ISIS भी जिहाद करता है और कश्मीर में पत्थरबाज भी जिहाद कर रहे हैं, अमेरिका ISIS के जिहादियों को ढूंढ ढूंढ कर मार रहा है, कल पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान बॉर्डर के पास नंगरहार में डोनाल्ड ट्रम्प की सेना से सबसे बड़ा बम गिराकर एक साथ ISIS ठिकाने को तहस नहस कर दिया, ISIS के 7000 आतंकी एक सुरंग में छुपे हुए थे, वहीँ पर उन्हें ट्रेनिंग दी जाती थी और वहीँ से ये आतंकी अफ़ग़ानिस्तान और भारत में हमला करने के लिए भेजे जाते थे लेकिन US ARMY ने कल डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश के बाद वहां पर सबसे बड़ा बम जिसे MOAB या मदर ऑफ़ आल बम कहा जाता है, गिरा दिया, करीब 10 हजार किलोग्राम के इस बम ने डेढ़ किलोमीटर में सब कुछ तहस नहस कर दिया और वहां पर 300 मीटर गड्ढा बना दिया.
अब भारत के सामने भी एक बड़ा सवाल है, आखिर पत्थरबाजों को हम कब तक सहते रहेंगे, क्या कश्मीर को सीरिया बनने का इन्तजार किया जा रहा है, ये पत्थरबाज जिहादी भारतीय सैनिकों को थप्पड़ मार मार कर भाग रहे हैं, जब CRPF जवान अपने रास्ते पर चल रहे होते हैं तो ये पत्थरबाज जिहादी उन्हें लात मारकर भागते हैं, एक VIDEO ने पूरे देश का खून गर्म कर दिया है, जिसमें CRPF जवान के साथ पत्थरबाजों ने गिरी हुई हरकत की है.
अब भारत के सामने सवाल यह है कि क्या कश्मीर में पत्थरबाजों के ठिकानों पर ऐसा ही बम गिराकर एक साथ उन्हें ख़ाक में मिला देना चाहिए, अगर उन्हें एक साथ ख़त्म कर दिया जाए, जैसा कि कल US ARMY ने नंगरहार में ISIS ठिकाने पर किया है तो ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी. जिस प्रकार से US ARMY ने एक साथ 7000 जिहादियों को ख़त्म किया है अगर उसी तरह से INDIAN ARMY एक साथ 10 हजार पत्थरबाजों को ख़ाक में मिला दे तो ना तो वे भारतीय जवानों को चाटें मार सकेंगे, ना कश्मीर में आतंकवाद होगा, ना हिंसा होगी, ना अलगाववादी गद्दार होंगे और ना ही भारतीय सेना को इस तरह से अपमानित होना पड़ेगा.
अफ़ग़ानिस्तान में ISIS आतंकियों के खिलाफ यह अमेरिका की अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही है, यह परमाणु बम तो नहीं होता लेकिन जहाँ पर यह गिराया जाता है वहां पर परमाणु बम जैसी ही तबाही मचा देता है, इसलिए इसे गैर-परमाणु बम कहा जाता है. आप उसके वजह से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कितना खतरनाक होगा, बम का वजह 10 हजार किलो 1 टन है.
पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान बॉर्डर पर ISIS ने एक सुरंग में ठिकाना बना रखा था, यहाँ पर करीब 7000 आतंकवादी मौजूद थे, इस इलाके को दूसरा मोसुल बनाया जा रहा था, लेकिन कल US ARMY ने जब 10 हजार किलो का बम गिराया तो यहाँ पर 300 फीट गड्ढा बन गया और सभी आतंकी गड्ढे में समा गए. इस अटैक को हिरोशिमा-नागाशाकी के बाद सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है. यह बम डेढ़ किलोमीटर के दायरे में सब कुछ तहस नहस कर देता है.
बम गिराए जाने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आर्मी को बधाई देते हुए कहा कि हमने केवल तीन महीने में वो कर दिखाया तो 10 साल में नहीं हो सकता है, हमें हमारी सेना पर गर्व है.
बम गिराए जाने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आर्मी को बधाई देते हुए कहा कि हमने केवल तीन महीने में वो कर दिखाया तो 10 साल में नहीं हो सकता है, हमें हमारी सेना पर गर्व है.
लोगों ने इसे एकदम सही नाम दिया है क्योंकि इसकी विनाशकारी शक्ति के बारे में जानकर कोई भी हैरान रह जाएगा। आज हम आप को बताने जा रहे हैं इस बम के बारे में 6 खास बातें।
1.GBU-43/बी विशाल आयुध एयर ब्लास्ट (एमओएबी) एक 21,600 पाउंड का जीपीएस-निर्देशित विस्फोटक है।
2. यह पहली बार है कि यूएस ने मुकाबले में जीबीयू-43 मोआब बम का इस्तेमाल किया है।
3. अमेरिका की सेना के अल्बर्ट वीमोर्टस द्वारा ये बम विकसित किया गया था और 2003 में पहली बार इसका परीक्षण किया गया था।
4. यह बम 10,000 किलो का है।
5. इस बम को पहली बार इराक युद्ध के दौरान 2003 में बनाया गया था पर इसका इस्तेमाल कभी नहीं किया गया था।
6. इस बम के बनने के बाद रूस ने इस बम से चार गुना ज्यादा विनाशकारी बम बनाया।
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