विमुद्रीकरण जिसे विपक्ष नोटबंदी का नाम दे रहा है, वास्तव में विमुद्रीकरण तो नरेन्द्र मोदी ने काले धन और जाली नोटों पर नियंत्रण के लिए किया थापरंतु नोटबंदी से एक ऐसा घोटाला देश के सामने कुछ दिनों में आने वाला है, जिसके बारे में कोई आम आदमी तो कल्पना तक नहीं कर सकता।आपको शायद पता नहीं होगा कि नोटबंदी की वजह से पूर्व कांग्रेस सरकार का सबसे बड़ा घोटाला सामने आने वाला है और मैडम यानी सोनिया गाँधी और सर यानी मनमोहन सिंह पर बहुत बड़ा संकट आने वाला है, इन्हीं मैडम और सर को बचाने के लिए कांग्रेस ने पूरी ताकत लगा दी है, इन्हीं मैडम और सर को बचाने के लिए कांग्रेस नोटबंदी के आदेश को रद्द कराने के लिए जी जान से लगी है।
विमुद्रीकरण उर्फ़ नोटबंदी कांग्रेस के लिए गले की हड्डी
कांग्रेस के पास नोटबंदी को रद्द कराने का एक ही उपाय है और वह है सुप्रीम कोर्ट। इस वक्त कांग्रेस ने अपने वकीलों की पूरी फ़ौज सुप्रीम कोर्ट में खड़ी कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के दर्जनों वकील नोटबंदी के खिलाफ याचिकाओं की पैरवी कर रहे हैं। अब आप सोचिये सुप्रीम कोर्ट में नोटबंदी के खिलाफ याचिकाएं कौन डाल रहा है और इन याचिकाओं की पैरवी आखिर कांग्रेसी सांसद ही क्यों कर रहे हैं, क्या नोटबंदी की पैरवी करने के लिए कांग्रेस वकील ही बचे हैं। सलमान खुर्शीद, कपिल सिब्बल, पी. चिदंबरम, अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तनखा, के.टी.एस. तुलसी जैसे धुरंधर कांग्रेसी वकील नोटबंदी का आदेश रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जी जान लगा दे रहे हैं।
दरअसल भारत की सेंट्रल बैंक यानि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने 500 और 1000 के 15 लाख करोड़ के नोट भारत में जारी किये थे, सभी नोटों का 1 सीरियल नंबर होता था
वहीँ आरोप ये लग रहा है की, भारत में 1 ही सीरियल नंबर के 1 से अधिक नोट मनमोहन सरकार और उनके समय में काम करने वाली RBI ने छापे हैं।
मसलन मान लीजिये 123456 सीरियल नंबर का 1 नोट 500 का होना चाहिए।
परंतु इसी सीरियल नंबर के कई कई नोट बैंको में जमा हुए हैं। 1 ही सीरियल नंबर के कई कई नोट, और वो नोट जाली भी नहीं, मसलन सरकार ने ही छापे है। .
