13,860 करोड़ रुपए की ब्लैकमनी का खुलासा करने के बाद गिरफ्तार हुए गुजराती व्यापारी महेश शाह को आयकर विभाग ने छोड़ दिया है। उम्मीद की जा रही थी कि महेश शाह पर आपराधिक धाराओं के अंतर्गत बड़ी कार्यवाही की जायेगी लेकिन आयकर विभाग ने महेश शाह के बयान लेकर उसे आज़ाद कर दिया । विभाग ने शनिवार को गिरफ्तार करने के बाद घंटों पूछताछ की और शाह के बयान रिकॉर्ड किए।
इसके बाद शाह को छोड़ दिया गया है और सोमवार को फिर आने के लिए कहा है। आईटी विभाग के संयुक्त निदेशक विमल मीणा ने रविवार को बताया कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने महेश शाह का बयानों को रिकॉर्ड कर लिया है। बता दें कि महेश शाह को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीम ने शनिवार को हिरासत में ले लिया था। जिसके बाद शाह के परिवार को पुलिस सुरक्षा दी गई है।
30 सितंबर की रात 13,860 करोड़ की अघोषित संपत्ति की दी थी सूचना
दें कि शाह आय घोषणा योजना के अंतिम दिन 30 सितंबर की रात को आयकर विभाग के दफ्तर गए थे, जहां उन्होंने स्टेच्युरी फॉर्म- 2 जमा कर अपने पास 13,860 करोड़ रुपये नकदी होने की जानकारी दी थी। बाद में उनका यह फॉर्म स्वीकार हो गया, जिसका अर्थ यह है कि विभाग ने उनकी घोषणा को स्वीकार कर लिया है।
शाह को घोषित आय का 45 प्रतिशत हिस्सा कर के रूप में जमा करवाना था, जो मोटे तौर पर 6237 करोड़ रुपये बनते हैं। 1560 करोड़ रुपये की पहली किश्त 30 नवंबर को देय थी, लेकिन जब वह नहीं दे पाए तो उनका फॉर्म रद करते हुए आयकर विभाग ने उनकी तलाश शुरू कर दी थी।
घोषित संपत्ति की पहली किश्त नहीं कर पाए जमा
शाह ने शनिवार को एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में कहा कि उन्हें कुछ व्यवसायियों और राजनेताओं ने इस्तेमाल किया है, जिनके बारे में वह जल्द खुलासा करेंगे। 29 नवंबर को गायब हुए महेश शाह शनिवार को सामने आए।
उनका कहना है कि जिन लोगों ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा, वह पीछे हट गए और, ‘मैं पहली किश्त नहीं दे पाया।’ शाह के अनुसार, उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया है, लिहाजा वह जल्द ही सबकुछ बताएंगे। गौरतलब है कि घोषित संपत्ति की पहली किश्त जमा करवाने में विफल रहने पर आयकर अधिकारियों ने 67 वर्षीय शाह के घर और दफ्तर में दबिश दी थी।
आयकर घोषणा योजना (आईडीएस) के तहत दो महीने पहले 13,680 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का खुलासा करने वाले गुजरात के कारोबारी महेश शाह ने शनिवार को कहा कि कुछ कारोबारियों व राजनेताओं ने अपने पैसे की घोषणा करने के लिए उनका इस्तेमाल किया, जिनके नाम वह जल्द ही सामने लाएंगे। बीते 29 नवंबर को फरार होने के लगभग एक सप्ताह बाद शाह अहमदाबाद में टेलीविजन चैनल ईटीवी के स्टूडियो में दिखाई दिए, जहां आयकर विभाग ने प्रॉपर्टी डीलर शाह को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।
इससे पहले उन्होंने टेलीविजन चैनल से कहा, "आईडीएस के तहत मैंने 13,860 करोड़ की संपत्ति की जो घोषणा की है, वह मेरे नहीं हैं।"
कारोबारी ने कहा कि ऐसा करने के लिए किसी ने मुझे मजबूर नहीं किया था, बल्कि इस संपत्ति की घोषणा करने के लिए मुझे कमीशन देने का वादा किया गया था।
शाह ने कहा, "जिन लोगों के पैसों की घोषणा आईडीएस के तहत की गई थी, वे अपनी बात से पीछे हट गए, जिस कारण मैं पहली किस्त अदा नहीं कर सका।"
उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी का अहसास हो चुका है और आयकर विभाग को सभी सूचनाएं मुहैया कराने के बाद जल्द ही वह सारा खुलासा कर देंगे।
शाह ने कहा, "जिनके पैसों की घोषणा की गई है, वे कारोबारी और राजनीतिज्ञ हैं।"
शाह (67) तब सुर्खियों में आए, जब आम माफी योजना के तहत घोषित संपत्ति की पहली किश्त देने में नाकाम होने के बाद आयकर अधिकारियों ने उनके आवास तथा अहमदाबाद स्थित उनके कार्यालय पर छापेमारी की थी।
आयकर अधिकारियों के समक्ष घोषणा को सामने रखने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट तहमूल सेठना ने शुक्रवार को कहा कि अपने मुवक्किल से उनकी अंतिम बातचीत 29 नवंबर को हुई थी।
आईडीएस के अंतिम दिन 30 सितंबर की रात शाह आयकर कार्यालय गए थे।
उन्होंने 14 अक्टूबर को आईडीएस के तहत सांविधिक फॉर्म नंबर-2 दिया था। आयकर विभाग ने बाद में फॉर्म नंबर-2 के प्रतिवेदन की पुष्टि की थी, जिसका मतलब होता है कि आयकर विभाग ने उनकी घोषणा को स्वीकार कर लिया है।
आईडीएस उन लोगों को कानून से राहत प्रदान करता है, जो अपनी अघोषित आय की घोषणा करते हैं और कर का भुगतान करते हैं।
शाह को कुल घोषित पैसों का 45 फीसदी यानी लगभग 6,237 करोड़ रुपये कर के रूप में भुगतान करना था। 30 नवंबर को 1,560 करोड़ रुपये की पहली किस्त दी जानी थी।
लेकिन जब वह पहली किस्त अदा करने में नाकाम हुए, तो आयकर विभाग के अधिकारियों ने फाइनेंस एक्ट, 2016 (आईडीएस) की धारा 193 के तहत उनके फॉर्म नंबर-2 को रद्द कर दिया और शाह तथा उनकी कंपनी के पते पर छापेमारी शुरू कर दी।
Comments