जनवरी 11 को स्वदेशी जागरण मंच करोल बाग जिले द्धारा कैशलेस विषय पर यशवंत चौहान, विभाग संयोजक व प्रांत प्रचार प्रमुख दिल्ली की अध्यक्षता में सुनील बंसल जिला संयोजक करौल बाग ने रघुनाथ मंदिर दिल्ली गेट, नई दिल्ली में विचार गोष्ठी का आयोजन किया .जिसमे डॉ. आनन्द कुमार सिंह, दिल्ली विश्वविधालय, डॉ. अनीस गुप्ता विश्वविधालय, डा ज्योति प्रकाश वर्मा ,दिल्ली विश्वविधालय, भाजपा ज़िला चांदनी चौक अध्यक्ष अरविन्द गर्ग आदि ने बहुत ही सरल शैली में कैशलेस एवं लेस कैश से होने वाले लाभों से सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगो का ज्ञानवर्धन किया .कार्यक्रम में अखिल भारतीय सह-महिला प्रमुख श्रीमति सुधा शर्मा जी स्वदेशी जागरण मंच और श्रीमति सोना कुमारी जी, सह-महिला प्रमुख,दिल्ली प्रांत,और श्री राकेश गोस्वामी ,क्रीडा भारती भी उपस्थित रहे।
यशवंत जी ने झंडेवालान विभाग के सुनील बंसल,पवन शर्मा , सुनील बंसल एवम सतीश गुप्ता आदि द्वारा इस गोष्ठी के आयोजन करने में जो प्रयास किया है, बहुत ही सराहनीय काम किया है। और हम सब का भी कर्तव्य है कि कम से कम एक व्यक्ति को मोबाइल के माध्यम से भीम एवं दूसरे माध्यम को डाऊनलोड करना सिखाए, तभी सरकार के इस जनहित कार्य को कर पाएंगे।कल तक हमारा भारत अल्प-विकसित देशों में गिनती होती थी और आज विकसित। जो देश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।
डॉ आनन्द ने आंकड़ो के माध्यम से कैशलेस पर प्रकाश डालते बताया कि पहले छोटे-छोटे लेन-देन का कोई रिकॉर्ड नही था, लेकिन कैशलेस या लेसकेश होने से सरकार के पास एक-एक रूपए का हिसाब होने से जनता को आने वाले दिनों में बहुत अच्छे परिणाम मिलने शुरू होंगे। जब प्रारम्भ में मोबाइल आया फोन करने और फ़ोन सुनने पर काफी खर्च होता था, परंतु जैसे-जैसे इसका प्रचलन बड़ा, कितना खर्च कम हो गया। ठीक उसी भांति कैशलेस प्रक्रिया पर भी प्रभाव पड़ेगा। बहुत ही स्पष्ट और विस्तार से आंकड़ों के माध्यम से सरकार के इस कदम को जनता हित में समझाने का सफल प्रयास किया। उन्होंने कहा, जब सरकार के पास टैक्सों में वृद्धि होगी, सरकारी योजनाओं को कार्यविंत करने में सरकार सक्षम होगी। हर निर्धन को भी उसी भांति सुविधाएं प्राप्त होंगी जो अधिक धन अर्जित करने वाले को होती हैं। कैशलेस का जीडीपी भी प्रभावित होगी। बैंक के माध्यम से भुगतान करने से पैसा बैंक में ही रहता है। मुद्रा चलन में अधिक है लेकिन उपलब्ध कम है और बैंक के माध्यम से भुगतान होने से पैसा चलन में रहा। अब विमुद्रीकरण होने से छोटा-छोटा काम करने वालों के घरों में पैसा ब्लॉक होने के कारण मुद्रा का अभाव हो रहा था।संक्षेप में इतना ही कहना उचित होगा अधिक कर आने से हम सरकार को अपराध बढ़ने की स्थिति में अधिक पुलिस की मांग कर सकते हैं। पहले बैंक इन्टरनेट न होने के कारण एक दूसरे से लिंक नहीं थे, लेकिन आज इस आधुनिक युग में हर बैंक दूसरे बैंक सी जुड़ा है।
