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फर्श से अर्श तक जयललिता का सफर

नहीं रहीं तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता, लंबे इलाज के बाद 68 साल की उम्र में हुआ निधनतमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता का सोमवार(दिसम्बर 5) देर रात निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने के बाद जयललिता का अपोलो अस्पताल में इलाज किया जा रहा था। जयललिता पिछले 22 सितंबर से अस्पताल में भर्ती थीं। अपोलो अस्पताल के बाहर भारी संख्या में जयललिता के समर्थक मौजूद थे। अपोलो अस्पताल के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है।
दिल का दौरा पड़ने के 24 घंटे बाद जयललिता के मृत होने की खबर आयी। रात 11.30 बजे जयललिता ने अंतिम सांस ली।
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रविवार शाम को जयललिता की तबीयत को लेकर विरोधाभासी बातें सामने आईं। एआईएडीएमके ने कहा कि जयललिता पर विशेषज्ञों द्वारा किए जा रहे उपचार का असर हो रहा है। जबकि इलाज कर रहे अपोलो अस्पताल ने कहा कि जयललिता की तबयीत बेहद नाजुक बनी हुई है।
रविवार देर रात पार्टी मुख्यालय पर पार्टी के विधायकों की अहम बैठक हुई। इस बैठक में पनीरसेल्वम भी मौजूद थे। पनीरसेल्वम को जयललिता का भरोसेमंद माना जाता है। इसके पहले जयललिता ने अपनी गैर-मौजूदगी में पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री का कार्यभार सौंपा था।    
Supporters venerate J Jayalalithaa
गौरतलब है कि जयललिता को रविवार शाम दिल का दौरा पड़ा जिसके बाद उन्हें सीसीयू में भर्ती कराया गया था। जयललिता गत 22 सितंबर से अस्पताल में भर्ती थीं।  हालांकि, पिछले कुछ दिनों में उनकी सेहत में सुधार होना बताया गया। लेकिन दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें वेंटीलेटर और एक्मो प्रणाली पर रखा गया था।
मुख्यमंत्री की तबीयत बिगड़ने की खबर पाकर अस्पताल के बाहर भारी संख्या में जयललिता के समर्थक मौजूद हैं और अस्पताल के बाहर भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अपनी मुख्यमंत्री की तबीयत के बारे में उड़ रही अफवाहों को लेकर समर्थकों ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया।  
इससे पहले जयललिता की नाजुक हालत को देखते हुए आज उनके उत्तराधिकारी का चयन करने के लिए एआईएडीएमके की आपात बैठक हुई जिसमें सभी विधायकों ने हिस्सा लिया। चर्चा है कि मुख्यमंत्री की कमान एक बार फिर से ओपी पनीरसेल्वम को सौंपी जा सकती है। पनीरसेल्वम जयललिता के वफादार बताए जाते हैं। 
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि एआईएडीएमके के सभी विधायकों को एक बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए एक-एक कर चेन्नई के अपोलो अस्पताल में बुलाया गया। जिस बयान पर विधायकों ने हस्ताक्षर किए उस पर लिखा है कि ओपी पनीरसेल्वम जयललिता के उत्तराधिकारी होंगे। 
Related imageजयललिता के स्वास्थ्य पर नजर रखने वाले लंदन के डॉक्टर ने आज कहा कि जयललिता की हालत ‘अत्यंत गंभीर’ है। डा. रिचर्ड बेले ने एक बयान में कहा कि दुर्भाग्य से और उनके स्वास्थ्य में जो सुधार हुआ था उसके बावजूद उनके अंतनिर्हित स्वास्थ्य की स्थिति का मतलब है कि आगे समस्या बने रहने का खतरा बना हुआ था। 
