मुद्दा दलितों का और दिया खुद का इस्तीफा
जब मायावती सदन से बाहर जा रही थी तो उनके आसपास के कई नेताओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन वो सदन से ऐसे बाहर गयीं कि जैसे उनका ये कार्यक्रम पहले से तय था. दरअसल अभी बहुजन समाज पार्टी के दिन ठीक नही चल रहे हैं और बसपा सुप्रीमों बौखलाई हुई हैं और इससे निजात पाने के लिए उन्होंने दलितों का मुद्दा उठाया है.
खोयी हुई जमीन वापस चाहती हैं
मायावती को लगता है कि दलित वोटों पर उनकी ही पार्टी का हक़ है लेकिन इन दिनों बसपा से दलित वोटों का विश्वास कम हुआ है और इसी को देखते हुए मायावती ने अपनी तरफ से बड़ा दांव खेला है और बहुत सोच-समझकर इस्तीफे का दांव खेला है. मायावती इस दांव को खेलकर दलितों के बीच खोयी हुई जमीन वापस पाना चाहती हैं.
लोकसभा और विधानसभा में मिल चुकी है करारी हार
वैसे भी बीते 2104 के लोकसभा चुनाव और 2017 के यूपी विधानसभा के चुनाव के बाद मायावती की सियासत फीकी हो गयी है और उसकी छटपटाहट में मायावती ने इस्तीफा देने का बड़ा दांव खेलने की कोशिश की है.अप्रैल 2018 में वैसे भी मायावती का राज्यसभा कार्यकाल ख़त्म हो रहा है और ऐसे में उनकी विधानसभा में सीटों की स्थिति को देखते हुए फिर से राज्यसभा आने में बड़ी मुश्किल हो सकती है. मायावती हर वो कोशिश करना चाहती हैं जो उन्हें फायदा पहुंचा सकता है.
मोदी लहर में खाता भी नही खुला
2012 में यूपी विधानसभा के जब चुनाव हुए थे तो मायावती की पार्टी को 80 सीटें मिली थी लेकिन 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी स्थिति और ख़राब हो गयी और 80 से महज 19 सीटों पर पार्टी सिमट कर रह गयी. इससे बड़ा झटका तो उन्हें लोकसभा चुनाव में मिला था. मोदी लहर में बसपा की हालत इतनी ख़राब हो गयी कि उसका खाता ही नही खुल पाया. इन्हीं सब आकंड़ों के बाद मायावती की खीज और बढ़ गयी.
भीम आर्मी ने बढ़ा दी चिंताएं
जिस मुद्दे पर मायावती बोलते-बोलते इस्तीफा देने पर आ गयीं उस मामले में भी उनकी चुनौती कम नही है. दरअसल सहारनपुर में हुए दलित और राजपूतों के बीच संघर्ष में भीम आर्मी का नाम खूब बढ़-चढ़कर सामने आया. जिस तरीके से भीम आर्मी पर दलितों ने भरोसा जताकर बसपा से मुंह मोड़ा है, वो मायावती के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. मायावती को लगता था कि दलित वोट उन्ही के भरोसे है, लेकिन भीम आर्मी को दलितों ने हाथों-हाथ लिया.
सहारनपुर जाकर भी नही जीत पाईं दलितों का विश्वास
इसलिए छोड़ना चाहती हैं राज्यसभा
हालांकि अब देखना ये है कि उनका ये दांव कितना कारगर साबित होगा लेकिन इतना तो तय है कि अपने आप को दलितों का हमदर्द साबित करने के लिए वो खुद को शहीद घोषित करने के लिए भी तैयार हैं. वैसे उनके इस्तीफे को इस बात से भी जोड़कर देखा जा रहा है कि राज्यसभा में उनका कार्यकाल अगले साल समाप्त होने वाला है और ऐसे में इस्तीफे की धमकी कोई त्याग भावना नही है सिर्फ एक दिखावा ही है जो दलित वोटों को पाने की ललक बताता है.
मायावती के इस्तीफे को लेकर ओमप्रकाश राजभर ने खोली पोल
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि वह 14 साल तक बसपा में थे। उन्होंने बसपा यह सोच कर ज्वाइन की थी कि बाबा भीमराव अम्बेडर के विचारों पर चलने वाली पार्टी होगी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने हमेशा ही दलितों की अनदेखी की और दौलत की बेटी बन गयी। इसके चलते उन्हें बसपा छोड़ कर अपनी पार्टी बनानी पड़ी है।
जब दलितों ने छोड़ा साथ तो याद आने लगा वोट बैंक
राजभर ने कहा कि मायावती की सच्चाई दलितों को समझ आ गयी है इसलिए दलित वर्ग ने मायावती का साथ छोड़ दिया है। यूपी चुनाव 2017 में जब दलितों ने बसपा को हाशिए पर ला दिया है तो मायावती को अब समझ आ गया है कि उनका फरेब नहीं चलने वाला है इसलिए मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा देने का नाटक किया है।
राजभर ने कहा कि मायावती की सच्चाई दलितों को समझ आ गयी है इसलिए दलित वर्ग ने मायावती का साथ छोड़ दिया है। यूपी चुनाव 2017 में जब दलितों ने बसपा को हाशिए पर ला दिया है तो मायावती को अब समझ आ गया है कि उनका फरेब नहीं चलने वाला है इसलिए मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा देने का नाटक किया है।
एक दिन पहले कहा था कि मेरे दोनों हाथ में लड्डू
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि जब एनडीए ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाया था तो मायावती ने हमारे प्रत्याशी को दलित मानने से ही इंकार कर दिया था। इसके बाद राष्ट्रपति चुनाव के दिन मायावती ने कहा था कि मेरे दोनों हाथ में लड्डू है मीरा कुमार व रामनाथ कोविंद में से एक दलित देश का राष्ट्रपति बनेगा। इसके बाद मायावती को लगा कि दलित वोट बैंक उनके हाथ से खिसक चुका है तो वह राज्यसभा से इस्तीफा देने का राजनीतिक ड्रामा करने लगी है, जिसका भी उन्हें कोई फायदा नहीं होगा।
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि जब एनडीए ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाया था तो मायावती ने हमारे प्रत्याशी को दलित मानने से ही इंकार कर दिया था। इसके बाद राष्ट्रपति चुनाव के दिन मायावती ने कहा था कि मेरे दोनों हाथ में लड्डू है मीरा कुमार व रामनाथ कोविंद में से एक दलित देश का राष्ट्रपति बनेगा। इसके बाद मायावती को लगा कि दलित वोट बैंक उनके हाथ से खिसक चुका है तो वह राज्यसभा से इस्तीफा देने का राजनीतिक ड्रामा करने लगी है, जिसका भी उन्हें कोई फायदा नहीं होगा।
Comments