इसके साथ ही खबरों की मानें तो ‘आप’ के एक विधायक पर लंदन में अलगाववादियों और आतंकी तत्वों के साथ मंच साझा करने का भी आरोप लगाया गया है।
ऐसे में यह साफ है कि पंजाब में चुनाव लड़ने के लिए आप के पास धन की कोई कमी नहीं है। उन्हें विदेश से धन उपलब्ध कराया जा रहा है। जबकि पंजाब चुनाव में पार्टी के प्रचार के लिए पहुंचे केजरीवाल ने लोगों के सामने साफ तौर पर कहा था कि उनके पास चुनाव लड़ने के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में ईडी की नजर आप के पास विदेशों से आ रहे चंदे पर टिक गई है।
इसके साथ हीं केजरीवाल के एक विधायक पर यह भी आरोप लगा है कि लंदन में उसने एक सभा को संबोधित किया जहां अलगाववादियों और आतंकी तत्वों को उस मंच पर बैठे हुए देखा गया।
आप के पास चुनाव के लिए पैसा नहीं होने संबंधी बयान के बाद इस पर सवाल उठने तब उठने लगे है जब क्षेत्रीय राजनैतिक दलों को 20 हजार से अधिक चंदा मिलने के मामले की रिपोर्ट एडीआर ने जारी की। इसमें कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए। जहां एक ओर क्षेत्रीय राजनैतिक दलों को पिछले साल की तुलना में इस वित्तीय वर्ष में कम चंदा मिला वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी को विदेशों से सबसे ज्यादा चंदा मिला। यही नहीं पीएमके के बाद आप ने सबसे ज्यादा चंदा नकदी के रूप वर्ष 2015-16 में लिया।
चुनावी सुधार पर काम करने वाली गैर सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) और इलेक्शन वॉच ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में क्षेत्रीय दलों को मिले दान का विश्लेषण किया है। जिसमें विदेश से सिर्फ आम आदमी पार्टी को ही 20 हजार रुपए से अधिक का चंदा मिला है। आप की कुल आय का (20 हजार रुपए से अधिक) 15 फीसदी यानी 98 लाख रुपए का दान विदेश से प्राप्त हुआ है। यही नहीं नकदी दान लेने में भी आप तमाम क्षेत्रीय दलों से वह काफी आगे है। 2015-16 में पंजाब, दिल्ली और चंडीगढ़ और मलेशिया से प्रत्येक नकदी दान आम आदमी पार्टी को ही मिला है। आम आदमी पार्टी ने अपने दान रिपोर्ट में मलेशिया के एक दान दाता का नाम घोषित किया है, जिसने नकदी के माध्यम से एक लाख रुपए का दान, 20-20 हजार रुपए पांच बार में दिया। हैरानी की बात यह है कि आप ने दो करोड़ 89 लाख रुपए के चंदे का पैन विवरण की जानकारी चुनाव आयोग को नहीं दी है, जो पूरे दान का 44 फीसदी है।
इस सब के बीच आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के होशियारपुर जोन के पूर्व एनआरआई विंग व फंड रेजिंग कमेटी के यूएसए मामलों के पूर्व संयोजक वरिंद्र सिंह परिहार ने आम आदमी पार्टी पर चंदे के मामले में हिसाब नहीं देने का आरोप लगाया और इसकी जांच की मांग सीबीआई या एफबीआई से कराने की बात कही। उनका आरोप था कि आम जनता के नेताओं भगवंत मान की वेंकूवर बैठक, सुखपाल खैहरा का अमरीका दौरा, गुरप्रीत घुग्गी के विदेश दौरों, हिम्मत सिंह शेरगिल व संजय सिंह के विदेश दौरों, कंवर संधू के अमरीका दौरे के दौरान लाखों रुपए चंदे के रूप में एकत्रित किए गए लेकिन इसका हिसाब-किताब कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी द्वारा ज्यादातर चंदा अमरीका व कनाडा के नागरिकों से लिया गया जबकि कोई भी राजनीतिक दल कानूनन विदेशी नागरिकों से किसी भी तरह का फंड नहीं ले सकता।
दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी (आप) के एनआरआइ (अप्रवासी भारतीय) सह संयोजक पद से निलंबित तथा विदेश से चंदा भेजने वाले अमेरिकी डॉक्टर मुनीश रायजादा ने अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर अपने पूरे पैसे लौटाने तथा पार्टी को मिले चंदे का ब्यौरा सार्वजनिक करने को कहा। मुनीश का कहना था कि पार्टी में रहने के दौरान उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल आप को विदेश से चंदा दिलाने के लिए किया। उनके कहने पर सैकड़ों लोगों ने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा पार्टी को डोनेट किया ताकि देश में एक कथित ईमानदार पार्टी अपने पैरों पर खड़ी हो सके।
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के पास फंड न होने की बात तो कह दी लेकिन इसे वह साबित शायद ही कर पाएं। आप के पास पैसे न होने के केजरीवाल के दावे पर सवाल उठाना तो भाजपा और कांग्रेस ने शुरू ही कर दिया है। लेकिन केजरीवाल के इस दावे की पोल खोलने के लिए चुनाव आयोग के पास मौजूद हर राजनीति दल को मिलने वाले चंदे को लेकर जानकारी है। जाहिर है इसमें आप भी शामिल है।
अपनी गोवा यात्रा के दौरान एक संबोधन में केजरीवाल ने कह दिया था कि दिल्ली में सरकार चलाने के बावजूद हमारी पार्टी के पास गोवा में चुनाव लड़ने के लिए पैसा नहीं है। दक्षिण गोवा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के एक समूह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा, “यह सुनने-समझने और देखने में असामान्य लग सकता है, लेकिन सच यही है कि दिल्ली में डेढ़ साल सरकार चलाने के बाद भी आप के पास चुनाव लड़ने के लिए पैसा नहीं है। आपको विश्वास न हो तो मैं आपको अपना बैंक खाता भी दिखा सकता हूं। यहां तक कि पार्टी के पास भी पैसा नहीं है।”
पार्टी के विज्ञापनों में भारी-भरकम रकम खर्च कर रहे केजरीवाल क्या जनता से हमदर्दी बटोरने के लिए पैसा न होने की बात कह रहे हैं। या फिर दिल्ली की सत्ता में एक वर्ष से ज्यादा हो जाने के बावजूद फंड का संकट बताते हुए केजरीवाल खुद को ईमानदार साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसके लिए तो चुनाव आयोग के पास मौजूद आंकड़ों पर जवाब भी देना होगा। फिर कांग्रेस व भाजपा के उन सवालों पर केजरीवाल को जवाब देना होगा जो दोनों पार्टियां इंडिया अंगेस्ट करप्शन को मिले भारी चंदे की रकम को लेकर पूछ रही हैं। केजरीवाल से इस चंदे का हिसाब आज तक न मिलने की शिकायत दोनों ही दलों को है।
चुनाव आयोग के अनुसार, आम आदमी पार्टी चंदे के मामले में सभी क्षेत्रीय पार्टियों में अव्वल है। इसमें वह क्षेत्रीय पार्टियां भी शामिल हैं जिनकी किसी न किसी राज्य में सरकार है। उदाहरण के लिए, देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी को इस दौरान (वित्त वर्ष 2014-15) मात्र 19.50 करोड़ रुपये चंदा मिला। ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजेडी को 21.80 करोड़ रुपये, पंजाब में शिरोमणि अकाली दल को 3.01 करोड़ रुपये।
