यदि ऐसा कुछ हमला किसी मस्जिद या चर्च पर होता है, तब यह सभी के लिए ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बन जाती है । ‘भारत में अल्पसंख्यक समुदाय खतरे में है’ इस तरह की गूंज सुनार्इ देनी लगती; परंतु जब मंदिर तथा हिंन्दू साध्वी पर तेजाब से हमला होता है तब ‘सेक्युलर मीडिया’ के लिए यह कोर्इ न्यूज नहीं होती है । इस समाचार में भी अगर देखे तो जिहादीयों ने हमला किया है, यह पता होते हुए भी ‘समुदाय विशेष’ के लोग ऐसा उल्लेख किया गया है । सभी हिन्दूआें को अब संगठित होकर इस प्रकार से मंदिर तथा साध्वी पर होने वाले हमलों का वैधानिक मार्ग से विरोध करना चाहिए ।
गाजीपुर क्षेत्र, दिल्ली में स्थित हरिजन बस्ती में एक बुजुर्ग साध्वी का जीवन दूभर हो गया है। एक समुदाय विशेष के कुछ असामाजिक तत्व विरोध कर कई बार कॉलोनी में मंदिर संचालित कर रही साध्वी को धमकियां भी दे चुके है। उन पर हमला भी किया गया था। पीडि़त साध्वी शकुंतला गुप्ता (६७) की शिकायत पर गाजीपुर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। परंतु अभी तक किसी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नही हुई। इससे आहत साध्वी ने मंदिर पर बिकाऊ होने का नोटिस लगा दिया है। इस मामले में अखंड भारत मोर्चा के अध्यक्ष संदीप आहूजा ने भी पुलिस को पत्र लिखकर साध्वी को सुरक्षा मुहैया कराने का अनुरोध किया है।
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दिल्ली मुख्यमंत्री केजरीवाल को इनके वोट बैंक द्धारा डॉ नारंग की हत्या होने की चिन्ता नहीं, दलितों का रोना रोकर भाजपा पर हमला करने से नहीं चूकते, लेकिन उन्ही के मुख्यमंत्री रहते मन्दिर भी अब बिकाऊ होने शुरू हो गए।
दिल्ली मुख्यमंत्री केजरीवाल को इनके वोट बैंक द्धारा डॉ नारंग की हत्या होने की चिन्ता नहीं, दलितों का रोना रोकर भाजपा पर हमला करने से नहीं चूकते, लेकिन उन्ही के मुख्यमंत्री रहते मन्दिर भी अब बिकाऊ होने शुरू हो गए।
साध्वी शकुंतला ने बताया कि, वह घडौली एक्सटेंशन के हरिजन बस्ती में लगभग २५ वर्षो से अकेले रह रही हैं। शुरुआत में वह गोशाला चलाती थी। यहां हिन्दुओं के पूजा पाठ के लिए कोई मंदिर नही था। स्थानीय लोगो के आग्रह पर उन्होने अपने मकान के भूतल पर ही सदाशिव मंदिर की स्थापना कर दी। इसके बाद से उनकी समस्या बढती चली गई। साध्वी ने बताया कि, ८० के दशक में यहां हरिजन लोगो को प्लाट आवंटित हुए थे। उस समय समुदाय विशेष के लोगो की संख्या काफी कम थी। बाद में यह संख्या बढती गई और धीरे-धीरे इसका नाम भी मुल्ला कॉलोनी हो गया। हालांकि कागजो में यह अब भी हरिजन बस्ती है। उन्होने बताया कि, मंदिर बनाने के बाद समुदाय विशेष के लोगो ने उन पर इसे बंद करने का दबाव बनाया। जब वह नही मानी तो उन्होने मंदिर के आसपास मांस फेंकना शुरू कर दिया। मंदिर के पास खाली प्लाट के एक हिस्से को कूडादान बना दिया। कुछ असामाजिक तत्वो ने उन पर तेजाब से हमला भी किया। पुलिस से शिकायत करने पर भी कोई असर न पडा। बाद में कुछ हिन्दू संगठनो की मदद से मंदिर के पास तीन सीसीटीवी भी लगा दिए। परंतु वह भी पत्थर मारकर तोड दिया गया। इन सबसे साध्वी बेहद दुखी हैं। उन्होने विरोध स्वरूप मंदिर की दीवार पर यह लिख दिया कि, यह बिकाऊ है।
पुलिस पिकेट जरूरी
अखंड भारत मोर्चा के अध्यक्ष संदीप आहूजा का कहना है कि, यह गंभीर है। सरकार को इस पर कुछ कदम उठाने चाहिए। उन्होने बताया कि, शुरुआत में लगभग एक हजार प्लाट में यहां समुदाय विशेष के सौ-डेढ सौ प्लाट थे। परंतु धीरे-धीरे हिन्दू पलायन करने लगे। आज स्थिति यह है कि, चार सौ प्लाट हिन्दू परिवारो के पास रह गए हैं जबकि छह सौ प्लाट समुदाय विशेष के पास चले गए हैं। मंदिर के चारो आेर समुदाय विशेष के परिवार रहते हैं। इस वजह से वह मंदिर को हटाना चाहते हैं। ऐसे में उन्होने पुलिस से मंदिर के पास पिकेट या बूथ लगाने की मांग की है। ताकि साध्वी की सुरक्षा हो सके।
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