
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
ये विडियो तीन महीने पहले की है लेकिन मीडिया में इस खबर को नहीं दिखाया गया था। भारत की मीडिया का दोहरे चरित्र यही से पता चलता है। ये मुस्लिम नेता खुलेआम धमकी दे रहा है, और ये धमकी भारत की 80% जनसख्याँ वाले हिन्दू समाज को है।
ये मुस्लिम नेता जिस तरह धमकी दे रहा है उसे सुन हर हिन्दू का खून खौल जाएगा। ये बोलता है की अगर राम मंदिर बना तो पुरे भारत में ऐसा जलजला लायेगें की पूरी दुनिया याद रखेगी। यह विडियो देख कर हर हिन्दू का खून खोल जायेगा, यह विडियो देख कर आपको भी महसूस होगा क्या इस तरह का बयांन देना इन मुस्लिम नेता को शोभा देता है !
या फिर यह सब मुस्लिम नेता अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए कर रहे है, इस तरह का भड़काऊ भाषण कई बार मुस्लिम नेताओ को देखा गया है, हैदराबाद के नेता ओवेशी भी इसी तरह का काम करते है, पेशे से वह एक वकील है, लेकिन उनका काम भी हिन्दुओ के खिलाफ जहर उगलना है, उन्होंने ने भी राम मंदिर को ले कई बार मुस्लिम लोगो को भड़काया हुआ है !
देखे यह विडियो
राम मंदिर का मुद्दा हिन्दुओ की आस्था से जुड़ा हुआ है। और हर बार आने वाली सरकार के गले की फ़ांस बन जाता है। इस बार फिर बीजेपी की सरकार के आने के बाद ही इस मुद्दे ने फिर से रफ़्तार पकड़ ली है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी दोनों पक्षो से कोर्ट के बहार ही इसका समाधान निकालने को कहा है। इसके साथ ही देश के नामचीन नेता हिन्दुओ की अटुट आस्था वाले इस मुद्दे पर अपनी रोटिया सेकने पर लगे रहते है।
अवलोकन करें:--
हाल ही में बीजेपी सांसद उमा भारती ने राम मंदिर को ले कर एक बार फिर बयांन दिया है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को ले कर अवाज़ बुलंद करते हुए कहा की, राम मंदिर के लिए यदि उन्हें जेल जाना पड़े या फांसी पर लटकना पड़े तो वह भी ख़ुशी स्वीकार है।
जब केंद्रीय मंत्री उमा भारती से पूछा गया की क्या अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे की चर्चा पर योगी जी से मुलाकात की है, तो उमा भारती ने कहा की हमे राम मंदिर की चर्चा करने की अब जरूरत नही है। हम राम मंदिर मुद्दे को लेकर अनभिज्ञ नहीं हैं। उमा भारती ने कहा कि योगी जी के गुरु महंत अवैद्यनाथ मंदिर आंदोलन के नेताओं में शामिल थे। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में वो इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं कहेंगी। हालांकि उन्होंने ये जरूर कहा कि खुद सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मामले को कोर्ट के बाहर भी आपसी बातचीत से हल किया जा सकता है।
आज केन्द्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार पूर्ण बहुमत से है, क्यों नहीं सुप्रीम कोर्ट पर उन साम्प्रदायिक लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए दबाव बनाया जाता, जिन लोगों ने रामजन्मभूमि की खुदाई में मिले मन्दिर के अवशेषों, फर्श, खण्डित मूर्तियों को क्यों नहीं कोर्ट में प्रस्तुत किया गया? जबकि खुदाई में 1 नहीं 14 खम्बे निकले थे, वह भी 11वीं एवं 14वीं सदी के, खण्डित मूर्तियाँ, क्यों नहीं कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए गए? क्या इन लोगों पर कोर्ट को गुमराह कर अपनी रोटियाँ सेकने का आरोप नहीं बनता?
मुख्य बात यह कि जब कोर्ट ने भूमि पूजन की इजाजत दी थी, फिर क्यों विवाद लम्बित रखा गया? जो इस बात को प्रमाणित करता है कि मुद्दा मन्दिर-मस्जिद का नहीं तत्कालीन सरकारें किसी तरह अपने मुस्लिम वोट बैंक को हाथ से नहीं जाने देना चाहती थी और कोर्ट को इसे लम्बित बनाए रखने का दबाव बनाकर मुद्दे को जीवित रख मालपुए खाती रही। सच्चाई सामने आने पर किसी मुसलमान का दिमाग़ पागल नहीं है कि वह दंगे में कूदे। तत्कालीन पिछली सरकारें मुसलमानों को भ्रमित कर उनके वोटों पर राजनीती करती रही और मुसलमान पागल बन उन पर विश्वास कर विश्व हिन्दू परिषद्, जनसंघ वर्तमान भारतीय जनता पार्टी को अपना दुश्मन समझ रहा है।


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