अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यह कहा कि सरकार हज सब्सिडी खत्म करने पर विचार कर रही है, हज सब्सिडी को एक सियासी मुद्दा बना दिया है। इस मसले पर अल्पसंख्यक मंत्रालय ने छह सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। जिसे हज सब्सिडी का खर्च कम करने के लिए नए रास्ते निकालने के लिए कहा गया है। लेकिन हज यात्रा पर सरकार कि ओर से मिलने वाली सब्सिडी को लेकर काफी बवाल मच गया है। वैसे विश्व में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ वोट-बैंक की खातिर हज यात्रियों को सब्सिडी दी जा रही थी।
मुसलमानों को 650 करोड़ की हज सब्सिडी दे रही है सरकार
आपको बता दें कि साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से 10 वर्षों में हज सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से कम करने और बाद में पूरी तरह से समाप्त करने के रास्ते निकालने को कहा था। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक कमिटी यह देखेगी कि मिलने वाली इस सब्सिडी का सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल कैसे हो सकता है। सब्सिडी फिलहाल 650 करोड़ रुपये की है।साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि वह सब्सिडी को खत्म कर इससे बचने वाले पैसे को मुस्लिम समुदाय के सामाजिक और शैक्षणिक विकास में खर्च करे। जिसके जवाब में तत्कालीन सरकार ने कहा था कि हज यात्रा का दायित्व प्राइवेट एयरलाइंसों को देने से हज यात्री से मनमाने दामों पर किराए वसूले जाने का खतरा है।
ओवैसी ने की हज पर सब्सिडी खत्म करने की मांग
वहीं, हमेशा अपने बयानों से विवादों में रहने एआईएमआईएम चीफ ओवैसी ने भी हज को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा हज पर जाने वाली सब्सिडी को खत्म कर इस राशि को लड़कियों की शिक्षा में इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने कहा कि सब्सिडी के नाम पर 690 करोड़ रुपए एयरलाइन्स को दिए जाते हैं जिसका फायदा मुस्लिम तीर्थयात्रियों को नहीं मिलता। ओवैसी ने कहा कि इस सब्सिडी को खत्म कर देना चाहिए क्योंकि मुस्लिमों को अपनी धर्म यात्रा के लिए सरकार से मदद की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस सब्सिडी को खत्म कर देना चाहिए क्योंकि मुस्लिमों को अपनी धर्म यात्रा के लिए सरकार से मदद की जरूरत नहीं है।
हालांकि, उन्होंने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की उस घोषणा का स्वागत किया, जिसमें कहा गया था कि भारत के सालाना हज कोटे में 34,500 का इजाफा करते हुए इसकी लिमिट 1.70 लाख कर दी गई है।
उधर, जाने-माने गीतकार और पूर्व राज्य सभा सांसद जावेद अख्तर ने इस सब्सिडी को खत्म करने की मांग की है। उन्होंने टि्वटर पर लिखा कि आखिरकार सरकार ने एक कमिटी बनाने का फैसला किया, जो हज सब्सिडी पर विचार करेगी। अगर इस सब्सिडी को पहले खत्म कर दिया जाता तो बेहतर होता।
केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने छह एक्सपर्ट्स की एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी यह पता लगाएगी कि मुस्लिम हज यात्रियों को दी जाने वाली सब्सिडी व्यवहारिक और असरदार है या नहीं? गौरतलब है कि 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रथा को बंद करने के लिए कहा था।
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