कांग्रेस पार्टी बड़ी अजीब पार्टी है और इसके नेता भी बड़े अजीब हैं, पहले इन लोगों ने नोटबंदी का विरोध करते हुए कहा कि मोदी तो सबसे पैसे छीन रहा है, नोटबंदी ख़त्म हो गयी और मोदी के देने की बारी आयी मतलब देश का बजट पेश करने का वक्त आया तो ये लोग कह रहे हैं मोदी के बजट को रोको, कहीं मोदी लोगों को ज्यादा ना दे दे।
केंद्र सरकार द्वारा एक फरवरी को बजट पेश करने के फैसले को चुनौती देने के लिए एकजुट विपक्ष ने चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटाया है । विपक्ष का आरोप है कि इसके माध्यम से भाजपा मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर सकती है। कांग्रेस, बसपा, जदयू, राजद, सपा समेत विपक्षी दल गुरुवार 11 बजे चुनाव अयोग के दफ्तर पहुंचे और इस पर रोक लगाने की मांग की।
जनसेवक किसी महाराजा से काम नहीं
प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि आखिर बजट आने से गैर-भाजपाई में क्या डर सता रहा है? क्या बजट विरोधी राष्ट्र को बताएँगे कि जिस विमुद्रीकरण पर संसद में अवरोध किया, कितने नेता बैंकों की लाइन में लगे थे? राष्ट्र को बताएँ राजनीति में पदापर्ण पूर्व उनकी वित्तीय स्थिति क्या थी और आज कितनी है? ये लोग जनसेवा के लिए राजनीति आए हैं या कोई महाराजा बनने?
कुछ दिन पहले राहुल गाँधी सहित सभी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोदी से मिलने गए थे, उन्होंने मोदी से किसानों का कर्ज माफ़ करने की मांग की थी, इसके अलावा भी कांग्रेसियों ने कई मांगें रखी थीं, जैसे सभी गरीब महिलाओं के खाते में 25000 रुपये डाले जाँय, सभी दुकानदारों और व्यापारियों को टैक्स में 50 फीसदी की छूट दी जाय, जब मोदी सरकार के बजट पेश करने का वक्त आया तो यही कांग्रेसी कह रहे हैं कि मोदी सरकार को बजट पेश करने से रोको, कहीं ये हमारी मांगें ना मान लें।
यही कांग्रेसी किसानों का कर्ज माफ़ करने की मांग करते हैं और यही मोदी को बजट पेश करने से रोकते हैं, मतलब ये किसानों के लिए लड़ने के केवल दिखावा करते हैं, इसी प्रकार से अन्य मांगें मानकर ये गरीबों के लिए लड़ने का दिखावा करते हैं।
कांग्रेसी नेता आनंद शर्मा ने बजट रोकने की मांग करते हुए कहा है कि मोदी सरकार बजट में गरीबों के लिए अधिक घोषणाएं करके वोटरों को लुभा सकते हैं, कांग्रेसी नेता चुनाव आयोग से मिलकर मोदी सरकार से बजट पेश करने से रोकने की मांग करेंगे।
केंद्र सरकार द्वारा एक फरवरी को बजट पेश करने के फैसले को चुनौती देने के लिए एकजुट विपक्ष ने चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटाया है । विपक्ष का आरोप है कि इसके माध्यम से भाजपा मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर सकती है। कांग्रेस, बसपा, जदयू, राजद, सपा समेत विपक्षी दल गुरुवार 11 बजे चुनाव अयोग के दफ्तर पहुंचे और इस पर रोक लगाने की मांग की।
जनसेवक किसी महाराजा से काम नहीं
प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि आखिर बजट आने से गैर-भाजपाई में क्या डर सता रहा है? क्या बजट विरोधी राष्ट्र को बताएँगे कि जिस विमुद्रीकरण पर संसद में अवरोध किया, कितने नेता बैंकों की लाइन में लगे थे? राष्ट्र को बताएँ राजनीति में पदापर्ण पूर्व उनकी वित्तीय स्थिति क्या थी और आज कितनी है? ये लोग जनसेवा के लिए राजनीति आए हैं या कोई महाराजा बनने?
