मोबाइल भुगतान मंच पेटीएम में लेनदेन संबंधी दिक्कतें जारी हैं और अनेक लोगों को शिकायत है कि उनके बैंक खाते से तो पैसे कट गए लेकिन पेटीएम एकाउंट में नहीं पहुंचे। इसके साथ ही पेटीएम का इस्तेमाल करने वाले अपने मौजूदा बकाया नहीं देख पा रहे हैं जबकि कुछ लोगों के अनुसार वे अपने बकाया को वापस बैंक खाते में भी नहीं भेज पा रहे हैं। पेटीएम का इस्तेमाल करने वालों को ये दिक्कतें पिछले कई दिनों से सामने आ रही हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि लेनदेन आइटी सृजित नहीं होने के कारण पेटीएम के ग्राहक सेवा अधिकारी भी मदद नहीं कर पा रहे हैं। वहीं एप्पल के हैंडसेट इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों का कहना है कि वे पेटीएम का इस्तेमाल ही नहीं कर पा रहे।
पेटीएम के प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे मामले नियमित रूप से सामने आते हैं जिसमें सर्वर कनेक्टिविटी, बैंक डाउनटाइम या अन्य तकनीकी कारणों के बीच ग्राहक के बैंक खाते से पैसा कट तो जाता है लेकिन पेटीएम में नहीं पहुंच पाता।
प्रवक्ता ने कहा, ‘इस तरह का लेनदेन 48 घंटे में खुद ब खुद ही सही हो जाता है। इस समय बैंक सर्वरों पर दबाव है इसलिए इस तरह के मामले अधिक सामने आ रहे हैं।’
उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा 500 व 1000 रुपए के मौजूदा नोटों को चलन से बाहर किए जाने के बाद पेटीएम जैसे मोबाइल वालेट व अन्य डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल काफी बढा है। हालांकि, इसके साथ ही इनमें लेनदेन पूरा नहीं हो पाने के मामले भी बढ़े हैं।
पेटीएम का कहना है कि वह अपना काम नये सर्वरों पर डाल रही है और अतिरिक्त क्षमता जोड़ रही है इस कारण भी कुछ तकनीकी दिक्कत आ रही है। वहीं एप्पल हैंडसेटों पर पेटीएम में दिक्कत के बारे में कंपनी का कहना है कि आइओएस एप में कुछ दिक्कत है जिसे वह दूर कर एप्पल से इस बारे में आग्रह करेगी।
पेटीएम की असलियत
आज आपको पेटीएम की वो असलियत बता रहा हूँ, जो वास्तव मे हर भारतीय को जान लेना चाहिए...मै चाहूंगा कि हफ़्तों की मेहनत से लिखे गए इस लेख को आप पूरा पढ़े ...और सहमत हो तो शेयर भी करे..!
एक बात तो आप सभी मानेंगे कि नोटबंदी से सबसे अधिक फायदा पेटीएम को ही पुहंचा है....पेटीएम से रोजाना 70 लाख सौदे होने लगे हैं जिनका मूल्य करीब 120 करोड़ रपये तक पहुंच गया है,पेटीएम हर ट्रांसिक्शन मे मोटा कमीशन वसूल रही हैं...सौदों में आई भारी तेजी से कंपनी को अपने पांच अरब डॉलर मूल्य की सकल उत्पाद बिक्री (जीएमवी) लक्ष्य को तय समय से चार महीने पहले ही प्राप्त कर लिया है.पर पेटीएम कंपनी है क्या ?
एक वक्त था जब पेटीएम एक भारतीय स्टार्ट अप कंपनी हुआ करती थी पर आज यह कंपनी चीन के उद्योगपति जैक मा के हाथों का खिलौना बन चुकी है पर यह तो सभी जानते है कि अलीबाबा की पेटीएम मे हिस्सेदारी है पर यह आधा सच है.
पूरी कहानी समझने के लिए थोड़ा फ्लैश बैक मे जाना होगा जब जैक मा ने 1998 में अलीबाबा नामक ई कामर्स कंपनी की स्थापना की तो उनको बहुत सी बाधाओं का सामना करना पड़ा। पहले तीन सालों तक इस ब्रैंड से उनको कोई लाभ नहीं हुआ। कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इसके पास भुगतान के रास्ते नहीं थे और बैंक इसके साथ काम करने को तैयार नहीं थे..
मा ने अलीपे के नाम से खुद का पेमेंट प्रोग्राम शुरू करने का निर्णय किया। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और विक्रेताओं के बीच अलग-अलग करंसीज के पेमेंट्स को ट्रांसफर किया जाता है.
पूरा सच यह है कि अलीबाबा का अलीपे ही पेटीएम का सबसे बड़ा हिस्सेदार है दरअसल चीन या चीन के उद्योगपति भारत के व्यवसाय की "सेवा उन्मुख व्यवसाय आपूर्ति श्रंखला"(सप्लाई चेन)को तोड़ना चाहते है, ताकि वह आसानी से अपना माल भारत के बड़े बाजार मे खपा सके .
