
चीन ने जो डोकलाम मुद्दे पर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारतीय गणराज्य को जो मिनी युद्ध की अपने ऑफिशियल सरकारी अखबारों के ज़रिये धमकी दी हैं, वो सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक खेल खेल रहा है लेकिन इसके प्रतिवाद में भारत सरकार की प्रतिक्रिया के अतिरिक्त किसी भी दूसरे विपक्षी या विरोधी नेता की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, मतलब 60 सालों तक देश में राज करने वाली कांग्रेस व् अन्य धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदार दल चीन की इस धमकी पूरी तरह खामोश है, चीनी थिंक टैंक को मैं पाकिस्तानियों से ज्यादा समझदार समझता था परंतु चीन ने यह दिखा दिया है कि वह पाकिस्तान ही नहीं बल्कि तालिबानों से भी नीचे गई गुजरी मानसिकता रखते हैं , चीन ने जो भारत के परमाणु देशों के ग्रुप में एंट्री का विरोध किया वह दुखद है, लेकिन इससे भी ज्यादा शर्मनाक ये रहा की चीन ने जो एक आतंकवादी मसूद अज़हर के लिए बार-बार वीटो करके आतंकवाद का समर्थन किया वो निसंदेह चीन को आतंकवादीओ का स्पष्ट समर्थक बताती है।
चीन में अब किसी सभ्य समाज की सोच नहीं है, पूरा विश्व चीन की विस्तारवादी नीतियों से परेशान है वह किसी भी दूसरे देश के देशों की समुद्रीय सीमा में भी अवैध कब्जा कर रहा है, साउथ चाइना सी इसका उदाहरण है जिस पर चीन का कब्जा अंतरराष्ट्रीय कोर्ट भी अवैध ठहरा चुकी है, इसके जरिए चीन विश्व व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते पर कब्ज़ा करना चाहता है, चीन पिछले 10 सालों में जब भारत में कांग्रेसी राज था भारत की पूरी तरह घेराबंदी कर चुका है, बांग्लादेश के चिट्टगांव, श्री लंका के हंबनटोटा व् पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के जरिए पूरी बंगाल की खाड़ी व् अरब सागर में चीन की बहुत ही जबरदस्त हलचल है, जबकि उस टाइम यहां भारत में कांग्रेसी सरकार घोटालों पर घोटाले करके अपने ही देश के साधनों को लूटने में लगी हुई थी, तब चीन भारत को अपना माल बेच कर उन्हीं पैसों से भारत की घेराबंदी कर रहा था।
अभी कुछ दिनों पहले राज्यसभा में हुई विदेश नीति की चर्चा पर किसी भी विपक्षी व् विरोधी दल ने पाकिस्तान व् चीन की कोई निंदा नहीं की है वरन कांग्रेस ने तो यह कहा की उस के शासनकाल में चीन और पाकिस्तान के अच्छे संबंध थे जो की आज की वास्तविक वस्तुस्थिति में अत्यंत ही निंदनीय बयान था क्योंकि पूर्व में यह दोनों समस्या कश्मीर या चीन से सीमा विवाद कांग्रेस के प्रथम प्रधानमंत्री श्री नेहरु जी की ही देन है जो की विरासत में ही वर्तमान सरकार को मिले हैं. वैसे अगर देखा जाए तो राहुल गांधी की चीन के राजदूत से गुप्त मुलाकात के बाद ही पाकिस्तान व् चीन की आक्रमकता में तेज़ी आयी है, कहीं राहुल गांधी व् राबर्ट वाड्रा कोई गुप्त एजेंडा तो चीन से सेट नहीं कर आये की एक तरफ से पाकिस्तान कश्मीर हड़प ले और दूसरी तरफ से ही डोकलाम व् अरुणाचल प्रदेश पर चीन कब्जा कर ले जिसका बाद में राहुल गांधी कांग्रेस वह अन्य विपक्षी दल कम्युनिस्ट, लालू, ममता, केजरीवाल, मायावती सब चीन का समर्थन करेंगे, राहुल गांधी कांग्रेस व् विरोधी दलों को यह पता ही नहीं है वह कब मोदी विरोध के चलते देश विरोधी बन गए जो की अब देश द्रोही की सीमा में आ गए है, जो की वास्तविक सत्य हैं।
