864 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे आवास राज्य मंत्री सुरेश पासी को लिफ्ट खराब मिली। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें 18वीं मंजिल तक सीढ़ियों से जाना पड़ा।
वहीं वीसी सत्येंद्र यादव व एलडीए सचिव अरुण कुमार के हौसले तो बीच में ही पस्त पड़ गए और वह आधे रास्ते में ही रुक गए। पांच दिन में दूसरी बार निरीक्षण को पहुंचे मंत्री ने कहा कि जेपीएनआईसी का निर्माण भी घोटाले की नींव पर हुआ है।
भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के चलते प्रोजेक्ट की लागत 700 करोड़ रुपये बढ़ गई। विदेशों से सामान मंगाए गए, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में नियमों की जमकर अनदेखी की गई।
मंत्री ने कहा कि घोटाले में एलडीए ही नहीं बल्कि शासन के आला अधिकारी और पिछली सरकार के लोग शामिल हैं। एक हफ्ते में जांच रिपोर्ट सीएम योगी आदित्यानाथ को सौंपेंगे और तकनीकी जांच की सिफारिश करेंगे। मंत्री शनिवार(अप्रैल 15) दोपहर गोमतीनगर स्थित जेपी सेंटर पहुंचे और करीब एक घंटे तक यहां रहे।
जेपीएनआईसी के बजट को 186 करोड़ से बढ़कार 864 तक बढ़ाने वाली मूल फाइल गायब है। मंत्री सुरेश पासी के मांगने के बाद भी एलडीए के अफसर फाइल दिखा नहीं सके। इससे पहले भी वह कई बार प्रोजेक्ट की मूल फाइल मांग चुके हैं।
अप्रैल 15 को फिर मंत्री ने जेपीएनआईसी का निरीक्षण किया तो उन्होंने फाइल मांगी तो अफसरों के पास फाइल ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि सीएम को दिए प्रजेंटेशन में अफसरों ने 82 फीसदी काम पूरा होने की बात कही थी, यहां तो 50 फीसदी काम भी नहीं पूरा दिख रहा।लाईटिंग, एसी, लिफ्ट और निर्माण कार्य तक अधूरा है।
गर्दन बचाने के लिए रोका बजट
आवास राज्य मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि नई सरकार आने के बाद जेपीएनआईसी का 115 करोड़ का बजट प्रमुख सचिव आवास की ओर से रोका जाना महज दिखावा है। यही अधिकारी पिछली सरकार में खूब बजट जारी कर रहे थे। अब यह नहीं चलेगा, दोषियों पर कार्रवाई होगी।
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