द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने अपने सदस्यों को एडवायजरी जारी कर कहा कि वे केंद्र सरकार के 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने के फैसले की आलोचना करने से बचें। संस्था की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है, ”सभी सदस्यों को सलाह दी जाती है कि नोटबंदी को लेकर अपने क्लाइंट को राय देने और किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर विचार व्यक्त करने को लेकर सावधान रहें।” एडवायजरी के अनुसार, ”सदस्यों को कड़ाई से सलाह दी जाती है कि वे गलत कामों में शामिल ना हो और ना ही नोटबंदी को लेकर लेख या साक्षात्कार के जरिए नकारात्मक बयान ना दें।” यह एडवायजरी छह सीए के अवैध काम में शामिल होने की जानकारी सामने आने के बाद जारी की गई है।
आईसीएआई ने बताया कि गलती कर रहे सदस्यों को समझाने के लिए आईसीएआई काम कर रही है। तात्कालिक कदम उठाए गए हैं और संबंधित सदस्यों के खिलाफ जांच शुरू की गई है। संस्था ने नोटबंदी को आर्थिक विकास के लिए जोरदार बूस्ट बताया था। साथ ही इस कदम को कालेधन से चल रही समानांतर अर्थव्यवस्था पर करारा वार कहा था। आईसीएआई के अनुसार, ” इस कदम से ना केवल काले धन को दूर करने में मदद मिलेगी बल्कि यह राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को रोकने में भी सफलता मिलेगी।”
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने का एलान किया था। उस समय सरकार ने कहा था कि इस कदम से कालेधन, जाली नोट, आतंकवाद और नक्सलवाद से लड़ने में मदद मिलेगी। इसके बाद अब कैशलैस ट्रांजेक्शन को बढा़वा देने की बात की जा रही है। लेकिन बैंकों और एटीएम के बाहर लोगों की लाइनें कम नहीं हो रही है। वित्त मंत्रालय के अनुसार देश में 85 प्रतिशत एटीएम को नए नोटों के अनुसार बदल दिया गया है लेकिन धरातल पर ऐसा दिख नहीं रहा। सबसे ज्यादा दिक्कत 500 रुपये के नोटों की कमी के चलते हो रही है। हालांकि आरबीआई कहना है कि पर्याप्त कैश मौजूद है।
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