रेयान इंटरनेशनल स्कूल के दूसरी कक्षा के छात्र प्रद्युमन की हत्या से पुरे बिहार में आक्रोश का माहौल है। मूलतः बिहार के मधुबनी जिले रहने वाले वरुण के पुत्र की हत्या स्कूल में ही कर दी गई थी। इस हत्या के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हरियाण के सीएम मनोहर लाल खट्टर से सितम्बर 10 को फोन पर बात की है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हरियाण के सीएम मनोहर लाल खट्टर से फोन पर बातचीत के दौरान दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सीएम नीतीश कुमार ने स्थानीय आयुक्त नई दिल्ली को भी निर्देश दिया कि वे तुरंत वहां से पदाधिकारी गुरुग्राम भेजें। वहां जाकर पीड़ित परिवार से मिल सांत्वना दें। सीएम नीतीश ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री नीतीश के अलावा बिहार के डीजीपी डीजीपी पी के ठाकुर ने भी हरियाणा के डीजीपी से फोन पर बात की और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
छात्र प्रद्युमन के पिता ने कहा है कि, “ये मर्डर का मामला है। ये कैसे हुआ? ये मुझे पता नहीं पता। लेकिन ये जानता हूं कि ये हत्या है। जो लोग जिम्मेदार हैं, उन पर तुरंत एक्शन क्यों नहीं हुआ? अगर कोई पिता अपने बच्चे को आठ घंटे के लिए स्कूल छोड़ेगा तो किस भरोसे के साथ छोड़ेगा।’’“प्रद्युम्न हम शर्मिन्दा है तेरे कातिल जिन्दा है”
रायन इंटरनैशनल स्कूल में 7 साल के बच्चे की हत्या के बाद ऐक्शन में आई गुरुग्राम पुलिस ने कहा है कि इस मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और 7 दिन में जांच पूरी करके चार्जशीट दाखिल की जाएगी। हरियाणा के मुख्यमन्त्री मनोहर लाल खट्टर ने भी मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कारवाई की बात कही है। मुख्यमन्त्री ने इस हत्या को जघन्य करार दिया है। इस बीच आरोपी कंडक्टर अशोक को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। स्कूल प्रबंधन ने स्कूल के प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया है। प्रद्युम्न नाम के दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे का खून से लथपथ शव सितम्बर 8 को टॉइलट में मिला था। उधर सोहना के बार एसोसिएशन ने फैसला किया है कि कोई भी वकील मासूम की हत्या करने वाले का केस नहीं लड़ेगा।
गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर
संदीप खेरवार ने सितम्बर 9 को यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जांच
रिपोर्ट के तुरंत बाद कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, ‘मामले में पुख्ता सबूत
जुटाया जा रहा है। 7 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। एक-दो दिन
में चीजें साफ हो जाएंगी। हम प्रद्युम्न हत्या की जांच फास्ट ट्रैक कोर्ट
में कराने का आग्रह करेंगे। हत्या में इस्तेमाल चाकू और कपड़े को फरेंसिक
जांच के लिए भेज दिया गया है। हमारी कोशिश होगी जांच के बाद पीड़ित पक्ष को
पूरी तरह संतुष्ट किया जाए।’
अवलोकन करें :--
अवलोकन करें :--
स्कूल प्रशासन पूरी तरह शक
के गहरे मे है क्योंकि कंडक्टर चाकू लेकर स्कूल के अन्दर कैसे घुसा? उन्होंने कहा कि इस मामले
के दोषी को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि आगे से कोई ऐसा नहीं कर पाए। पुलिस
कमिश्नर ने कहा, ‘हत्या में बस कंडक्टर का रोल स्पष्ट तौर पर सामने आया है।
किसी और की इसमें भूमिका होगी तो हम उसकी जांच करेंगे। FIR में किसी का
नाम नहीं है। स्कूल की लापरवाही का भी मामला सामने आया है।’ स्कूल प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना होगा कि "क्या ड्राइवर के चरित्र की पुलिस से जाँच करवाई गयी थी?"
