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सोनिया गाँधी सकते में, गौरी लंकेश मर्डर केस में सामने आया चौंकाने वाला सबूत

gauri-lankesh-exposed-her-gangहिंदुत्व और आरएसएस विरोधी पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या ने तूल पकड़ लिया है, वह लगातार बीजेपी, आरएसएस, हिंदुत्व और मोदी के खिलाफ आग उगलती रहती थीं, कल(सितम्बर 5) चार नकाबपोश लोगों ने उनके घर में घुसकर उन्हें गोली मार दी।  गौरी लंकेश को रात 8-9 बजे के बीच उनके राजेश्वरी नागा स्थित घर में घुसकर गोली मार दी गयी।  रिपोर्ट के मुताबिक़ गोलियां उनके शरीर के आर पार हो गयी। वह गौरी लंकेश पत्रिका  की मुख्य संपादक और फाउंडर थीं और कट्टर हिंदुत्व विरोधी पत्रकार के नाम से मशहूर थी।पता नहीं कैसा हाईब्रिड नाम है। गौरी लंकेश पहले कभी नहीं सुना।
अब इस मामले ने कुछ अलग ही मोड़ ले लिया है, कल गौरी लंकेश ने अपने और अपनी गैंग का खुलासा किया था, उन्होंने कहा था कि हममे से ही कुछ लोग गलतियाँ करते हैं, फेक पोस्ट शेयर करते हैं, सभी को बता दो, एक दूसरे की पोल खोलने का प्रयास ना करें. शान्ति.. कॉमरेड्स.
इस मामले में उनके समर्थक और मोदी विरोधी पार्टियाँ आरएसएस और बीजेपी पर उंगली उठा रही हैं, लेकिन गौरी लंकेश के ही कल के ट्वीट ने इसे नया रंग दे दिया है। उनके ट्वीट को देखकर लग रहा है कि उनके और आजादी गैंग के बीच सब कुछ ठीक नहीं था। वे आपस में ही उलझे हुए थे। हो सकता है कि उनकी गैंग वालों ने ही उन्हें मार डाला हो। 
ट्वीट देख ऐसा सम्भव है, यह उनके ही गैंग वालों का काम हो, क्योकि आज मोदी विरोधियों के जनसेवा आदि का कोई काम नहीं, बस दुकान बंद न हो जाए, संघ और मोदी को गालियाँ देते रहो और चर्चा में रहकर, चुनाव में वोट खींचों।
देखिए मोदी और संघ को गाली देने का पाखंड। गौरी लंकेश का परिवार CBI जाँच की मांग कर रहा है, लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस सरकार मना कर रही है, क्यों? क्योकि इनको डर है, मोदी और संघ विरोधी ही बेनकाब न हो जाएं। क्यों डर रहे हैं, सीबीआई जाँच से? यह ड्रामा क्या है? आखिर किस दबाव में सीबीआई जाँच से कांग्रेस पीछे भाग रही है? वह कौन से मजबूरी है, जो सीबीआई को केस सुपुर्द करने से रोक रही है?

केरल में होती संघियों की हत्याओं पर क्यों मौन रहते हो?
इतना निन्दा जो कर रहे है काश इन लोगो का ध्यान केरल की तरफ भी गया होता, जहाँ खुल्लेआम संघ के स्वयं सेवक के ऊपर हमला कर मार दिया जाता रहा है। वहाँ का एक भी सीन आप लोग नही दिखाते हो। 1978 से पत्रकारिता में हूँ, शायद ही कोई महीना जाता हो, जब किसी न किसी स्वयंसेवक की हत्या का समाचार न आता हो। क्या किसी संघी की जान की कोई कीमत नहीं?
गलती संघचालकों की है, जो गाँधी नीति अपनाते हुए, कभी हिंसा का संसद से लेकर सड़क तक आंदोलन तक नहीं किया। अरे संघ पदाधिकारियों सीखो इन पाखंडियों से। ऐसा नहीं विरोध हुआ, यानि जंगल में मोर नचा किसने देखा? कोई पत्रकार और छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता बताए अब तक केरल में कितने संघ स्वयंसेवकों को मौत के उतारा जा चूका है और किस तरह? किसी ने उनकी हत्याओं पर एक शब्द लिखा या बोला?  
कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की जितनी भी निंदा की जाए, कम ही है। उससे भी ज्यादा शर्मनाक व निंदनीय सोशल मीडिया पर आ रहीं वह पोस्ट हैं, जो एक प्रकार से हत्या के अपराध को उचित ठहरा रहीं हैं। भारतीय समाज की खूबी ही विविधता में एकता है। घोर वैचारिक विरोध का मतलब यह नहीं कि किसी की हत्या कर दी जाए। किसी भी सभ्य समाज में अभिव्यक्ति का दमन नहीं किया जा सकता। विचार की काट विचार से ही की जा सकती है, हिंसा से नहीं । हत्या किसी की भी हो उसे न्यायोचित ठहराना हत्या करने के समान अपराध है। केरल में वामपंथियों द्वारा आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या से भी मुझे दुख हुआ और आज गौरी लंकेश की भी हत्या से। हमने अखिलेश के मुख्यमंत्री रहते उन्ही के एक मंत्री के इशारे पर शाहजहांपुर में एक पत्रकार को जिंदा जलाने पर भी गम और गुस्से का इजहार किया था। दाएं, बाएं या फिर मध्यमार्गी कोई भी हो, सबको अपने स्वतंत्र विचार रखने की आजादी है। असहमति हमें किसी का गला दबाने की छूट नहीं देती। 
जो हिन्दू विरोधी बयान करे उसको अपना हीरो बना लेते हो यह गलत बात है।
 हो सकता है पक्षकार ने कराया हो अगले को बदनाम कराने के लिए। उन्होंने दूसरे ट्वीट में कहा कि मुझे ऐसा लग रहा है कि हममे से कुछ लोग खुद से ही लड़ रहे हैं, हमें पता है कि हमारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है. क्या हम उस पर ही ध्यान केन्द्रित नहीं रख सकते। 
So much hue &cry for Gauri Lankesh. Where were these humanitarians when RSS workers were being murdered in ?
वामपंथी पत्रकार गौरी की हत्‍या की बुद्धिजीवियों और पत्रकारों ने निंदा करते हुए इसे ‘अभिव्‍यक्ति की आजादी की मौत’ बताया है। वहीं पत्रकार जागृति शुक्‍ला ने गौरी लंकेश की हत्‍या पर अपने ट्वीट्स से विवाद खड़ा कर दिया है।
 
जागृति ने ट्वीट में कहा, ”तो, कॉमी (वामंपथी) गौरी लंकेश की बेरहमी से हत्‍या कर दी गई। जैसा कहते हैं कि आपके कर्म हमेशा लौटकर आते हैं। आमीन।” अगले ट्वीट में उन्‍होंने कहा, ”जो लोग खूनी क्रांति में यकीन रखते हैं, वे गौरी लंकेश की किस्‍मत पर रो रहे हैं। खुद पर बीतती है तो कैसा लगता है?” जागृति ने लिखा, ”गौरी लंकेश के लिए बहुत रोना-धोना हो गया। ये मानवतावादी उस वक्‍त कहां थे, जब केरल में आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्‍या हो रही थी?
जेएनयू की शहला राशिद ने लिखा है, ”सोशल मीडिया पर आरएसएस के समर्थक उनकी मौत का जश्‍न मना रहे हैं। गौरी लंकेश की हत्‍या का जी न्‍यूज की पूर्व रिपोर्टर जागृति शुक्‍ला समर्थन कर रही हैं।” वरिष्‍ठ पत्रकार पल्‍लवी घोष ने कहा, ”गौरी लंकेश की मौत से ज्‍यादा, जागृति शुक्‍ला जैसे कुछ लोगों ने हमें शर्मिंदा किया है।”
kapil-mishra-reaction-on-gauri-lankesh-deathउनकी हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने भी कहा कि - मरते मरते गौरी ने अपनों पर ही उंगली उठायी है, लगता है गौरी ने किसी अपनें की ही गोली खायी है। 
दुकानदारी शुरू हो गयी 
जबकि आज उनकी मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक कार्यकर्त्ता मेधा पाटेकर ने कहा कि यह सांप्रदायिक और हिंदुत्व ताकतों का काम है। मेधा पाटेकर ने कहा कि केवल मुट्ठी भर लोग ही साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ लिखने की हिम्मत कर पाते हैं, ऐसे लोगों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, साम्प्रदायिकता ने पत्रकारों के लिए कहीं जगह नहीं छोड़ीहै। उन्होंने सभी पत्रकारों की सुरक्षा देने की मांग की।  उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी ने इस मामले पर एक्शन लेने की मांग की। 
Noted journalist and critic of right wing politics silenced in New India. Terrible time for dissent. RIP Bravo journalist
पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद से बिहार के भी राजनीतिक गलियारे में हलचल मची हुई है. आज लालू यादव ने गौरी लंकेश की हत्या के बाद ट्विट कर कहा था कि ‘नई भारत में प्रसिद्ध पत्रकार और सही विंग की राजनीतिक आलोचक के लिये भयानक समय आ गया है. इसके साथ ही उन्होंने पत्रकार के मौत पर दुःख जताया है.
