समाजवादी पार्टी में सुलह के प्रयास लगभग समाप्त हो चुके हैं । आज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बीच तीन घंटे तक चली बातचीत बेनतीजा ख़त्म हो गयी । वहीँ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल “अखिलेश कोई समझौता करने को तैयार नही हैं । उन्होंने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से साफ़ कर दिया कि अब अकेले चुनाव लड़ने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है।”
सूत्रों ने बताया कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अपने फैसले पर फिर से सोचने और दोबारा मीटिंग करने को कहा है। वहीँ चुनाव आयोग से आज मिले सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि अब कोई समझौता नही होने जा रहा, हम अखिलेश के नेत्रत्व में चुनाव लड़ेंगे ।
सूत्रों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आज़म खान सुलह के जिस फॉर्मूले को लेकर आज दिल्ली पहुंचे वह सपा सुप्रीमो से नहीं मिल सकते लेकिन उन्होंने फोन पर सपा सुप्रीमो को अपना फॉर्मूला सुझाया जिसे मुलायम सिंह यादव ने ख़ारिज कर दिया।
अब लगभग तय माना जा रहा है कि दोनो गुट अलग अलग होकर चुनाव लड़ेंगे लेकिन अभी भी निगाहें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं । हालाँकि जानकारों का कहना है कि भले ही अखिलेश के पास विधायको की तादाद ज़्यादा है लेकिन फिर भी फाउंडर होने के नाते सपा मुखिया मुलायम सिंह का पक्ष ज़्यादा मजबूत है । इसलिए सम्भावना है कि या तो चुनावचिन्ह साईकिल जब्त कर लिया जाएगा या फिर मुलायम खेमे को दे दिया जाएगा ।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का ऐलान आज-कल में ही होने वाला है और ऐसे में सूबे की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के दो फाड़ हो चुके हैं, जिसमें मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव गुटों ने पार्टी और चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ पर अपने अपने दावे चुनाव आयोग में पेश कर दिये हैं। वहीं जहां दोनों गुटों में प्रयास के बावजूद सुलह के लिए मंगलवार को हुई बातचीत बेनतीजा खत्म होने के बाद प्रो. रामगोपाल यादव ने साफ कह दिया है कि अब कोइ फैसला होने वाला नहीं है और प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा जाएगा।
समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह और अखिलेश गुट ने सपा पर अपना हक जताने के साथ चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ पर कब्जा करने के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग में तमाम तर्को और सबूतों के आधार पर अपनी-अपनी अर्जियां पेश कर दी है। सोमवार को मुलायम सिंह यादव ने पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताते हुए चुनाव चिन्ह पर अपना हक जताया था, तो मंगलवार को अखिलेश गुट की ओर से प्रो.रामगोपाल यादव ने भी चुनाव आयुक्त से मुलाकात करके सपा के आपातकालीन अधिवेशन के निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के अलावा पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के बहुमत होने का भी दावा पेश किया और कहा कि असली सपा अखिलेश सपा के पास है इसलिए चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ पर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गये अखिलेश यादव का हक है।
बहुमत अखिलेश के साथ
सपा के एक अधिवेशन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गये अखिलेश यादव की ओर से मंगलवार को प्रो. रामगोपाल यादव ने यहां दिल्ली में चुनाव आयोग के साथ बैठक करके अपने तर्क रखे और पार्टी व चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ पर अपना हक जताया। चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद आज रामगोपाल यादव ने कहा है कि उनके पास 90 फीसदी विधायकों का साथ है, जो अखिलेश यादव का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में उनके नेतृत्व वाले दल को ही ही सपा माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें कहा गया है कि अखिलेश गुट ही असली समाजवादी पार्टी है और पूरी पार्टी अखिलेश यादव के साथ है इसलिए पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह 'साइकिल' उन्हें ही आवंटित करने की मांग की गई है। अखिलेश खेमे की ओर से रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल और किरणमय नंदा चुनाव आयोग गए थे।
बेनतीजा रही सुलह की कोशिश
समाजवादी पार्टी में चल रहे झगड़े के बीच अब सुलह की कोशिशे तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम से मिलने पहुंचे और दोनों के बीच 3 घंटे चली बैठक खत्म हो गई है। इस बैठक में शिवपाल भी शामिल हुए थे। मंगलवार को इससे पहले लखनऊ में फिर से मुलायम सिंह यादव के घर पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मुलाकात हुई, जिसमें अखिलेश ने पार्टी को बचाने के लिए पिता मुलायम सिंह यादव के सामने कई शर्त रखने के साथ एक फार्मूला रखा, लेकिन कई मामलों में बातचीत नहीं बन सकी है।
