जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अबदुल्ला ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। 7 अगस्त को फारुख ने कहा कि बीजेपी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) मिलकर जम्मू कश्मीर की स्वायत्ता को खत्म करना चाहते हैं। फारुख अबदुल्ला ने कहा कि यह ही संघ का प्लान है। अबदुल्ला ने आगे कहा महबूबा ने कहा है कि अगर अनुच्छेद 35A से छेड़छाड़ हुई तो वह कुर्सी छोड़ देंगी, उम्मीद है कि वह अपनी बात पर टिकेंगी। अबदुल्ला ने अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा याद करो लोग रातो-रात विरोध में खड़े हो गए थे। अब की बार विरोध और बड़े पैमाने पर होता है।
विभिन्न राजनीतिक दलों (गैरसत्ताधारी दलों) के नेताओं व प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार बड़े ही सुनियोजित तरीके से धारा 35ए को भंग करने में लगी हुई है। राज्य में सत्तासीन पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार इसमें पूरा सहयोग कर रही है।
अब्दुल्ला ने कहा कि भाजपा और आरएसएस का एक ही एजेंडा है, धारा 370 व जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता को किसी तरह खत्म करना। इसी एजेंडे के तहत धारा 35ए को समाप्त किया जा रहा है। अगर संविधान की यह धारा भंग हुई तो रियासत के तीनों क्षेत्रों कश्मीर, लद्दाख व जम्मू पर नकारात्मक असर होगा।
उन्होंने कहा कि धारा 35ए के समाप्त होने या इसमें किसी तरह की संशोधन का मतलब न सिर्फ धारा 370 को कमजोर बनाना है, बल्कि रियासत का सांख्यिकी चरित्र बदलना भी है। यह रियासत के लोगों को अल्पसंख्यक बनाने की साजिश का हिस्सा है। फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती जो हमेशा रियासत की विशेष संवैधानिक स्थिति की रक्षा करने का दावा करती हैं, उन्हें केंद्र सरकार पर जोर देना चाहिए कि वह धारा 35ए को मजबूत बनाए और इसे कमजोर बनाने या भंग करने की हर साजिश को नाकाम बनाएं।
मुख्य प्रश्न यह है कि जब
अमरनाथ यात्रियों पर हमले को याद करते हुए कहा कि कैसे रातोंरात लोग उठ खड़े हुए थे. उन्होंने कहा कि अगर आर्टिकल 35ए को हटाया जाता है, तो बहुत बड़ा विद्रोह होगा. पिछले महीने फारूख अब्दुल्ला ने कहा था कि, 'हुर्रियत को फंड केन्द्र सरकार से मिली थी और इस बात का जिक्र पूर्व रॉ प्रमुख ए एस दौलत के किताब में है.'
इससे पहले अबदुल्ला ने कहा था कि वे उनका नाम नहीं बताना चाहते हैं, जो हुर्रियत नेताओं को फंड मुहैया कराते हैं, लेकिन देश परिणाम भुगत रहा है.
कश्मीर में अनुच्छेद 35A को छेड़ा तो वो होगा जो कभी नहीं हुआ: उमर
कश्मीर में अनुच्छेद 35A को लेकर मामला गरम होता जा रहा है. इस मसले पर विवाद के बीच सोमवार को नेशनल कांफ्रेंस तमाम विपक्षी पार्टियों के साथ चर्चा के लिए एक बैठक कर रही है. इसकी अध्यक्षता फारुक अब्दुल्ला करेंगे. बैठक का मकसद राज्य के स्पेशल स्टेटस से किसी तरह की छेड़छाड़ पर संयुक्त रूप से आवाज उठाना है.इस बीच नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को इस मामले में चेतावनी भी जारी कर दी है. उन्होंने कहा है कि कश्मीर में अनुच्छेद 35A को छेड़ा तो कश्मीर में वो होगा जो कभी नहीं हुआ.
बता दें कि पिछले महीने केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर रुख प्रस्तुत किया गया था. जिसक सख्त विरोध करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'भारतीय संघ में किसी भी राज्य के विलय और राज्य को स्पेशल स्टेटस दिया जाना, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. अगर अनुच्छेद 35A पर बड़े पैमाने पर चर्चा होती है तो इसके हर कानूनी पहलुओं पर बहस होनी चाहिए. इसके तहत कश्मीर के विलय की भी चर्चा की जानी चाहिए. उन्होंने कहा, राज्य के स्पेशल स्टेटस से छेड़छाड़ की स्थिति में पूरा विपक्ष एकजुट है और हम सभी एक साथ इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे.
उमर ने कहा, 'जम्मू एंड कश्मीर के स्पेशल स्टेटस पर सवाल उठाने का मतलब उस राज्य के विलय पर भी अपने आप सवाल खड़ा करना है. जैसे अनुच्छेद 370 और 35A को बातचीत के जरिए जम्मू और कश्मीर व भारत सरकार के बीच मंजूरी दी गई थी और यही राज्यों के विलय का कठोर पक्ष है.' उन्होंने कहा, देश के अटॉर्नी जनरल आखिर कैसे अनुच्छेद 35A पर बहस के लिए तैयार हो गए? क्या वो इस राज्य के विलय को लेकर भी बहस करने को तैयार हैं.
उमर ने कहा, भारतीय संविधान में कश्मीर के स्पेशल स्टेटस को बाकायदा स्थापित किया गया है. इसे किसी भी हाल में छेड़ा या बदला नहीं जा सकता है. ये भरोसे और विश्वास की कानूनी धारा है.
