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मुसलमानों को राष्ट्रगान न बोलने पर मारना गलत है

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों पर गत सोमवार(जुलाई 10) को हुए आतंकवादी हमले के विरोध में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए। इन्ही प्रदर्शन में हिसार में कथित बजरंग दल के विरोध प्रदर्शन से विवाद छिड़ गया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आतंकवाद का पुतला जलाया लेकिन उनका विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक हो गया। कार्यकर्ता स्थानीय मस्जिद में पहुंच गए और इमाम को बाहर निकाल कर उस पर भारत माता की जय बोलने का दबाव बनाने लगे। बहस के दौरान एक कार्यकर्ता ने इमाम को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद इस मामले पर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई। इस मु्द्दे पर आज तक चैनल पर हो रही बहस में एंकर अंजना ओम कश्यप के सवाल से संघ विचारक राकेश सिन्हा तिलमिला गए। अंजना के जबरदस्ती भारत माता की जय बोलने के सवाल राकेश सिन्हा ने उनसे ही पलटकर पूछ लिया कि क्या आपको भारत माता की जय बोलने से दिक्कत है। उनके इस सवाल पर और सवाल पूछने के ढंग पर राकेश सिन्हा ने उनसे कह दिया कि आज आप टेरिरिस्ट की तरह बात कर रही हैं। इसके बाद राकेश सिन्हा के ये कहकर फिर बहस को गर्मा दिया कि आपको भारत माता की जय बोलने से दिक्कत है।
वीडियो देखिये :--
अज़ान को लेकर यह मुस्लिम जो कहता और करता है वह देख और सुन सेक्युलर गैंग की हवा निकलनी तय है!
https://www.facebook.com/ChanakyaFanClub/videos/748199345360200/
बहस में शामिल मौलाना अंसार रजा ने भी स्पष्ट कह दिया कि वो भारत माता की जय नहीं बोलेंगे। उधर, हिसार में मारपीट के बाद मस्जिद की तरफ से बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत के बाद वीडियो के आधार पर पुलिस ने घटना में शामिल कार्यकर्ताओं की पहचान की और देर रात सभी के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई है। हालांकि घटना सामने आने के बाद से घटना में शामिल सभी कार्यकर्ता अंडरग्राउंड हो गए हैं। इस वजह से अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
हरियाणा के हिसार जिले में अमरनाथ यात्रियों पर हमले का गुस्सा मुस्लिम समुदाय के प्रति देखने को मिल रहा है।
यहां अमरनाथ यात्रा पर हुए आतंकी हमले के बाद बजरंग दल के कुछ लोग एक मस्जिद के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान एक मुस्लिम व्यक्ति मस्जिद से बाहर आता है। बजरंग दल के कुछ लोग इस व्यक्ति को 'भारत माता की जय' बोलने का दबाव बनाते हैं। लेकिन जब यह व्यक्ति इंकार करता है तो लोग उस पर थप्पड़ों की बरसात करते हैं।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाला मुस्लिम कारोबारी जुलाई  11 को मस्जिद में नमाज अदा करने आया था, इसी दौरान दल के कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला। बजरंग दल के कार्यकर्ता 'भारत माता की जय' के नारे लगा रहे थे, इसी बीच भीड़ में से किसी व्यक्ति ने मस्जिद के द्वार पर खड़े कारोबारी से नारा लगाने को कहा। पुलिस ने बताया कि उसके इन्कार  करने पर भीड़ में के किसी व्यक्ति ने उसे थप्पड़ मार दिया। 
कारोबारी ने 125 अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। बजरंग दल के एक नेता ने कहा कि दल के किसी व्यक्ति ने कारोबारी को थप्पड़ नहीं मारा। घटना के बाद मस्जिद में मौजूद लोगों ने धार्मिक स्थान का मुख्य द्वार बंद कर लिया और पुलिस को इसकी सूचना दी।
राकेश सिन्हा,  जिन्हे उनकी पत्रकारिता शुरू करने के दिनों से परिचित हूँ, एक मृदु भाषी है, फिर भी उनसे और बजरंग दल से पूछना चाहता हूँ कि भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ और संघ के राष्ट्रीय मुस्लिम मंच में कितने मुसलमान है जो "वन्दे मातरम", "भारत माता की जय" या "राष्ट्रगान" गाते हैं? मुश्किल से 1% भी नहीं होंगे। फिर भी सिर का ताज बनाए घूमते हो। चुनावों में भाजपा को वोट तक नहीं देते, फिर भी उन्हें मालपुए खिलाते हो, क्या यह दोगली मानसिकता नहीं? इन प्रकोष्ठों के कितने मुसलमानों की यह सब न बोलने पर पिटाई की? क्यों इन प्रकोष्ठों पर धन व्यर्थ किया जा रहा है? Charity begins from home कहावत को चरितार्थ करिए, फिर आम मुसलमान से इन नारों की उम्मीद रखिए। 
अवलोकन करिये :--