विशेषज्ञों की टीम द्वारा उनकी देखभाल की जा रही थी और वह अब अत्यंत आवश्यक जीवन रक्षक प्रणाली पर थीं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्ध सबसे उन्नत स्तर की जीवन रक्षक प्रणाली है जो ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ केंद्र अपनाएंगे। अपोलो चेन्नई में उपलब्ध यह प्रौद्योगिकी इस केंद्र की उच्च स्तर की विशेषज्ञता को प्रतिबिंबित करती है। पूरे समय मैडम को अपोलो और एम्स देखभाल टीम की ओर से असाधारण देखभाल मुहैया करायी गई है जो कि विश्व में किसी भी देश के बराबर है। 
रविवार शाम को दिल का दौरा पड़ने के बाद 68 वर्षीय जयललिता को एक्स्ट्राकोरपोरियल मैम्ब्रेन आक्सीजीनेशन (ईसीएमओ) पर रखा गया जो कि एक हृद्य को मदद करने वाला उपकरण है। कुछ समय से बीमार चल रही मुख्यमंत्री की सेहत में पिछले कुछ दिनों में सुधार देखा गया था लेकिन कल शाम उन्हें दिल का दौरा पड़ गया।   
उधर, केंद्र ने आज यहां स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से विशेषज्ञों के एक दल को चेन्नई के अपोलो अस्पताल भेजा। स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने यहां बताया कि एम्स के चार विशेषज्ञ जल्द ही अपोलो अस्पताल पहुचेंगे। नड्डा ने कहा कि हम अपोलो और तमिलनाडु की सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं।
Image result for जयललिता फ़िल्मेंअपोलो अस्पताल ने आज सुबह एक ट्वीट में बताया कि चिकित्सक उनकी स्थिति पर करीबी निगाह रखे हुये हैं और अपनी ओर से ‘सर्वश्रेष्ठ’ करने का प्रयास कर रहे हैं। अपोलो अस्पताल के मुख्य संचालन अधिकारी डॉ. सुबैया विश्वनाथन ने जयललिता की हालत अचानक बिगड़ने की घोषणा करते हुए एक वक्तव्य में कहा कि उनका उपचार हृदयरोग विशेषज्ञों, पल्मोनोलॉजिस्ट और गंभीर स्थिति देखभाल विशेषज्ञों समेत विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक दल कर रहा है और स्थिति पर नजर रख रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने अन्नाद्रमुक प्रमुख जे जयललिता की सेहत में जल्द सुधार की कामना की और कहा कि वह एम्स के विशेषज्ञों के दल की देखरेख में हैं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘हम जयललिता की सेहत में जल्द सुधार की कामना करते हैं। एम्स के चिकित्सकों का एक दल उनकी देखभाल कर रहा है।’ नड्डा ने ट्वीट में लिखा, एम्स के चिकित्सक दो दिन पहले भी चेन्नई गए थे और आज भी चेन्नई में हैं।
जयललिता की तबियत बिगड़ने के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव कल रात विमान द्वारा मुंबई से चेन्नई आये और अस्पताल पहुंचकर मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य की जानकारी ली। चौधरी विद्यासागर राव महाराष्ट्र के भी राज्यपाल हैं। केन्द्रीय मंत्री पोन राधाकृष्णन आज सुबह यहां हवाईअड्डे पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत भारतीय जनता पार्टी के सभी नेताओं ने जयललिता के स्वास्थ्य में पूर्ण सुधार की कामना की है और उनके लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि बुखार और शरीर में पानी की कमी की शिकायत के बाद जयललिता को 22 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में यहां उनका श्वांस की समस्या तथा संक्रमण का भी इलाज किया गया।(एजेंसी इनपुट के साथ)
जयललिता के जीवन पर एक दृष्टि 
Related image24 फरवरी 1948 को मैसूर में जन्मीं जयललिता को राजनीति विरासत में नहीं मिली थी।
-15 वर्ष की आयु में कन्नड फिल्मों में वह मुख्‍य अभिनेत्री की भूमिकाएं करने लगी थीं।
-वे दक्षिण भारत की पहली ऐसी अभिनेत्री थीं जिन्होंने स्कर्ट पहनकर फिल्मों में भूमिका निभाई थी।