वो नोट जो 2004 से 2014 तक के है।
इसके साथ साथ कई ऐसे नोट भी छापे गए, जिनके सीरियल नंबर ही अवैध थे।
सोशल मीडिया पर भी इसके खिलाफ आवाज उठने लग गयी है, और लोग मनमोहन सरकार और उनके चहेते RBI गवर्नर रघुराम राजन पर सवाल उठा रहे हैं।
कई नेता कह रहे हैं कि नोटबंदी सबसे बड़ा घोटाला है, कुछ लोग कह रहे हैं कि नोटबंदी से देश बर्बाद हो गया, कुछ लोग कह रहे हैं कि नोटबंदी से सैकड़ों लोग मर गए। आज सबसे बड़ा बयान कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने दिया, उन्होंने कहा कि नोटबंदी इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है, वह यह बात संसद में बोलेंगे तो भूकंप आ जाएगा और वहां मोदीजी बैठ नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि मोदी उनके सामने आने से डर रहे हैं, एक बार मोदी उन्हें मिल गए तो वे उन्हें पकड़कर समझा देंगे।
क्या सच में आ सकता है भूकंप
क्या सच में आ सकता है भूकंप
राहुल गाँधी ने एक बात तो माना कि उनकी सरकार में भी घोटाले हुए हैं और नोटबंदी देश का सबसे बड़ा घोटाला है, हम यह तो नहीं कह सकते कि नोटबंदी देश का सबसे बड़ा घोटाला है लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं कि नोटबंदी देश में हुए सबसे बड़े घोटाले का पर्दाफाश कर सकती है और यह घोटाला इतना बड़ा हो सकता है कि देश में सच में भूकंप आ सकता है, सभी के पैरों तले जमीन खिसक सकती है और पूरी की पूरी कांग्रेस पार्टी उसमें समा सकती है।
क्या है ये घोटाला
आप मालूम होगा कि RBI ने अब तक 1000 और 500 रुपये कीमत के 14.5 लाख करोड़ रुपये जारी किये थे, नोटबंदी के बाद आज तक 12 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। नोटबंदी के बाद 30 दिन बीते हैं और अभी भी पुराने नोट जमा करने के 20 दिन बाकी हैं। अब आप सोचिये, क्या अब केवल 2.5 लाख करोड़ रुपये ही जमा होने बाकी हैं। 20 हजार रुपये तो मेरे पास ही हैं। मैंने अब तक इसलिए पैसे जमा नहीं किये हैं क्योंकि मै भीड़ कम होने का इन्तजार कर रहा हूँ। मेरे जैसे कितने लोग होंगे जो भीड़ ख़त्म होने का इन्तजार कर रहे होंगे। मै इसलिए भी भीड़ खत्म होने का इन्तजार कर रहा हूँ क्योंकि मेरे अकाउंट में पहले से पैसे जमा थे और मेरा काम चल रहा है। मेरे जैसे कितने लोग होंगे जो अब तक अपना काम चला रहे होंगे और भीड़ ख़त्म होने या कम होने का इन्तजार कर रहे होंगे।
कांग्रेस के शासनकाल में हुआ नकली नोट छापने का कारोबार !
अब आप सोचिये, अगर RBI में 14.5 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जमा हो गए तो क्या होगा, अगर 20 लाख करोड़ रुपये जमा हो गए तो क्या होगा, अगर 25 लाख करोड़ रुपये जमा हो गए तो क्या होगा। इस पांच लाख या 10 लाख करोड़ रुपये का हिसाब कौन देगा। क्या RBI बताएगा कि जब उसने केवल 14 लाख करोड़ रुपये जारी किये थे तो देश में 20 लाख करोड़ रुपये कहाँ से आ गए। अगर 20 लाख रुपये जमा हुए तो देश में 6 लाख करोड़ का घोटाला सामने आएगा और अगर 25 लाख करोड़ जमा हुए तो 11 लाख करोड़ रुपये का घोटाला सामने आएगा। पांच लाख करोड़ का घोटाला अबतक का देश का सबसे बड़ा घोटाला होगा।
जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक लाखों धनकुबेरों ने भी अपना कालाधन बैंकों में जमा नहीं किया है, अगर उन्होने सरकार को जुर्माना देकर अपना कालाधन जमा कर दिया और ऐसे लोगों ने 2-3 लाख करोड़ रुपये भी जमा कर दिए तो यह घोटाला और बड़ा हो सकता है।
