Skip to main content

नोटबंदी: आपकी ID से ऐसे हुआ दूसरों का कालाधन सफेद

black-jaoosनोटबंदी से भले ही कुछ लोगों को परेशानी हो रही हो और जनता को लाईन में लगकर कैश निकलना पड़ रहा हो लेकिन इससे बहुत सारे फायदे भी हुए हैं, सबसे बड़ा फायदा तो यह हुआ है कि देश के कालाधन और फेक करेंसी ख़त्म हो गयी है।
यदि मोदी का नोटबंदी निर्णय गलत होता तो महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी द्धारा संसद में भाग लेने वाले उन  सांसदों पर जमकर हमला नहीं बोलते, जो रोज़ संसद में हंगामा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के सांसद जिन्हें जनता ने चुना है वो सदन में बहस न करके देश का समय और पैसा बर्बाद कर रहे हैं।
देश से ब्लैक मनी और फेक करेंसी ख़त्म होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी गति मिलेगी और जितनी भी करेंसी होगी वह सिस्टम की नजर में रहेगी, डॉलर के मुकाबले रूपया मजबूत होगा। 
मोदी का यह भी कहना ठीक है "मैं धीरे-धीरे खुराक दे रहा था", लेकिन किसी ने संकेत नहीं समझे। इतना ही नहीं, इन्होंने यह भी कहा था "संसद की भी सफाई करनी है", तब भी किसी ने संकेत नहीं समझे। 
मैं स्वयं 2012 गुजरात चुनावों से नरेंद्र मोदी या नरेंद्र मोदी जैसे सख्त प्रशासक को प्रधानमन्त्री देखने का स्वप्न संजोए हुए था, जिसका वर्णन सेवानिर्वित होने उपरान्त एक हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते मोदी की तुलना भूतपूर्व प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री से करते लिखा था, "लाल बहादुर शास्त्री के बाद भारत को एक सख्त प्रशासक मिला है"! काश ताशकंत से शास्त्रीजी जीवित आ गए होते। छद्दम धर्म-निरपेक्ष साम्प्रदायिकता भूल गए होते। 
मोदी सरकार को चाहिए कि जिन लोगों ने आधारकार्ड पर नोट बदले हैं, उसकी गंभीरता से जाँच करनी चाहिए। लोगों को कमीशन का लालच देकर कालेधन को सफ़ेद करके आम नागरिकों को हुई दिक्कत की सच्चाई जगजाहिर करने से विरोधियों को बेनकाब किया जाए, जो इस नोटबंदी से कहीं अधिक सख्त कदम होगा। 
कुछ समय पूर्व इसी ब्लॉग पर निम्न लेख लिखा था :--

