Skip to main content

किसानों की लाशों पर राजनीति खेलते राजनेता

Image may contain: 3 people, textपिछले कुछ दिनो में अचानक से हिंसक किसान आन्दोलन शुरू हुए हैं | आखिर क्या कारण है ? क्या किसान अपने श्रम से उत्पादित किये गये सब्जी, दूध अन्य जरूरी उत्पादों को आन्दोलन के नाम पर जमीन में फेक देंगे? क्या किसान स्वयं अपने श्रम का अपमान करेंगे ? क्या कर्ज़े में डूबा कर्ज़ा मुक्त होने के लिए अपने उत्पाद को अपने ही हाथों बर्बाद करेगा? किसी भूखे से उसके हाथ की रोटी को फेंकने को बोलिये, फेंकेगा क्या? अगर ऐसा करता है, यह इस बात का प्रमाण है कि क़र्ज़ मुक्त आन्दोलन एक स्वांग है, किसी के हाथों कठपुतली बन इस ड्रामे को खेलने का प्रमाण है। फिर कश्मीर उग्रवादियों की तरह मुँह छुपाकर पत्थराव करना, आगजनी करना, स्पष्ट रूप से तिल का ताड बनाने का प्रमाण दे रहा है। किसानों की आड़ में असामाजिक तत्वों को प्रोत्साहन देकर, कानून व्यवस्था को तार-तार करने का प्रयास है। ऐसे न जाने कितने कर्ज़दार किसान हैं, जो नगर पालिका/निगम से लेकर संसद में बैठे हुए हैं, क्या वही कर्ज़दार किसान अपना क़र्ज़ माफ़ करवाने के लिए दूसरों को बलि का बकरा बना रहे हैं ?
किसान आन्दोलन और उसकी माँगों से किसे आपत्ति है। राष्ट्र के अन्नदाता के कष्टों का निवारण होना ही चाहिए। किन्तु किसानों को सॉकल बनाकर उनकी आहुतियाँ देकर अपना सत्ता प्राप्ति का यज्ञ करने की कुचेष्टा कर रही कांग्रेस के षड़यंत्र को सबके सामने रखकर ही किसानों को बचाया जा सकता है। 
आज पुरे देश में आंदोलन का फैशन चल पड़ा है। समस्याओं की बाढ़ आ गयी है। हर आदमी अपनी हर समस्या का समाधान मोदी सरकार से करवा लेना चाहता है। क्योंकि और किसी पर किसी को भरोसा ही नहीं है। आखिर भरोसा भी कैसे हो? पिछले 67 सालों से तो लोग छले ही गए हैं।
अब किसान आंदोलनों को ही ले लें। किसान कर्ज माफ़ी की माँग पर अड़े हैं। इसके पहले भी तो कई बार किसानों के कर्ज माफ़ किये गए हैं। किसान आंदोलनों में वही किसान ज्यादा आक्रामक हैं जो पहले के कर्ज माफ़ी योजनाओं का मजा ले चुके हैं। अब तो यह फैशन बन गया है। बैंक से खेती के नाम पर कर्ज लो और मत चुकाओ। हर पाँच साल में चुनाव होना ही है और वोट के लिये हर पार्टी कर्ज माफ़ी का एलान देर सबेर करेगी ही।मजा कोई मारे और भरे कोई और। कोई भी सरकार या नेता अपना पैतृक संपत्ति बेचकर इस नुकसान की भरपाई नहीं करती है। वह तो हम-आपसे ही इसकी भरपाई करती है।
आज किसान कर्ज माफ़ी की माँग पर अड़े हैं। कल व्यापारी कर्ज माफ़ी की माँग करेगा। परसो विद्यार्थी शिक्षा ऋण माफ़ करने के लिये आंदोलन करेगा। यह कर्ज न हुआ बाबा जी का प्रसाद हो गया। हाथ पसार कर ले लो और गटक जाओ। और जो लोग इन कर्जमाफी आंदोलनों को समर्थन दे रहे हैं और किसान-किसान चिल्ला रहे हैं उन्होंने कभी इस बात का विरोध किया है कि आज सब्जियां क्यों सस्ती बिक रही है? हर आदमी बड़े-बड़े मॉल/स्टोर में कोई मोलजोल नहीं करता लेकिन छोटी-मोटी दुकानों पर, सब्जी मंडी में मोलजोल करना अपना जन्म सिद्ध अधिकार समझता है।
