और वो राजनीतिक गुरूत्वाकर्षण और पार्टी की बाध्यता से उपर उठ चुके है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या में दीपावली मनाये जाने पर अमर सिंह का कहना रहा कि एक क्षत्रिय अपने पुरखे मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम का पर्व मना रहा है। कोई यादव भाई कह दे कि वो राम को नहीं मानते ..कोई मुसलमान पांच वक्त की नमाज पढ़ता है तो इस पर कोई प्रश्न नहीं उठाता है और अगर कोई हिन्दू वो चाहे क्षत्रिय मुख्यमंत्री ही हो अगर मर्यादा पुरूषोत्तम का पर्व मना रहे हैं तो इसमें क्या मनाही है। हम किसी मुसलमान को यह तो नहीं कहते कि आप पांच वक्त की नमाज मत पढ़िए, हमें ही घंटियां बजाने दीजिये बल्कि आप इतनी नमाज पढ़िये कि आप का सिर घिस कर काला हो जाये।
खिलाड़ियों को गेरूआ रंग की शर्ट दिये जाने के सवाल पर अमर सिंह ने कहा कि वो तो भारत के ध्वज में है तो क्या हम राष्ट्रीय ध्वज को नहीं मानेंगे। गेरूआ रंग अब एक ट्रेड हो गया है जो प्रचलित हो गया है। गेरूआ तो संतत्व का, बैराग का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ताजमहल घोषित मकबरा है और वहां शिव चालीसा का पाठ निश्चित रूप से विरोधियों को अवसर देना है। यह मोदी को बदनाम करना है चाहे ये भाजपा के लोग करें या विहिप के लोग करें। जो भी तत्व ऐसा कर रहे हैं वो अनावश्क रूप से कर रहे हैं जैसे गो रक्षक के नाम पर उपद्रव करना, ताजमहल की आलोचना करना। इस तरह की राजनीति नरेन्द्र मोदी नहीं करते और बार-बार उन्होंने इसकी कड़ी निन्दा भी की है लेकिन वो कहते हैं कि ‘क्षमा बड़न को चाहिए छोटन को उत्पात’ हर जगह ऐसे लोग है जैसे सपा में आजम खान वैसे ही भाजपा में उनके तरह भी कुछ लोग है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निकाय चुनाव में एक नयी रणनीति तैयार किये जाने के सवाल पर कहना रहा कि सबसे पहले अपने पिता को वो सम्मान ही दे दें।
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