कौन होगा इस घोटाले का जिम्मेदार - सोनिया, मनमोहन या रघुराम राजन
कौन होगा इस घोटाले का जिम्मेदार - सोनिया, मनमोहन या रघुराम राजन
अब आप सोचिये, इस पांच-छह-सात लाख करोड़ रुपये के घोटाले का जिम्मेदार कौन होगा, मोदी सरकार को देश में आये 2 ही वर्ष हुए हैं, उन्होंने अब तक रुपये भी नहीं छापे होंगे, अब सवाल यह उठता है कि क्या बैंकों में नकली नोट जमा हुए हैं, ऐसा होना भी असंभव है क्योंकि बैंक वालों को नकली नोटों की पहचान होती है और वे एक एक नोटों को चेक करके रूपया जमा करते हैं। दूसरा प्रश्न यह उठता है कि क्या RBI ने एक ही सीरियल नम्बर के कई नोट छाप रखे थे। ऐसा क्यों किया गया था। क्या राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा किया गया था। अगर ऐसा किया गया था तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। क्या इसका जिम्मेदार पूर्व कांग्रेस सरकार है। निश्चित तौर पर। क्या इसके जिम्मेदार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हैं। निश्चित तौर पर हैं। क्या इसके जिम्मेदार पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी हैं। निश्चित तौर पर हैं। क्या इसके जिम्मेदार सोनिया गाँधी हैं। निश्चित तौर पर हैं क्योंकि कांग्रेस सरकार सोनिया गाँधी के ही इशारों पर चलती थी और ऐसा कहा जाता है कि मनमोहन सिंह तो उनके हाथों का रिमोट कंट्रोल थे।
अब समझ में आया, कांग्रेस ने SC में क्यों लगा रखी है पूरी ताकत
अब आप सोचिये कि कांग्रेस ने नोटबंदी का आदेश वापस लेने के लिए पूरी ताकत क्यों लगा रखी है। सुप्रीम कोर्ट में दर्जनों वकीलों की फ़ौज क्यों लगा रखी है, सभी रचिकाओं की पैरवी कांग्रेस सांसद जो कि सुप्रीम कोर्ट में वकील भी हैं, क्यों कर रहे हैं। क्या नोटबंदी की पैरवी करने के लिए कांग्रेस वकील ही बचे हैं। सलमान खुर्शीद, कपिल सिब्बल, पी. चिदंबरम, अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तनखा, के.टी.एस. तुलसी जैसे धुरंधर कांग्रेसी वकील नोटबंदी का आदेश रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जी जान लगा दे रहे हैं।
क्या कांग्रेसी सांसदों को भी इस सबसे बड़े घोटाले के एक्सपोज होने का डर सता रहा है, निश्चित तौर पर डर सता रहा होगा वरना संसद में नोटबंदी पर चर्चा करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में खुद ही याचिकाएं डलवा कर उसकी खुद ही पैरवी नहीं करते।
सामने आएगा सबसे बड़ा घोटाला
सिर्फ एक हफ्ते में पता चल जाएगा कि रिज़र्व बैंक में कितना रूपया जमा हुआ है, निश्चित तौर पर अगले एक हफ्ते में रिज़र्व बैंक में 20 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुके होंगे और 6 लाख करोड़ रुपये का घोटाला सामने आ चुका होगा। कल भारतीय जनता पार्टी ने संसद में इसीलिए चर्चा से परहेज किया क्योंकि वे इस घोटाले के पर्दाफाश होने का इन्तजार कर रहे हैं। अगर बैंकों में 14.5 लाख करोड़ रुपये से एक भी रुपये ऊपर जमा हुए तो वे पूर्व कांग्रेस सरकार से पूछेंगे कि ये रुपये कहाँ से आ रहे हैं। आपने तो 14.5 लाख करोड़ रुपये ही छापे थे। अगर बैंकों में 20 लाख करोड़ रुपये जमा हुए तो मोदीजी कांग्रेस से पूछेंगे कि भैया ये 6 लाख करोड़ रुपये कहाँ से जमा हो गए आपने तो 14 लाख करोड़ ही छापे थे। अब आप पूरी पार्टी मिलकर इस 6 लाख करोड़ का हिसाब बताओ, वरना जेल में जाओ।
