अवलोकन करें :--
मीडिया से बात करते हुए बेनजीर अरफां ने कहा कि जो सस्पेंसन लेटर उन्हें मिला है उसमें लिखा गया है- किसी दूसरी संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम जो कि रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन के लिए था उसमें आपने बिना पार्टी की मर्जी से हिस्सा लेकर पार्टी के नियमों को तोड़ा है जिस कारण आपको तत्काल प्रभाव से पार्टी से बर्खास्त किया जाता है।
बेनजीर का कहना है कि इस कार्यक्रम के बहाने मुझपर निशाना साधा जा रहा है। बेनजीर के मुताबिक लोकल लेवल के कुछ भाजपा नेताओं को उनकी कार्यशैली पसंद नहीं आ रही थी इसलिए उन्हें इस छोटे से मुद्दे को लेकर बलि का बकरा बनाया गया है।
बहुत खतरनाक हैं रोहिंग्या मुस्लिम, अलकायदा, ISIS, पाकिस्तानी ISI से जुड़े हैं तार : गृह मंत्रालय
केंद्र सरकार ने आज रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे किये गये हैं. हलफनामें में कहा गया है कि रोहिंग्या मुस्लिम देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं क्योंकि इनके तार बड़े बड़े आतंकवादी संगठनों से जुड़े हैं, इनके सम्बन्ध अलकायदा, ISIS और बड़े बड़े आतंकवादी संगठनों से हैं, इनके तार पाकिस्तानी ISI से भी जुड़े हैं, पाकिस्तान के आतंकी संगठन इन्हें भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं.
गृह मंत्रालय ने कहा है कि रोहिंग्या मुसलमानों के मामले को धर्म और हिन्दू मुसलमान से जोड़कर ना देखा जाय, ये देश की सुरक्षा का मामला है. इन्हें शरण देना भारत के लिए खतरनाक हो सकता है. गृह मंत्रालय ने यह भी बताया है कि बहुत सारे रोहिंग्या मुसलमानों के पास अवैध पहचान पत्र हैं जो इस बात का सबूत है कि इन लोगों ने भारत में अवैध एंट्री ली है और अवैध गतिविधियों में शामिल हैं. हम इन्हें भारत में नहीं रख सकते.सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 3 अक्टूबर को तय की है.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि करीब 50 हजार रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं, भारत के सभी कट्टरपंथी नेता इन्हें भारत में बसाना चाहते हैं. इन्हें के बड़े वोटबैंक के रूप में देख रहे हैं, ओवैसी नेता नेता इनका समर्थन कर रहे हैं और इन्हें शरण ना देने को मुस्लिमों के साथ अन्याय बता रहे हैं.
सोशल मीडिया पर विचार:--
सोशल मीडिया पर विचार:--
भारत सरकार ने म्यांमार से भाग कर आये ४०००० से अधिक रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देनी चाहिए इस को लेकर इस समय बड़ी बहस छिड़ी हैं. यूएन जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्था से लेकर ओवैसी जैसे स्थानिक नेता और इन्डियन एक्सप्रेस जैसे अंग्रेजी अख़बार से लेकर गली के समाचार पत्र तक सभी भारत सरकार को यह ज्ञान बाँट रहे हैं की यह उसकी नैतिक जिम्मेदारी हैं और मानवतावादी दृष्टिकोण को अपनाकर भारत ने रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देनी चाहिए.
मेरे कुछ प्रश्न हैं. पहला तो यह हैं की क्या ये सभी रोहिंघ्या मुसलमानों के पक्षधर लोग यह बता सकेंगे की क्यों म्यांमार से उन्हें भगाया गया? ऐसा इन मुसलमानों ने क्या किया की म्यांमार के बौद्ध लोग और जिनको मानवतावादी दृष्टिकोण के लिए नोबल पुरस्कार से नवाजा गया ऐसे सु की की सरकार ने इन्हें पाने देश से भगाया? क्या वे म्यांमार में एक "पाकिस्तान" की मांग कर रहे थे जैसी भारत के मुसलमानों ने की थी और उसको यथार्थ में परिवर्तित किया? क्या वे वहां के बौद्ध लोगों से झगडे कर रहे थे? हिंसक घटनाओं को अंजाम दे रहे थे?
अच्छा, म्यांमार से भाग कर ये रोहिंग्या बांग्लादेश में घुसे तो वहां की सरकार और जनता ने भी इनको भगाया. क्यों? क्या वहां पर मुस्लिम नहीं रहते? क्या बांग्लादेश इस्लाम के "उम्म्मत" को नहीं मानता? क्या वो रोहिंग्य को मुस्लमान नहीं मानता? अगर मानता हैं तो फिर उनको आश्रय क्यों नही दिया?
कुरान में एक बात और कही गयी हैं और वह हैं अपने वतन से मोहब्बत ही आधा ईमान हैं. "हुब्बल वतनी निस्फुल ईमान". तो क्या रोहिंग्या मुस्लमान कुरान के इस वचन का पालन नहीं करते? क्या भारत के मुस्लमान इस वचन को मानते हैं?
वास्तविकता यह हैं की आज दुनियामे जो २२-२३ इस्लामिक देश हैं वहां पर इस्लाम के नाम पर ही झगडे शुरू हैं. मुस्लमान तो वहां से भी विस्थापित हुआ हैं और यूरोप के देशों में शरण लेने के लिए बाध्य हुआ हैं. ऐसा क्यों हो रहा हैं इसका उत्तर ये ओवैसी जैसे लोग और उनके समर्थक अख़बार देंगे?
इनका दूसरा तर्क हैं की भारत ने तिब्बत के लोग, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आये हिन्दू और श्रीलंका से आये तमिल और सिंहली लोगों को तो शरण दी हैं तो इन बेचारे रोहिंग्या मुसलमानों को क्यों नहीं? बात तो सही हैं. पर ये एक बात को भूल गए हैं की इन लोगों को भारत के आलावा कोई भी देश दुनिया मनाही हैं जहाँ वे शरण ले सके. दूसरी बात हैं इन्होने कभी अपने लिए अलग प्रदेश की या "पाकिस्तान" की मांग नहीं की. वे सभी यहाँ के लोगों के साथ एक होकर जी रहे हैं. क्या भारत में रोहिंग्या इस प्रकार से रह पाएंगे? अगर रह पाते तो म्यांमार से खदेड़े जाने की नौबत उन पर क्यों आती?
दुनिया में २२-२३ इस्लामिक देश हैं. इन देशों ने रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने के लिए पहल करनी चाहिए थी पर नहीं की, क्यों? भारत पर ही दबाव क्यों?
भारत सरकार ने देश की सुरक्षा को मद्देनजर सही फैसला लिया हैं. उसके लिए हम सभी सरकार के साथ हैं.



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