चीन में अब किसी सभ्य समाज की सोच नहीं है, पूरा विश्व चीन की विस्तारवादी नीतियों से परेशान है वह किसी भी दूसरे देश के देशों की समुद्रीय सीमा में भी अवैध कब्जा कर रहा है, साउथ चाइना सी इसका उदाहरण है जिस पर चीन का कब्जा अंतरराष्ट्रीय कोर्ट भी अवैध ठहरा चुकी है, इसके जरिए चीन विश्व व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते पर कब्ज़ा करना चाहता है, चीन पिछले 10 सालों में जब भारत में कांग्रेसी राज था भारत की पूरी तरह घेराबंदी कर चुका है, बांग्लादेश के चिट्टगांव, श्री लंका के हंबनटोटा व् पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के जरिए पूरी बंगाल की खाड़ी व् अरब सागर में चीन की बहुत ही जबरदस्त हलचल है, जबकि उस टाइम यहां भारत में कांग्रेसी सरकार घोटालों पर घोटाले करके अपने ही देश के साधनों को लूटने में लगी हुई थी, तब चीन भारत को अपना माल बेच कर उन्हीं पैसों से भारत की घेराबंदी कर रहा था।
अभी कुछ दिनों पहले राज्यसभा में हुई विदेश नीति की चर्चा पर किसी भी विपक्षी व् विरोधी दल ने पाकिस्तान व् चीन की कोई निंदा नहीं की है वरन कांग्रेस ने तो यह कहा की उस के शासनकाल में चीन और पाकिस्तान के अच्छे संबंध थे जो की आज की वास्तविक वस्तुस्थिति में अत्यंत ही निंदनीय बयान था क्योंकि पूर्व में यह दोनों समस्या कश्मीर या चीन से सीमा विवाद कांग्रेस के प्रथम प्रधानमंत्री श्री नेहरु जी की ही देन है जो की विरासत में ही वर्तमान सरकार को मिले हैं. वैसे अगर देखा जाए तो राहुल गांधी की चीन के राजदूत से गुप्त मुलाकात के बाद ही पाकिस्तान व् चीन की आक्रमकता में तेज़ी आयी है, कहीं राहुल गांधी व् राबर्ट वाड्रा कोई गुप्त एजेंडा तो चीन से सेट नहीं कर आये की एक तरफ से पाकिस्तान कश्मीर हड़प ले और दूसरी तरफ से ही डोकलाम व् अरुणाचल प्रदेश पर चीन कब्जा कर ले जिसका बाद में राहुल गांधी कांग्रेस वह अन्य विपक्षी दल कम्युनिस्ट, लालू, ममता, केजरीवाल, मायावती सब चीन का समर्थन करेंगे, राहुल गांधी कांग्रेस व् विरोधी दलों को यह पता ही नहीं है वह कब मोदी विरोध के चलते देश विरोधी बन गए जो की अब देश द्रोही की सीमा में आ गए है, जो की वास्तविक सत्य हैं।
1962 के बाद एक बार फिर चीन से वफादारी दिखा रही है सीपीएम
1962 के युद्ध में खुलेआम चीन का साथ देने वाली कम्युनिस्ट पार्टियां एक बार फिर से देश के खिलाफ मुखर हो रही हैं।
देश में सबसे बड़ी वामपंथी पार्टी सीपीएम यानी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने डोकलाम में भारत के रुख पर सवाल खड़ा किया है। पार्टी के मुखपत्र के ताजा अंक में जो कुछ छपा है उसे जानकर आप यकीन नहीं कर पाएंगे कि यह पार्टी भारत की है और लोकसभा और राज्यसभा में इसके सांसद हैं।
मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी के संपादकीय में चीन के साथ जारी ताजा तनाव के लिए भारत को दोषी ठहराते हुए इसकी कड़ी आलोचना की गई है।
भारत का खाना, चीन का गाना
भारत में कम्युनिस्ट पार्टियां शुरू से ही चीन के लिए वफादारी के कारण बदनाम रही हैं। लेकिन बीते कुछ दशक में उसके नेता अपना चीन-प्रेम खुलकर जताने में झिझकते रहे हैं। ऐसे में सीपीएम का ये खुला रुख थोड़ा चौंकाने वाला है।
एक बार फिर चीन से वफादारी दिखा रही है सीपीएम, खड़ी हुई चीन के समर्थन में
एक बार फिर चीन से वफादारी दिखा रही है सीपीएम, खड़ी हुई चीन के समर्थन मेंऐसा नहीं है कि भारत ने भूटान की सुरक्षा का ठेका ले रखा है। उसके साथ 1949 की संधि में यह अनुच्छेद हटा दिया गया था कि भूटान के लिए विदेश नीति और विदेशों से हथियार खरीदने के लिए भारत से मार्गदर्शन लेना जरूरी होगा।
