1. मुहर्रम पर मूर्ति विसर्जन पर सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा, 'कुछ भी गलत होने की आशंका के आधार पर धार्मिक मामलों पर बंदिश नहीं लगा सकते है।'
2. कोर्ट ने ममता सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, 'आपके पास अधिकार हैं, पर असीमित नहीं। आप सभी नागरिकों को बराबरी की नजरों से देखें।'
2. कोर्ट ने ममता सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, 'आपके पास अधिकार हैं, पर असीमित नहीं। आप सभी नागरिकों को बराबरी की नजरों से देखें।'
हाई कोर्ट ने कहा, धार्मिक मामलों में सरकारें किसी भी तरह के दखल देने से बचें।
3. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध लगाना सबसे आखिरी विकल्प है। कोर्ट ने कहा कि आखिरी विकल्प का इस्तेमाल सबसे पहले क्यों, सरकार को सिलसिलेवार तरीके से कदम उठाने होंगे।
4. चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा, सरकार को प्रतिबंध लगाना तो सभी पर क्यों नहीं लगाया. सरकार कैलेंडर को नहीं बदल सकती है, क्योंकि आप सत्ता में हैं इसलिए दो दिनों के लिए बलपूर्वक आस्था पर रोक नहीं लगा सकते हैं। सरकार को हर हालात के लिए तैयार रहना होंगे।
5. सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि क्या सरकार को कानून व्यवस्था का अधिकार नहीं है। वकील की ओर से कहा गया है कि अगर कानून व्यवस्था बिगड़ी तो किसकी जिम्मेदारी होगी. हाई कोर्ट की बेंच ने इस दलील को सिरे खारिज कर दिया।
6. हाई कोर्ट ने कहा पूजा-पाठ वर्षों से चलते आ रहे हैं, ऐसे में मामलों में दखल की गुंजाइश नहीं होती है।
7. कोर्ट ने कहा कि आप दो समुदायों के बीच दरार क्यों पैदा कर रहे है। दुर्गा पूजा और मुहर्रम को लेकर राज्य में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है उन्हें साथ रहने दीजिए।
8. किसी भी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सामाजिक एकता को कायम रखने वाले फैसले ले।
9. धार्मिक मामलों में किसी मुश्किल से निपटने के लिए सरकार को अपने तंत्र का इस्तेमाल करना चाहिए न कि संभावनाओं पर काम करना चाहिए।
10. आखिर में फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट की बेंच ने कहा, मुहर्रम के दिन भी रात 12 बजे तक दुर्गा पूजा करने वाले लोग मूर्ति विसर्जन कर सकेंगे। साथ ही सरकार की जिम्मेदारी है कि वे उन्हें सुरक्षा मुहैया कराए।
3. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध लगाना सबसे आखिरी विकल्प है। कोर्ट ने कहा कि आखिरी विकल्प का इस्तेमाल सबसे पहले क्यों, सरकार को सिलसिलेवार तरीके से कदम उठाने होंगे।
4. चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा, सरकार को प्रतिबंध लगाना तो सभी पर क्यों नहीं लगाया. सरकार कैलेंडर को नहीं बदल सकती है, क्योंकि आप सत्ता में हैं इसलिए दो दिनों के लिए बलपूर्वक आस्था पर रोक नहीं लगा सकते हैं। सरकार को हर हालात के लिए तैयार रहना होंगे।
5. सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि क्या सरकार को कानून व्यवस्था का अधिकार नहीं है। वकील की ओर से कहा गया है कि अगर कानून व्यवस्था बिगड़ी तो किसकी जिम्मेदारी होगी. हाई कोर्ट की बेंच ने इस दलील को सिरे खारिज कर दिया।
6. हाई कोर्ट ने कहा पूजा-पाठ वर्षों से चलते आ रहे हैं, ऐसे में मामलों में दखल की गुंजाइश नहीं होती है।
7. कोर्ट ने कहा कि आप दो समुदायों के बीच दरार क्यों पैदा कर रहे है। दुर्गा पूजा और मुहर्रम को लेकर राज्य में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है उन्हें साथ रहने दीजिए।
