कश्मीर से आज एक शर्मनाक खबर आयी है क्योंकि भारतीय सेना ने काफी प्रयास के बाद तीन आतंकियों को चारों तरफ से घेर लिया था, एक आतंकी को मार भी दिया था, इतने में आसपास की मस्जिदों से घोषणा की गयी कि हमारे तीन आतंकी भाई चारों तरफ से घेर लिए गए हैं, सभी पत्थरबाज भाई तुरंत पत्थर लेकर पहुंचे और उन्हें बचाएं, मस्जिद से घोषणा होने के बाद सैकड़ों पत्थरबाज अपने अपने हाथों में पत्थर लेकर पहुंचे और सैनिकों पर पत्थरबाजी करने लगे, सेना का जैसे ही ध्यान भटका आतंकियों को भागने का मौका मिल गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कश्मीर में भारतीय सुरक्षाबलों ने केवल 45 दिन में 50 आतंकियों को मारकर अर्धशतक पूरा कर लिया है, सेना ने रोजाना 1-2 आतंकी मारे हैं और धुंवाधार बैटिंग करते हुए अर्धशतक लगाया है, इस दौरान करीब 7-8 भारतीय सैनिक भी शहीद हुए हैं. अभी भी भारतीय सेना के पास 250 से अधिक आतंकियों की लिस्ट है इन्हें ख़त्म किया जाना है।
मस्जिदों से आतंकवादियों को बचाने के लिए जो चीख-चिल्लाट की जाती है, इसके लिए छद्दम धर्म-निरपेक्षों का ऐसी मस्जिदों के विरुद्ध प्रदर्शन कब होगा? ये मस्जिदें हैं या आतंकवादियों की आरामगृह? कहते हैं, आतंकवाद का कोई धर्म अथवा मजहब नहीं होता , फिर मस्जिदों में लगे लाउड-स्पीकरों से पत्थरबाजों को नेवता क्यों? क्या मस्जिदों में लाउड-स्पीकर अज़ान के लिए लगे है या आतंकवादियों के बचाव के लिए चीखने के लिए?
वैसे तो सूत्रों से समाचार आ रहे है कि आतंकवादियों से निपटने के साथ-साथ पत्थरबाजों को भी देखते ही गोली मारने का निर्णय बहुत जल्द होने वाला है, क्योकि ज्यादा समय तक सरकार कश्मीर को पाकिस्तान समर्थकों के हाथ नहीं छोड़ने वाली। यदि पत्थरबाज अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आये तो इनका भी आतंकवादियों जैसा हश्र होगा। और जब सरकार ऐसी मस्जिदों को सील करेगी, फिर छद्दम धर्म-निरपेक्षों का शुरू होगा विधवा-विलाप।
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