अब सिर्फ यह संधि है कि भारत और भूटान एक-दूसरे के राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर आपस में सहयोग करेंगे।” मतलब ये कि सीपीएम के मुखपत्र ने एक तरह चीन की तरफ से भारत को नसीहत दी है। अब तक यही बातें चीन सरकार बोलती रही है।
खत्म नहीं हुई चीन से पुरानी वफादारी
1962 में चीन से हुई लड़ाई में तब के कम्युनिस्ट नेता खुलकर चीन के साथ खड़े हो गए थे। उनका कहना था कि ये दो देशों का नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट चीन और पूंजीवादी भारत के बीच ताकत का संघर्ष है।
तब के वामपंथी नेता बीटी रणदि्वे, पी सुंदरैया, पीसी जोशी, बास पुन्नइैया, ज्योति बसु और हरकिशन सिंह सुरजीत खुलेआम चीन का समर्थन कर रहे थे। वो कहते थे कि चीन की लाल सेना भारत में आकर हमें आजाद कराएगी। तब एक मात्र वामपंथी नेता अजय घोष थे जो तटस्थ भूमिका में थे।
हालांकि उन्होंने भी खुलकर इसकी आलोचना नहीं की थी। भारत-चीन युद्ध के समय जब एक तरफ सेना बॉर्डर पर चीन की सेना से मोर्चा ले रही थी, उसी वक्त देश के अंदर बगावत की पूरी तैयारी कर ली गई थी। देखा जाए तो यह सीधे-सीधे देशद्रोह का मामला बनता है, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। संभव है, तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू कम्युनिस्ट पार्टी से किसी भी तरह के विवाद के पक्षधर न हों। क्योकि चीन में कम्युनिस्टों की सरकार रही है। और भारतीय कम्युनिस्टों का चीन के पक्ष में खड़ा होना स्वाभाविक है।
लेकिन गैर-कम्युनिस्टों का चीन के समर्थन में लामबंद होना, सिद्ध करता है, कि भारत में जयचन्दों की कमतायी नहीं। हिन्दू सम्राटों के कार्यकाल से अधिक शायद आज के दौर में जयचन्द जी रहे हैं, कुछ पाकिस्तान और कुछ चीन या दूसरे भारत विरोध के पक्ष में व्यस्त हैं।
कपिल मिश्रा का अल्का लाम्बा पर प्रहार
आप के ही विधायक और दिल्ली सरकार के पूर्व जल मंत्री कपिल मिश्रा ने केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के खिलाफ बहुत बड़ा खतरनाक खुलासा किया है, उन्होंने कहा है कि आप पार्टी के नेता चीन जाते हैं और वहां से पैसे खाकर भारत और भारतीय सेना के खिलाफ जहर उगलते हैं, ये लोग भारत और भारतीय सेना को नीचा दिखाने और उनका मनोबल तोड़ने के लिए सोशल मीडिया पर भारत और भारतीय सेना के खिलाफ जहर उगल रहे हैं और चीन के सेनाधिकारियों के लेख और ब्लॉग शेयर कर रहे हैं खासकर चांदनी चौक से विधायक अलका लंबा चीन को लेकर काफी प्रतिक्रियाएं दे रही हैं.
कपिल मिश्रा काफी पहले से ही आरोप लगा रहे हैं कि केजरीवाल के कई मंत्री और विधायक पिछले दो वर्षों से कई बार चीन गए और वहां पर जाकर देशद्रोही साजिश में शामिल हुए, उन्होंने बताया था कि इनके विधायक चीन जाते हैं और वहां के नेताओं से मिलकर भारत को बर्बाद करने की प्लानिंग करते हैं. अब कपिल मिश्रा की बातें सच साबित हो रही हैं क्योंकि चीन के नेताओं के लेख AAP नेता सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं ताकि भारत को कमजोर देश साबित किया जा सके. मतलब इन लोगों को अपने ही देश को कमजोर बताने में ख़ुशी हो रही है और आजकल अलका लंबा जोर शोर से चीनी नेताओं के बयानों को प्रचार कर रही हैं.
आज कपिल मिश्रा ने चांदनी चौक टू चाइना कनेक्शन का पूरा खुलासा ही कर दिया है और केजरीवाल से अलका लाम्बा को लेकर कर तीखे सवाल पूछे हैं.