-जयललिता अन्नाद्रमुक के संस्थापक एमजी रामचंद्रन उर्फ एमजीआर की करीबी थी।
Related image-जयललिता ने एमजीआर के साथ 28 फिल्मों में काम किया।
-राजनीति में उनके समर्थक उन्हें अम्मा कहकर पुकारा करते थे।
-जयललिता पहली बार वर्ष 1991 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं।
-उन्हें आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में सजा भी हुई और मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा लेकिन कर्नाटक हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया जिसके बाद वो फिर से तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनी।
-जयललिता को पहली बार मद्रास विश्वविद्यालय से 1991 में डॉक्टरेट की मानद उपाधि मिली।
-1997 में उनके जीवन पर बनी एक तमिल फिल्म 'इरूवर' आई थी, जिसमें जयललिता की भूमिका ऐश्वर्या राय ने निभाई थी।
क्या आप जानते हैं राजनीति से पहले जयललिता साउथ की फिल्मों की हीरोइन हुआ करती थीं और वो समय था जब जयललिता के ठुमकों के लोग दीवाने थे। आगे तस्वीरों में देखें, जयललिता का फिल्मी सफर। (फोटो- फिल्म स्टिल)
फिल्मों से राजनीति में पदापर्ण 
राजनीति में आने से पहले जयललिता एक लोकप्रिय अभिनेत्री थीं और उन्होंने तमिल, तेलुगू, कन्नड़ की फिल्मों के अलावा एक हिंदी फिल्म ‘इज्जत’ में भी काम किया है। कहते हैं कि एमजी रामचंद्रन ने जयललिता को राजनीति से परिचित कराया था, लेकिन जयललिता इन दावों को सही नहीं मानती।
हिंदी फिल्म इज्जत में धर्मेन्द्र के साथ 
जयललिता का जन्म एक तमिल परिवार में 24 फरवरी, 1948 को हुआ था। जयललिता पुरानी मैसूर स्टेट (जो अब कर्नाटक का हिस्सा है) के मांडया जिले के पांडवपुरा ताल्लुक के मेलुरकोट गांव में पैदा हुई थीं। जयललिता के पिता जयराम का तब निधन हो गया था जब वे केवल दो वर्ष की थीं। उनकी मां जयललिता को साथ लेकर बेंगलुरू चली गई थीं जहां उनके माता-पिता रहते थे। 
बाद में उनकी मां ने तमिल सिनेमा में काम करना शुरू कर दिया और अपना फिल्मी नाम संध्या रख लिया। बचपन से ही गरीबी में घिरी जयललिता को परिस्थितियों ने मजबूती प्रदान की। विषम परिस्थितियों में भी जयललिता ने खुद को तमिलनाडु की राजनीति और तमिल सिनेमा में स्थापित किया।
बेंगलुरु में पढ़ाई करने के बाद जयललिता अपनी मां के साथ मद्रास लौट कर आ गई थीं। मद्रास से ही उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। 1961 में पहली बार जयललिता ने एक अंग्रेजी फिल्म में काम करके अपने करियर की शुरुआत की थी। जयललिता का फिल्मी करियर बेहद शानदार था।
जयललिता ने इज्जत नामक हिन्दी फिल्म में धर्मेंद्र के साथ भी काम किया है। 
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अपने शानदार फिल्मी करियर के बाद जयललिता ने अपना ध्यान राजनीति में लगा दिया। वर्ष 1982 में एआईएडीएमके (AIADMK) की सदस्यता लेने के बाद पहली बार जयललिता राजनीति में आईं। उनका राजनीति में आगमन फिल्मों में उनके साथी कलाकार, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके के संस्थापक एम.जी. रामचंद्रन के कारण हुआ।
Related imageरामचंद्रन के साथ उनकी नजदीकियों ने उन्हें राजनीति में स्थापित होने में काफी मदद की। वर्ष 1983 में जयललिता की नियुक्ति पार्टी के प्रचार सचिव के रूप में हुई। वर्ष 1984 में जयललिता राज्य सभा सांसद बनीं।
