मुगल सम्राट अकबर ने जिसे अपनी राजधानी के रूप में स्थापित किया था। जो अब यह एक विश्व दरोहर स्थल है, वो फतेहपुर सीकरी पहले यह एक “समृद्ध व्यापार और जैन तीर्थस्थल केंद्र” था। सन् 1999-2000 के बीच में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा चेबली टीले की खुदाई के बारे में तर्क देते हुए, वरिष्ठ आगरा पत्रकार भानु प्रताप सिंह का कहना है कि यहाँ की 1000 साल पुरानी प्राचीन वस्तुयें, मूर्तियां, और संरचनाएं, “संस्कृति और धार्मिक स्थल” की ओर संकेत करते हैं।
“खुदाई में जैन धर्म की अनेक प्रतिमाएँ मिली, जिनमें से सैकड़ों आधारशिला मंदिर की है जिन पर तिथि भी लिखी हुई है। जैन समुदाय के वरिष्ठ नेता” स्वरूप चंद्र जैन” कहते हैं कि इन प्रतिमाओं में भगवान आदी नाथ, भगवान ऋषभ नाथ, भगवान महावीर और जैन यक्षिनी की हजार साल पुरानी प्रतिमाएं मिली हैं। भारत की जनसंख्या 1.2 अरब के करीब है, जिसमें से जैनो की संख्या उसकी 0.4 प्रतिशत है व ये लोग धार्मिक, समृद्ध और साक्षर समुदाय के लोग हैं।
प्राचीन जैन तीर्थ, जो कभी समृद्ध व्यापार का केंद्र भी था
इतिहासकार सुगम आनंद कहते हैं कि “निष्कर्षों पर गंभीर शोध किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आपको समय और संसाधनों की आवश्यकता है। निश्चित रूप से अकबर ने जब फतेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बनाया था, वहाँ लोगों का निवास, मंदिरों और वाणिज्यिक केंद्रों का प्रमाण है। टीले की खुली जगह का इस्तेमाल करके अकबर ने इसे अपनी राजधानी बनाया, लेकिन हमें अभी भी कई शोधों की आवश्यकता है। ” तालाब में दफन की गई मूर्तियों और कलाकृतियों को एएसआई द्वारा फतेहपुर सीकरी में एक गेस्ट हाउस में रखा गया है।
“जैन धर्म का प्रमुख केंद्र था फतेहपुर सीकरी” के लेखक भानु प्रताप सिंह का कहना है कि “सिक्री अकबर से बहुत पहले अस्तित्व में था। खुदाई ने इस तथ्य को स्पष्ट रूप से साबित कर दिया है।” ” डी.वी शर्मा, आगरा के एएसआई के पूर्व अधीक्षक पुरातत्वविद्, जो खुदाई की देखरेख करते थे, उन्होंने का कहना है कि “हमें कई क्षतिग्रस्त मूर्तियाँ मिली है और उसमें तिथियों के साथ पांडुलिपि भी है और ये सब अब फतेहपुर सीकरी के अतिथि गृह में रखी हुई हैं। उन्हें खुदाई को आगे बढ़ना चाहिए था और साथ ही इतिहासकारों की भी इस विषय में सहायता लेनी चाहिए थी।
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डी. वी शर्मा यह भी कहते हैं कि “फतेहपुर सीकरी खुदाई पर लिखी गई मेरी पुस्तक एएसआई के पुस्तकालय में रखी है, जो निष्कर्षों का पूरा ब्योरा देते हुए, जैन और सिकरवाड़, दोनों के एक समृद्ध व्यापार और तीर्थयात्रा के बारे में बताती हैं। अकबर ने कुछ नई संरचनाएं बनाईं और कुछ पुरानी संरचनाओं में ही बदलाव कर दिया। अब खोज में बस यह पता लगाना बाकी है कि किसने मंदिरों और मूर्तियों को ध्वस्त कर दिया।
डी. वी शर्मा यह भी कहते हैं कि “फतेहपुर सीकरी खुदाई पर लिखी गई मेरी पुस्तक एएसआई के पुस्तकालय में रखी है, जो निष्कर्षों का पूरा ब्योरा देते हुए, जैन और सिकरवाड़, दोनों के एक समृद्ध व्यापार और तीर्थयात्रा के बारे में बताती हैं। अकबर ने कुछ नई संरचनाएं बनाईं और कुछ पुरानी संरचनाओं में ही बदलाव कर दिया। अब खोज में बस यह पता लगाना बाकी है कि किसने मंदिरों और मूर्तियों को ध्वस्त कर दिया।
एएसआई ने फतेहपुर सीकरी में खुदाई को अचानक बंद कर दिया जिसका कारण सिर्फ उन्हें स्वयं को पता होगा । भानू प्रताप सिंह ने दावा किया, “क्या उन्होंने सभी घाटियों की खोज की और उन्हें खोद लिया?अगर ऐसा होता तो आश्चर्यजनक खुलासा हो गया होता, जिससे हमारी ऐतिहासिक समझ में कोई बदलाव आया होता।”

1999 में खुदाई से पहले, एएसआई ने अपने विभिन्न प्रकाशनों में, स्पष्ट रूप से कहा था: “अकबर के समय से पहले, ऊँची चोटियों पर कोई नहीं रहता था, इसकी महिमा और वर्तमान एक प्रसिद्धि सूफी संत की पसंद के आश्रम के रूप में थी। ” लेकिन एएसआई के दस्तावेजों में सिकरी गांव का उल्लेख है कि यह एक ऐसी जगह है जो रहस्यमय है और इसकी पुरातात्विक खोज के लिए वादा है। ”
भानु प्रताप सिंह ने कहा कि फतेहपुर सीकरी में सिकरवाड राजपूत रहते थे, जिन्होंने अपने समय में कई किले और मंदिर बनाए थे जिनमें कई संरचनाएं और महल भी थे।परंतु मुगलों ने या तो इनको ध्वस्त कर दिया या फिर उपयुक्त रूप से उनमें बदलाव कर दिए। यही सभी चीजें मुगलों से पहले मुस्लिम शासकों द्वारा भी की गई थी।

(साभार)
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