कुछ दिन पहले राहुल गाँधी सहित सभी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोदी से मिलने गए थे, उन्होंने मोदी से किसानों का कर्ज माफ़ करने की मांग की थी, इसके अलावा भी कांग्रेसियों ने कई मांगें रखी थीं, जैसे सभी गरीब महिलाओं के खाते में 25000 रुपये डाले जाँय, सभी दुकानदारों और व्यापारियों को टैक्स में 50 फीसदी की छूट दी जाय, जब मोदी सरकार के बजट पेश करने का वक्त आया तो यही कांग्रेसी कह रहे हैं कि मोदी सरकार को बजट पेश करने से रोको, कहीं ये हमारी मांगें ना मान लें।
यही कांग्रेसी किसानों का कर्ज माफ़ करने की मांग करते हैं और यही मोदी को बजट पेश करने से रोकते हैं, मतलब ये किसानों के लिए लड़ने के केवल दिखावा करते हैं, इसी प्रकार से अन्य मांगें मानकर ये गरीबों के लिए लड़ने का दिखावा करते हैं।
कांग्रेसी नेता आनंद शर्मा ने बजट रोकने की मांग करते हुए कहा है कि मोदी सरकार बजट में गरीबों के लिए अधिक घोषणाएं करके वोटरों को लुभा सकते हैं, कांग्रेसी नेता चुनाव आयोग से मिलकर मोदी सरकार से बजट पेश करने से रोकने की मांग करेंगे।
पांच राज्यों में होने वाले चुनावों की तारीखों की घोषणा के ठीक एक दिन बाद गुरुवार को विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटा रही हैं। बता दें कि बजट पेश करने की तारीख यानि एक फरवरी जो कि चुनाव से ठीक पहले की है।
फिर एकजुट हुए गैर-भाजपाई
विपक्षी पार्टियां चाहती हैं कि यह तारीख आगे सरका दी जाए। कांग्रेस, तृणमूल, समाजवादी पार्टी, बसपा, जनता दल युनाइटेड और लालू यादव की पार्टी आरजेडी मिलकर आज (गुरुवार) चुनाव आयोग से मिलेगी। विपक्ष का आरोप है कि सत्ता पक्ष इसके माध्यम से आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में फायदा ले सकता है। कांग्रेस चुनाव आयोग से मांग करेगी कि आचार संहिता के दौरान बजट पेश न हो बल्कि वोट आन अकाउंट पेश किया जाए। 2012 में यूपी चुनाव की घोषणा के समय नतीजे के बाद बजट पेश हुआ था।
वहीँ चुनाव आयोग ने बुधवार को कहा कि एक फरवरी को बजट पेश करने की योजना के खिलाफ राजनीतिक दलों के दिए गए एक आवेदन की वह जांच करेगा। इस बीच वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इस कदम का बचाव करते हुए सवाल किया कि अगर राजनीतिक दल दावा करते हैं कि नोटबंदी एक अलोकप्रिय फैसला है तो उन्हें बजट से डर क्यों होना चाहिए।
Populist measures could be taken in budget, so a just and fair election can't be held: GN Azad,Congress after meeting Election Commission pic.twitter.com/BH1IpflQzx
We demand that budget be presented after March 8, which is when polling for elections will be over: GN Azad, Cong after meeting EC pic.twitter.com/x7GzS0eY28
कांग्रेस, वाम, सपा और बसपा सहित विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग को और राष्ट्रपति को पत्र लिख कर चुनाव से पहले बजट पेश किए जाने का विरोध किया है। इन दलों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले बजट पेश करने से भाजपा और उसके सहयोगियों को अनावश्यक तरीके से लाभ होगा क्योंकि केंद्र सरकार मतदाताओं को लुभाने के लिए आकर्षक घोषणाएं कर सकती है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने मुख्य निवार्चन आयुक्त नसीम जैदी को लिखे एक पत्र में कहा है यह विपक्षी दलों की सामूहिक एवं गंभीर चिंता है कि एक फरवरी को बजट पेश किए जाने से सरकार को मतदाताओं को लुभाने के लिए लोकप्रिय घोषणाएं करने का अवसर मिल जाएगा।
आजाद ने कहा इससे न केवल सत्तारूढ़ दल को अनावश्यक लाभ मिलेगा बल्कि इससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया भी कमजोर होगी। इसलिए यह मांग है कि आगामी चुनाव को देखते हुए और वर्ष 2012 के उदाहरण के अनुसार, बजट को पहले पेश करने की अनुमति न दी जाए।
