
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
यह केवल भारत में ही सम्भव है, जहाँ आक्रमणकारियों पर विधवा विलाप होता है, अपने वास्तविक इतिहास को नकारने का साहस होता है। इन्ही जयचन्दों के कारण मुग़ल भारत में घुस पाए, लगता है, मुग़ल आक्रमणकारियो पर विधवा विलाप करने उन्ही जयचन्दों के वंशज हैं। हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान जिसने 16 बार ज़ालिम मोहम्मद गौरी को शिकस्त दी हो और 17वीं बार जयचन्दों के ही कारण हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज को हार ही नहीं, अपनी ऑंखें भी उस ज़ालिम गौरी गँवानी पड़ी, तब भी किसी जयचन्द की रगों में देश का खून नहीं दौड़ा। शाबाशी है, उस राजकवि चंद्रवरदाई को जिसने सामने खड़ी मौत में अपने सम्राट को सहारा देता रहा। और दुश्मन के हाथोँ मरने से पहले अपने सम्राट के ही हाथों अपनी कविता के माध्यम से दुश्मन को 72 हूरों के पास पहुंचाकर अपने हाथों अपने सम्राट और स्वयं की जीवनलीला का अंत कर लिया। राजकवि चंद्रवरदाई से न तब किसी जयचन्द ने शिक्षा लेने का प्रयास किया और न ही आज के जयचन्द प्रयत्न करते हैं।
![]() |
| शाबाश है इस वीर शेरसिंह राणा को जो अपनी जान जोखिम मे डाल अपने सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अपमानित होती अस्थियाँ को भारत लाया ! |
इतना ही नहीं, हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज की अस्थियों का कितना अनादर हुआ, किस नेता ने चिन्ता की? बस मुग़ल आतताइयों की झूठी शान बखान कर देश को गुमराह करते रहे हैं और यह निंदनीय काम आज भी बदस्तूर जारी हैं। दूसरे, इन मुग़ल प्रसंशकों को सांसद फूलन देवी को मौत की नींद सुलाने वाले शमशेर सिंह राणा से शिक्षा लेनी चाहिए, जो अपनी जान जोखिम में डाल दिल्ली की तिहाड़ जेल से भाग कर अपने हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अस्थियों को भारत लेकर आने उपरान्त राजस्थान की जोधपुर पुलिस को समपर्ण किया। इस साहसिक कार्य के लिए क्या देश के किसी भी नेता में शमशेर सिंह को भारत रत्न से बड़े किसी राष्ट्रीय पुरस्कार को देने के लिए बोलने का साहस है?
तीसरे, रामजन्मभूमि हो, या ताजमहल या काशी, मथुरा इनका किसके कहने पर विरोध कर रहे हो? जिन मुगलों को इतना सम्मान दे रहे, जबकि इनके जन्म स्थलों पर कोई जानता भी नहीं। आखिर गुलामी मानसिकता का कब त्याग करोगे? इतना निश्चित है कि जो नेता अपने देश की धरोहरों एवं सम्राटों का सम्मान नहीं कर सकते, देश का भी सम्मान नहीं कर सकते, सिवाए देश भक्ति के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा कर जनता को भ्रमित करने की अलावा और कुछ नहीं कर सकते। यदि यही काम किसी विदेश में किया होता ऐसे छद्दम देशप्रेमियों को कभी का जेलों में डाल दिया होता।
यदि इन मुग़ल प्रशसंकों में लेशमात्र भी शर्म है तो केन्द्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों को ताजमहल में बन्द कमरों को खोलने के बाध्य करें। कोर्ट में केस दर्ज़ करें, ताकि देश मुगलों की नीचता से अवगत हो सके। जब पद्मनाभन मन्दिर के बन्द कक्षको से स्वर्ण मुद्राएँ अर्जित करने कोर्ट जा सकते हो, तो ताजमहल के बन्द कमरों को खुलवाने कोर्ट क्यों नहीं जाते? लेकिन फिर वही बात आती है, कि अयोध्या खुदाई में मिले अवशेषों को कोर्ट से छुपाने की क्षमता रखते हों, ऐसे जयचन्दों से इस काम की कल्पना करना भी व्यर्थ है। क्योकि जब कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी थे। कांग्रेसी चमचों की सेना ने उन्हें कुर्सी से उठा कर बाहर "फेंक दिया था, और सोनियां को कोप भवन से निकाल कर गद्दी पर बैठाया था। जिनकी मानसिकता ही तलवे चाटने की हो, उनसे और उम्मीद भी क्या की जा सकती है?