लोगों का कहना है की, बैंको में 1 लाख करोड़ के ऐसे नोट जमा हुए है, जिनके सीरियल नंबर का का हिसाब रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के पास है ही नहीं।
साथ ही लोगों का कहना है की, नकली स्टाम्प पेपर छापने के कारण अब्दुल करीम तेलगी को अगर सजा हो सकती है, फिर अगर आम पब्लिक में से किसी ने छोटा सा भी गोलमाल किया है तो उसको तुरंत अंदर कर दिया जाता है फिर इनको किस लिए खुला छोड़ दिया जाता है और सुरक्षा अलग से मिली हुई है, तो ऐसे ही अवैध नोट छापने के कारण रघुराम राजन को भी सजा होनी ही चाहिए।
विमुद्रीकरण का विरोध करने वाले आखिर किसके लक्ष्य की पूर्ति के लिए काम कर रहे हैं
विमुद्रीकरण की कहानी २०१० में एक कंपनी De La Rue की नकली मुद्रा में भागीदारी से शुरी हुई थी। 2009-10 के दौरान, सीबीआई ने भारत-नेपाल सीमा के साथ लगभग ७० भारतीय बैंक शाखाओं पर छापा मारा था और उनके पास नकली मुद्रा पायी गयी थी।
विमुद्रीकरण की कहानी २०१० में एक कंपनी De La Rue की नकली मुद्रा में भागीदारी से शुरी हुई थी। 2009-10 के दौरान, सीबीआई ने भारत-नेपाल सीमा के साथ लगभग ७० भारतीय बैंक शाखाओं पर छापा मारा था और उनके पास नकली मुद्रा पायी गयी थी।
छापे के बाद पता चला की नकली मुद्रा बैंको के पास सिर्फ स्मगलर्स से ही नहीं रिजर्व बैंक से भी आयी थी। ये जानकार तो सीबीआई के रौंगटे खड़े हो गए।
सीबीआई ने तभी रिजर्व बैंक पे छापे मारे और उनकी लाकर्स से रु 500 और रु 1000 के नकली मुद्रा पायी गयी।
इतना बड़ा घोटाला की देश के प्रमुख बैंक के पास की नकली मुद्रा ये बाद अविश्वनीय थी।
जो नकली मुद्रा पाकिस्तान भारत में भेज रहा था वो खुद रिजर्व बैंक जाने अनजाने देश में बाँट रहा था।
उसी दौरान उत्तर प्रदेश का एक केस सामने आया जब एक वकील ने अपने क्लाइंट की तरफ से कोर्ट में ये पेशकश की की जो नोट उसके क्लाइंट के पास थे वो नकली है इसका क्या सबूत है? वकील की बात को सिद्ध करने के लिए जब नोट लैब में भेजे गए तो पता चला की वो नोट देखने में बिलकुल असली जैसे थे और उसमे और असली नोट में फ़र्क़ कर पाना बहुत मुश्किल था।
उसी दौरान उत्तर प्रदेश का एक केस सामने आया जब एक वकील ने अपने क्लाइंट की तरफ से कोर्ट में ये पेशकश की की जो नोट उसके क्लाइंट के पास थे वो नकली है इसका क्या सबूत है? वकील की बात को सिद्ध करने के लिए जब नोट लैब में भेजे गए तो पता चला की वो नोट देखने में बिलकुल असली जैसे थे और उसमे और असली नोट में फ़र्क़ कर पाना बहुत मुश्किल था।
ये तो हाल था हमारे देश में नकली नोटों का व्यापार करने वालो का की वो कोर्ट को ही असली और नकली नोट के लिए चैलेंज कर सकते थे।
सीबीआई को जांच में पता चला की ये सब धांध्लेबाज़ी De La Rue नमक कंपनी की तरफ से हो रही है जिससे भारतीय रिजर्व बैंक ९५% नोटों की खरीदारी करता है ।
उस समय, De La Rue सरकार द्वारा काली सूची में डाल दी गयी थी और कंपनी दिवालियापन की कगार पे थी तभी De La Rue की सीईओ जेम्स हसी ने पेपर गुणवत्ता मुद्दों पर इस्तीफा दे दिया।
इसी बीच, 2010 में एक और गंभीर सुरक्षा चूक उजागर हुई, सरकार द्वारा मुद्रा की छपाई का काम जो सरकार ने कुछ जाने सोचे अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन को दे दिया. तक़रीबन रु 1 लाख करोड़ रुपये की राशि के लिए करेंसी नोटों की छपाई को आउटसोर्स किया गया था।
भारत की संपूर्ण आर्थिक संप्रभुता दाँव पर थी!