इसके लिए उन्हें अपने नियंत्रण वाली खुद की एक सुरक्षित रसद श्रृंखला (लॉजिस्टिक्स चेन) शुरू करना है और चीन के विक्रेता चीन के ही किसी पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल कर भारत मे माल बेचने मे अपने आपको सहज महसूस करेंगे
जो पेटीएम उन्हें उपलब्ध करा रहा है.
पेटीएम का मूल उद्देश्य अलीबाबा और चीनी उद्योगपतियों के लिए रास्ता साफ करना है,अलीबाबा के ग्लोबल मैनेजिंग डायरेक्टर के गुरु गौरप्पन को पिछले महीने पेटीएम के बोर्ड में एडिशनल डायरेक्टर के तौर पर शामिल किया गया है और नोट बंदी के ठीक 4 दिन पहले अलीबाबा के सारे टॉप मैनेजर पेटीएम के नोएडा ऑफिस मे कमान सँभाल चुके थे...
अलीबाबा को चीन का पहला प्राइवेट बैंक खोलने की अनुमति मिल गयी है और भारत मे अलीबाबा के पेटीएम को भी पेमेंट बैंक खोलने की अनुमति रिजर्व बैंक ने दे दी है..
यानी एक ही कंपनी अलीबाबा ने दोनों देशों मे खुद का बैंक और खुद का पेमेंट गेटवे खोल लिया है.
नोट बंदी के बाद 1 महीने मे छोटे और मध्यम उद्योग धंधो की जो बर्बादी हो रही है उस पुरे वैक्यूम को चीनी सामानों ला लाकर भारतीय बाजार मे पाट दिया जायेगा.
और देश देखते देखते नयी गुलामी की तरफ बढ़ता चला जायेगा.
जो व्यापार से जुड़े लोग है वह तुरंत समझ जाएंगे क़ि यह खेल क्या है.
आप को अब भी शायद लग रहा है कि पेटीएम इतनी बड़ी कंपनी नहीं है चलिये ये भ्रम भी आपका दूर कर देते है.
पेटीएम ने दुनिया की सबसे बड़ी कैब टैक्सी कंपनी उबर से हाथ मिला लिया है दिल्ली और मुंबई मेट्रो के टिकट पेटीएम के मार्फ़त ख़रीदे बेचे जा रहे है Irctc यानि रेलवे के टिकट पेटीएम से ख़रीदे बेचे जा रहे हैआईआरसीटीसी ने पेमेंट गेटवे के लिए पेटीएम के साथ साझेदारी की है और पेटीएम देश की सबसे बड़ी ट्रैवल बुकिंग प्लैटफॉर्म बनने के लिए पूरी तरह से तैयार है..
पेटीएमने बीसीसीआई से भारत में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय एवं घरेलू मैचों के 2015 से 2019 तक के लिए क़रीब 84 अंतरराष्ट्रीय मैचों का क़रार किया गया है।..अब रणजी ट्राफी भी पेटीएम के नाम से खेली जायेगी..
इतना ही नहीं मीडिया को भी अपने शिकंजे मे लेने की पूरी तैयारी की गयी है एनडीटीवी के गैजेट्स 360° के लिए पेटीएम की मालिक कंपनी, वन97 कम्युनिकेशंस ने पूरा निवेश किया है..
सुबह शाम न्यूज़ चैनलों को मन भर के विज्ञापन दिए जा रहे है और तो और सरकारी न्यूज चैनल डी डी न्यूज़ भी पेटीएम का प्रचार कर रहा है..
खुदरा क्षेत्र के फ्यूचर समूह ने पेटीएम के साथ समझौता किया है। इसके तहत फ्यूचर समूह पेटीएम के मंच का प्रयोग बिग बाजार के सामान को ऑनलाइन बेचने के लिए करेगा। इस समझौते में पेटीएम के मार्केटप्लेस पर बिग बाजार एक प्रमुख स्टोर बन जाएगा.
सरकार खुद बड़े करेंसी नोट के डीमॉनेटाइजेशन के बाद जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए फंड ट्रांसफर के लिए पेटीएम से हाथ मिलाने को तैयार बैठी है...!
सरकार किस हद तक पेटीएम का समर्थन कर रही है उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है पेटीएम से की गई मात्र सवा छः लाख की धोखाधड़ी की जांच सीधी सीबीआई से करायी जा रही है..
ऐसा भी नहीं है कि इस और किसी का ध्यान नहीं है
आरएसएस की आर्थिक शाखा भी पेटीएम के चीनी संबंध पर बारीक नजर रखे हुए है। आरएसएस से जुड़ा स्वेदशी जागरण मंच (एसजेएम) चीनी उत्पाद और निवेश के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन चला रहा है लेकिन इस बार सरकार खुद आगे बढ़कर देश को कैशलेस बनाकर चीनी उद्योगपतियों के खतरनाक मंसूबो को कामयाब बना रही है.
बागड़ ही खेत हड़प रही है भारत की कैशलेस व्यवस्था को जब चीनी कंपनियां नियंत्रित करेंगी, तब आप खुद सोचिये अंजाम क्या होगा..
याद रखिए पार्टी के प्रति निष्ठा या किसी नेता की भक्ति से कही अधिक बड़ा देश का हित होता है..!
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