दुनिया जानती है कि मनमोहन सिंह को 10 साल तक सिर्फ नाम का प्रधानमंत्री बनाया गया था, उनका रिमोट सोनिया गाँधी के पास था और 10 साल वही देश को चला रही थी। मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने अपनी किताब The Accidental Prime Minister में मनमोहन सिंह की इज्जत की जमकर धज्जियाँ उड़ाई थी। लेकिन अब उन्हीं की किताब पर The Accidental Prime Minister फिल्म भी बन रही है, जिसमें अनुपम खेर मनमोहन सिंह का रोल निभा रहे हैं। ऐसा लगता है कि यह फिल्म मनमोहन सिंह, सोनिया गाँधी और कांग्रेस को एक्सपोज करके रख देगी और मनमोहन सिंह की बोलती बंद हो जाएगी।फिल्म The Accidental Prime Minister का पहला पोस्टर लांच हो गया है। इस फिल्म में मशहूर फिल्म स्टार अनुपम खेर मनमोहन सिंह का रोल निभाएंगे, फिल्म हस्तियों ने अनुपम खेर को बधाई देनी शुरू कर दी है।
यह फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू की किताब पर बनी है। संजय बारू ने अपनी किताब The Accidental Prime Minister में लिखा था कि दरअसल मनमोहन सिंह सिर्फ नाम के प्रधानमंत्री थे, वे बिना सोनिया गाँधी की इजाजत के कोई भी काम नहीं करते थे, हर फाइल सोनिया गाँधी के 10 जनपथ आवास पर जाती थी, पहले सोनिया गाँधी चेक करती थीं और उसके बाद मनमोहन सिंह सिर्फ उस फाइल पर अपना साइन करते थे।
पुस्तक में लिखा गया था कि मनमोहन सिंह सिर्फ नाम के प्रधानमंत्री थे, लेकिन सोनिया गाँधी सुपर प्राइम मिनिस्टर थीं, हर फैसले वह खुद लेती थी। संजय बारू की उसी किताब पर The Accidental Prime Minister फिल्म बनी है जिसमें अनुपम खेर मनमोहन सिंह का किरदार निभा रहे है।
To reinvent yourself as an actor is to challenge yourself. Looking forward to portraying #DrManmohanSingh in #TheAccidentalPrimeMinister.:) pic.twitter.com/PsVdkpjZWY— Anupam Kher (@AnupamPkher) June 7, 2017
अनिल कपूर ने ट्विटर पर फिल्म में मनमोहन सिंह का रोल निभाने के लिए बधाई दी और कहा कि - इस रोल के साथ सिर्फ अनुपम खेर ही न्याय कर सकते थे, मुझे आशा है कि यह अनुपम खेर की बेस्ट फिल्म होगी।
If there's anyone who can do justice to this role, it's you @anupampkher! #TheAccidentalPrimeMinister is sure to be a riveting watch! pic.twitter.com/31kPvbvBon— Anil Kapoor (@AnilKapoor) June 7, 2017
इस फिल्म से पूर्व भूतकाल में भी अनेकों राजनीतिज्ञ विषयों पर फिल्मों का निर्माण होता रहा है। "किस्सा कुर्सी का", "क्रांतिवीर" और "आँधी" का नाम विशेष रूप से लिया जा सकता है। किस्सा कुर्सी का में समस्त राजनीतिज्ञों के घिनौने हत्कण्डों का तो फिल्म क्रांतिवीर में नेताओं का देश के दुश्मनों से साठगांठ का फिल्मांकन करना। क्रांतिवीर पर तो नेताओं का कोई बस नहीं चल सका, परन्तु किस्सा कुर्सी का पर ऐसा कुठाराघात हुआ कि फिल्म को किसी योग्य ही नहीं छोड़ा।Wishing #SunilBohra @anupamPKher @AshokePandit @HansalMehta #VijayGutte All the Very Best for your new film. #THEACCIDENTALPRIMEMINISTER pic.twitter.com/1s0diZ6OVe— Madhur Bhandarkar (@imbhandarkar) June 7, 2017
और जहाँ तक संजय बारू की पुस्तक पर डॉ मनमोहन सिंह का फिल्मांकन करना डॉ सिंह की छवि को जरूर धूमिल कर देगा। इस फिल्म से यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि किस तरह सोनिया गाँधी प्रधानमंत्री न होते हुए भी किस तरह देश के प्रधानमंत्री की भूमिका निभा रही थी। और मनमोहन मात्र एक कठपुतली ही थे, जो मनमोहन सिंह के लिए बहुत घातक सिद्ध होगा। क्योंकि पुस्तक की विषयवस्तु मात्र पुस्तक प्रेमियों तक ही सीमित था, जबकि फिल्म के माध्यम से हर पहलू जगजाहिर हो जायेगा।
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