भारतीय रिजर्व बैंक ने 1997-98 में 2000 करोड़ के रु 100 के नोट और 1,600 करोड़ के रु 500 के नोट अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी को छपाई के लिए आउटसोर्स किये थे।
कमिटी की जांच के दौरान रिजर्व बैंक ने नोटों की ख़राब हालत का हवाला दिया जो की कमिटी की सोच से परे थे।
कमिटी ने यह भी पाया की बैंक की व्यवस्था और देश में बैंक नोटों की आपूर्ति में बहुत अंतर था।
ज्यादातर तीन कंपनियों को भारतीय मुद्रा आउटसोर्स किया गया था अमेरिकी बैंकनोट कंपनी (अमेरिका), De La Rue (ब्रिटेन) और Giesecke और Devrient (जर्मनी)
तभी केंद्रीय सतर्कता आयोग को वित्त मंत्रालय के अनाम अधिकारियों से एक शिकायत प्राप्त हुई जिसके अनुसार भारत की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ सिर्फ De La Rue ने ही नहीं बल्कि फ्रेंच फर्म Arjo Wiggins, संयुक्त राज्य अमेरिका की क्रेन एबी और लुसेनथल, जर्मनी ने भी किया था।
फिर सितम्बर-अक्टूबर २०१० में गुणवत्ता उल्लंघन के अनुसार सरकार द्वारा अन्य कंपनियों के दिए गए मुद्रा कागज के नमूनों की जांच हुई जिसमे संयुक्त राज्य अमेरिका की क्रेन एबी और जर्मनी की लुसेनथल, प्रयोगशालाओं में मुद्रा परीक्षण में विफल रही।
फिर २०१५ में जब मोदी सरकार ने अमेरिका से नकली करेंसी नोटों में जांच के लिए सहयोग माँगा जिसमे पता चला की जर्मन कंपनी लुसेनथल पाकिस्तान को कच्चे नोट बेच रहा थी जिसके कारण कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
सबसे बुरा यह था कि देश की पूरी मुद्रा सुरक्षा बिंदू पर टिकी हुई थी, जहाँ कुछ बेईमान कंपनी हमारी अर्थव्यवस्था पर एक कहर बनी हुई थी जो असली नोट पाकिस्तान और नकली नोट हमारे देश में भेज रही थी।
एक तरह से पूरा मुद्रा उत्पादन पाकिस्तान के साथ साझा किया हुआ था ।
नकली करेंसी नोटों को प्रिंट करने के लिए पाकिस्तान सरकार में 5 प्रिंटिंग प्रेस लगा हुई थी, जो भारत में नकली नोटों को प्रोत्साहित कर रही थी और इन मुद्रा को नेपाल और बांग्लादेश से तस्करी कर रहे थी।
ये नकली मुद्रा भारत में उत्तर प्रदेश, पंजाब, बंगाल, राजस्थान और बिहार के रास्ते देश में लायी जाती थी जो छात्र संघ जैसे की JNU, जाधवपुर, मीडिया और पत्रकारों और राजनीतिक दलों को चुनाव को प्रभावित करने में मदद करती थी।
जिस तरह से मोदी सरकार ने आक्रमण तरीके से पाकिस्तान के खिलाफ काम किया है पहले सर्जिकल स्ट्राइक फिर ये विमुद्रीकरण पाकिस्तान तीतर बितर हो गया है और भारी बमबारी के खिलाफ भारत से भीख मांग रहा है। पाकिस्तान पहले से ही 15 खरब रु मुद्रण छाप चूका था और उन्हें पूरी तरह से भारत में लाने की फिराक में था ।
अगर पाकिस्तान ऐसा करता तो ये भारत में अभूतपूर्व आतंक हमलों, मुद्रास्फीति, भारी मूल्य वृद्धि को अंजाम देती और भारत के लिए कयामत साबित होती।
जब नवम्बर 8, को कैबिनेट मंत्रियों और शीर्ष बैंकरों पर अनजाने से नोट्स-पर प्रतिबंध एक अधिनियम चरम गोपनीयता में भारतीय PM मोदी की घोषणा के द्वारा उजागर हुआ पाकिस्तान और उसके नेटवर्क को बचाने के लिए सभी प्रयास नाकाम हो गए और पाकिस्तान सारे खाने चित हो गया ।
सो सुनार की एक लौहार की
तो अब आप ये समझ सकते है की कौन सी टीम किस लक्ष्य के लिए काम कर रही है और नोट बंदी से देश का क्या फायदा होगा।
तो अब आप ये समझ सकते है की कौन सी टीम किस लक्ष्य के लिए काम कर रही है और नोट बंदी से देश का क्या फायदा होगा।
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