राजनेता चाहे जिस तरह की राजनीति खेले, लेकिन जनता उनसे दस कदम आगे ही चलती है। आज नेता समाज जिस तरह तुष्टिकरण नीति अपनाते है, जनता उनसे ज्या...
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उपरोक्त लेख अध्ययन कर जाँच करिये इन मतदान केन्द्रों पर कितने मुसलमान इन प्रकोष्ठों से जुड़े हैं और किस-किस पद पर है। मुस्लिम बहुल मतदान केन्द्रों से बाहुबली की तरह चलता हुआ भाजपा उम्मीदवार असहाय बन अपनी जमानत बचाने के तड़पना शुरू कर देता है। इतना ही नहीं, भाजपा अपनी सदस्य सूची का अवलोकन कर देखे कितने मुसलमान है और किस क्षेत्र से और उन क्षेत्रों से भाजपा को कितने वोट मिलते हैं।इसलिए आम मुसलमान को इन नारों के लिए बाध्य करना, किसी जुल्म से कम नहीं। सम्भव है, संघ और भाजपा के लोगों को लेख अशोभनीय लगे, लेकिन है कटु सच्चाई, है कुनीन की गोली से कहीं ज्यादा कड़वा लेख। 
भारत माता की जय बोलने में बाधक है तुष्टिकरण नीति 

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Image result for muslim mps not singing national anthem फिर जब मोदी जी स्वयं कहते हैं "सबका साथ, सबका विकास" फिर अल्पसंख्यक मंत्रालय, अनुसूचित मंत्रालय, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ और अनुसूचित प्रकोष्ठ किस लिए? सर्वप्रथम भाजपा को ही इन प्रकोष्ठों को हमेशा के लिए बंद करना होगा या "सबका साथ, सबका विकास" कहना बन्द करना होगा। यह तो वही बात हो गयी "चोर से कहो चोरी कर और साहूकार से कहो, संभलकर रह, तेरे घर चोरी होने वाली है",  अब समय ऐसे दोहरे मापदंडों को त्यागने का है।  अब समय अलग से विशेष सुविधाएँ देने का नहीं। जो वर्ग या समाज "एक देश, एक कानून" को नहीं माने, छीन लो उससे सरकारी सुविधाएँ। विदेश जाते ही, जहाज से उतरते ही वहाँ के कानून के अनुसार चलना शुरू कर देते हो, वहां का राष्ट्रगान भी गाओगे, सब कुछ वहीँ के कानून के अनुसार करने लगते है,लेकिन भारत में मनमानी। 
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भी गत 26 जून को गुजरात में हुई एक बैठक में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार  से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को तत्काल प्रभाव से भंग करने की मांग की। विहिप ने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों से जुड़े आयोग और मंत्रालय से “अलगाववादी मानसिकता” को बढ़ावा मिलता है। गुजरात के खेड़ा जिले के वडताल में 24-25 जून को हुई विहिप की केंद्रीय शासी परिषद की बैठक में इन मांगों के साथ एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि अल्पसंख्य आयोग इस प्रकार का वातावरण बनाता है जैसे भारत में मुस्लिम व ईसाई समाज पीड़ित है।

