उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता अजाम खान पर अब कार्यवाही होनी तय है क्योंकि अब उन पर कार्यवाही करने के लिए हाई-कमान ने योगी सरकार को पत्र लिख दिया है, उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल राम नाईक ने खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर अजाम खान मामले की जांच करने और उन पर कार्यवाही करने के लिए पत्र लिखा है।
आजम खान पर कई तरह के आरोप हैं -
- सरकारी पद का दुरूपयोग करके वक्फ बोर्ड की संपत्ति कब्जाने और उसे धोखे से बेचने का आरोप है
- हेराफेरी और सरकारी खजाने के दुरूपयोग का आरोप
- आलिया मदरसा पर कब्ज़ा करने का आरोप
- निजी विश्वविद्यालय 'जौहर यूनिवर्सिटी' में सरकारी गेस्ट हाउस बनवाने का आरोप
- सरकारी स्पोर्ट्स स्टेडियम का सामान अपनी जौहर यूनिवर्सिटी में ले जाने का आरोप
- रामपुर की सरकारी इमारतों पर कब्ज़ा कर लिया
- सरकारी इमारतों को केवल 1 रुपये किराये पर जौहर ट्रस्ट को आवंटित किया
आजम खां पर मदरसा आलिया पर कब्जा करने का आरोप है। इसके साथ ही निजी विश्वविद्यालय में सरकारी गेस्ट हाउस बनवाने तथा स्पोर्ट्स स्टेडियम का सामान रामपुर में अपने जौहर विश्वविद्यालय में ले जाने का आरोप है।
आजम खां के खिलाफ सेंट्रल वक्फ काउंसिल (सीडब्ल्यूसी) ने 42 पन्नों की एक रिपोर्ट भी तैयार की थी। इस रिपोर्ट में वक्फ काउंसिल ने बेहद ईमानदार होने का दावा करने वाले आजम खां पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगाए थे।
सूत्रों के अनुसार आजम आजम खान के खिलाफ सेंट्रल वक्फ काउंसिल (CWC) ने 42 पेज की एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें आजम खान के खिलाफ बेईमानी करने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस रिपोर्ट की एक कॉपी प्रधानमंत्री कार्यालय में भी भेजकर जांच करने की मांग की गयी थी।
मामले की गंभीरता को समझते हुए कल उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उन पर कायवाही का आदेश दिया है।
उत्तर प्रदेश में वक़्फ़ घोटाले कोई नया नहीं है, यदि भारत में जितने भी वक़्फ़ बोर्ड है, उनकी गम्भीरता से जाँच करने पर पता नहीं कितने घोटाले उजागर होंगे। लगभग 35 वर्ष पूर्व पत्रकारिता प्रारम्भ करने के दिनों एक मुस्लिम पत्रकार मित्र ने सिविल लाइन्स, दिल्ली, में उपराज्यपाल कार्यालय के निकट भूमिमाफिआ द्वारा कब्रिस्तान की जमीन पर फ्लैट निर्माण होने की समाचार दिया, जिसकी पुष्टि करने उपरान्त जब दरिया गंज स्थित बच्चा घर में वक़्फ़ बोर्ड कार्यालय पहुँचने पर तत्कालीन सचिव से इस घोटाले पर जानकारी लेने के लिए सम्पर्क करने पर, सचिव ने हाथ जोड़ विनती की "भाई साहब यदि अपने परिवार की चिंता नहीं है, तभी इस मसले में हाथ डालिये। पता नहीं कितने कब्रिस्तानों पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। जब भी इन पर किसी भी तरह की कार्यवाही करते हैं, हमें अपनी जान बचानी मुश्किल हो जाती है। आज वक़्फ़ बोर्ड को नहीं मालूम कि उसकी कितनी ज़मीन है? निजामुद्दीन दरगाह और जामा मस्जिद हल्कों में वक़्फ़ बोर्ड की ज़मीनों पर अवैध कब्जे हुए हुए हैं। कोई नेता या सरकार हमारा साथ देने को तैयार नहीं। सबको अपनी कुर्सी प्यारी है, घोटालों की परवाह नहीं। निजामुद्दीन इलाके में देखिये जितनी भी कोठियाँ सब वक़्फ़ की जमीन पर बनी हैं। किसी सरकार या मन्त्री में हिम्मत नहीं पूछने की, तैक़ीक़ात करने की। जनाब हमने भी सोंच लिया, बस नौकरी करे जाओ, घोटालों पर चुप रहो।" कितना दर्द था, तत्कालीन दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड सचिव के कथन में।
उत्तर प्रदेश मुख्यमन्त्री योगी ने वक़्फ़ बोर्ड घोटालों पर जाँच कर, आज़म खान को नहीं, बल्कि शेर की मांध में घुसकर मुस्लिम समाज को भ्रमित करने वालों को बेनकाब करने का जो बीड़ा उठाया है, यह उनका सर्वाधिक साहसिक कदम है। इसमें सफल होने पर यह केवल उत्तर प्रदेश की जीत नहीं, वरन केन्द्र सरकार की भी सबसे बड़ी जीत सिद्ध होगी। जो अन्य राज्यों को भी वक़्फ़ बोर्डों की जाँच करने पर विवश कर देगा। जो न जाने कितने आज़म खान और इमामों को बेनकाब करने में सक्षम होंगे।
तत्कालीन दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड सचिव के कथन की गहराई में जाने से, यह सम्भावनाएं है कि इन जांचों से ध्यान हटाने के लिए उत्तर प्रदेश में या बाहर दंगों का दौर शुरू न हो जाए। उत्तर प्रदेश एवं केन्द्र सरकार को इन सम्भावनाओं का संज्ञान ले सतर्कता बरते। यदि तत्कालीन सचिव आज जीवित हो, बता देंगे कि किस तरह उनकी और अन्य पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की जान को खतरा हुआ था और दिल्ली पुलिस ने भी अपनी नौकरी बचाने के लिए उनसे क्या गुप्त मंत्रणा की थी? खैर, उत्तर प्रदेश वक़्फ़ बोर्ड जाँच मात्र एक झांकी है, देश में दूसरे वक़्फ़ बोर्ड जाँच अभी बाकी है। संक्षेप में इतना ही कहना उचित है कि "योगी के पदचिन्हों पर चल तुष्टिकरण त्याग दूसरे राज्यों में वक़्फ़ बोर्डों की जाँच की जाएगी?
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