'हिन्दू भी आतंकवादी होते हैं' यही साबित करने के लिए मालेगांव ब्लास्ट की साजिश रची गयी और साध्वी, प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित और कुछ अन्य हिन्दुओं को आरोपी बनाकर जेल में डाल दिया गया था। इनके खिलाफ ना तो सबूत थे और ना ही कोई गवाह, इसके बावजूद भी इन्हें 9 साल तक जेल में रखा गया और शारीरिक प्रताड़ना दी गयी, इनसे ब्लास्ट का इल्जाम देने के लिए बहुत दबाव बनाया गया, बहुत प्रताड़ना दी गयी लेकिन ये भी शेर दिल थे, इतनी मार पड़ने, हड्डियाँ टूटने के बाद भी इन्होने कबूल नहीं किया कि हम आतंकवादी है। वास्तव में पुरोहित SIMI की गतिविधियों पर पैनी नज़र रखे हुए थे। वीडियो सुनिए :--
https://youtu.be/X43CZjAKwU0
उधर इन्हें जेल में डालने के बाद कांग्रेस के बड़े बड़े नेता सभी रैलियों में कहने लगे कि हिन्दू भी आतंकवादी होते हैं, भगवा आतंकवादी होते हैं, उदाहरण के लिए ये लोग साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित का नाम लेते थे लेकिन अब ये लोग ऐसा नहीं कर पाएंगे इसलिए बहुत दुखी होंगे क्योंकि मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं इसलिए दोनों को इस मामले में जमानत मिल गयी.
सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी खबर आयी है. मालेगांव ब्लास्ट में आरोपी कर्नल पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट में जमानत मिल गयी है. वे पिछले 9 वर्षों से जेल में बंद थे लेकिन उनकी फ़रियाद ना सिविल कोर्ट ने, ना हाई कोर्ट ने सुनी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मायूस नहीं किया और उन्हें न्याय दिया. मतलब कहें तो कर्नल पुरोहित को न्याय मिलने में देर तो हुई लेकिन आखिर जमानत मिल ही गयी।
कर्नल पुरोहित पिछले 9 वर्षों से जेल में बंद थे लेकिन उनकी फ़रियाद ना सिविल कोर्ट ने, ना हाई कोर्ट ने सुनी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मायूस नहीं किया और उन्हें न्याय दिया. मतलब कहें तो कर्नल पुरोहित को न्याय मिलने में देर तो हुई लेकिन आखिर जमानत मिल ही गयी.
2008 में हुए मालेगांव ब्लास्ट केस में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के साथ साध्वी प्रज्ञा को भी आरोपी बनाया गया था लेकिन उन्हें कुछ महीनों पहले जमानत मिल गयी थी, इसके बाद पुरोहित ने भी सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अर्जी दी क्योंकि उनके खिलाफ अभी तक आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया था और ना ही उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत हैं. इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी. वैसे भी वे 9 साल सजा काट चुके हैं इसलिए दोषी साबित होने पर भी उन्हें कोई सजा नहीं मिलने वाली.
यह फैसला न्यायाधीश आर के अग्रवाल और एएम सप्रे की बेंच ने किया। इस केस की पैरवी सीनियर वकील हरीश साल्वे ने की थी, उन्होंने कहा कि कर्नल पुरोहित पर आरोप राजनीतिक फायदे के लिए लगाए गए थे, उन्हें फंसाया गया था।
हेमंत करकरे जो पूरी तरह से कांग्रेसी था, उस समय महाराष्ट्र में भी कांग्रेस की सरकार थी, उसने इस काम में कांग्रेस की पूरी मदद किया उसने साध्वी प्रज्ञा के मुंह में मटन चिकन ठूस दिया उनकी कंठी माला उतार कर फेंक दी थी मार-मार कर उनके दोनों पैर तोड़ दिए थे हेमंत करकरे ही वो शख्स था जिसने साध्वी प्रज्ञा के फेंफड़ों की झिल्ली तक फाड़ दी थी, साध्वी प्रज्ञा को कैंसर भी हेमंत करकरे के अत्याचारों के कारण हुआ
ये खुलासा बेहद गंभीर और बड़ा है।
UPA की सरकार यानि सोनिया-मनमोहन की सरकार हिन्दुओ को आतंकी साबित करने के लिए किस प्रकार षड्यंत्र कर रही थी, इस पर बड़ा खुलासा हुआ है।
टाइम्स नाउ के हवाले से आपको बता दें कि तत्कालीन सोनिया गांधी सरकार ने तत्कालीन NIA प्रमुख पर दबाव बनाया था कि वो मोहन भागवत को आतंकी साबित कर आतंकी वारदातों में फंसा कर गिरफ्तार कर लें। इससे पहले भी सोनिया गांधी की सरकार ने कई हिन्दुओ जिनमे साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित और असीमानंद को फर्जी केस में फंसाकर आतंकी साबित करने के लिए गिरफ्तार किया था।
