इस फैसले पर ओवैसी ने दिया चौंकाने वाला बयान
अगस्त 22 को इस फैसले के आने के बाद से ही हर राजनीतिक दल के लोगों जमकर अपनी राय रख रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले पर AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि, “हम सुप्रीम कोर्ट के इस फैसला का तहेदिल से स्वागत करते हैं। हाँ लेकिन मैं मानता हूँ कि इस फैसले को जमीन पर उतारना एक बहुत बड़ा काम होगा।”
असदुद्दीन ओवैसी के इस बयान से कुछ बातें तो साफ़-साफ़ समझ आती हैं. उनके इस बयान में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात तो उनका समर्थन देना ही है. दूसरा जो उन्होंने इस फैसले को जमीन पर उतारने में जिस समस्या का ज़िक्र किया है वो शायद होती ही नही अगर समय रहते ख़ुद ओवैसी मुस्लिम महिलाओं पर हो रही इस ज्यादती के खिलाफ आवाज़ उठा देते तो.
मुस्लिम संगठनों ने इस फैसले का किया स्वागत
वहीं तीन तलाक के मुकदमे में प्रमुख पक्षकार रहे ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा कि बोर्ड मिल बैठकर आगे का कदम तय करेगा.
तो वहीँ ऑल इण्डिया मुस्लिम वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुस्लिम समाज के लिए ऐतिहासिक है. उन्होंने आगे कहा कि यह देश की मुस्लिम महिलाओं की जीत है, लेकिन उससे भी ज्यादा अहम यह है, कि यह इस्लाम की जीत है. साथ ही उन्होंने इस बात की उम्मीद भी जताई है कि आने वाले वक्त में तीन तलाक को हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाएगा.
अवलोकन करें :--
सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर फैसला सुनाते हुए “तीन तलाक पर 6 महीने की रोक लगाते हुए केंद्र सरकार से कहा है कि वो इस पर कानून बनाये.” आपको बता दें कि 5 जजों की बेंच ने इस अहम् मुद्दे पर फैसला सुनाया है.
सबसे खास बात ये है कि SC ने कहा कि “अगर तीन तलाक पर केंद्र सरकार 6 महीने में कोई कानून नही बना पाती है तो तीन तलाक पर रोक जारी रहेगी.”
उलेमा के मशवरे के बिना कानून ना बने वरना..
जमीयत उलेमा हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसला सुनाने के बाद अपनी राय का इजहार करते हुए कहा है कि देश पहले धर्म के नाम पर पहले भी बंट चुका है हम नही चाहते कि दुबारा ये मुल्क तक़सीम हो जो कोर्ट ने फैसला सुनाया है हुकुम पुरे होश और हवास के साथ इस वक्त की सूरत हाल को ध्यान में रखकर उसको समझकर सेक्युलर स्टेट के तरीके पर मुल्क को बाकी रखना चाहिये।इस मसले पर मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मैं समझता हूं इस मुल्क की सरकार और प्रधानमंत्री पहले सोचेगा कि मुल्क के पढ़े लिखे लोगो की सोच क्या है?और मैं ये समझता हूं मुझे ये उम्मीद रखनी चाहिये खैर की उम्मीद रखनी चाहिये कि वो जो भी कानून बनाएंगे। 6 महीने के अंदर वो कानून मुल्क के सेक्युलरिज्म के हक में होगा। सेक्युलरिज्म के खिलाफ नही होगा।मेरी उम्मीद तो अच्छी है बाकी वक़्त बताएगा।
इस पर मौलाना अरशद मदनी ने केंद्र सरकार पर भरोसा जताते हुए कहा कि “मुझे अपनी उम्मीद अच्छी रखनी चाहिये, होता क्या है वो तो बाद में पता चलेगा। मौलाना अरशद मदनी ने साफ लफ्जो में कह दिया है कि देश में सेक्युलरिज्म बनाये रखने के लिये तलाक पर कानून मुस्लिम उलेमा ऐ इकराम के मशविरे से ही बने।

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