अब प्रश्न यह उत्पन्न होता है, कि आखिर किस दबाव में एकदम प्रिंसिपल को सस्पेंड किया गया? फिर गिरफ्तार किए गए ड्राइवर को देख ऐसा नहीं लगता कि "वह ऐसा कर भी सकता है? दूसरे, ड्राइवर द्वारा गिरफ्तार होते ही स्वीकारना कि वह टॉयलेट में गलत काम कर रहा था, आखिर इतनी सुबह जब स्कूल में छात्र/छात्राएं आ रहे हों, उस समय टॉयलेट में गलत काम होना, किसी अदृश्य घटना की ओर संकेत कर रही है। दाल जरुरत से ज्यादा काली है।
यकीन नहीं होता कि हरियाणा व केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है,क्योंकि जिन ईसाई मिशनरियों के खिलाफ संघ और भाजपा वाले मुहिम चलाते आये हैं उस मिशनरी स्कूल में इतना बड़ा हादसा होने पर भी उस स्कूल के खिलाफ सख्त कार्यवाई करने की बजाय सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है और वो भी अभिभावकों के भारी विरोध प्रदर्शन के कारण ही हो रही है,उम्मीद थी कि इस घटना के बाद ना सिर्फ उस स्कूल में तुरंत हमेशा-हमेशा के लिये ताला जड़ दिया जाएगा बल्कि देशभर के मिशनरी स्कूलों में भी छापेमारी करके उनके गलत क्रियाकलापों को उजागर किया जाएगा और उनपर नकेल कसी जाएगी लेकिन ऐसा कुछ भी करने की बजाय उस स्कूल को बचाने का ही प्रयास होता दिखाई दे रहा है,तर्क ये दिया जा रहा है कि यदि स्कूल पर कोई कार्यवाई की गयी तो बारह सौ बच्चों का भविष्य खराब हो जाएगा,अरे जनाब भविष्य खराब नहीं होगा बल्कि सिर्फ एक वर्ष ही खराब होगा और यदि स्कूल की मान्यता रद्द की गयी तब उन सभी बच्चों का भविष्य सुरक्षित ही हो जाएगा। ऊपर से प्रदर्शन कर रहे दुखी अभिभावकों पर बर्बरता पूर्ण तरीके से लाठीचार्ज भी कर दिया गया।
अब प्रश्न यह उत्पन्न होता है, कि आखिर किस दबाव में एकदम प्रिंसिपल को सस्पेंड किया गया? फिर गिरफ्तार किए गए ड्राइवर को देख ऐसा नहीं लगता कि "वह ऐसा कर भी सकता है? दूसरे, ड्राइवर द्वारा गिरफ्तार होते ही स्वीकारना कि वह टॉयलेट में गलत काम कर रहा था, आखिर इतनी सुबह जब स्कूल में छात्र/छात्राएं आ रहे हों, उस समय टॉयलेट में गलत काम होना, किसी अदृश्य घटना की ओर संकेत कर रही है। दाल जरुरत से ज्यादा काली है।
भाजपा इस गुमान में ना रहे कि वो आज मजबूत है इसलिये ऐसे कुकर्मों से उस पर कोई आंच नहीं आएगी, शीघ्र ही प्रद्युम्न को न्याय दिलाते हुए उस स्कूल की मान्यता रद्द की जाये और इस घटना की सीबीआई जाँच करवाई जाये साथ ही जबतक जाँच पूरी नहीं हो जाती तबतक शक के घेरे में जितने भी लोग आ रहे हैं उन्हें हिरासत में रखा जाये, अन्य सभी देशभर के मिशनरी स्कूलों में भी छापेमारी करके उन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को किसी भी खतरे से बचाया जाये,ये सब नहीं होने तक प्रद्युम्न को न्याय नहीं मिलेगा और ना ही अभिभावकों का ये आंदोलन भी रुकेगा इसलिये इससे पहले कि ये आंदोलन निर्भया आंदोलन जैसा रूप धारण करके भाजपा की सत्ता को उखाड़ फेंके उससे पहले सरकार जाग जाये और इस विषय में कुछ करके दिखाये।इन छोटी-छोटी कार्यवाई से हम संतुष्ट नहीं हैं। इतना सबकुछ होने के बाद भी प्रद्युम्न की माँ बार बार यही रट लगाये हैं कि मोदीजी बहुत अच्छे इंसान हैं और वो जरूर इंसाफ करेंगे अतः मोदीजी अब उस माँ के भरोसे पर खरा उतरकर दिखायें वर्ना भरोसा सिर्फ उस माँ का नहीं बल्कि पूरे देश का टूटेगा क्योंकि आज प्रद्युम्न को भी सभी अभिभावक अपना बेटा मानकर ही आंदोलन कर रहे हैं ठीक वैसे ही जैसे निर्भया को सभी ने अपनी खुद की बहन बेटी मानकर आंदोलन किया था।
सभी अभिभावको ने एक साथ जंतर मंतर पर केंडल मार्च निकाला, इस प्रोटेस्टैट को “ताकि जिन्दा रहे बच्चन” नाम दिया गया, अभिभावक के साथ कई युवा लोग भी आये, साथ मे कई पत्रकार भी आये। कई अभिभावकों ने अपनी बात भी रखी उन्होने कहा की सरकार बच्चों की सुरक्षा स्कूलों में सुनिश्चित करें, अभिभावकों ने अपने भावों को नारे के रूप में प्रकट किया “प्रद्युम्न हम शर्मिन्दा है तेरे कातिल जिन्दा है”।

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