http://nigamrajendra28.blogspot.in/2016/07/blog-post_3.html

इस लेख में गरीबी का स्वांग खेल सरकार की आँखों में धूल झोंकने वालों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। 
नोटबंदी: बैंक में जमा आपके पैसेे जल्दी हो जाएंगे डबल, करने होंगे ये कामनोटबंदी के कारण हुई जनता को परेशानी, नोटबंदी से नहीं बल्कि अन्य बैंकों से अधिक रिज़र्व बैंक जिम्मेदार है, जिसने केवल नए 500 एवं 2000 के नोट बैंकों को दिए। रिज़र्व बैंक को चाहिए था इस नयी मुद्रा के साथ-साथ 100 एवं 50 के नोट अगर दिए जाते, इतनी दिक्कत नहीं होती। फिर अगर शुरू से ही आधारकार्ड को कंप्यूटर पर लोड किया जाता, एक सप्ताह उपरान्त ही बैंकों में लगती लाइनें समाप्त हो गयी होती। घरों में काम करने वाले/वाली, दैनिक मजदूरी करने वालों ने स्याही लगने से पहले चार दिनों में 10,000 रूपए कमीशन में कमाए। कई नेताओं ने तो अपने-अपने कार्यकर्ताओं को लाइनों में लगवाकर अपने काले धन को सफ़ेद करवाने में सफल हुए हो गए। और जनता को भ्रमित कर रहे है कि "पूछो मोदी से कितना काला धन बाहर आया?" 
देश भर के 50 बैंको में पड़े ED के छापे के बाद बैंक कर्मियों द्वारा काले पैसे को सफ़ेद करने के बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है. लखनऊ में भी 4 बैंको की 10 शाखाओं में ED ने छापेमारी की, और जो खुलासा हुआ है उसने सबके होश उड़ा दिए हैं. सूत्रों के मुताबिक आईबी ने यूपी के 1325 ऐसे बैंक चिन्‍हित किए हैं जिन्होंने नियमों से परे जाकर पुराने नोटों को नए नोटों में बदला है.
सूत्रों के अनुसार रुपये के बदलने में जिस ID का इस्तेमाल किया गया उसके मालिक को पता ही नहीं कि उसके ID पर हजारो का काला धन सफ़ेद किया जा चुका है.
अब तक की जांच में पता चला है कि एक ही आईडी से एक ही व्‍यक्‍ति को कई-कई बार पुराने के बदले नए नोट दिए गए. मगर जब इस बात की पड़ताल की गयी कि बड़ी संख्या में ID मिले कैसे तब असल खेल समझ में आया। 
IB से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि भ्रष्ट बैंक कर्मियों ने यह ID मोबाईल सिम का कारोबार करने वालों से खरीदे. इसके अलावा कई कालेजो से भी छात्र छात्राओं की ID खरीदी गयी. इन ID को खरीदने के लिए 300 से 500 की दर से भुगतान किया गया. इसके बाद 20 से 30 प्रतिशत का कमीशन ले कर पैसे बदल दिए गए.
मोबाईल आउट लेट चलाने वाले एक शख्स ने नाम का खुलासा न करने की शर्त पर बताया कि जो ग्राहक सिम कार्ड खरीदने आता है उसकी ID ले ली जाती है और आम तौर पर यह ID दूकानदार के पास पड़ी ही रहती है. सामान्यतः किसी भी अच्छे आउटलेट पर 1500 से 2000 तक ऐसी ID रहती ही हैं. जब कुछ बैंक कर्मियों ने उनसे कुछ ID मांगी तब यह खेल समझ में आ गया और फिर मोबाईल आउटलेट वालो ने भी जम कर माल काटा.
इसके साथ ही स्कूल कालेजो के पास भी छात्र छात्राओं की ID रहती है जिसका इस्तेमाल छात्रवृत्ति के खाते खुलवाने के अलावा भी किया जाता है।  ऐसे स्कूलों से भी थोक मात्र में ID खरीदी गयी और 9 नवम्बर से ले कर 15 नवम्बर के बीच हर ID पर कई कई बार पैसे बदले गए। इस खेल में कई नामी प्राईवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटी और कॉलेज संचालकों ने भी अपना काला धन को सफेद कर लिया।      
कालाधन रोकने के लिए सरकार ने नोटबंदी जैसा एक बड़ा फैसला लिया था। लेकिन नतीजा कुछ और ही निकल रहे हैं। नोटबंदी के फैसले के बाद बड़े पैमाने पर कालेधन को सफेद करने के कई मामले सामने आये हैं। लेकिन एक चौंकाने वाला खुलासा ये हुआ है कि मोबाइल फोन आउटलेट से लाखों लोगों की आइडी और स्‍कूल-कॉलेजों से भारी संख्‍या में छात्र-छात्राओं के पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर कालेधन को सफेद करने का खेल खेला गया है। माना जा रहा है कि बैंकों ने ब्‍लैक मनी रखने वालों से मिलीभगत कर सरकार का खेल खराब कर दिया। लेकिन सरकार अब इन संदिग्‍ध बैंकों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। सरकार ने राष्‍ट्रीय स्‍तर पर आइबी से इसकी रिपोर्ट जमा करवानी शुरू कर दी है। कार्रवाई की जिम्‍मेदारी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपी गई है। ईडी ने देश के 10 बैंकों की 50 शाखाओं पर छापे मारकर काम शुरू भी कर दिया है। 
 
