हालांकि जीएफपी कांग्रेस के दिगंबर कामत के नाम पर राजी थी लेकिन लॉबीइंग के चलते कांग्रेस की मुश्किले बढ़ गईं। राज्य में चुनकर आए नए 17 विधायकों ने सीक्रेट बैलेट के जरिए अपना लीडर चुना और हाई कमान को इसकी जानकारी दी लेकिन उसी दौरान बीजेपी ने तेजी से काम करते हुए अपना सीएम घोषित कर दिया। पार्टी दिगंबर कामत और लुइजीन फालैरो के बीच ही उलझकर रह गई। दरअसल राज्य में चुनाव से पहले ही गोवा फॉरवर्ड पार्टी, कांग्रेस के साथ गठबंधन की इच्छुक थी और इसके लिए कामत तैयार थे, लेकिन फालैरो और उनके समर्थक इसके हक में नहीं थे।
12 मार्च को जब कांग्रेस, जीएफपी के साथ गठबंधन की कोशिश करने पहुंची तो पार्टी ने शर्त रख दी कि वह फालैरो को सीएम नहीं बनाएंगे। इसी बीच बीजेपी ने बाजी मार ली जीएफपी और महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी, दोनों को अपने साथ साध लिया। ऐसे ही कांग्रेस मणिपुर में भी नाकाम रही। सबसे ज्यादा, 28 सीटें जीतने के बाद भी पार्टी के लिए गठबंधन के साथी जुटा पाना असंभव हो गया क्योंकि एनपीएफ और एनपीपी बीजेपी के साथ है। इसके अलावा एलजेपी का झुकाव भी बीजेपी की तरफ है। कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह बीजेपी को तोड़ लेगी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और बीजेपी ने बाजी मार ली।
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