दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के अचानक इस्तीफे से कई सवाल पैदा हो गए हैं । दिल्ली में आप सरकार बनने के बाद उपराज्यपाल नजीब जंग और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के बीच छिड़ी जंग में भी पिछले दो महीने से युद्ध विराम जैसी स्थिति थी । माना जा रहा था कि दोनो के बीच पैदा हुआ तनाव कम हो गया है और अब सब कुछ सामान्य सा है ।
दिसम्बर 22 को अचानक नजीब जंग इस्तीफा देकर सबको एक बड़ा सरप्राइज दिया। नजीब जंग के इस्तीफे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जो त्वरित टिप्पणी आयी उससे लगता है कि उन्हें भी इस्तीफा देने की पहले से कोई भनक तक नही थी ।
हालाँकि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन ने जंग के इस्तीफे को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और बीजेपी के बीच हुई डील करार दिया लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नजीब जंग के इस्तीफे के बारे में बुधवार(दिसम्बर 21) देर शाम फैसला लिया गया ।
सूत्रों ने बताया कि उत्तर प्रदेश चुनावो से पहले अगस्ता मामले की तरह दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की भी एक फ़ाइल विवाद का कारण बनी। गौरतलब है कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया है । सूत्रों के अनुसार उप राज्यपाल नजीब जंग पर भाजपा से जुड़े कुछ लोगो ने शीला दीक्षित के कार्यकाल में एक योजना से जुडी फ़ाइल पर जांच की कार्यवाही का दबाव बनाया गया था ।
सूत्रों ने बताया कि यह सम्भवतः वह फ़ाइल हो सकती है जिसके लिए सत्ता सँभालने के बाद केजरीवाल भी ऍफ़आईआर में शीला दीक्षित का नाम जोड़ने की मांग कर रहे थे। दिल्ली चुनावों में केजरीवाल और प्रशांत भूषण दीक्षित के विरुद्ध 370 सबूतों को जनता में दिखा सत्ता हथियाने में सफल तो हो गए, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं की। गौरतलब है कि अगस्त, 2015 में हाईकोर्ट के फैसले के बाद एलजी सचिवालय ने दिल्ली सरकार से वो सभी फाइलें मंगवा ली थीं, जिन पर पिछले डेढ़ साल में फैसला लिया गया था। नजीब जंग की नियुक्ति यूपीए कार्यकाल में हुई थी । उनके गांधी परिवार से करीबी रिश्ते बताये जाते हैं । इतना ही नहीं दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में उनका राज्य सरकार से कोई विवाद नही हुआ ।
सूत्रों ने बताया कि इस संदर्भ में उपराज्यपाल और बीजेपी नेताओं के बीच विवाद गहराता चला गया । बुधवार को उपराज्यपाल नजीब जंग केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि से भी मिलने पहुंचे थे । उसके बाद ही उन्होंने इस्तीफा देने का मन बना लिया था ।
नजीब जंग दिल्ली के 20वे उपराज्यपाल थे। उन्होंने 9 जुलाई, 2013 को पद संभाला था। इसके पहले जामिया यूनिवर्सिटी के कुलपति थे। वे 1973 में मध्य प्रदेश कैडर में IAS बने। उन्होंने 1994 से 1999 तक पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री में ज्वाइंट सेक्रेट्री के तौर पर काम किया । इतना ही नहीं नजीब जंग एशियन डेवलपमेंट बैंक में सीनियर एनर्जी स्पेशलिस्ट के रूप में भी सेवाएं दीं। वे सन 2009 से 2013 के बीच जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनीवर्सिटी के 13वें वाइस चांसलर के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।
आने वाले दिनों में आपको दिल्ली के अंदर एक ऐसी बड़ी खुली जंग दिखने की संभावनाएं हैं, जो आपने भारतीय राजनीति में शायद ही देखी होगी । किरण बेदी ख़ुद ही एक बेहद कुशल प्रशासक हैं और वे केजरीवाल को बेहद अच्छी तरह जानती और समझती भी हैं क्यूँकि उन्होंने केजरीवाल के साथ काम किया हुआ है ।
हम आपको एक ऐसी ख़बर देना चाहते हैं जो उपराज्यपाल के इस्तीफ़ा देने के बाद भाजपा और मीडिया के अंदर काफ़ी चल रही है , मीडिया में आ रही ख़बरों और भाजपा के सूत्रों से जानकारी मिली है कि हो सकता है केजरीवाल की पुरानी साथी किरण बेदी को दिल्ली का नया उपराज्यपाल बना दिया जाए ।
केजरीवाल जो हमेशा दिल्ली में कम शक्तियों का ज़िक्र करते रहते हैं उनको भी किरण बेदी के आने पर अपनी रणनीतियाँ पूरी तरह बदलनी होंगी क्यूँकि किरण बेदी के साथ केजरीवाल की बनेगी नहीं ये बात तो सभी जानते हैं । हालाँकि केजरीवाल किसी से भी बनाकर नहीं रखते हैं और अपनी डफ़ली अपना राग ही बजाते रहते हैं ।
अगर किरण बेदी को दिल्ली की उपराज्यपाल बनाया जाता है तो भ्रष्टाचार के केसों में भी केजरीवाल के ख़िलाफ़ जाँच बेहद तेज़ हो जाएगी वैसे भी केजरीवाल के नज़दीकी राजेंद्र कुमार और स्वाति मालिवाल पर जान एजेंसियाँ काफ़ी सख़्त हो गयी है ।

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