अवैध तरीके से ब्‍लैक मनी को व्‍हाइट में बदला गया
बताया गया है कि नोटबंदी के दो सप्‍ताह बाद तक यानी 24 नवंबर तक नोट एक्‍सचेंज के नाम पर बड़े पैमाने पर ब्‍लैक मनी को व्‍हाइट में बदलने का काम हुआ। नोटबंदी के दौरान अनियमितता बरतने के आरोप में अब तक  27 बैंक कर्मी सस्‍पेंड हो चुके हैं। एक्‍सिस बैंक के मैनेजर तो 40 करोड़ रुपये की काली रकम सफेद करने के आरोप में पकड़े जा चुके हैं। न्‍यूज 18 इंडिया कि खबर के मुताबिक, देशभर में गड़बड़ी करने वाले बैंकों की संख्‍या करीब 25 हजार बताई जा रही है। कालेधन को समाप्‍त करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का एलान किया था। इसे बैंक में एक्‍सचेंज करने और जमा करने का वक्‍त दिया था। बताया गया है कि इसी दौरान सभी नियमों को ठेंगा दिखाकर दिन-रात अवैध तरीके से ब्‍लैक मनी को व्‍हाइट में बदला गया है।
 
बदली गई नोटों की संख्‍या
सूत्रों के मुताबिक आइबी ने यूपी के 1325 ऐसे बैंक चिन्‍हित किए हैं जिन्होंने नियमों से परे जाकर पुराने नोटों को नए नोटों में बदला है। दूसरी ओर हरियाणा में भेजी गई आइबी की गाइडलाइन के मुताबिक 21 बिंदुओं पर उन्‍हें बैंकों की रिपोर्ट भेजनी है। उन्‍हें उन बैंकों पर निगाह रखने के लिए कहा गया है जहां बार-बार हंगामा हो रहा है और नो कैश का बोर्ड लगाया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हर रोज औसत से ज्‍यादा नोट बदले गए हैं। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि हर रोज की बदली गई नोटों की संख्‍या पर गौर करें तो ऐसा लगता है कि बैंकों में दिन-रात काम किया गया है।
 
ऐसे खेला गया खेल
एक ही आइडी से एक ही व्‍यक्‍ति को कई-कई बार पुराने के बदले नए नोट दिए गए। आइडी मोबाइल फोन आउटलेट से ली गई। इसके अलावा स्‍कूल-कॉलेज से छात्र-छात्राओं की आइडी एकत्र की गई। जनता को आइडी पर 4000 के बदले 2000 या उससे भी कम रकम देकर उसका इस्‍तेमाल ब्‍लैक मनी को वहाइट में बदलने के लिए किया गया। दो नामी मोबाइल कंपनी के आउटलेट चलाने वाले एक व्‍यक्‍ति ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि ये आउटलेट वाले पर निर्भर करता है कि वो किसी भी ग्राहक की आइडी अपने पास कितने दिन तक रखता है। लेकिन आमतौर पर किसी भी आउटलेट पर एक से डेढ़ हजार तक आइडी आराम से मिल जाती हैं। कुछ लोग सीधे आइडी खरीदने आए तो कुछ लोगों ने दूसरों को आइडी खरीदने भेजा। रहा सवाल कितने की बिकी तो जिसका जैसे सौदा पट गया। क्‍योंकि यह खेल आउटलेट वालों को भी समझ में आ गया था तो 400 से 500 रुपये तक एक आइडी के वसूले गए। एक शहर में एक कंपनी की कम से कम 6 से 8 आउटलेट होते हैं।
 