असीमानंद के बाद सोनिया गांधी भारत के सबसे बड़े हिंदूवादी संगठन यानि आरएसएस प्रमुख को गिरफ्तार करवाना चाहती थी।
और उसके बाद हिन्दुओ को आसानी से आतंकवादी घोषित किया जाता, आरएसएस और उस से जुड़े संगठनो पर बैन लगाया जाता।
परंतु मोहन भागवत के खिलाफ सोनिया गांधी को कोई ऐसी कड़ी मिली ही नहीं की कैसे भी उनको फंसाया जा सके। लेकिन सोनिया गांधी की सरकार की साजिश कामयाब नहीं हो सकी
साध्वी प्रज्ञा पर अत्याचार
साध्वी प्रज्ञा पर सबसे ज्यादा अमानवी अत्याचार हेमंत करकरे ने किया था, हेमंत करकरे महाराष्ट्र में ATS का प्रमुख था। रॉ के एक रिटायर्ड अधिकारी ने पूरा खुलासा किया था कि बाटला हाउस एनकाउंटर और तमाम केस में जिहादियों के मारे जाने से मुस्लिम नाराज थे।
जिहादियों खुश करने के लिए कांग्रेस ने “भगवा आतंकवाद या हिंदू आतंकवाद” का प्लान किया और उसके लिए संघ के कुछ लोगों को इसमें फंसाने की पूरी साजिश रची गयी थी।
जिहादियों खुश करने के लिए कांग्रेस ने “भगवा आतंकवाद या हिंदू आतंकवाद” का प्लान किया और उसके लिए संघ के कुछ लोगों को इसमें फंसाने की पूरी साजिश रची गयी थी।
साध्वी प्रज्ञा की सगी बहन के बताया की जब वो साध्वी से मिलने जेल गयी थी, तो साध्वी ने उन्हें कहा था कि हेमंत करकरे दबाव डाल रहा है की, “खुद को आतंकी मान ले वरना तेरे बाप को भी इसी तरह उल्टा लटकाकर मारूंगा।"
ख़ैर ईश्वर का न्याय देखिए वही हेमंत करकरे कांग्रेस की साजिश का शिकार हुआ, जिहादियों को खुश करने के लिए हेमंत करकरे ने साध्वी प्रज्ञा पर इतना अत्याचार किया, जिहादी आतंकवादी कसाब ने हेमंत करकरे को मार डाला था और हेमंत करकरे के मरने के 3 या 4 साल के बाद उसकी पत्नी कविता करकरे भी कैंसर से मारी गई ….ईश्वर के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं।
हिन्दू आतंकवाद
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं। जी न्यूज पत्रकार रोहित सरदाना ने इस केस पर ट्वीट किया है। सरदाना ने अपने ट्वीट में लिखा, “साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित की ज़मानत के बाद आतंकवाद का ‘रंग और मज़हब’ भगवा बताने वालों की ज़मानतें ज़ब्त होंगी ? राज खुलेंगे ?” गौरतलब है, सरदना के इस ट्वीट से माना जा रहा है कि उनका इशारा उन नेताओं की तरफ है जिन्होंने “हिंदू आतंकवाद” की बात कही थी। हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल किए जाने को लेकर बीजेपी, कांग्रेस नेतृत्व की पूर्व यूपीए सरकार पर निशाना साध चुकी है। पूर्व यूपीए सरकार में गृह मंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे को हिंदू आतंकवाद वाले बयान पर कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी। कुछ ट्विटर यूजर्स ने इशारों ही इशारों में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए लिखा कि “हिंदू आतंकवाद” की बात कहकर पार्टी ने मुस्लिम वोटों के तुष्टिकरण की राजनीति की थी।
पिछली सरकार के रहते स्वामी असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित के साथ जो अमाननीय व्यवहार किया गया, काश उसका एक प्रतिशत भी किसी मुस्लिम आतंकी के साथ किया होता, छद्दम धर्म-निरपेक्षों और मानवाधिकार संस्थानों ने आसमान सिर पर उठा कर, अत्याचार करने वालों को ही जेल में बन्द करवा दिया होता। इन लोगों पर जिस तरह अत्याचार किए गए थे, उसे तत्कालीन महामहिम पाटिल को भी अवगत करवाया गया था। उस पत्र को Organiser साप्ताहिक ने शायद पृष्ठ 18/19 पर प्रकाशित भी किया था।