अमरनाथ में जो देखा वो कुछ भी नहीं था
उमर ने धमकी भरे लहजे में कहा, 'अमरनाथ की जमीन को लेकर विवाद में जो भी देश ने देखा वो कुछ नहीं था. अगर अनुच्छेद 35A से छेड़छाड़ की गई तो वो होगा जो पहले कभी नहीं हुआ होगा.' उन्होंने केंद्र सरकार को इशारा देते हुए कहा, आपके पास भले ही जम्मू और कश्मीर की दिशा बदलने की क्षमता हो लेकिन ये ठीक कदम नहीं होगा. अनुच्छेद 35A जम्मू-कश्मीर राज्य को संविधान द्वारा दी गई खास ताकत है जिसके तहत राज्य में स्थायी निवास को परिभाषित किया गया है.
क्या है अनुच्छेद 35A
अनुच्छेद 35A के तहत संविधान में ये ताकत जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को दी गई है. इसके तहत वह अपने आधार पर ‘स्थायी नागरिक’ की परिभाषा तय करे साथ ही उन्हें चिन्हित कर विभिन्न विशेषाधिकार भी दिया जा सकता है. धारा 370 जम्मू-कश्मीर को कुछ विशेष अधिकार प्रदान करता है. 1954 के एक आदेश के बाद अनुच्छेद 35A को संविधान में जोड़ा गया था.
महबूबा नहीं चाहतीं कि कश्मीर में कोई अन्य भारतीय बसे, घर खरीदे
भारत सरकार और करोड़ों भारतीय चाहते हैं कि कश्मीर से आर्टिकल 35(A) हटे, कश्मीर में भी लोग घर घरीद सकें, वहां पर अपनी जिन्दगी जी सकें लेकिन कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती नहीं चाहतीं कि कश्मीर से आर्टिकल 35(A) हटाया जाय. मतलब महबूबा मुफ़्ती ये नहीं चाहतीं कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली या अन्य राज्यों का कोई भी निवासी कश्मीर में घर खरीद सके और वहां का परमानेंट निवासी बन सके इसीलिए महबूबा मुफ़्ती ने आर्टिकल 35(A) पर राजनीति तेज कर दी है.
सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 35(A) हटाने को लेकर बहस चल रही है लेकिन महबूबा मुफ़्ती ने इस बहस के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है, महबूबा मुफ़्ती पहले भी कह चुकी हैं कि अगर कश्मीर से आर्टिकल 35(A) हटाया गया तो कश्मीर में तिरंगे को कोई कांधा देने वाला नहीं रहेगा, मतलब देशद्रोह शुरू हो जाएगा और महबूबा मुफ़्ती भी देशद्रोही बनकर पाकिस्तान का समर्थन करना शुरू कर देंगी, महबूबा मुफ़्ती ने कुछ ही दिन पहले ये धमकी दी है.
महबूबा मुफ़्ती ने कश्मीर में एक रैली में कहा कि आर्टिकल 35(A) हटाने पर बहुत गंभीर परिणाम होंगे इसलिए पहले हमें अपना विशेष अधिकार बचाना है, आपको बता दें कि आर्टिकल 35(A) जम्मू कश्मीर सरकार को विशेष अधिकार देता है जिसके तहत सरकार ही कश्मीर के निवासियों को परमानेंट नागरिकता प्रदान करती है, मतलब जब तक सरकार नहीं चाहेगी हरियाणा या अन्य राज्यों का कोई भी निवासी कश्मीर में ना तो घर खरीद सकता है और ना ही वहां का स्थायी निवासी बन गकता है.
महबूबा मुफ़्ती ने अपने इसी अधिकार को बचाने के लिए आन्दोलन तेज कर दिया है, अगर आर्टिकल 35(A) हटा दिया गया तो कोई भी कश्मीर में घर खरीद सकेगा और इसके लिए उसे महबूबा की परमिशन नहीं लेनी पड़ेगी, महबूबा यही तो नहीं चाहतीं. महबूबा ने आज कहा कि कश्मीर सरकार को यह अधिकार 1947 में मिला था और इसे बचाकर रखना हमारा पहला फर्ज है, मतलब आर्टिकल 35A बचाने के लिए अगर महबूबा मुफ़्ती को सरकार भी गंवानी पड़ी तो शायद वे पीछे नहीं हटेंगी और इसके लिए बीजेपी से गठबंधन भी तोड़ देंगी.
वैसे मुफ़्ती ने गठबंधन तोड़ने की कोई गलत या नई बात नहीं की है। जो वह बोल रही हैं, कश्मीर ही नहीं भारत की समस्त दीवारों पर पहले लिखा जा चुका था, कि जिस तरह उत्तर प्रदेश में मायावती ने भाजपा के साथ किया था, वही महबूबा मुफ़्ती जम्मू-कश्मीर में दोहराएंगी। नेशनल कांफ्रेंस हो या पीडीपी या कांग्रेस या और कोई अन्य दल कोई भी कश्मीर से 35A हटाने के पक्षधर नहीं। जब वहाँ यह धारा ही नहीं रहेगी, इन लोगों को वहां पूछेगा कौन? क्या होगा इनके परिवारों का? शायद कोई इनके परिवार को नौकरी भी न दे? यानि जिस तरह पाकिस्तान में कोई भी पार्टी सत्ता में आए, कश्मीर का राग नहीं छोड़ते। ठीक वही स्थिति कश्मीर में इन पार्टियों की है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि मोदी सरकार इस धमकी से डर कदम पीछे हटाएगी या कश्मीर में विद्रोह करने वालों के साथ सख्ती से पेश आएगी?

Comments