ताजमहल पिछले कुछ दिनों से खबरों के केंद्र में है। पहले बीजेपी विधायक संगीत सोम द्वारा ताजमहल को लेकर दिए गए अक्रामक बयान के बाद ताजमहल ही खबरों में छाया हुआ है। हर पार्टी इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रही है। हालांकि ये पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी के किसी नेता ने ताजमहल को लेकर इस तरह का बयान दिया हो। करीब 8 महीने पहले उत्तर प्रदेश चुनाव के समय भी एक टीवी शो पर चर्चा करते हुए योगी आदित्यनाथ ने भी ताजमहल का नाम बदले की बात कही थी। हालांकि तब वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं बने थे। उन्होंने गोरखपुर में मोहल्लों के नाम बदलने पर जवाब देते हुए कहा था कि, “हमने किया है हुमायूंपुर को हनुमानपुर किया है। और भी करेंगे जो हमारे अनुकुल होगा वो करेंगे। इसके बाद योगी ने कहा कि अगर किसी विदेशी आक्रांता के द्वारा कोई ऐसा काम किया है तो ऐसा किया जाना चाहिए। इसके बाद जब पत्रकार ने उनसे कहा कि फिर आप ताजमहल को राम महल भी कर सकते हैं तो योगी बोले की क्यों नहीं करेंगे। आवश्यकता होगी तो जरूर करेंगे।
ताजमहल पिछले कुछ दिनों से खबरों के केंद्र में है। पहले बीजेपी विधायक संगीत सोम द्वारा ताजमहल को लेकर दिए गए अक्रामक बयान के बाद ताजमहल ही खबरों में छाया हुआ है। हर पार्टी इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रही है। हालांकि ये पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी के किसी नेता ने ताजमहल को लेकर इस तरह का बयान दिया हो। करीब 8 महीने पहले उत्तर प्रदेश चुनाव के समय भी एक टीवी शो पर चर्चा करते हुए योगी आदित्यनाथ ने भी ताजमहल का नाम बदले की बात कही थी। हालांकि तब वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं बने थे। उन्होंने गोरखपुर में मोहल्लों के नाम बदलने पर जवाब देते हुए कहा था कि, “हमने किया है हुमायूंपुर को हनुमानपुर किया है। और भी करेंगे जो हमारे अनुकुल होगा वो करेंगे। इसके बाद योगी ने कहा कि अगर किसी विदेशी आक्रांता के द्वारा कोई ऐसा काम किया है तो ऐसा किया जाना चाहिए। इसके बाद जब पत्रकार ने उनसे कहा कि फिर आप ताजमहल को राम महल भी कर सकते हैं तो योगी बोले की क्यों नहीं करेंगे। आवश्यकता होगी तो जरूर करेंगे।
बहुत-से लोग इस बात से चिंतित हैं कि ताजमहल को यूपी टूरिज़्म बुकलेट में से ऐतिहासिक स्थानों की सूची से हटा दिया गया… किस इतिहास की बात कर रहे हैं हम…? जिस शख्स (शाहजहां) ने ताजमहल बनवाया था, उसने अपने पिता को कैद कर लिया था… वह हिन्दुओं का कत्लेआम करना चाहता था… अगर यही इतिहास है, तो यह बहुत दुःखद है, और हम इतिहास बदल डालेंगे… मैं आपको गारंटी देता हूं…” संगीत सोम ने मुगल बादशाहों बाबर, औरंगज़ेब और अकबर को ‘गद्दार’ कहा, और दावा किया कि उनके नाम इतिहास से मिटा दिए जाएंगे।
फैजाबाद का बदलेगा नाम, कहलाएगा अयोध्या धाम: केशव प्रसाद मौर्य
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को ऐलान किया कि फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या धाम किया जाएगा. केशव मौर्य ने ये बातें अयोध्या में छोटी दिवाली के मौके पर आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान कही. फिलहाल फैजाबाद जिले में ही अयोध्या आता है. इससे पहले कार्यक्रम में ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को नगर निगम बनाने की घोषणा की. सीएम योगी ने कहा कि वे अयोध्या को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए कई अन्य योजनाओं की भी शुरुआत की जाएगी.