प्रस्ताव में कहा गया है, “वास्तव में ये न केवल हिंदू समाज अपितु अन्य अल्पसंख्यकों जैसे बौद्ध व सिख समाज पर भी बर्बर अत्याचार करते हैं। इसलिए जेहादी व मिशनरी पीड़ित नहीं अत्याचारी हैं। ये अल्पसंख्यक आयोग जैसी संस्थाओं का लाभ लेकर अपने लिए सहानुभूति अर्जित करते हैं, जिससे ये अपने हिंदू विरोधी व देश विरोधी षडयंत्रों को निर्बाध रूप से चलाते रहते हैं।”
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इन नारों को न बोलने के लिए मुसलमान कसूरवार नहीं, कसूरवार है तुष्टिकरण नीति, कसूरवार है छद्दम समाजवाद, कसूरवार है छद्दम धर्म-निरपेक्षता, जिसने आम मुसलमान को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने की बजाए केवल वोट-बैंक बनाए रखा। अंसार रज़ा जो प्रधानमन्त्री मोदी के रोज़ा इफ्तार खाने की इच्छा तो रखते हैं, लेकिन इन नारों को बोलने से गुरेज़। यूँ कहेंगे जितना यह भारत हिन्दुओं का है उतना ही हमारा भी है, लेकिन राष्ट्रगान के मुद्दे पर इस्लाम को ले आएंगे, इसको बोलते है दोगलापन। गुड़ खाएंगे लेकिन गुलगुलों से परहेज़ करेंगे। विश्व में ऐसा कौन सा देश है, जहाँ राष्ट्रगान नहीं होता, लेकिन भारत में लागू तुष्टिकरण नीति के कारण यहाँ आकर सब विभाजित हो जाते है।   

 पाकिस्तान से प्रशिक्षित होकर आए आतंकवादी यही तो चाहते हैं कि भारत में साम्प्रदायिक फसाद हो जाए। जो लोग अमरनाथ  यात्रियों पर हमले से गुस्से में हैं, उन्हें देश के हालातों को समझना चाहिए। पहले यूपी और अब पश्चिम बंगाल के हालात देखने चाहिए। सिर्फ गुस्सा प्रकट करने से कछ नहीं होगा।  हिन्दूवादी माने या नहीं लेकिन भारत में रहने वाले मुसलमान भी इस हकीकत को जानते हैं कि आतंकवादी एक दिन उन्हें भी नहीं छोड़ेंगे। जब पाकिस्तान में कट्टरपंथी आम मुसलमान को मार रहे हैं तो फिर भारत के मुसलमानों को भी अंदाजा लगा लेना चाहिए। भारत आतंक से तभी सुरक्षित रह सकता हैं, जब हिन्दू और मुसलमान मिल कर इस आतंकवाद से लड़े। भारतीय मुसलमान यह ज़हर भी अपने दिमाग से निकाल दें कि पाकिस्तान प्रयोजित आतंक से भारत में मुग़ल युग के एक लम्बे अन्तराल के बाद इस्लामीकरण का राज्य होगा। भारतीय मुसलमान यह भी न भूले कि आतंकवाद ने गैर-मुस्लिम से अधिक मुस्लिमों को ही अपना शिकार बनाया है।मुसलमानों को ममता बनर्जी, मुलायम सिंह,अखिलेश यादव, लालू प्रसाद  जैसे राजनेताओं से भी सावधान रहना चाहिए। ऐसे राजनेता सिर्फ सत्ता की खातिर मुसलमानों के हमदर्द बने होते हैं।  

किसी मुसलमान द्वारा इन नारों और राष्ट्रगान को न गाए जाने पर सर्वप्रथम मारो देश में लागू तुष्टिकरण नीति को, मारो छद्दम समाजवाद को, और मारो छद्दम धर्म-निरपेक्षता को। एक आम मुसलमान को मारने से क्या फायदा, जब संसद में ही कुछ सांसद राष्ट्रगान पर आपत्ति करते हैं, सदन छोड़ कर चले जाते हैं, मार सकते उनको, हिम्मत है।   
  



    

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