संवाददाताओं के पूछने पर आजाद ने कहा आयोग को कुछ राजनीतिक दलों की ओर से अभ्यावेदन मिले हैं जो कि बजट पेश करने से संबंधित हैं। आयोग उन पर गौर कर रहा है।
चुनाव तारीख से तीन दिन पहले बजट पेश करने की तारीख पर विपक्ष चुनाव आयोग को ज्ञापन देगा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने चुनाव आयोग से समय मांगा है।
अगर मोदी सरकार को बजट पेश करने से रोका जाता है तो देश को लाखों करोड़ रुपये का नुकसान होगा और देश का विकास कम से कम 60 महीनों के लिए रुक जाएगा। मोदी सरकार ने नोटबंदी के बाद लाखों करोड़ रुपये की कमाई की है, लाखों करोड़ का कालाधन जब्त किया है, मोदी सरकार अब इसी कमाई को गरीबों के कल्याण पर खर्च करना चाहते हैं लेकिन विपक्षी डरे हुए हैं। उन्हें पता है कि नोटबंदी सफल हुई है, मोदी सरकार ने खजाना भर दिया है, अब अगर मोदी सरकार ने खरीबो के लिए इस खजाने को लुटाया तो सभी लोग इन्हें ही वोट देंगे और हमें कोई पूछेगा भी नहीं। इसलिए अब ये मोदी सरकार के बजट को रोकना चाहते हैं।
वहीं, इस मामले पर जेटली ने कहा है, लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अंतरिम बजट पेश किया जाता है। किसी ने उसे नहीं रोका. यहां तक कि 2014 में बजट आम चुनाव से ठीक कुछ दिन पहले पेश किया गया. यह संवैधानिक आवश्यकता है।
बताते चले कि पिछले दिनों केंद्रीय संसदीय कमेटी ने बैठक में आम बजट एक फरवरी को पेश करने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि इस पर अभी अंतिम मौहर नहीं लगी है, लेकिन चार फरवरी से यूपी समेत पांच राज्यों होने वाले चुनावों को देखते हुए विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया है।
शिव सेना भी बजट से घबराई
अन्य भाजपा विरोधियों की भाँति नोटबंदी का विरोध करने वाले शिवसेना अध्यक्ष अब मोदी सरकार के आम बजट से घबरा गए हैं, उन्होंने आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के संपन्न होने तक केंद्रीय बजट स्थगित कर देना चाहिए। उद्धव ने यहां जिला पार्टी सदस्यों की बैठक में कहा, "इस संबंध में शिवसेना के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राष्ट्रपति से मुलाकात करेगा। हमें लग रहा है कि केंद्र में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) केंद्रीय बजट में देश की जनता को फुसलाने और गुमराह करने की कोशिश कर सकती है।"
विपक्ष की इस मुहीम में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना भी शामिल हो गयी है । शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से अपील की है कि वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बजट पेश करने की इजाजत नहीं दें । उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बजट का इस्तेमाल वोटरों को लुभाने के लिए कर सकती है।
विपक्ष की इस मुहीम में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना भी शामिल हो गयी है । शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से अपील की है कि वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बजट पेश करने की इजाजत नहीं दें । उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बजट का इस्तेमाल वोटरों को लुभाने के लिए कर सकती है।
उद्धव ने सवालिया लहजे में कहा कि आखिर निर्वाचन अयोग द्वारा पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले ही केंद्रीय बजट का ऐलान कर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि बुधवार को निर्वाचन आयोग ने गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा कर दी।
पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव चार फरवरी से आठ मार्च तक चलेंगे और मतगणना 11 मार्च को होगी, वहीं केंद्रीय बजट के एक फरवरी को लाए जाने की संभावना है।




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