niraj kumar
लालू प्रसाद यादव के इस ट्विट पर जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कटाक्ष करते हुए कहा कि लालू यादव गौरी लंकेश की हालय पर तो बोल रहे हैं पर जब बिहार में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या हुई थी तो उस समय चुप क्यों थे. बता दें कि कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश पर हमलावरों ने 7 राउंड फायरिंग की जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
कर्नाटक पुलिस प्रमुख आर के दत्ता ने कहा लंकेश को राज राजेश्वरी नगर स्थित घर के बारह अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। उनके शरीर पर गोलियों के कई निशान हैं, जिससे जाहिर होता है कि उनकी हत्या के लिए कई बार गोली चलाई गई। लंकेश ने कन्नड़ अखबार गौरी लंकेश पत्रिका की संपादक थीं। पुलिस प्रमुख ने कहा कि लंकेश ने कभी किसी हमले की शिकायत नहीं की। हमलावरों के बारे में पूछे जाने पर दत्ता ने किसी अटकल से इनकार किया। बस इतना ही कहा कि जांच पूरी होने दीजिए। कर्नाटक के गृह मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने इस हत्या की निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। गौरी लंकेश को हिंदुत्ववादी राजनीति का कट्टर आलोचक माना जाता था। इस बारे में ज्यादा जानकारी का इंतजार है। अपने अखबार में भाजपा के नेताओं के खिलाफ खबर प्रकाशित करने के बाद भाजपा सांसद प्रह्लाद जोशी ने लंकेश के खिलाफ मानहानि का केस दायर कर रखा था।
 इतना निन्दा जो कर रहे है कास आप लोगो का ध्यान केरल की तरफ भी गया होता जहा खुल्लेआम संघ के स्वयं सेवक के ऊपर हमला कर मार दिया जाता रहा है।वहा का एक भी सीन आप लोग नही दिखाते हो।
जो हिन्दू बिरोधी बयान करे उसको अपना हीरो बना लेतो हो यह गलत बात है।
यदि किसीने हत्या किया कोई जरूरी नही उनके बिपक्षकार ने किया हो हो सकता है पक्षकार ने कराया हो अगले को बदाम कराने के लिए।

खासकर तब जब यह हत्या कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक मे हुई है? कर्नाटक मे ला ऐण्ड ऑर्डर की जिम्मेदारी किसकी है ? कांग्रेस वहां सत्ता मे है तो यह अराजक और अप्रिय स्थिति रोकने की जिम्मेदारी भी उसकी ही थी न। अगर दोषी को दोषी कहना समाज की दृढता और न्यायप्रियता की बानगी है तो जिम्मेवार को जिम्मेवार कहने का भी तो समाज के पास नैतिक साहस होना चाहिए। कांग्रेस को इस बात के लिए कठघरे मे खड़ा क्यों नही किया जाना चाहिए . हिन्दू अतिवाद के स्वागत में कारपेट बिछाने का काम कांग्रेस ने ही किया है।
यह वामपंथी हमेशा ही हिन्दुओं के विरुद्ध साज़िशें करते रहते हैं। राज्य मे सरकार कॉंग्रेस की, मगर इलज़ाम हिन्दुओं पे डाल के उन को बदनाम करो, यह सोची समझी साजिश है हिन्दुओं के विरुद्ध कर्नाटक और केरल मे हिन्दुओं की दिनदहाड़े हत्यायें हो रही हैं मगर छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेताओं और मीडिया के कानो पे जूँ तक नहीं रेंगती शर्म आनी चाहिए इन पाखंडी पत्रकारों को। 
खुलनी शुरू हो कांग्रेस की साज़िश 
