हम जैसा स्कूलों में और किताबों से सीखते हैं, हमारी सोच भी वैसी ही
बनती जाती है। हमारे विचारों से हमारी शिक्षा झलकती है। परंतु पिछले कुछ
समय से बच्चों की किताबों में ऐसी बातें लिखी जा रही हैं जो कहीं ना कहीं
उनकी शिक्षा को गलत दिशा में भटका रहे हैं। एक बार फिर से ऐसा ही कुछ देखने
को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक किताब का कुछ सामग्री तेजी से
वायरल हो हा है। ये सामग्री सीबीएसई की बारहवीं की किताब का है। इस सामग्री
में लिखा गया है कि, जिन लड़कियों का फिगर ३६,२४,३६ होता है वो सबसे
सर्वोत्तम होती हैं। अब प्रश्न उठता है कि, सीबीएसई ऐसे सामग्री से बच्चों
को पता नहीं क्या सिखाना चाह रही है।
भारतीय शिक्षा पद्धति और छात्रों को पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम को लेकर अक्सर विवाद होते रहा रहता है। अब हाल ही में सीबीएसई की 12 वीं कक्षा की एक पुस्तक को लेकर भी सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 12 वीं कक्षा की फिजिकल एजुकेशन की किताब में ऐसा कुछ प्रकाशित किया गया गया है, जिसे पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे।
इसके अलावा किताब में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कमजोर धावक बताया गया है। किताब में इसका कारण महिलाओं के हाथ-पैर के आकार का छोटा होना बताया है। वहीं किताब में लड़कियों को माहवारी और गर्भावस्था के दौरान भी खेल-कूद जैसी गतिविधियों में शामिल होने के सलाह दी गई है। ऐसी सामग्री के सोशल मीडिया पर वायरल होने से हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था फिर से सवालों के घेरे में खड़ी हो गई है।
मिली जानकारी के मुताबिक न्यू सरस्वती हाउस द्वारा प्रकाशित शर्मा जी की हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन किताब में लड़कियों के 36-24-36 इंच के फिगर साइज को सबसे बेहतर बताया गया है, जबकि पुरुषों के लिए V शेप की बॉडी को बेस्ट बताया गया है। हालांकि इस किताब को NCERT द्वारा नहीं लाया गया है, लेकिन सीबीएसई के 12वीं क्लास के छात्रों को यह पुस्तक जरूर पढ़ाई जा रही है।
किताब में एक पुरुष और महिलाओं के शारीरिक अंतरों के बारे में बताया गया है। इसमें एक प्रश्न है कि, किस आकार की महिलाएं सबसे सर्वोत्तम होती हैं। इस प्रश्न के उत्तर में किताब ने महिलाओं के तमाम तरह के फिगर का उल्लेख करते हुए बताया है कि, जिनकी फिगर ३६,२४,३६ होती है वैसी महिलाएं सबसे सर्वोत्तम होती हैं। अपनी इस बात को पुष्ट करने के लिए किताब में ये भी लिखा गया है कि इसीलिए मिस वर्ल्ड या मिस यूनिवर्स जैसी प्रतियोगिताओं में बॉडी औऱ फिगर का भी विचार किया जाता है। किताब में ये भी बताया गया है कि, इस तरह का फिगर पाना सबके बस की बात नहीं है। ऐसे फिगर के लिए नियमित तौर पर कुछ विशेष व्यायाम करने होते हैं।
इस तरह का ज्ञान देने वाली इस किताब को न्यू सरस्वती हाउस ने पब्लिश किया है और इसे सीबीएसई के १२ वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इस किताब के सामग्री ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है कि, आखिर बच्चों को ये किस तरह की शिक्षा दी जा रही है।
इसके अलावा किताब में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कमजोर धावक बताया गया है। किताब में इसका कारण महिलाओं के हाथ-पैर के आकार का छोटा होना बताया है। वहीं किताब में लड़कियों को माहवारी और गर्भावस्था के दौरान भी खेल-कूद जैसी गतिविधियों में शामिल होने के सलाह दी गई है। ऐसी सामग्री के सोशल मीडिया पर वायरल होने से हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था फिर से सवालों के घेरे में खड़ी हो गई है।
मिली जानकारी के मुताबिक न्यू सरस्वती हाउस द्वारा प्रकाशित शर्मा जी की हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन किताब में लड़कियों के 36-24-36 इंच के फिगर साइज को सबसे बेहतर बताया गया है, जबकि पुरुषों के लिए V शेप की बॉडी को बेस्ट बताया गया है। हालांकि इस किताब को NCERT द्वारा नहीं लाया गया है, लेकिन सीबीएसई के 12वीं क्लास के छात्रों को यह पुस्तक जरूर पढ़ाई जा रही है।
किताब में एक पुरुष और महिलाओं के शारीरिक अंतरों के बारे में बताया गया है। इसमें एक प्रश्न है कि, किस आकार की महिलाएं सबसे सर्वोत्तम होती हैं। इस प्रश्न के उत्तर में किताब ने महिलाओं के तमाम तरह के फिगर का उल्लेख करते हुए बताया है कि, जिनकी फिगर ३६,२४,३६ होती है वैसी महिलाएं सबसे सर्वोत्तम होती हैं। अपनी इस बात को पुष्ट करने के लिए किताब में ये भी लिखा गया है कि इसीलिए मिस वर्ल्ड या मिस यूनिवर्स जैसी प्रतियोगिताओं में बॉडी औऱ फिगर का भी विचार किया जाता है। किताब में ये भी बताया गया है कि, इस तरह का फिगर पाना सबके बस की बात नहीं है। ऐसे फिगर के लिए नियमित तौर पर कुछ विशेष व्यायाम करने होते हैं।
इस तरह का ज्ञान देने वाली इस किताब को न्यू सरस्वती हाउस ने पब्लिश किया है और इसे सीबीएसई के १२ वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इस किताब के सामग्री ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है कि, आखिर बच्चों को ये किस तरह की शिक्षा दी जा रही है।
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