राम मंदिर मामले में एक बड़ी खबर आयी है, विश्व हिन्दू परिषद् के नेता और पूर्व बीजेपी सांसद राम विलास वेदांती ने दावा किया है कि बाबरी ढांचा गिराने के आदेश उन्होंने दिया था और इसमें अशोक सिंघल और महंत अवैद्यनाथ भी शामिल थे, हम तीनों से ही बाबरी ढांचा गिरवाया है, मैं अपने बयान पर कायम हूँ और इस बयान से कभी नहीं पलटूंगा भले ही सुप्रीम कोर्ट उन्हें फांसी पर चढ़ा दे, वे राम मंदिर बनाने के लिए कोई भी सजा झेलने के लिए तैयार है। स्मरण हो, उस समय बालासाहेब ठाकरे ने भी कहा था कि "ढांचे को शिव सैनिकों ने गिरा है, हिम्मत है तो गिरफ्तार करो मुझे।"
उन्होंने कहा कि लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती जैसे नेताओं को CBI झूठे केस में फंसाना चाहती है, CBI झूठ बोल रही है, असलियत उसे मालूम ही नहीं है, मैं खुद कबूल कर रहा हूँ कि बाबरी ढांचा उन्होंने कारसेवकों से बोलकर गिरवाया था, उन्होंने और अशोक सिंघल ने खुद ये आदेश दिया था तो आडवाणी जी और मुरली मनोहर जोशी पर आपराधिक साजिश रचने का मामला क्यों चलाया जा रहा है।
उन्होंने CBI पर बरसते हुए कहा कि CBI झूठ बोल रही है और सुप्रीम कोर्ट भी सच नहीं जानता, बाबरी खँडहर उन्होंने राम भक्तों के साथ इसलिए गिरवाया था ताकि उस पर भव्य राम मंदिर बनवाई जा सके, राम मंदिर के लिए वे फांसी पर भी चढ़ने के लिए तैयार है।
अवलोकन करें :--
अब राम विलास वेदांती ने खुद ही कह दिया है कि ये लोग बाबरी गिराने के दोषी नहीं हैं क्योंकि यह काम तो उन्होंने तीन लोगों के साथ मिलाकर किया था, अब देखना यह है कि CBI और सुप्रीम कोर्ट इनकी बात पर यकीन करके बीजेपी नेताओं से आपराधिक साजिश रचने का आरोप हटाता है या नहीं।
कब गिराया गया था बाबरी ढांचा
6 दिसंबर 1992 का हजारों कारसेवकों ने बाबरी ढांचा गिरा दिया था, उसके बाद पूरे देश में कई जगह साम्प्रादयिक दंगे हुए। इससे पहले एक बड़ा आन्दोलन शुरू किया गया था, आन्दोलन की अगुवाई बीजेपी के नेता, विश्व हिन्दू परिषद् और निर्मोही अखाड़ा कर रहा था, उस दिन हजारों रामभक्त कारसेवक अयोध्या में इकठ्ठे हुए थे, पुलिस और सरकार के रवैय्ये से लोग नाराज थे, इसीलिए वहीँ पर बाबरी ढांचे का काम तमाम कर दिया गया। इस मामले में दो FIR दर्ज हुए, एक लखनऊ में कार सेवकों के खिलाफ और दूसरा रायबरेली में बीजेपी नेताओं के खिलाफ।
मुलायम सिंह की गोली के शिकार रामभक्तों को न्याय कौन दिलवाएगा?सरकार 1984 सिख दंगो पर जाँच करवा सकती है, लेकिन तत्कालीन मुख्यमन्त्री मुलायम सिंह के राज में पुलिस गोली के कारण अकारण मौत के नवाला बने रामभक्तो की जाँच कौन करवाएगा? फिर जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खुदाई होने पर, मुलायम सिंह ने क्या कहा था, क्या मेरे मीडिया मित्र उस वक्तव्य को सार्वजानिक करने का प्रयास करेंगे? यदि उसे सार्वजानिक करने पर राममन्दिर के दुश्मन जगजाहिर हो जायेंगे। फिर विधानसभा चुनावों के दौरान तत्कालीन मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव ने क्या कहा था, उसे भी जनता भूली नहीं होगी। कोर्ट से खुदाई मिले मन्दिर के अवशेषों को क्यों और किसके इशारे पर छुपाया गया?



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