छात्रों की आइडी का इस्‍तेमाल नोट बदलने में होने लगा
सवाल उठता है कि कालेधन को सफेद करने के लिए कॉलेज के छात्रों की ही आइडी का इस्‍तेमाल क्‍यों किया गया और छात्रों की आइडी इतनी आसानी से मिल कैसे गई? जांच पड़ताल में सामने आया है कि कुछ बड़ी-बड़ी डीम्‍ड यूनिवर्सिटी और कॉलेज संचालकों ने भी कालेधन को सफेद किया है। इसके लिए उन्‍होंने नोट बदलने की प्रक्रिया को चुना। काम आसान भी था। क्‍योंकि ये कोई बाध्‍यता नहीं थी कि जहां आप नोट बदल रहे हैं वहां आपका खाता होना जरूरी है। कॉलेज वालों के पास छात्रों की आइडी भी मौजूद थी। उसी से कालाधन सफेद कर लिया। कहा जाता है कि कॉलेज संचालकों का यह तरीका बैंक कर्मियों को भी समझ में आ गया। फिर क्‍या था, देशभर में धड़ाधड़ छात्रों की आइडी का इस्‍तेमाल नोट बदलने में होने लगा। नाम न लिखने की शर्त पर एक कॉलेज संचालक ने बताया कि छात्रवृत्‍ति के चलते बहुत सारे छात्रों का बैंक अकाउंट होता है। मोबाइल नम्‍बर भी होता है, जिसके चलते बैंककर्मियों को नोट बदलने में आसानी हो गई। बस इसी बात को बहुत सारे बैंक वाले आसानी से समझ गए और उन्‍होंने दूसरे लोगों को भी यह तरीका अपनाने की सलाह दे डाली।
 
200 से 500 रुपये तक में बिकी छात्रों की आइडी
ये खेल शुरू होते ही छात्रों की आइडी की मांग होने लगी। कालेधन वालों ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी के चक्‍कर लगाने शुरू कर दिए। कहीं-कहीं तो बैंककर्मियों ने खुद ही छात्रों की आइडी की जुगाड़ करके कालेधन वालों को दी। 200 रुपये प्रति आइडी से शुरू हुआ खेल 500 रुपये आइडी तक पहुंच गया। जिन शहरों के बैंक आए आइबी के निशाने पर उनमें दिल्‍ली, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता, जौनपुर, इटावा, कन्‍नौज, अलीगढ़, बरेली, मऊ, आगरा, मेरठ, गोंडा, गाजीपुर, पीलीभीत, गोरखपुर, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, आजमगढ़, बदायूं, संभल, गाजियाबाद, नोएडा, लखनऊ, बरेली, कानपुर, इलाहबाद, हाथरस, रामपुर, सहारनपुर, बहराइच, बांदा, फर्रुखाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव आदि हैं।
आज(दिसम्बर 8) को नोटबंदी को एक माह पूर्ण होने पर,  ट्विटर पर #IndiaDefeatsBlackMoney ट्रेंड कर रहा है और तरह तरह के कमेंट लिख रहा हैं। आप भी पढ़ें, लोग कैसे अपने विचार साझा कर रहे हैं -


Incidents of stone-pelting have reportedly reduced drastically in the Valley ever since demonetisation announcement. 

Demonetisation has badly affected the hawala rackets of transferring money without any actual money movement. 

Comments

AUTHOR

My photo
shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

Popular posts from this blog

भोजपुरी एक्ट्रेस त्रिशा कर मधु का MMS…सोशल मीडिया पर हुआ लीक

सोशल मीडिया पर भोजपुरी एक्ट्रेस और सिंगर त्रिशा कर मधु का MMS लीक हो गया है, जिससे वो बहुत आहत हैं, एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया है, त्रिशा मधु ने इस बात को कबूल किया है कि वीडियो उन्होंने ही बनाया है लेकिन इस बात पर यकीन नहीं था कि उन्हें धोखा मिलेगा। गौरतलब है कि हाल ही में त्रिशा का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें वह एक शख्स के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रही थीं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद अभिनेत्री ने इसे डिलीट करने की गुहार लगाई साथ ही भोजपुरी इंडस्ट्री के लोगों पर उन्हें बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाया। त्रिशा मधु कर ने अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो के साथ पोस्ट लिखा है जिसमें कहा, आप लोग बोल रहे हैं कि खुद वीडियो बनाई है। हां, हम दोनों ने वीडियो बनाया थ। पर मुझे ये नहीं मालूम था कि कल को मेरे साथ धोखा होने वाला है। कोई किसी को गिराने के लिए इतना नीचे तक गिर जाएगा, यह नहीं पता था। इससे पहले त्रिशा ने वायरल हो रहे वीडियो पर अपना गुस्सा जाहिर किया था और कहा था कि उनको बदनाम करने को साजिश की जा रही है। त्रिशा मधु कर ने सोशल मीडिया पर ए...