8. किसी भी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सामाजिक एकता को कायम रखने वाले फैसले ले।
9. धार्मिक मामलों में किसी मुश्किल से निपटने के लिए सरकार को अपने तंत्र का इस्तेमाल करना चाहिए न कि संभावनाओं पर काम करना चाहिए।
10. आखिर में फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट की बेंच ने कहा, मुहर्रम के दिन भी रात 12 बजे तक दुर्गा पूजा करने वाले लोग मूर्ति विसर्जन कर सकेंगे। साथ ही सरकार की जिम्मेदारी है कि वे उन्हें सुरक्षा मुहैया कराए।
इससे पहले ममता बनर्जी ने कहा था कि चार दिन तक चलने वाले दुर्गा पूजा उत्सव की समाप्ति के बाद 30 सितंबर को होने वाले दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन के लिए शाम 6 बजे तक की अनुमति दी जाएगी। इसके बाद यह सीधे 2 अक्टूबर को, मुहर्रम की समाप्ति के बाद, फिर से शुरू किया जा सकेगा। एक अक्टूबर को मुहर्रम के चलते ताज़िए निकाले जाएंगे। मुहर्रम पर मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाने के पीछे ममता सरकार ने तर्क दिया था, कुछ लोग धार्मिक आधार पर दिक्कत पैदा करने की कोशिश कर सकते है। हर धर्म हमारा है. लेकिन यदि किसी पूजा पंडाल के पास से गुजरते हुए जुलूस के चलते समस्या हो सकती है तो इससे हम प्रभावित हो सकते है। हालांकि जब ममता के आदेश को लेकर विवाद बढ़ा तो उन्होंने ट्विटर पर सफाई दी कि "मुहर्रम के दिन 24 घंटे की अवधि को छोड़कर, विसर्जन 2 , 3 और 4 अक्टूबर को हो सकता है।" पिछले साल भी इसी तरह राज्य सरकार ने मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध जारी किया था। पिछले साल 11 अक्टूबर को दशहरा था और 13 अक्टूबर को मुहर्रम. ममता के इस फैसले के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिस पर सुनवाई के दौरान कोलकाता हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी।
हाईकोर्ट ने सीएम से ये भी पूछा कि अगर दो समुदाय के लोग खुशी से रह रहे हैं तो एक साथ पर्व क्यों नहीं मना सकते हैं। इसके बावजूद ममता बनर्जी के तेवर कम नहीं हुए हैं। उन्होंने विरोधियों पर पलटवार करते हुए कहा कि ''मुहर्रम और दुर्गा पूजा को लेकर उन्होंने जो नियम बनाए थे। वो अगर तुष्टिकरण है तो जब तक जिंदा रहूंगी ऐसा करते रहूंगी।''
सीएम ममता बनर्जी ने और क्या कहा
- कोलकाता में एक प्रोग्राम के दौरान उन्होंने कहा कि जब दुर्गा पूजा और गणेश उत्सव का शुभारंभ करती हूं तो तुष्टिकरण का आरोप नहीं लगता है।
- लेकिन, ईद की नमाज अदा करते ही आरोप लगने शुरू हो जाते हैं।
- उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म को माननेवाले लोगों के साथ वो भेदभाव नहीं करती हैं।
- पं. बंगाल की संस्कृति ही ऐसी है। यही वजह है कि वो भी ऐसा ही मानती हैं।
- लेकिन, विरोधी पार्टियों को राजनीति के लिए ये सब तुष्टिकरण लगता है।
क्या है मामला
- दरअसल, पं. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने 30 सितंबर को मूर्ति विसर्जन पर रोक लगा दी थी।
- 30 सितंबर को मुहर्रम है। इस वजह से उन्होंने मां दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जित करने से मना कर दिया था।
- सीएम के मुताबिक मुहर्रम होने की वजह प्रदेश में दो समुदायों के बीच तनाव हो सकता है।
- कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए सीएम ममता बनर्जी ने ऐसा निर्णय लिया है।
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