मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में किसानों के हिंसक आन्दोलन में फायरिंग हुई जिसमें 5 किसानों की जान चली गयी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी सरकार किसानों के खिलाफ युद्ध लड़ रही है, New India में अपना हक मांगने वाले अन्नदाताओं को गोली मारी जा रही है, राहुल गाँधी ने फायरिंग के तुरंत बाद ट्वीट किया, ऐसा लगता है कि वे इस घटना का इन्तजार कर रहे हों, उनका ट्वीट देखकर ही शक होता है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस कुछ ना कुछ खिचड़ी जरूर पका रही है।
| ये चूहे खाने की राजनीति का पर्दाफाश कौन करेगा? |
कुछ देर बाद कांग्रेस की खिचड़ी का खुद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने खुलासा कर दिया। उन्होने कहा कि किसान हिंसक आन्दोलन कर ही नहीं सकते, दरअसल इस हिंसक आन्दोलन के पीछे कांग्रेस की साजिश है, किसानों के बीच में असामाजिक तत्त्व शामिल कर दिए गए हैं, यही लोग किसानों के नाम पर प्रदेश में हिंसा कर रहे हैं, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे है।
शिवराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस की मंशा शुरू से ही इस आन्दोलन को राजनीतिक रंग देने की रही, कांग्रेस ने ही आन्दोलन को हिंसक बनाया है।
| दिल्ली चुनाव होते ही क्या इन किसानों को मालपुए मिलने लगे? |
शिवराज सिंह ने कहा कि मेरी सरकार किसानों की सरकार है। हमारी सरकार ने सदैव किसानों के हित में आगे बढ़कर कार्य किये हैं। मंदसौर की आज की दुर्घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने घटना के न्यायिक जाँच के आदेश दिये हैं। किसान भाइयों की सभी वाजिब मांगें मान ली गई हैं एवं इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिये गये हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदसौर घटना के मृतकों के परिजनों को रु. 10 लाख, गंभीर घायलों को 1 लाख सहायता राशि देंगे। घायलों के इलाज की ज़िम्मेदारी प्रदेश सरकार उठायेगी। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा -
| किसी ने इन किसानो से पूछा कि ये कंगाल कहाँ से आए? |
किसान भाइयों से अपील करता हूँ कि वे धैर्य रखें। किसी के बहकावे में न आयें। सरकार आपके साथ खड़ी है। हम मिल-बैठकर हर समस्या का हल निकाल लेंगे।
किसान आन्दोलन थमने का नाम नहीं ले रहा. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने 'इतिहास के सबसे बड़े ऋण माफ़ी' का ऐलान किया तो भी आन्दोलन चल ही रहा हैं. अब तो पड़ोस के मध्य प्रदेश में भी यह आग सुलग गयी हैं. शरद पावर ने तो प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करने की विनती की हैं. कुल मिलकर यह भाजपा शासित राज्यों के खिलाफ विपक्षी पार्टियों का षड्यंत्र हो सकता हैं ऐसा विश्वास होने लगा हैं. सरकार को चाहिए की पता लगायें की कोई असामाजिक तत्व इस आन्दोलन में घुसपैठ कर हिंसा फ़ैलाने पर उतारू तो नहीं हैं? उनके साथ कठोरतासे पेश आना होगा. अन्यथा सरकार के लिए 'अच्छे दिन' बहोत दूर हो सकते हैं.
किसान आन्दोलन थमने का नाम नहीं ले रहा. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने 'इतिहास के सबसे बड़े ऋण माफ़ी' का ऐलान किया तो भी आन्दोलन चल ही रहा हैं. अब तो पड़ोस के मध्य प्रदेश में भी यह आग सुलग गयी हैं. शरद पावर ने तो प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करने की विनती की हैं. कुल मिलकर यह भाजपा शासित राज्यों के खिलाफ विपक्षी पार्टियों का षड्यंत्र हो सकता हैं ऐसा विश्वास होने लगा हैं. सरकार को चाहिए की पता लगायें की कोई असामाजिक तत्व इस आन्दोलन में घुसपैठ कर हिंसा फ़ैलाने पर उतारू तो नहीं हैं? उनके साथ कठोरतासे पेश आना होगा. अन्यथा सरकार के लिए 'अच्छे दिन' बहोत दूर हो सकते हैं.
सड़क पर दूध और सब्ज़ी बर्बाद करने वाले किसानों की जाँच हो
केन्द्र में मोदी सरकार आने के बाद से ऐसा आभास होता है कि आज विपक्ष के पास सरकार का विरोध करने के लिया कोई मुद्दा नहीं रहा है। जब भी देश में किसी भी राज्य में चुनाव होने होते है, विपक्ष को कुछ और नहीं किसानों का मुद्दा लाकर धरना आदि करवा देती है, और चुनाव संपन्न होते ही धरना एवं प्रदर्शन समाप्त हो जाते हैं।
| किसके इशारे पर सब्ज़ियाँ बर्बाद की गयीं ? |
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| किसके इशारे पर दूध को सड़क पर बर्बाद किया गया? क्या यह जन-विरोधी नहीं? |
एक तरफ कहते हो "भूखे मर रहे हैं, कर्ज़े में डूबे हुए है" दूसरी तरफ इस तरह की बर्बादी करना क्या किसी साज़िश का स्पष्ट प्रमाण नहीं? क्या देश की राजनीति का स्तर इतना ज्यादा नीचे गिर चूका है, कि देश की जनता का परेशान कर अपनी राजनीति खेलो ?
किसानों का ये आंदोलन सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों में ही क्यों ? क्योकि यह कांग्रेस प्रायोजित हैं और जो सड़को पर किसान दिख रहे हैं वो किसान नही बल्कि कांग्रेस सदस्य हैं । जब हर मोर्चे पर कांग्रेस मोदी सरकार को घेरने में विफल हो गयी हैं, जब उनका गाय काटने जैसा कुकर्म जनता के सामने आ गया, जब उनका अलगाववादियों से प्रेम सामने आ गया, जब उनका देशद्रोहियों के समर्थन में साथ खड़ा होना जनता ने देख लिया तो वो अब किसान के नाम पर देश को गुमराह कर जनता की सहानुभूति बटोरना चाहती है । लेकिन कांग्रेस को यह ध्यान रखना होगा कि यह 60 का दशक नही बल्कि 21 वी सदी हैं और इसमें जनता तुम लोगो को किसानों के नाम पर गंदी राजनीति नही करने देगी ।
किसानों का ये आंदोलन सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों में ही क्यों ? क्योकि यह कांग्रेस प्रायोजित हैं और जो सड़को पर किसान दिख रहे हैं वो किसान नही बल्कि कांग्रेस सदस्य हैं । जब हर मोर्चे पर कांग्रेस मोदी सरकार को घेरने में विफल हो गयी हैं, जब उनका गाय काटने जैसा कुकर्म जनता के सामने आ गया, जब उनका अलगाववादियों से प्रेम सामने आ गया, जब उनका देशद्रोहियों के समर्थन में साथ खड़ा होना जनता ने देख लिया तो वो अब किसान के नाम पर देश को गुमराह कर जनता की सहानुभूति बटोरना चाहती है । लेकिन कांग्रेस को यह ध्यान रखना होगा कि यह 60 का दशक नही बल्कि 21 वी सदी हैं और इसमें जनता तुम लोगो को किसानों के नाम पर गंदी राजनीति नही करने देगी ।



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