उन्होंने कहा कि अयोध्या ने दुनिया मनाना सिखाया, लेकिन यहां कभी भी दिवाली नहीं धूमधाम से नहीं मनाई गई. इससे पहले पूरे कार्यक्रम में रामचरित मानस में वर्णित कथा को मूर्त रूप देने की कोशिश की गई. कथा में बताया गया है कि भगवान राम, सीता और लक्ष्मण लंका में रावण का वध करने के बाद जब अयोध्या लौटे थे तब यहां के लोगों ने घी के दीये जलाकर उनका स्वागत किया था. ठीक इसी कथा को दोहराया गया. राम, सीता और लक्ष्मण पुष्पक विमान रूपी हेलीकॉप्टर में बैठक अयोध्या आए. वहीं सीएम योगी गुरु वशिष्ठ की भूमिका निभाते हुए तीनों का स्वागत किया।
इतना ही नहीं इलाहबाद का भी नाम बहुत जल्द प्रयागराज रखा जाने वाला है। क्योकि इलाहाबाद को अंग्रेजी में Allahabad लिखा जाता है। यानि किस तरह जनता को पागल बनाया गया।
मुगलसराय स्टेशन का नाम बदल चुकी है केंद्र सरकार
हाल ही में केंद्र सरकार ने यूपी के ही मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलकर पं. दीनदयाल उपाध्याय किया था. 15 अक्टूबर से रेलवे और मुगलसराय जंक्शन के तकनीकी सिस्टम में पं. दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू)का नाम नजर आने लगेगा. टिकटों पर मुगलसराय नाम हटाकर दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन करने के लिए रविवार को दिनभर नई दिल्ली स्थित पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) व अनरिजर्व टिकटिंग सिस्टम (यूटीएस) में परीक्षण चला. IRCTC ने भी सामान्य व आरक्षण टिकटों पर भी दीनदयाल उपाध्याय का शार्ट फार्म अंकित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
अगर जरूरी पड़ी तो ताजमहल का नाम राम महल भी कर कर देंगे- CM योगी
हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर यू टर्न लेते हुए ताजमहल को एतिहासिक धरोहर बताया है। उन्होंने इस मुदेदे पर बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि ताजमहल को किसने और क्यों बनवाया। ताजमहल एक ऐतिहासिक धरोहर है। भाजपा नेता संगीत सोम के ताजमहल पर दिए गए विवादास्पद बयान के बाद मुख्यमंत्री योगी की यह टिप्पणी आई है। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में कहा, ‘यह मायने नहीं रखता कि ताज महल को किसने और क्यों बनवाया। यह भारत माता के सपूतों के खून पसीने से बना है। यह पूरी दुनिया में अपने वास्तु के लिए मशहूर है। यह एक ऐतिहासिक धरोहर है और हमारे लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है। खासतौर पर पर्यटन की दृष्टि से यह हमारी प्राथमिकता में है और पर्यटकों को सुविधाएं व सुरक्षा मुहैया कराना हमारी जिम्मेदारी है।’
ये बयान 27 Feb 2015 का है! लेकिन अब योगी आदित्यनाथ के CM बनने की घोषणा के बाद ऐसा लगता है! फ़ायर ब्राण्ड हिंदुत्व नेता योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री चुने जाने की घोषणा के बाद बवाल मच गया है! विरोधी और सेकूलर लोबी दहाड़े मार मार कर रो रही है! सबसे बड़ा कारण ये है कि योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे हैं!
अब सुनिए योगी राज का वो बयान जिसको सुनने के बाद कट्टरपंथी लोगों की पैंट गिली हो गयी थी! वे दहाड़े मार मार कर रोने लगे थे! इस बयान का काफ़ी विरोध हुआ था! लेकिन इस देश में अभी तक हिंदू की बात का विरोध ही तो होता आया है! वैसे तो राम मंदिर का फैंसला अभी भी कोर्ट में चल रहा है! दोनों पक्ष अपनी अपनी राय बनाते है! हिन्दू राम मंदिर बनवाने को ले कर आडा है! और मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिद बनवाने को ले कर एडी तक जोर लगा रहे है! अब देखने की बात यह है! की कोर्ट अब अपना क्या फैसला ले कर आती है!
राम मंदिर का यह विवाद लम्बे समय से चलता आ रहा है! काफी समय से इसको ले कर कोर्ट में सुनवाई चल रही है! कोर्ट इसको धर्म का मामला लेकर फैसला नही सुना पा रहा! लेकिन उम्मीद है! जल्द ही इसपर फैसला आने की उम्मीद है! साथ ही योगी के मुख्यमंत्री बनने से पहले लोगो को काफी उम्मीद थी! की योगी आदित्यनाथ मंदिर का निर्माण करवा कर दम लेंगे! लेकिन अभी ऐसा कुछ सामने नही आया है! जिससे यह साबित हो सके की मंदिर बनेगा! लेकिन कुछ लोगो का कहना है की मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है! अभी कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग भी यही कहते है की अयोध्य में राम मंदिर ही बनना चाहिए! कुछ दिन पहले खबर आई थी! की यूपी के मुस्लिम धर्म के कुछ लोग मंदिर के लिए ईंटो का ट्रक ले कर पहुचे थे! जिससे प्रशासन से रास्ते में ही रोक लिया था!
देखें यह विडियो:-



Comments