अगर यही स्थिति रही तो सरकारी बैंकों को कर्ज देना बंद कर देना पड़ेगा। और फिर लोगों को प्राइवेट बैंको/सेठ साहुकारों से पैसा लेकर अपना काम करना पड़ेगा। आज भी समाज में बहुत से लोग 5 से 10 % प्रति महीना सूद पर पैसा लगाते हैं। है कोई माई का लाल जो इनके पैसे पचा ले? आखिर कब त्तक वोट बैंक के चक्कर में देश बर्बाद होता रहेगा? 
NDA 1 ( अटल जी के नेतृत्व वाली सरकार ) में किसानों को साहूकारों के कर्ज के चंगुल से मुक्त करवाकर न्यूनतम ब्याज दरों पर बैंक से ऋण की सुविधा ( किसान क्रेडिट कार्ड ) देने का बेहतरीन निर्णय किया | उसके पहले कि सरकारों ने इस दिशा में सोचने करने का कोई प्रयास नहीं किया ? अटल सरकार के पूर्व कौन लोग सरकार में थे ? स्वजनो चिंतन कीजिये |
NDA 2 ( मोदी जी के नेतृत्व की सरकार ) ने किसानों के फसली नुकसान की भरपाई के लिये प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की, यूरिया को नीम कोटेड करवाकर किसानों को यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई , बीज की सब्सिडी किसानों के खाते में सीधे भेजने का निर्णय लेकर किसानों के हिस्सों की लूट को समाप्त करवाया , कृषि क्षेत्र में स्वायल हेल्थ कार्ड शुरू किये , ये सारे प्रयास किसानों के हित में लिये और इनसे किसान की आय में वृद्धि हो और वे समस्याओं से मुक्त हों ऐसे प्रयास निरंतर किये जा रहे हैं ; फिर भी मोदी सरकार किसान विरोधी है ! गजब आरोप है कांग्रेस और तथाकथित सेकुलरी गैंग ( समाजघाती, वामपंथी, पापिये , चारा चोर , आदि ) का |
स्वजनो आईये कुछ आँकड़ो का विश्लेषण करते हैं -
1- वर्तमान मोदी सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए गत चार वर्षों में कृषि बजट में (2014-15 से 2017-18) के लिए 1,64,415 करोड़ रूपये आवंटित किये गये जोकि यू.पी.ए. सरकार के वर्ष (2010-11 से 2013-14) 1,04,337 करोड़ रूपये की तुलना में 57.58 प्रतिशत अधिक है।
2- वर्ष 2016-17 में देश में खाद्यान्न का रिकार्ड उत्पादन हुआ है और यह आजादी के बाद का सर्वाधिक ऊंचा स्तर है,
3- दूध का उत्पादन वर्ष 2011-2014 तीन वर्ष में 398 मिलियन मीट्रिक टन के अनुपात में वर्ष 2014-2017 में 465.5 मिलियन मीट्रिक टन है जो 16.9 प्रतिशत अधिक है।
4- मछली उत्पादन में वर्ष 2011-14 तीन वर्ष में 272.88 लाख टन की तुलना में 2014-17 में बढकर 327.74 लाख टन हो गया जो जो 20.1 प्रतिशत की वृद्धि है।
5- वर्ष 2011-14 तीन वर्ष में 210.93 बिलियन की तुलना में अंडा उत्पादन 2014-17 में 248.72 बिलियन हो गया है जो 17.92 प्रतिशत अधिक है।
6- शहद उत्पादन मे 2011-14 तीन वर्ष में 2,18,950 मि. टन की तुलना में वर्ष 2014-17 में 2,63,930 मि. टन हो गया है जो 20.54 प्रतिशत अधिक है।
यह दस्तावेज़ चीख चीखकर बता रहे हैं कि पिछले 3 वर्षों में देश में कृषि को और किसानों को मोदी ने किस तरह तबाह किया है। इसीलिए मोदी वाकई में किसानों का दुश्मन है और राहुल तथा उसकी कांग्रेस वाकई में किसानों की हमदर्द है।