तेलंगाना में टीआरएस को 8.69 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश में तेलगू देशम पार्टी को 7.57 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल में टीएमसी को 8.32 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र में भाजपा के सहयोगी दल शिवसेना को 25.58 करोड़ रुपये बतौर चंदा मिला। ये सारे आंकड़े चुनाव आयोग से प्राप्त कर अलग-अलग स्त्रोतों से इकट्ठा किए गए हैं और अगर यह सही है तो केजरीवाल का दावा केवल जनता को गुमराह करने और उनसे पार्टी के लिए और फंड जुटाने का है।
‘आप’ से ज्यादा चंदा पाने वाली पार्टियों में सबसे ज्यादा भाजपा को 437.35 करोड़ रुपए चंदा मिला। दूसरे नंबर पर कांग्रेस को 141.55 करोड़ रुपए चंदा मिला। वहीं, एनसीपी को 38.82 करोड़ रुपए चंदे में मिले।
कांग्रेस का कहना है कि केजरीवाल के किसी भी बयान का तब तक कोई औचित्य नहीं है जब तक वह इंडिया अगेन्स्ट करप्शन के चंदे का खुलासा नहीं करते। पार्टी जब तक चंदे की पूरी रकम का खुलासा नहीं करती तब तक पार्टी की वित्तीय हालत को लेकर उनकी किसी कहानी को सही नहीं माना जा सकता है।
भाजपा ने कहा कि केजरीवाल हमेशा झूठे साबित हुए हैं। उन्होंने जो कुछ कहा है वह सिर्फ ज्यादा से ज्यादा फंड एकत्रित करने के मकसद से है जिससे चुनावों में वह मनमुताबिक खर्च कर सकें। उनका रुझान ज्यादा से ज्यादा फंड बटोरने पर रहता है। दिल्ली में उन्होंने करोड़ों रुपये बटोरे। लेकिन दिल्ली के लिए उन्होंने क्या किया?
इसके साथ हीं पंजाब की क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणी अकाली दल इससे पहले केजरीवाल पर राज्य की जनता को धमकाने और दिल्ली के करदाताओं के पैसे से पंजाब में चुनाव प्रचार करने का इल्जाम भी लगा चुकी है। पार्टी की मानें तो केजरीवाल दिल्ली की जनता की गाढ़ी मेहनत की कमाई का पंजाब में अपना प्रचार करने पर दुरुपयोग कर रहे हैं। यह बेहद चिंता की बात है कि आप नेता पंजाब में सत्ता पाने को इतने लालायित हो गए हैं कि वह उन संसाधनों को व्यर्थ लुटा रहे हैं, जिसका उपयोग दिल्ली के विकास के लिए करना चाहिए।
इधर पार्टी के पास फंड नहीं होने की बात करनेवाले केजरीवाल पंजाब, गोवा और गुजरात में चुनाव के लिए रणनीति भी बना चुके हैं।
खुद केजरीवाल ने पंजाब का जिम्मा अपने पास रखा है। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को गोवा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही जल मंत्री कपिल मिश्रा और पार्टी के सीनियर नेता आशुतोष को गुजरात का ज़िम्मा सौंपा गया है। पार्टी नेताओं को सितंबर के पहले हफ्ते से काम पे लग जाने का निर्देश दे दिए हैं। नेताओं को हर महीने 10-15 दिन अपने (जिसकी ज़िम्मेदारी दी है) राज्यों में बिताने के निर्देश भी दिए गए हैं।
दिल्ली में हुए विकास के मॉडल का प्रचार करेंगे जिसमें सिसोदिया शिक्षा से जुडी नीतियों, सत्येंद्र जैन स्वास्थ्य से जुड़े सरकार के कामों को लोगों तक पहुंचाएंगे। सिसोदिया जहां शिक्षा में किए गए बदलाव, स्कूलों के हालात और सरकारी स्कूलों में पैरेंट टीचर्स मिटिंग की शुरुआत की बात करते सुने जा सकेंगे वहीं सत्येंद्र जैन वहीं पुलों और सड़कों के निर्माण में पैसे की बचत, मोहल्ला क्लीनिक की शुरुआत और फ्री इलाज, बिजली-पानी पर सरकार के काम को जनता के बीच रखेंगे। ऐसे में यह समझ पाना थोड़ा मुश्किल है कि अगर पार्टी के पास फंड की कमी है तो इन चुनावों में इन नेताओं के अलग-अलग राज्यों में जाने चुनाव प्रचार करने का खर्चा पार्टी कहां से उठाएगी।
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