यहाँ विवादित मस्जिद के पक्ष में बोलने वाले समस्त हिन्दू नेताओं के लिए डूब मरने वाली बात है, कि किसी भी मुस्लिम मुद्दे की बात हो शिया हो या सुन्नी एवं अन्य मुस्लिम वर्ग सभी अपने भेदभाव भूल एक हो जाते हैं, लेकिन हिन्दू तुष्टिकरण नीति अपना अपने आराध्य राम के जन्म स्थान और रामसेतू पर ही प्रश्नचिन्ह लगाने से नहीं चुके। इतना ही कुर्सी की भूख ने खुदाई में मिले समस्त प्रमाण कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए। जिस कारण रामजन्मभूमि विवाद का निर्णय आज तक नहीं हो पाया।
शिया वक़्फ़ बोर्ड द्वारा कोर्ट को लिखकर देना इस बात की ओर भी स्पष्ट संकेत देता है, कि अब केन्द्र में तुष्टिकरण करने वाली सरकार नहीं बल्कि "सबका साथ, सबका विकास" करने वाली सरकार है, और जब जनता के समक्ष वास्तविकता सामने आएगी कि कुर्सी की खातिर किस तरह कोर्ट को सच्चाई से गुमराह किया गया था, उसका मन्दिर विरोधियों पर कोर्ट की जो प्रक्रिया होगी, वह बहुत ही शर्मनाक होगी और कोर्ट के विरुद्ध होने सड़कों पर होने वाले किसी भी दंगे को दफ़न करने में वर्तमान केन्द्र सरकार लेशमात्र भी संकोच नहीं करेगी; दूसरे मुस्लिम समाज में भी फूट पड़ने की पूरी संभावनाएं हैं। क्योकि सच्चाई से कोई कैसे इंकार कर सकता है। कोर्ट को सच्चाई से गुमराह करने पर पिछली युपीए सरकार, पुरातत्व विभाग के अलावा मंदिर विरोधी पक्षों की मान्यताओं पर भी कुठाराघात होने की पूरी सम्भावनाएँ हैं। क्योकि अब कोई राम के जन्म और रामसेतू पर प्रश्न करने का साहस नहीं कर पाएगा।
इस सन्दर्भ में अवलोकन करें:--
शिया बनाम सुन्नी
शिया वक़्फ़ बोर्ड ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड शांति पूर्ण तरीके से समाधान नहीं चाहता। इस मसले को सभी पक्ष आपस में बैठकर सुलझा सकते हैं और सुप्रीम कोर्ट इसमें उन्हें वक्त दें। इसके लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाए जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुआई में हाई कोर्ट के दो सेवानिवृत जज, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी के अलावा और पक्षकार शामिल हों।
शिया वक़्फ़ बोर्ड ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड शांति पूर्ण तरीके से समाधान नहीं चाहता। इस मसले को सभी पक्ष आपस में बैठकर सुलझा सकते हैं और सुप्रीम कोर्ट इसमें उन्हें वक्त दें। इसके लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाए जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुआई में हाई कोर्ट के दो सेवानिवृत जज, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी के अलावा और पक्षकार शामिल हों।
शिया वफ्फ बोर्ड इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी पक्षकार था, हालांकि हाई कोर्ट में विस्तृत दलील के लिए पैरवी नही की। 2011 में जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया था। ये हलफनामा उसी नोटिस के जवाब में आया है।
हाई कोर्ट का फैसला
दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2010 में जन्मभूमि विवाद में फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षकारों में बांटने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने जमीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में अपीलें दाखिल कर रखी हैं जो कि पिछले छह साल से लंबित हैं. इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी।
दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2010 में जन्मभूमि विवाद में फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षकारों में बांटने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने जमीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में अपीलें दाखिल कर रखी हैं जो कि पिछले छह साल से लंबित हैं. इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी।
सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड क्यों पैरवी कर रहा है?
राम मंदिर पर शिया वक्फ बोर्ड का फैसला सुनकर बीजेपी नेता और राम मंदिर के पैरोकार सुब्रमनियम स्वामी खुश हो गए हैं, उन्होंने इस फैसले की तारीफ करते हुए कहा - मेरे हिसाब से शिया वक्फ बोर्ड का यह दखल एक अच्छी बात है और राम मंदिर के लिए पॉजिटिव समाचार है।
उत्तर प्रदेश के शिया वक्फ बोर्ड ने कहा है कि बाबरी मस्जिद की जमीन हमारी थी और हम आपसी सहमति से वहां पर राम मंदिर चाहते हैं क्योंकि वहां पर हिन्दू अधिक रहते हैं, हम चाहते हैं कि मस्जिद वहां पर बनें जहाँ पर मुस्लिम ज्यादा रहते हों।
शिया वक्फ बोर्ड ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट फाइल किया है जिसमें बाकायदा लिखा है कि अगर हम जमीन के मालिक हैं तो इस मामले की पैरवी सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड क्यों कर रहा है, हमें अपनी पैरवी करने दो और मामले को निपटाने दो। हम मिल बैठकर मामले को निपटाना चाहते हैं और वहां पर राम मंदिर बनवाना चाहते हैं। मस्जिद भी बनेगी लेकिन राम मंदिर से थोड़ी दूरी पर उस जगह बनेगी जहाँ पर मुस्लिम अधिक रहते हैं।



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