साठ के दशक में देव आनन्द अभिनीत एक बहुचर्चित फिल्म थी "असली नकली" और इस फिल्म एक गीत "लाख छुपाओ छुप न सकेगा, राज या इतना गहरा...." आज भी चर्चित है। और यह गीत मोदी और संघ विरोधियों पर चरितार्थ हो रहा है। 
कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर में वरिष्ठ महिला पत्रकार गौरी लंकेश की सितम्बर 5 को उन्ही के घर के एंट्रेंस पर हत्या कर दी गई जिसे लेकर सस्पेंस बना हुआ है। वामपंथी पत्रकार गौरी लंकेश बीजेपी और केंद्र सरकार की कट्टर विरोधी मानी जाती थीं। हत्या के फौरन बाद कई पत्रकारों और संपादकों ने केंद्र सरकार और RSS को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया बल्कि कहना तो ये चाहिए कि दोषी करान देना ही शुरू कर दियाl लेकिन हत्या हुए ज्यादा समय भी नहीं हुआ कि अब मामले की जो सच्चाई सामने आ रही है वो चौंकाने वाली है।
नए खुलासे के मुताबिक, हत्या के पीछे कांग्रेस के लोगों पर शक है। एबीपी न्यूज के संवाददाता विकास भदौरिया ने ट्वीट किया है कि वो कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार से जुड़ी एक खबर पर काम कर रही थीं।
खुद गौरी लंकेश ने एक जगह बताया था कि वो कर्नाटक के कांग्रेसी विधायक डीके शिवाकुमार के खिलाफ एक मामले में जांच कर रही हैं। डीके शिवाकुमार वही विधायक हैं, जिनके रिसॉर्ट में गुजरात के कांग्रेसी विधायक रुके थे। उन पर सीबीआई के छापे भी पड़ चुके हैं। इसके अलावा कर्नाटक सरकार और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से जुड़े मामले भी गौरी लंकेश की पत्रिका में छपने वाले थे।
वहीँ दूसरी तरफ गौरी के आखिरी ट्वीट्स को भी नज़र-अंदाज़ बिलकुल नहीं किया जा सकताl खुद गौरी लंकेश ने कुछ ट्वीट में ऐसी बातें लिखी हैं जिनसे उनके और उनके वामपंथी साथियों के बीच किसी विवाद का संकेत मिलता है। इस सबसे अलग गुजरात के गृह मंत्री ने कहा है कि मामले में नक्सलियों का हाथ भी हो सकता है। देखें उनके आखिरी ट्वीट्स-
जिस तरह से घर में घुसकर गोली मारी गई है। उससे लग रहा है कि हत्यारे उनकी जान-पहचान के थे। सच्चाई क्या है ये तो पुलिस की जांच के बाद ही पता चल सकेगा, लेकिन जिस तरह से वामपंथी पत्रकारों ने इस मामले में आरएसएस और बीजेपी को दोषी ठहराना शुरू कर दिया उसी से शक पैदा हो गया कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है।
इस सबके बीच एक और स्पेक्यूलेशन है, जिसकी तहकीकात ज़रूरी हैl गौरी लंकेश के पिता पी लंकेश भी एक पत्रकार थे जो कन्नड़ में ‘पत्रिका’ नाम से एक साप्ताहिक पत्रिका निकालते थेl उनके निधन के बाद गौरी इसकी संपादक बनीं और उनके भाई इन्द्रजीत भी साथ में लगे रहेl फिर गौरी का उनके नक्सलियों के प्रति झुकाव के चलते भाई इंद्रजीत के साथ बड़ा विवाद हुआl विवाद बढ़ने के कारण उन्होंने ‘पत्रिका’ से नाता तोड़ लिया और अपनी खुद की कन्नड़ साप्ताहिक ‘गौरी लंकेश पत्रिका’ की शुरूआत की.गौरी और उनके भाई का एक इस ट्वीट में गौरी लंकेश के भाई और उनके बीच के विवाद की खबर है। भाई ने उन्हें नक्सली करार देते हुए कहा था कि उनके रवैये के कारण अखबार की इमेज पर बुरा असर पड़ रहा है। वहीँ गौरी ने तो इस पर भाई के खिलाफ पुलिस कम्प्लेंट दर्ज कराते हुए ये आरोप भी लगाया था कि इन्द्रजीत ने उन्हें गोली दिखाके डराने की कोशिश कीl