वास्तव में पिछली यूपीए सरकार ने हिन्दुत्व को बदनाम करने को कमर कसे हुए थी। जिसे कुर्सी के भूखे नेता सोनिया गाँधी का साथ देते रहे। जबकि सब जानते थे कि इस्लामिक आतंकवाद को बचाने के लिए बेकसूर हिन्दू साधु-संत-साध्वियों को अपमानित किया जा रहा है। बदकिस्मती से यदि 2014 चुनाव में भाजपा की बजाए पिछली सरकार की वापसी हो गयी होती, बापू आशाराम की तरह अब तक दो/तीन साधु-संत, जो अपने-अपने समागमों में सोनिया अत्याचारों के विरुद्ध प्रवचन दे रहे थे, जेल में पहुंच चुके होते। अभी आशा राम की रिहाई बाकी है। बापू आशा के विरुद्ध 9 जून 2012 से षड्यंत्र की तैयारी चल रही थी। जब अपने एक समागम में बापू ने कहा था "सोनिया बहुत हो गया, इटली वापस जाओ, तुम हिन्दुओं को ईसाई बनवाओगी, आशा राम और मेरे शिष्य उनको वापस हिन्दू बनाएंगे...." इस घटना को मैंने एक हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते प्रकाशित भी की थी, जबकि समस्त मीडिया बापू के विरुद्ध सरकार के षड्यंत्र पर पर्दा डाल बदनाम करने में व्यस्त थी।
जिस भ्रष्टाचार और काले धन को लेकर बाबा रामदेव ने रामलीला मैदान में अनशन किया था, उसी मुद्दे को लेकर अन्ना हज़ारे ने भी किया, लेकिन लाइट बन्द कर अश्रु गैस छोड़ रामदेव पर जो अत्याचार किया गया था, अन्ना के साथ क्यों नहीं हुआ? यह इस बात का प्रमाण है कि तत्कालीन सरकार हिन्दू धर्म को बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ रही थी।
2017 का सबसे बड़ा हिन्दू विरोधी आंदोलन शुरू कर दिया गया है। इस आंदोलन में शामिल है: कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, उमर खालिद जैसे तत्व, देश के वामपंथी और सेक्युलर पत्रकार, ये तमाम वो लोग है जो हमेशा कहते है “आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता”, पर ये लोग देश भर में हिन्दुओ को आतंकवादी बताकर आंदोलन कर रहे है। गाय को खाना बताया जा रहा है, हिन्दू को आतंकवादी बताया जा रहा है, एक हिन्दू होने के नाते आपको इसके खिलाफ आवाज उठाना होगा। ये वो कांग्रेस है जिसने सरकार में रहते हुए हिन्दुओ को गुलाम बनाने वाला बिल लाने की कोशिश की थी। ये वही कांग्रेस है जिसके नेताओं ने हिन्दुओ को आतंकवादी बताया था देश का हिन्दू उस समय भी चुप था। अब ये सड़कों पर आकर हिन्दुओ को आतंकवादी बता रहे है, अगर देश का हिन्दू एकजुट होकर इनके खिलाफ आवाज नहीं उठाएगा, तो ये लोग कल से हिन्दुओ को आतंकवादी बुलाएँगे
जिस भ्रष्टाचार और काले धन को लेकर बाबा रामदेव ने रामलीला मैदान में अनशन किया था, उसी मुद्दे को लेकर अन्ना हज़ारे ने भी किया, लेकिन लाइट बन्द कर अश्रु गैस छोड़ रामदेव पर जो अत्याचार किया गया था, अन्ना के साथ क्यों नहीं हुआ? यह इस बात का प्रमाण है कि तत्कालीन सरकार हिन्दू धर्म को बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ रही थी।
2017 का सबसे बड़ा हिन्दू विरोधी आंदोलन शुरू कर दिया गया है। इस आंदोलन में शामिल है: कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, उमर खालिद जैसे तत्व, देश के वामपंथी और सेक्युलर पत्रकार, ये तमाम वो लोग है जो हमेशा कहते है “आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता”, पर ये लोग देश भर में हिन्दुओ को आतंकवादी बताकर आंदोलन कर रहे है। गाय को खाना बताया जा रहा है, हिन्दू को आतंकवादी बताया जा रहा है, एक हिन्दू होने के नाते आपको इसके खिलाफ आवाज उठाना होगा। ये वो कांग्रेस है जिसने सरकार में रहते हुए हिन्दुओ को गुलाम बनाने वाला बिल लाने की कोशिश की थी। ये वही कांग्रेस है जिसके नेताओं ने हिन्दुओ को आतंकवादी बताया था देश का हिन्दू उस समय भी चुप था। अब ये सड़कों पर आकर हिन्दुओ को आतंकवादी बता रहे है, अगर देश का हिन्दू एकजुट होकर इनके खिलाफ आवाज नहीं उठाएगा, तो ये लोग कल से हिन्दुओ को आतंकवादी बुलाएँगे
इस तरह के प्रदर्शन को आम आदमी पार्टी और कांग्रेस फण्ड कर रही है। दिल्ली में मनीष सिसोदिया प्रदर्शन कर रहा है तो मुंबई में उमर खालिद, सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक पर कांग्रेस के नेता, आम आदमी पार्टी के नेता हिन्दुओ को आतंकवादी बता रहे है। इस देश के हिन्दुओ को अपनी चुप्पी तोड़कर इनका विरोध करना होगा।
क्योकि हिन्दू आतंकवादी नहीं है, हिन्दू आतंकवादी होता तो ये लोग ऐसे सड़क पर प्रदर्शन नहीं कर रहे होते। 

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