प्रो ज्योति प्रकाश ने बताया कि पहले लगभग 5% ही बैंक द्धारा लेन-देन था, जबकि यूएसए में 34%, प्रत्येक पार्टी अपने घोषणा पत्र में कालेधन के विरुद्ध लड़ाई का उल्लेख करते हैं, लेकिन साहस किसी ने नहीं किया, हमें इस सरकार पर गर्व करना चाहिए कि कालेधन और भ्रष्टाचार के विरुद्ध शंखनाद किया। पहले सात में से एक नकली नोट चलन में था, जिस कारण भ्रष्टाचार और कालाधन विकराल रूप धारण कर गया था। आज विरोधी क्या नोटबंदी से भ्रष्टाचार और कालाधन समाप्त हुआ? जनता इनकी भ्रमित बातों में फंस जाते हैं। सरकार के इस साहसिक कदम से इन दोनों पर प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है। जब इन् काले कारनामो पर जो कुठाराघात हुआ है भारत की अर्थव्यवस्था भी शक्तिशाली होगी।
डॉ अनीस गुप्ता ने विमुद्रीकरण का जाली नोट, आतंकवाद और कालेधन पर हुए प्रभावों से जनता को अवगत करवाया। विमुद्रीकरण होते ही देखिए लगभग 600 नक्सलियों ने आत्म समर्पण करने का समाचार आया। कश्मीर में पत्थरबाज़ी बंद हो गयी, अलगाववादी तड़प रहे हैं। क्या यह विमुद्रीकरण के अच्छे प्रभाव नहीं?विपक्ष केवल उन्ही नकली नोटों की बात कर रहा है, जो बैंक द्धारा पकड़ा गया, लेकिन उस धन की बात नहीं करता जो नदियों में, नालों में, कब्रिस्तानों में फेंकने के आलावा जलाए गए। पाकिस्तान में हड़कम मच गया।
अरविन्द गर्ग ने अपने सम्बोधन में एक बात स्पष्ट रूप से बताया कि मीडिया, और विपक्ष विमुद्रीकरण को नोटबंदी का नाम देकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। सबसे पहले हमें विमुद्रीकरण और नोटबंदी के बीच अंतर को समझना होगा। वास्तव में इन दोनों में ज़मीन आसमान का अन्तर है। नोटबंदी का मतलब है नोट बंद हुआ, शायद ही कोई भारतीय होगा, जिसके साथ ऐसा हुआ है। सरकार ने नोट बदली की है। किसी ने हाथ के हाथ नोट बदले तो किसी ने अपने खाते में जमा कर चेक के माध्यम से अपने खाते से निकले। अब बताइये नोट कहाँ बंद हुआ।
पवन शर्मा ने कहा "142, मर गए ,नोटबंदी,मे , नोटबंदी बंद कर देनी चाहिए।" कृपया मुझे जबाब चाहिए ।
149 ट्रेन दुर्घटना में मर गए, ट्रेन बंद होनी चाहिए ?
सीमा पर इतने सारे जवान मारे गये,
सीमा सुरक्षा बंद कर देनी चाहिए?
लाखों लोग न्याय के इंतजार में न्यायालय की चौखट पर दम तोड़ चुके हैं, न्यायालय बंद होने चाहिए?
मोबाइल फोन के विस्फोट से इस देश में अब तक 4 मौतें, और 1543 लोग घायल हो चुके हैं, मोबाइल फोन पर पाबंदी होनी चाहिए?
दारु पीने से हर साल हजारों की संख्या में लोग मरते, और करोड़ों बीमार होते हैं, दारु बंद होनी चाहिए?
नेताओं की रैलियों में हुई भगदड़ से अब तक, न जाने कितना मर गए।
रैलियों पर पाबंदी लगा देनी चाहिए?