क्योंकि...
मोदी कहता है कमाओ और खाओ...
कांग्रेस और उसके सहयोगी दल कहते हैं कर्ज़ लेकर मौज उड़ाओ।
जीतू पटवारी कौन है ? श्याम गुर्जर कौन है ? शकुन्तला खटीक कौन है ? फैजान खान कौन है ? ये सब बेचारे किसान हैं क्या ? नहीं ये सब राहुल बाबा की राजनैतिक महत्वाकांक्षा यज्ञ के लिये किसानों की बली करवाने वाले असली हत्यारे हैं !
वास्तविक किसान नेताओं, युवाओं से मेरा आग्रह है कि तथ्यों के आधार पर विश्लेषण करके किसानों के नाम पर नंगानाच कर रही राजनैतिक गिद्ध मंडली ( कांग्रेस और उसकी सो कॉल्ड सेकुलरी गैंग ) को बेनकाब कीजिए।
कांग्रेस नेता आज किसानों के भविष्य को लेकर चिंता दिखा रहे हैं लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि देश में किसनें 60 वर्षों तक राज किया है और किसानों का भविष्य किसनें बर्बाद किया है,  किसानों की आज की समस्या के लिए कांग्रेस का 60 साल का शासन जिम्मेदार है। कांग्रेस ने ही किसानों को बर्बाद किया और आज कांग्रेसी नेता किसानों का मसीहा बन रहे है। 
कांग्रेस विधायक थाने में आग लगाने का खुला आदेश दे रही हैं, यह बहुत ही शर्मनाक है, पहले कांग्रेस पर सिर्फ शक था लेकिन अब कांग्रेसी खुलकर प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं और पूरे राज्य में आग लगा रहे हैं, ऐसा लगता है कि ये लोग राज्य को बर्बाद कर देना चाहते हैं.
इन दिनों देश की राजनीति इस कदर स्तर विहीन हो चुकी है कि नुकसान किसी का भी हो लेकिन फायदा पार्टी को होना चाहिएl मंदसौर में प्रशासन ने किसानों पर गोली चला दी तो मौके को भुनाने के चक्कर में कांग्रेस खूब बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैl जहाँ जरूरत पड़ रही है वहां बिना बुलाये पहुँच रही हैl
5 किसानों की मौत हुई तो मंदसौर देश में चर्चा का विषय बन गयाl देश के पीएम और मध्यप्रदेश के सीएम इस मामले पर निगाह गड़ाए बैठ गयेl पूरा देश खबरों के जरिये से जानने की कोशिश में लग गया कि आखिर इस आन्दोलन को हिंसक बनाने में किसका हाथ हैl सोशल मीडिया पर इस मामले में कई वीडियो शेयर किये जा रहे हैं जिससे कांग्रेस की पोल भी खुल रही हैl आज हम आप एक ऐसा वीडियो दिखाने जा रहे हैं जिसमें कांग्रेस की एक विधायक ताव में आकर पुलिस के सामने ही धमकियां दे रही हैं और आम लोगों को भड़का रही हैl वीडियो देखकर आप खुद समझ जायेंगे कि मंदसौर का असली गुनाहगार कौन हैl
मंदसौर मामले में एक वीडियो पहले भी आया था जिसमें कांग्रेस के ही एक दूसरे विधायक ने SDM को धमकाते हुए कहा था कि आप बस कानून व्यवस्था देखिये बाकि मुझे क्या करना है मैं देख लूंगा। 
सिर्फ अपनी राजनीतिक नैय्या को डूबने से बचाने के लिए नेता इस स्तर पर गिर सकते हैं कि नुकसान किसी का भी हो बस फायदा उनका होना चाहिए, लेकिन सच तो ये है कि पार्टी कोई भी हो लेकिन ऐसी राजनीती से बचना चाहिएl 