इन तमाम बातों पर तहकीकाट होनी चाहिए पर लेफ्ट-गैंग तो उससे पहले ही केंद्र सरकार और आरएसएस पर बेबुनियाद आरोप लगा उन्हें दोषी ठहराने में लग गया हैl
आपको ये भी बता दें, लंकेश को बीजेपी और हिंदुत्ववादी राजनीति का बड़ा विरोधी माना जाता था। उनका बीजेपी और हिंदुत्व विरोध इस हद तक था कि वो कई बार फर्जी खबरें छापने के आरोपों में भी घिरी रहीं। 2008 में बीजेपी सांसद प्रह्लाद जोशी और उमेश धुसी ने उनकी पत्रिका में छपे एक लेख पर विरोध दर्ज कराया था। दोनों ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा ठोंका। कोर्ट में गौरी लंकेश अपनी रिपोर्ट को सही साबित नहीं कर पाईं। इस पर अदालत ने उन्हें छह महीने की जेल और जुर्माने की सज़ा भी दी थी। हालांकि उन्हें कभी जेल में रहना नहीं पड़ा, क्योंकि कोर्ट से ही जमानत मिल गई।
मुस्लिम देशों में मदर टेरेसा क्यों नहीं?
*मुस्लिम देशाें में काेई मदर टेरेसा क्यों नहीं बनती ? क्या सारी सेवा की आवश्यकता भारत को ही है ?*
*क्या सूडान, लीबिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इराक, सऊदी अरब और सीरिया में गरीब नहीं हैं ? टेरेसा ने वहाँ पर "सेवा" क्यों नहीं की ? वहाँ वेटिकन वाले क्याें नहीं जाते ?*
मुस्लिम देशाें में वेटिकन सिटी वालों काे इतना साहस ही नहीं है कि वह मदर टेरेसा जैसी अपनी कर्मचारी भेज सके। मुस्लिम देश में सेवा के नाम पर धर्म परिवर्तन की अनुमति नहीं मिलेगी फिर भी अगर वेटिकन पराेछ ताैर पर भी अपनी करतूत जारी रखी ताे फिर मुस्लिम देश वेंटिकन के स्टाफ काे फांसी पर लटका देगें।
हिन्दू धर्म बहुत उदार है पता नहीं यह उदारता हमारी कमजोरी है या फिर कुछ और। हमारे अंदर ही ऐसे "सेकुलर प्रगतिशील (कु)बुद्धिजीवी" लोग बिखरे पड़े है जो हमारी जड़ो में मट्ठा डालते हैं। भारत में ही मदर टेरेसा क्यों ? हम ही आखिर क्यों मजारों पर जाते हैं ? यह हिन्दू धर्म की कमजोरी की निशानी नहीं तो और क्या है ? फूले नहीं समां रहे कि मदर टेरेसा संत घोषित हो गई है।
जबकि वेटिकन सिटी विश्व का सबसे छोटा कैथोलिक ईसाई देश है जो न लोकतांत्रिक है न ही धर्मनिरपेक्ष।
*हिन्दुओं ने सदैव सबको गले लगाया किन्तु दुख मात्र इस बात का है कि जिन्हें हमने गले लगाया वही आज हमारे गले में छुरी फेरने को तैयार बैठे हैं।* हमारे जयचंद स्वयं इसमें उनकी सहायता कर रहे हैं।
हमें हमारी सोच में थोड़ा बदलाव करना होगा।हमें अब केवल अपने धर्म और देश की सोच के साथ साथ सभी धर्मों और संपूर्ण विश्व की सोच के अनुसार अपने धर्म और अपने देश के लिए क्या उचित या क्या अनुचित है।ऐसा गहराई से विचार करके ही हमें हमारी देश की सभी नीतियां जैसे राजनीती,धर्मनीति,विदेश नीति,रक्षा नीति आदि सभी नयी बनानी होगी।तभी हमारा और हमारे देश का कल्याण होगा। वरना विश्व समुदाय के सेक्युलर लोग हमें हमारे पवित्र धर्म और हमारे पवित्र देश से पथ भ्रष्ट कर देंगे।

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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