भारत के सर्वाधिक साक्षरता वाले प्रदेश में लाल आतंक की बर्बरता अपने चरम पर है । भारत के तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग का एवं राष्ट्रीय मीडिया का इस पर चुप्पी साधे रखना वाकई बेहद शर्मनाक है। वैसे तो सामाजिक असमानता,जलीकट्टू के दौरान पशुओं पर हो रहे अत्याचार, मानवाधिकारों की दुहाई देते हुए भारत में वामपंथी लोग आपको यत्र-तत्र घडियाली आंसू बहाते हुए मिल जायेंगे पर केरल में हो रही एक के बाद एक हत्याओं पर इस वर्ग का मौन इस बर्बर कार्य को इनकी मौन स्वीकृति देता हुआ प्रतीत होता है । 1978 में जब पत्रकारिता में पदापर्ण करने से आज तक केरल में संघ एवं भाजपा कार्यकर्ताओं की हो रही हत्याओं का सिलसिला रुका नहीं है। अख़लाक़ की भीड़ द्वारा मौत होने पर छद्दम धर्म-निरपेक्ष किस तरह विधवा-विलाप करते नज़र आए, लेकिन केरल में होती हत्याओं पर अंधे,गूंगे और बहरे बने बैठे हैं। क्या इनका खून खून नहीं, अख़लाक़ का ही खून खून था? लेकिन तब से लेकर यही देखा है कि किसी भी गैर-हिन्दू की हत्या होने पर समाजवाद और धर्म-निरपेक्षता संकट में नज़र आ जाती है। परन्तु केरल में होती हत्याओं पर छद्दमों के साथ-साथ मीडिया भी चुप्पी साधे रहता है,क्यों?
लाखों की संख्या में आरएसएस व् भाजपा की महिलाएं करवा चौथ का व्रत होने के बाद भी कम्युनिस्टों द्वारा केरल में हुए अपने कार्यकर्ताओ की नृशंस हत्याओं पर सबसे अधिक मुखर विरोध प्रगट कर रही थी। राहुल गांधी जितने बड़े पद पर है, महिलाओ के बारे में उसका बयान अत्यंत ही अशोभनीय है, बगैर नारी शक्ति के कोई भी संगठन नहीं चलता है, फिर उसे अपनी ही पार्टी की नारियो की फ़िक्र करनी चाहिए की वो शॉर्ट्स पहन कर आ रही है या नहीं, इससे साफ़ ज़ाहिर है की ये राहुल गांधी विदेशो में मौज मस्ती लेकर विदेशी संस्कृति में पूरी तरह रम गया है, कोई भी पहनावा व्यक्तिगत होता है, और आरएसएस में भी 90% कार्यकर्ता जीन्स नहीं पहनते अगर कोई पहनता भी है तो किसी को भी कोई ऑब्जेक्शन नहीं है ये उसका व्यक्तिगत विषय है। फिर भाजपा की नारी शक्तियो ने जब भी संसद में भाषण दिया, राहुल हमेशा शर्म से ही मुँह छुपा कर संसद से बाहर चले जाते हैं। अमेठी में इनके विकास कार्यो की झूठ का पर्दाफाश भी हुआ है कि कैसे किसानों की ज़मीने हड़प कर अपना खानदानी ट्रस्ट बना लिया। कुछ दिनों पहले स्पेन की किसी लड़की के साथ जो कि कच्छे में बेठी हुई थी फोटो देखीं, हम तो सोच रहे थे की यही कांग्रेस की नयी महारानी बनेगी, बाक़ी शादी न करके सबका दिल तोड़ दिया, फिर विदेशो में तो पहले बच्चा हो जाता है फिर उसके बाद कानूनन शादी होती है, जिसकी भारत देश में मान्यता नहीं है।
जहाँ इस प्रजाति की संख्या कम होती है वहाँ अधिकार,प्रजातंत्र और आजादी जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों में इनकी निष्ठा देखते हुए नहीं बनती किन्तु जहाँ यह प्रजाति बहुमत में होती है वहाँ इनके विपक्षियों के लिये लोकतांत्रिक मूल्य खरगोश के सींग के समान दुर्लभ हो जाते हैं। सचिन गोपालन, गंगाधरन, विशाल आदि ऐसे कई हमारे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के भाइयों भगवान का घर कहे जाने वाले केरल में वामपंथी रक्त क्रांति का शिकार होना पड़ा है। अभी कुछ महीने पहले की घटना पर दृष्टिपात् करें तो केरल में BJP के नेता को मात्र इसलिए लाल आतंक की बर्बरता का सामना करना पड़ा क्योंकि उन्होनें दलित छात्रों पर हो रहे शोषण के खिलाफ एक CPM समर्थित प्रधानाचार्या के खिलाफ अपना शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की भूल कर दी । बेचारे पी०पी० वावा जी को अपनी एक आँख खोनी पडी । केरल में वामपंथी आतंकियों द्वारा राजनैतिक एवं वैचारिक विरोधियों की हत्या अथवा दमन का यह कोई पहला उदाहरण नहीं है । 1969 से अब तक वहाँ 262 राजनैतिक अथवा वैचारिक विरोधियों की हत्या की जा चुकी है । सदानन्द मास्टर, रामचन्द्रन,रेमिथ उथपन,संतोष,बेबी अंचेरी आदि अनेक नामों की एक ऐसी लम्बी फेहरिस्त है जिनको इस वामपंथी आतंक का बर्बर सामना करना पडा है । 