राखी सावंत की सेक्सी वीडियो वायरल

बॉलीवुड की ड्रामा क्वीन राखी सावंत हमेशा अपनी अजीबो गरीब हरकत से सोशल मिडिया पर छाई रहती हैं। लेकिन इस बार वह अपनी बोल्ड फोटो के लिए चर्चे में हैं. उन्होंने हाल ही में एक बोल्ड फोटो शेयर की जिसमें वह एकदम कहर ढाह रही हैं. फोटो के साथ-साथ वह कभी अपने क्लीवेज पर बना टैटू का वीडियो शेयर करती हैं तो कभी स्नैपचैट का फिल्टर लगाकर वीडियो पोस्ट करती हैं. वह अपने अधिकतर फोटो और वीडियो में अपने क्लीवेज फ्लांट करती दिखती हैं. राखी के वीडियो को देखकर उनके फॉलोवर्स के होश उड़ जाते हैं. इसी के चलते उनकी फोटो और वीडियो पर बहुत सारे कमेंट आते हैं. राखी अपने बयानों की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहती हैं.राखी अक्सर अपने रिलेशनशिप को लेकर हमेशा चर्चा में बनी रहतीं हैं. राखी कभी दीपक कलाल से शादी और लाइव हनीमून जैसे बयान देती हैं तो कभी चुपचाप शादी रचाकर फैंस को हैरान कर देती हैं. हंलाकि उनके पति को अजतक राखी के अलावा किसी ने नहीं देखा है. वह अपने पति के हाथों में हाथ डाले फोटो शेयर करती हैं लेकिन फोटो में पति का हाथ ही दिखता है, शक्ल नहीं. इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर राखी जो भी शेयर करती हैं वह भी चर्चा ...

Netflix फैला रहा हिन्दू घृणा : ‘हल्लिलूय्याह’ बन गया ‘अनंत आनंदम्’, बच्चों का यौन शोषण करने वाला हिन्दू बाबा

                             Netflix लो वेब सीरीज 'राणा नायडू' में वेंकटेश और राणा दग्गुबती भारत में आजकल गालियों और सेक्स को ही वेब सीरीज मान लिया गया है। इसमें अगर हिन्दू घृणा का छौंक लग जाए तो फिर कहना ही क्या। चाहे ‘पाताल लोक’ में पंडित के मुँह से माँ की गाली बुलवाने वाला दृश्य हो या फिर ‘मिर्जापुर’ में ब्राह्मण को लालची बता कर उसे उठा कर भगाने का, OTT पर धड़ाधड़ रिलीज हो रहे ये वेब सीरीज इन मामलों में निराश नहीं करते। ऐसी ही एक नई वेब सीरीज Netflix पर आई है, ‘राणा नायडू’ नाम की। हिन्दू भावनाओं के प्रति जितनी जागरूकता सरकार और हिन्दुओं में देखी जा रही है, उतनी कभी नहीं। 70 के दशक में वैश्यवृत्ति पर आधारित निर्माता-निर्देशक राम दयाल की फिल्म 'प्रभात' का प्रदर्शन हुआ, जिसे विश्व हिन्दू परिषद द्वारा नायक और नायिका के राम एवं सीता होने पर आपत्ति करने राम दयाल को दोनों के नाम परिवर्तित होने को मजबूर होना पड़ा था। इसके अलावा कई फिल्में आयी जिनमें हिन्दू मंदिरो को बदनाम किया जाता रहा है। यही कारण है कि राहुल गाँधी द्वा...