धार्मिक स्थलों पर भीड़ में भगदड़ में हजारों मर जाते है। धार्मिक समारोहों पर पाबन्दी होनी चाहिए ?
गोष्ठी का समापन करते यशवंत चौहान कहा किवक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए इससे आतंकवाद, नक्सलवाद, हवाला, नकली नोट, पाकिस्तान से छापने वाली नकली नोटों पर रोक लगेगी। कश्मीर की पत्थर बाजी की समस्या का हल हुआ,स्कूल व कालेज खुले,परीक्षाएँ हुई और दाखले की प्रक्रिया शुरू हुई।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को शपथ दिलाई गई कि वह व्यक्ति को भीम,एस बी आई बढी का प्रयोग करना सीखयेगें और कैशलेस का दैनिक जीवन में प्रयोग करेगें। सफल कार्यक्रम के लिऐ करोल बाग जिले को बधाई।
नोट-बदली के बाद आयी औद्योगिक उत्पादन में तेजी, खुदरा मंहगाई दर घटने से गरीबों की बल्ले बल्ले
रिपोर्ट लिखते-लिखते सूत्रों से बहुत ही ज्ञानवर्धक निम्न समाचार मिला,जो नोट-बदली यानि विमुद्रीकरण का दुष्प्रचार करने वालों के लिए दुःखद हो सकती है। इसलिए वक्ताओं के विचारों को संक्षेप कर, उन्हें के कथनों को प्रभावी बनाने के उदेश्य से देश में श्रीगणेश हुए विमुद्रीकरण के प्रभाव जनमानस के समक्ष प्रस्तुत है। ताकि गोष्ठी में उपस्थित आम नागरिकों को इस बात का बोध हो सके कि स्वदेशी जागरण मंच केवल सरकार की वाहवाही करने के उद्देश्य से आयोजित नहीं की गयी. धरातल पर इसके सुखद परिणामों का श्रीगणेश हो चूका है। नोट-बदली के बाद औद्योगिक उत्पादन में तेजी देखने को मिली है जबकि खुदरा महगाई में गिरावट आ गयी है जिसकी वजह से गरीबों के अच्छे दिन शुरू हो गए हैं, दाल, सब्जियां, खाने के अन्य सामान काफी सस्ते हो गए हैं जिसकी वजह से गरीब हर तरह का खाना खा पी रहे हैं वही उत्पादन में वृद्धि देखने को मिली है जिसकी वजह से आने वाले दिनों में देश की विकास दर बढ़ने के अनुमान है।
नवंबर में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर बढ़कर 5.7 फीसदी रही। वहीं, दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट देखी गई और यह 3.41 फीसदी, जबकि नवंबर में यह 3.63 फीसदी थी। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के मुताबिक पिछले साल अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन में 1.81 फीसदी गिरावट आई थी, जबकि उसके पिछले साल के समान महीने के मुकाबले यह गिरावट 3.4 फीसदी थी।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोतरी का मुख्य कारण विर्निमाण उत्पादन में हुई 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी है, जिसका कुल सूचकांक में सबसे ज्यादा योगदान है।
अन्य दो महत्वपूर्ण उपसूचकांकों में बिजली उत्पादन में 8.9 फीसदी और खनन में 3.9 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के मुताबिक खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर में पिछले साल के समान अवधि के मुकाबले 5.61 फीसदी कम रही।
सीपीआई में यह गिरावट मुख्यत: वार्षिक खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट के कारण आई है जो दिसंबर में 1.37 फीसदी और नवंबर में 2.03 फीसदी रही थी।
सीपीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण भारत की खुदरा मुद्रास्फीति दर दिसंबर में 3.83 फीसदी रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 2.90 फीसदी रही। वार्षिक मुद्रास्फीति की दर ग्रामीण क्षेत्रों में 2.06 फीसदी तथा शहरी क्षेत्रों में 0.15 फीसदी रही।






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