Comments

AUTHOR

My photo
shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

Popular posts from this blog

भोजपुरी एक्ट्रेस त्रिशा कर मधु का MMS…सोशल मीडिया पर हुआ लीक

सोशल मीडिया पर भोजपुरी एक्ट्रेस और सिंगर त्रिशा कर मधु का MMS लीक हो गया है, जिससे वो बहुत आहत हैं, एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया है, त्रिशा मधु ने इस बात को कबूल किया है कि वीडियो उन्होंने ही बनाया है लेकिन इस बात पर यकीन नहीं था कि उन्हें धोखा मिलेगा। गौरतलब है कि हाल ही में त्रिशा का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें वह एक शख्स के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रही थीं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद अभिनेत्री ने इसे डिलीट करने की गुहार लगाई साथ ही भोजपुरी इंडस्ट्री के लोगों पर उन्हें बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाया। त्रिशा मधु कर ने अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो के साथ पोस्ट लिखा है जिसमें कहा, आप लोग बोल रहे हैं कि खुद वीडियो बनाई है। हां, हम दोनों ने वीडियो बनाया थ। पर मुझे ये नहीं मालूम था कि कल को मेरे साथ धोखा होने वाला है। कोई किसी को गिराने के लिए इतना नीचे तक गिर जाएगा, यह नहीं पता था। इससे पहले त्रिशा ने वायरल हो रहे वीडियो पर अपना गुस्सा जाहिर किया था और कहा था कि उनको बदनाम करने को साजिश की जा रही है। त्रिशा मधु कर ने सोशल मीडिया पर ए...

राखी सावंत की सेक्सी वीडियो वायरल

बॉलीवुड की ड्रामा क्वीन राखी सावंत हमेशा अपनी अजीबो गरीब हरकत से सोशल मिडिया पर छाई रहती हैं। लेकिन इस बार वह अपनी बोल्ड फोटो के लिए चर्चे में हैं. उन्होंने हाल ही में एक बोल्ड फोटो शेयर की जिसमें वह एकदम कहर ढाह रही हैं. फोटो के साथ-साथ वह कभी अपने क्लीवेज पर बना टैटू का वीडियो शेयर करती हैं तो कभी स्नैपचैट का फिल्टर लगाकर वीडियो पोस्ट करती हैं. वह अपने अधिकतर फोटो और वीडियो में अपने क्लीवेज फ्लांट करती दिखती हैं. राखी के वीडियो को देखकर उनके फॉलोवर्स के होश उड़ जाते हैं. इसी के चलते उनकी फोटो और वीडियो पर बहुत सारे कमेंट आते हैं. राखी अपने बयानों की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहती हैं.राखी अक्सर अपने रिलेशनशिप को लेकर हमेशा चर्चा में बनी रहतीं हैं. राखी कभी दीपक कलाल से शादी और लाइव हनीमून जैसे बयान देती हैं तो कभी चुपचाप शादी रचाकर फैंस को हैरान कर देती हैं. हंलाकि उनके पति को अजतक राखी के अलावा किसी ने नहीं देखा है. वह अपने पति के हाथों में हाथ डाले फोटो शेयर करती हैं लेकिन फोटो में पति का हाथ ही दिखता है, शक्ल नहीं. इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर राखी जो भी शेयर करती हैं वह भी चर्चा ...

Netflix फैला रहा हिन्दू घृणा : ‘हल्लिलूय्याह’ बन गया ‘अनंत आनंदम्’, बच्चों का यौन शोषण करने वाला हिन्दू बाबा

                             Netflix लो वेब सीरीज 'राणा नायडू' में वेंकटेश और राणा दग्गुबती भारत में आजकल गालियों और सेक्स को ही वेब सीरीज मान लिया गया है। इसमें अगर हिन्दू घृणा का छौंक लग जाए तो फिर कहना ही क्या। चाहे ‘पाताल लोक’ में पंडित के मुँह से माँ की गाली बुलवाने वाला दृश्य हो या फिर ‘मिर्जापुर’ में ब्राह्मण को लालची बता कर उसे उठा कर भगाने का, OTT पर धड़ाधड़ रिलीज हो रहे ये वेब सीरीज इन मामलों में निराश नहीं करते। ऐसी ही एक नई वेब सीरीज Netflix पर आई है, ‘राणा नायडू’ नाम की। हिन्दू भावनाओं के प्रति जितनी जागरूकता सरकार और हिन्दुओं में देखी जा रही है, उतनी कभी नहीं। 70 के दशक में वैश्यवृत्ति पर आधारित निर्माता-निर्देशक राम दयाल की फिल्म 'प्रभात' का प्रदर्शन हुआ, जिसे विश्व हिन्दू परिषद द्वारा नायक और नायिका के राम एवं सीता होने पर आपत्ति करने राम दयाल को दोनों के नाम परिवर्तित होने को मजबूर होना पड़ा था। इसके अलावा कई फिल्में आयी जिनमें हिन्दू मंदिरो को बदनाम किया जाता रहा है। यही कारण है कि राहुल गाँधी द्वा...