227 सदस्यों वाली बीएमसी के लिए शिवसेना ने सबसे ज्यादा 84 सीटें जीती हैं। उसने यह प्रदर्शन अकेले चुनाव लड़कर किया है। बांद्रा के बेहरमपाड़ा इलाके से जीते हाजी हलीम खान ने कहा कि समाज के कुछ हिस्सों में माना जाता है कि शिवसेना मुस्लिम विरोधी है। वास्तव में ऐसा है नहीं। सेना ने हमेशा मुस्लिमों की मदद की है और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में विकास कार्य कराए हैं।
अगर इस सबको देखेंगे तो पाएंगे कि शिवसेना किसी अन्य राजनीतिक दल की तुलना में मुस्लिमों के लिए ज्यादा काम करती है। इलाके की एक प्रमुख मस्जिद हम तब बनवा सके जब बाला साहेब ठाकरे ने हमारी मदद की थी। 227 सदस्यों वाली बीएमसी के लिए शिवसेना ने सबसे ज्यादा 84 सीटें जीती हैं। जीते उम्मीदवारों ने शिवसेना को मुस्लिमों का असली शुभचिंतक बताया है।
कांग्रेस की गढ़ रही सीट पर हलीम ने शिवसेना की टिकट पर जीत हासिल की है। अंबोली-जोगेश्वरी इलाके से जीतीं शाहिदा खान (52) भी शिवसेना की टिकट पर जीती हैं। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में समस्या है तो शिवसेना जाति और मजहब देखे बगैर मदद करती है। इसमें दो राय नहीं कि पार्टी के भीतर हम हिंदुत्व के साये में रहते हैं। लेकिन इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हिंदू समाज का बड़ा हिस्सा हैं लेकिन मुस्लिमों पर फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि पार्टी हमारी समस्याओं को निपटाने में कोई भेदभाव नहीं करती है।
क्या उद्धव कांग्रेस से समझौता कर पार्टी पतन का कारण बनेंगे? वह पार्टी जिसकी उनके पिता ने महाराष्ट्र में इतनी साख बनायीं थी, आज उनके न होने पर कांग्रेस से समझौता करना, पार्टी की उल्टी गिनती ही शुरू न कर दे।
काश, आज बाला ठाकरे जीवित होते!
शिवसेना अब कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने को सोच रही है... दरअसल दोस्तों ये नगरपालिका भारत के बाकी नगरपालिकाओं जैसा नहीं है ? इसका बजट भारत में सबसे अधिक होता है और जो काली कमाई का खेल चलता है वो जानकर किसी के भी होश उड़ जाएंगे... जितना आपके पूरे राज्य का बजट है उतना इस नगरपालिका बजट होता है..
मुम्बई में मकान दूकान जमीन सब ऐसी चीजें है जो अगर किसी को मिल गई तो समझिए भगवान् मिल गए... बाकी तो ये पुरे महाराष्ट्र में होता है। यहां की नगर पालिका सिर्फ साफ़ सफाई करती है ऐसा नहीं है... यहां हफ्ते और महीने के हिसाब से अरबों रुपये तो सिर्फ रिश्वत में 5 सालों तक लोग ससम्मान पहुंचाते है।
मुम्बई में मकान दूकान जमीन सब ऐसी चीजें है जो अगर किसी को मिल गई तो समझिए भगवान् मिल गए... बाकी तो ये पुरे महाराष्ट्र में होता है। यहां की नगर पालिका सिर्फ साफ़ सफाई करती है ऐसा नहीं है... यहां हफ्ते और महीने के हिसाब से अरबों रुपये तो सिर्फ रिश्वत में 5 सालों तक लोग ससम्मान पहुंचाते है।
यहां बिल्डर्स खरबों रुपयों के बिजनेस करते हैं.... यहाँ झोपड़पट्टी हटाना हो.. नया निर्माण पास करवाना हो, सबमे bmc की अनुमति चाहिए.. और जिस अपार्टमेंट का एक एक फ्लैट 25 करोड़, 50 करोड़ और 100 करोड़ का बिकता हो उसके पीछे की कहानी आप समझ सकते हैं...
दुनिया समझती है सबसे ज्यादा कमाई तो ये फिल्मस्टार्स करते है पर सच्चाई ये है कि यहां छोटे छोटे बिल्डर भी पैसे के मामले में ऐसे 100 -100 फिल्मस्टार को पॉकेट में लिए घूमते हैं।
दुनिया समझती है सबसे ज्यादा कमाई तो ये फिल्मस्टार्स करते है पर सच्चाई ये है कि यहां छोटे छोटे बिल्डर भी पैसे के मामले में ऐसे 100 -100 फिल्मस्टार को पॉकेट में लिए घूमते हैं।
बीजेपी कहती है वो bmc में पारदर्शिता लायेगी... तब तो ये सारा गोरखधंधा बंद ही हो गया ना... ? और शिवसेना का असल जो खर्च है वो इसी से चलता है, बल्कि मनसे का भी। शानो शौकत, रुतबा सब इसी से है।। यही वजह है कि शिवसेना कांग्रेस के साथ मिलकर भी अपने इस व्यापार को बचाने का प्रयास हर हालत में करेगी... या बीजेपी उसके बिजनेस को चलने देने की बात मान ले तब ये सम्भव है और इसके लिए जरुरी है कि शिवशेना का मेयर बने जो आखिरी फैसले लेता है।
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