फ़िलहाल नोटबंदी जैसे कठोर फैसले को लेकर सरकार को घेरने वाले नेताओं की अब बोलती बंद हैl आपको बता दें कि नोटबंदी को लेकर कुछ ऐसे आकड़ें सामने आये हैं जो चौकाने वाले हैंl इन आकड़ों को जानकर शायद ही विरोधी मोदी सरकार से नोटबंदी पर जवाब मांगेl
देशहित में कठोर फैसले लेने वाली मोदी सरकार अपने इस फैसले पर अडिग रहीl वैसे सरकार की तरफ से इस फैसले को लेकर दावा किया जाता रहा कि नोटबंदी के बाद सीमा पार से हो रही आतंकवादी गतिविधियों में कमी आयेगी और नकली नोटों पर भी लगाम लगेगीlवैसे जिस तरीके से कश्मीर में अशांति फ़ैलाने वाले आतंकवादियों की हालत है उसे देखते हुए माना जा सकता है कि नोटबंदी से फायदा तो हुआ ही हैl क्योंकि अलगाववादियों और आतंकवादियों को पैसे का ऐसा अकाल पड़ा है कि वो कश्मीर में बैंक लूटने पर आमदा हैl
अखबार मेल टुडे को इस रिपोर्ट की कॉपी मिली है, जिसमें बताया गया है कि पिछले साल 8 नवंबर को प्रधानमंत्री के अचानक लिए इस फैसले के वक्त हमारी अर्थव्यवस्था में करीब 17.77 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट चलन में थे. वहीं मई, 2017 आते-आते उपयोग किए जा रहे बैंक नोटों का मूल्य करीब 19.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गयाl सरकार की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में इस वक्त 14.2 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में हैं, जो कि सारी ट्रांजैक्शन जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हैं. इसमें यह भी अनुमान लगाया गया है कि नोटबंदी की वजह से भारत का कुल निजी आयकर राजस्व भी अगले दो वर्षों में बढ़कर दोगुना हो जाएगा और इसके कुछ लाभ अभी से दिखने भी लगे हैं.
हालांकि, यहां गौर करने वाली बात यह है कि इस अप्रैल के अंत में भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल 14.2 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में हैंl इसका अर्थ यह हुआ कि इस वक्त अर्थव्यवस्था में नकदी की मौजूगी नोटबंदी न किए जाने की हालत के मुकाबले करीब 5 लाख करोड़ रुपये कम हैl
इससे यह भी पता चलता है कि लोगों के पास रखी नकदी की संख्या में भी कमी आई है. चूंकि इस तरह घर में पड़े पैसों का अर्थव्यवस्था के विकास में कोई योगदान नहीं होता, ऐसे में इसकी संख्या में कमी देश के फायदेमंद हैl
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