ये भी बनी हैं संभावना
| किसके राज में अशोक सिंघल का यह खून बहा? |
सुलह के प्रयासों में यह भी बताया जा रहा है कि यदि कोई नतीजा निकालता है तो अखिलेश यादव पिता मुलायम के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी छोड़कर प्रदेश अध्यक्ष बन सकते हैं, वहीं शिवपाल यादव को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। कहा जा रहा है कि बैठक में टिकट बंटवारे को लेकर भी चर्चा हुई है। हालांकि इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि सोमवार को चुनाव आयोग के सामने साइकिल पर दावा ठोकने के बाद मुलायम सिंह लखनऊ जा चुके हैं। सपा में सुलह के प्रयास कराने में आजम खां माध्यम बने हुए हैं, जिनका कहना है कि अभी सब खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक सपा के साथ हैं और भाजपा को सत्ता में आने से रोकना चाहते हैं। अगर कुछ हो सका तो सुलह की कोशिश करेंगे।जब रामजन्मभूमि आन्दोलन अपने उफान पर था, वास्तविक इतिहास को अपने वोटबैंक की खातिर नज़रअंदाज़ कर, रामभक्तों पर गोली चलवा दी। उसी भाँति भगवान राम ने समाजवादी पार्टी को भी अपने उफान पर लाकर किस तरह चौराहे पर निर्वस्त्र कर दिया।
| मुलायम सिंह जी किसके राज में खुदाई में निकले थे ? |
एक साधु का श्राप :
समाजवादी पार्टी के सितारे इन दिनों गर्दिश में हैं | विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं, परन्तु सपा में गुटबाजी और आपस में मनमुटाव बढ़ता ही जा रहा हैं | सपा को लेकर हर दिन कोई न कोई नया मुद्दा सुनाई देना अब रोज का काम हो गया हैं! आपसी कलह और मनमुटाव कम होने का नाम नहीं ले रहा हैं | यह कोई नहीं कह सकता सपा का यह मसला कब सुलझेगा, परन्तु इन दिनों इस मुद्दे की शुरुवात को लेकर एक चौकाने वाली खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं ! खबर में दावा किया जा रहा है की साधु के श्राप से यादव कुनबे में दरार पड़ी है !
अवलोकन करें :--"सपा तिनके की तरह बिखर जाएगी".. !
समाजवादी पार्टी के सदस्यों के इस मनमुटाव का कारण साधू और संतो के दिए गये श्राप भी माना जा रहा हैं | इन दिनों सोशल मीडिया पर एक पोस्टर ने मानो धूम मचा रखी हैं यह तेजी से फ़ैल रहा हैं! पोस्टर पर लिखा हुआ हैं, ” एक और संत के श्राप का असर दिखाई देने लगा हैं”| और यही नहीं इस पोस्टर में यह भी बताया गया हैं की सपा में इस मनमुटाव का असली कारण क्या हैं ? पोस्टर पर लिखे हुए एक संदेश के अनुसार सपा ने वाराणसी में साधू संतो तथा बटुको के उपर लाठीचार्ज करवाया था, इसी वजह से साधुओ ने इनको श्राप दिया था | यह उसी श्राप का परिणाम हैं की आज सपा इस कागार पर खड़ी हैं यहाँ तक की पिता और पुत्र में भी नहीं बन रही हैं |
क्या था पूरा मामला :- आपकी जानकारी के लिए बता दे बीते वर्ष उच्च न्यायालय ने गंगा नदी में मूर्ति विसर्जन पर बैन लगा दिया था | इसके कारण देश भर के साधू संत कुपित हो गये थे, सभी सन्तु संत और धार्मिक संघठन गंगा नदी में मूर्ति विसर्जन की मांग कर रहे थे | शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रमुख शिष्य स्वामी अविमुक्तरेश्वरानंद, तथा पातालपुरी के महंत बालक दास तथा अन्य बटुक, गंगा नदी में मूर्ति विसर्जन पर लगी इस रोक के खिलाफ बैठे हुए थे |
कहावत है, "बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से होएं", जो मुलायम सिंह पर चरितार्थ हो रही है। अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने के चक्कर में मुलायम सिंह ने न जाने कितनों को घाट-घाट का पानी पिलाया है। अपने वोट-बैंक की खातिर अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियाँ चलवा दीं।चौरासी कोस यात्रा किस पार्टी के राज में बाधित हुई? वास्तविक इतिहास को वोटबैंक इतिहास आधारित कर दिया। इतना ही नहीं, जब कोर्ट द्धारा रामजन्मभूमि की खुदाई का आदेश होने पर मुलायम सिंह ने जो कहा, उसे चरितार्थ करने में आजतक इनकी आवाज़ बंद है। सम्भव हो, भगवान राम या फिर शहीद हुए रामभक्तों का श्राप हो कि ऊँचाइयों पर ले जाकर मुलायम सिंह और इनकी पार्टी को फर्श पर पटक, धरातल में समाँने जा रही है। क्योंकि इन हालातों में पार्टी अगर टूट गयी, मुलायम तो क्या अखिलेश के जीवन में शायद ही राजनीतिक भँवर से बाहर निकल सकने की क्षमता हो। आज वही वोटबैंक भी समाजवादी पार्टी से मुँह मोड़ रहा है।
रामायण का गम्भीरता से अध्ययन करने पर ज्ञात होता है कि राजतिलक होने से पूर्व पुरुषोत्तम राम ने माता योगमाया के माध्यम से माता कैकई से राजा दशरथ को वनवास के लिए मजबूर कर धरती से राक्षस वंश को मोक्ष देने निकल पड़े। और अपने उद्धेश्य की पूर्ति उपरान्त माता कौशल्या से पहले उसी माता से मिलने गए, लेकिन यहाँ वह अध्याय दोहराने वाला नहीं।

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