28 अप्रैल 1969 को संघ के स्वयंसेवक श्री वेदिक्कल रामकृष्णन की बर्बर हत्या के आरोपी तो आज के मुख्यमंत्री श्री पिनाराई विजयन तथा CPI(M) के वर्तमान सचिव कोडियारी बालकृष्णन के ससुर राजू मास्टर थे । हालांकि दोनो आरोपी बाद में कोर्ट से बरी कर दिए गये । पिनाराई के सहयोगी एवं इडुक्की जिला समिति के सदस्य एम० एम० मणि ने तो यह गर्वपूर्वक स्वीकार किया है कि राजनैतिक विरोधियों का वही हश्र होगा जो कि टी० पी० चन्द्रशेखरन का हुआ…… पार्टी की सफाई की तैयारी शुरु हो गयी है । 13 लोगों की सूची बन गयी है जिनमें 3 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया है । ध्यातव्य है कि ये तीनों सदस्य कांग्रेस के थे । टी० पी० चन्द्रशेखरन का कसूर महज इतना था कि उसने 2008 में माकपा को छोडकर मार्क्सवादी रिवोल्यूशनरी पार्टी का गठन कर दिया । जबकि अभी भी वह मार्क्सवादी ही था । हद तो तब होती है जब ये लाल आतंकी अपने द्वारा की गयी हत्याओं को भी नैतिकता का अमलीजामा पहनाने लगते हैं ।
जयकिशन मास्टर की 42 बच्चों के सामने ही कक्षा में हत्या के बाद माकपा नेता एन० एन० विजयन बडे फक्र से कहते हैं कि “क्लासरुम है तो क्या हुआ,फासिज्म को खत्म करने के लिये इस तरह की कार्रवाही बच्चों के सामनें भी हो सकती है”। भारत में असहिष्णुता का पाखण्ड प्रलाप करने वाली इस प्रजाति में कितनी सहिष्णुता है,यह जगजाहिर है । पूरी दुनिया इससे वाकिफ है कि राजनैतिक हत्याओं के मामले में इस वामपंथी प्रजाति का कोई सानी नही हो सकता । बीसवीं शताब्दी इनके रक्तरंजित इतिहास की गवाह बनी है। अकेले 90 से 100 मिलियन हत्याओं का रिकार्ड इस प्रजाति के नाम पर है। रुस,चीन,कम्बोडिया,नार्थ कोरिया,इथोपिया,क्यूबा,लैटिन अमेरिका आदि देश जहाँ भी इस विचारधारा को सर उठाने का मौका मिला है वहाँ इसके अधिनायकों नें नागरिकों के समस्त अधिकारों का बलात्कार कर दिया । आजकल नार्थ कोरिया में कोई नीली जींस महज इसलिए नहीं पहन सकता क्योंकि किम जोंग युन को नीली जींस अमेरिकी साम्राज्यवाद की प्रतीक प्रतीत होती है । किम योंग चोल को मात्र इसलिए तोप से उडा दिया कि उनको किम जोंग युन के भाषण के बीच झपकी आ गयी थी ।
शुक्र है कि भारत की संसद इस मामले में भाग्यशाली है । भारत में चाहे पश्चिम बंगाल हो या चाहे त्रिपुरा,चाहे केरल हो या चाहे छत्तीसगढ,झारखंड,या बिहार के नक्सल प्रभावित इलाके । इस प्रजाति नें कब बेचारे ग्रामीणों के हाथों में बम,बन्दूक,और बारुद थमा दिया ,पता ही नहीं चला ।
जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में भी आये दिन इनकी हिंसक प्रवृत्तियों से विश्वविद्यालय प्रशासन एवं कुलपति को सामना करना पडा है ।चाहे वह अकादमिक भवन में कुलपति एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की बन्दी का मामला रहा हो या चाहे स्टैंटिंग कमेटी की मीटिंग में की गयी तोडफोड़। यह सब इनकी बढती असहिष्णुता का परिचायक है । राजनैतिक एवं वैचारिक विरोधियों को किसी चीज में गलत तरीके से फंसाकर उसे अपने रास्ते से अलग कर देना इनकी पुरानी आदत है। जिसका ये लोग समय आने पर बखूबी इस्तेमाल करते हैं ।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् द्वारा महारैली की घोषणा
आज पूरा विश्व इस दूषित विचारधारा की सच्चाई से वाकिफ हो चुका है । केरल में आये दिन हो रही हत्या प्रदेश की कानून व्यवस्था के मुख पर भी तमाचा है । केरल माकपा सरकार की सरपरस्ती में चल रही इन बर्बर हत्याओं के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् दिनांक 11 नवम्बर 2017 को केरल की राजधानी तिरुवंतपुरम में अपना विरोध प्रदर्शन प्रकट करने हेतु महारैली करने जा रही है। आप भी चलो केरल अभियान का हिस्सा बनकर भगवान के घर को कसाइख़ाना बनाने वाली इस दूषित विचारधारा के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनें।

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