अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छवि मुस्लिम विरोधी है दुनिया में किसी से छिपा नहीं है। पर अब एक अमेरिकी अखबार की मानें तो भारत बहुत जल्द दो करोड़ मुस्लिमों को देश से बाहर निकालने वाला है।
बीते तीन दशक में ये मुस्लिम बांग्लादेश के जरिए भारत के असम राज्य में पहुंचे हैं। अब असम की भाजपा सरकार ने इनके खिलाफ एक्शन लेने की तैयारी कर ली है।
अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, असम सरकार इन बांग्लादेशी मुस्लिमों को बॉर्डर से बाहर करेगी। इन मुस्लिमों के पास भारत की पहचान से जुड़े कोई साक्ष्य नहीं हैं। सन 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश के अलग होने के बाद से बांग्लादेशी मुस्लिमों का भारत में आना बदस्तूर जारी है।
असम के वित्त मंत्री हिमांता बिश्व सर्मा ने बताया कि असम में हिन्दुओं की संख्या घटती जा रही है। मुस्लिम आबादी बढ़ रही है। यह मुस्लिम आबादी भारत नहीं, बल्कि बांग्लादेश की है। इसे लौटना होगा। इससे हमारी संस्कृति पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आतंकी संगठन आईएसआईएस बांग्लादेश के मुस्लिमों को ट्रेंड कर रहा है। ऐसे में वहां के लोगों को भारत आने से रोकना होगा।
असम की बड़ी सीमा बांग्लादेश को छूती है। यहां ज्यादा सतर्कता न होने के कारण तमाम बांग्लादेशी मुस्लिम परिवार भारत में घुस चुके हैं। यह सब कुछ करीब तीन दशक से जारी है। इस वजह से असम की आबादी में हैरतअंग्रेज बढ़त देखी जा रही है। इससे यहां की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। लेकिन अब असम के सीएम सर्बानंद सोनोवाल की भाजपा शासित सरकार इन मुस्लिमों पर लगाम कसने की तैयारी कर चुकी है।
भारत और बांग्लादेश के बीच लोगों को उनके देश वापस भेजने से जुड़ा कोई समझौता नहीं हुआ है। नवंबर की शुरुआत में पहली बार बांग्लादेश ने भारतीय पहचानपत्र के अभाव में 10 लोगों को अपना नागरिक मानते हुए स्वदेश बुला लिया था।
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पिछली सरकारों के चलते पता नहीं कितने बांग्लादेशियों के राशन कार्ड, आधारकार्ड और चुनाव पहचान-पत्र तक बन चुके हैं। झुग्गी-झोंपड़ियों में रहकर सरकार की हर सुविधा का आनंद ले रहे हैं। घरों में कपडे धोने आदि का काम कर रहे हैं। कोई कारपेंटर का काम कर रहे हैं। बच्चे ढाबों और चाय की दुकानों में काम कर रहे हैं। और जिस समय बांग्लादेशियों को भारत से निकालने का काम शुरू होगा, तथाकथित धर्म-निर्पेक्षों को अपनी कुर्सी जाती देखते हुए भारत में दंगे आदि भी करवा सकते हैं, जिसके लिए सरकार को तैयार रहना होगा। दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश देने होंगे। चाहे वह व्यक्ति किसी भी पद पर हो। बहुत हो गयी दंगों की घिनौनी राजनीति।
पिछली सरकारों के चलते पता नहीं कितने बांग्लादेशियों के राशन कार्ड, आधारकार्ड और चुनाव पहचान-पत्र तक बन चुके हैं। झुग्गी-झोंपड़ियों में रहकर सरकार की हर सुविधा का आनंद ले रहे हैं। घरों में कपडे धोने आदि का काम कर रहे हैं। कोई कारपेंटर का काम कर रहे हैं। बच्चे ढाबों और चाय की दुकानों में काम कर रहे हैं। और जिस समय बांग्लादेशियों को भारत से निकालने का काम शुरू होगा, तथाकथित धर्म-निर्पेक्षों को अपनी कुर्सी जाती देखते हुए भारत में दंगे आदि भी करवा सकते हैं, जिसके लिए सरकार को तैयार रहना होगा। दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश देने होंगे। चाहे वह व्यक्ति किसी भी पद पर हो। बहुत हो गयी दंगों की घिनौनी राजनीति।
जिस दिन सरकार बांग्लादेशिओं को निकालने में सफल हो जाएगी, भारत की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त सुधार हो जाएगा। कोई देश कभी अवैध नागरिकों को तुरन्त देश छोड़ने को कहते हैं, लेकिन यहाँ तुष्टिकरण नीति भारतीय नेताओं को ऐसा करने से रोकती है, हिन्दू-मुस्लिम को भिड़वाते रहो और उनकी लाशों पर अपनी रोटियाँ सेकते रहो। दंगों में किसी नेता के घर के परिन्दे को भी क्या मरते देखा है? जनता है चंद टुकड़ों की खातिर इनके बहकावे में आकर एक-दूसरे की जान लेने को बेचैन हो जाते हैं।
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