कपिल ने केजरीवाल को लिखा ओपन लेटर
आज कपिल मिश्रा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को खुला ख़त लिखा है. उन्होंने कहा - पिछले कुछ दिनों से चांदनी चौक से विधायक अलका लांबा लगातार चीन और भारत के बीच चल रहे विवाद पर प्रतिक्रियाएं दे रही हैं. उनके द्वारा सोशल मीडिया पर भारत सरकार और भारतीय सेना के स्टैंड पर ना केवल लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं बल्कि चीन की सेना के अधिकारियों के लेख और ब्लॉग भी शेयर किये जा रहे हैं जिसमें भारत को कमजोर देश बताया जा रहा है.
कपिल मिश्रा ने कहा - मैंने मई के महीनें में आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा की जा रही विदेश यात्राओं पर सवाल उठाए थे, इस यात्राओं के उद्देश्य, इनकी फंडिंग और पूरा यात्रा विवरण माँगा गया था लेकिन आप तब से मौन हैं. मैंने तब भी कहा था कि आपके ख़ास लोगों के विदेश यात्राओं के डिटेल्स देश सामने आ गए तो आपको देश छोड़कर भागना पड़ेगा. आज जो सवाल मैं आपसे पूछने जा रहा हूँ उनके जवाब आपको मालूम हैं पर आप जवाब नहीं दे पाओगे, आपकी चुप्पी ही इन अपराधों में आपके शामिल होने का सबूत है.
कपिल मिश्रा ने कहा - अगर भारत देश के लिए ज़रा भी वफादारी बची है तो मेरे सवालों का जवाब तुरंत दीजिये-
- अलका लांबा पिछले पांच सालों में कितनी बाद चीन की यात्रा पर गयीं
- अलका लाम्बा की चीन की यात्राओं का खर्चा किन चाइनीज कंपनियों ने उठाया और चाइनीज दूतावास ने कितनी बार उनसे सीधा संवाद किया एवं यात्राओं के लिए बुलाया.
- अलका लांबा के चांदनी चौक तो चाइना कनेक्शन को आप भी जानते हो पर फिर भी लगातार उनके द्वारा सोशल मीडिया पर चाइना स्पॉन्सर्ड प्रोपेगेंडा करने से आपने क्यों नहीं रोका
- क्या एक हिन्दुस्तानी होने के नाते आपको अपनी ही विधायक के देश विरोधी खेल को नहीं रोका
- क्या एक हिन्दुस्तानी होने के नाते आपको अपनी ही विधायक के देश विरोधी खेल को नहीं रोकना चाहिए था?
- आपके सलाहकार एवं सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त आशीष खेतान कितनी बार चीन गए और किन चाइनीज कंपनियों ने उनकी कितनी विदेश यात्राएं प्रायोजित की हैं.
- मेरे कार्यकाल के दौरान भी अलका लांबा द्वारा चाइनीज कंपनियों के दिलिगेशन को मिलवाने के लिए बुलवाया गया और उन्होंने उन कंपनियों के माध्यम से मुझे भी चीन जाने का इनविटेशन दिया था जिसे मैंने अस्वीकार कर दिया था.
कपिल मिश्रा ने कहा कि - यहां एक बात और ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि कुछ दिन पहले हुए अमरनाथ यात्रियों पर हमले पर भी अलका लांबा और अमानतुल्लाह खान ने जो ट्वीट किए थे वो सीधे सीधे अंतराष्ट्रीय मंच पर भारत को कमजोर करने वाला बयान था।
कपिल मिश्रा ने कहा - आपको एक बार फिर दुबारा चेतावनी दे रहा हूँ, आम आदमी पार्टी के सारे नेताओं की विदेश यात्राओं के डिटेल्स तुरंत सार्वजनिक कीजिये। ये राज ज्यादा दिन आप छिपा नहीं पाएंगे। ऐसा लगभग स्पष्ट है कि इनमे से कई यात्राएं देश विरोधी एजेंडे के लिए की गई और इनके डिटेल्स देने से जिस प्रकार से आप बचने की कोशिश कर रहे हैं उससे लगता है कि आपको सबकुछ मालूम है।
ये देश का सवाल है। देश एक साथ दो मोर्चो पर लड़ रहा हैं। इन सवालों पर आपकी चुप्पी देश के लिए घातक हैं। (आपका, कपिल मिश्रा)
Comments