पार्टी के संस्थापक रामचंद्रन के बीमार पड़ने के बाद जब वह इलाज कराने के लिए देश से बाहर चले गए तो जयललिता ने पार्टी में उनका स्थान ले लिया। उन्होंने कांग्रेस गठबंधन वाली एआईएडीएमके की अध्यक्षता की। वर्ष 1987 में रामचंद्रन की मृत्यु के पश्चात उनकी पार्टी दो भागों में बंट गई।
Image result for जयललिता फ़िल्मेंपार्टी महासचिव होने के नाते वह वर्ष 1989 में तमिलनाडु के बोदिनायकनूर से राज्य विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव मैदान में उतरीं। इन चुनावों में जीतने के बाद वह राज्य विधानसभा की पहली नेता विपक्ष बनीं। 
वर्ष 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद सांत्वना के तौर पर पूरे भारत में कांग्रेस गठबंधन सरकार ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। जयललिता ने भी भारी अंतर के साथ जीत दर्ज की। इन चुनावों के बाद वह राज्य की मुख्यमंत्री बनाई गईं। तमिलनाडु की अब तक की सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने का खिताब भी जयललिता के ही नाम है।

Image result for जयललिता फ़िल्मेंअम्मा कैंटीन, अम्मा फार्मेसी....ये हैं वो काम जिनके चलते जयललिता लोगों के दिलों में बसती थीं

Image result for जयललिता फ़िल्मेंसभी जानते हैं कि 'अम्मा' के नाम से तमिलनाडु में बेहद लोकप्रिय जयललिता अपने फैंस के दिलों पर राज करती थीं l तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को उनके समर्थक भगवान मानते थे।
जयललिता की इस लोकप्रियता के पीछे भी एक कहानी है। उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री राज्य की आम जनता के जो किया, वह उन्हें लोगों में 'गरीबों का भगवान' बना दिया।
ये रहे अम्मा के किए प्रमुख काम-
Related imageगोल्ड फॉर मैरिज स्कीम: इस स्कीम के तहत आर्थिक रूप से पिछड़ी महिलाओं को डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने पर सरकार की ओर से चार ग्राम सोना और 50 हजार रुपए तक का कैश दिया जाता था।
अम्मा कैंटीन: राज्य के सभी शहरों में सस्ते दर पर खाना और नाश्ता उपलब्ध कराने के लिए अम्मा कैंटीन खुली हैं
अम्मा सीमेंट: इस योजना के तहत गरीब लोगों को सस्ते दर पर अपना मकान बनाने के लिए अम्मा सीमेंट दी जाती है 
अम्मा मोबाइल: राज्य के सभी सहायता समूहों को मुफ्त में अम्मा स्मार्ट फोन दिये गये हैं
अम्मा बेबीकिट: नवजात बच्चों की जरूरत के कई सामान होते हैं जो मुफ्त में दिये जाते हैं
अम्मा सॉल्ट: इस योजना के तहत लोगों को 14 रुपये प्रति किलो की दर से नमक उपलब्ध कराया गया, जबकि बाजार में नमक की कीमत 25 रुपये किलो थी
Image result for जयललिता फ़िल्मेंअम्मा मिनरल वाटर: राज्य के सभी प्रमुख शहरों में रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर 10 रुपये में बोतल बंद पानी मिलती है
अम्मा लेपटॉप:  यह लगभग 26 हजार रुपये का लैपटॉप राज्य के 11 लाख बच्चों को लैपटॉप बांटने की योजना है
अम्मा फार्मेसी: सभी प्रमुख अस्पतालों में अम्मा फार्मेसी हैं, जहां सस्ते दर पर दवाइयां मिलती हैं
अम्मा मिक्सर: गरीब औरतों को अम्मा मिक्सर मुफ्त में उपलब्ध कराया गया है
अम्मा सिनेमा: सस्ती दरों पर फिल्म दिखाने के लिए राज्य में अम्मा थियेटर के लिए सात स्थानों का चयन किया गया है 
द्रौपदी की तरह जयललिता ने ली थी प्रतिज्ञा 
तमिलनाडु की सीएम जयललिता की छवि एक जुझारू महिला के रूप में हमेशा लोगों के बीच रही है, जिन्होंने जीवन की हर चुनौती का डटकर सामना किया और हर लड़ाई जीती।
सीएम जे. जयललिता ने भी साल 1989 में ली थी एक प्रतिज्ञा
नॉन राजनैतिक बैकग्राउंड से आज तमिलनाडु की सत्ता पर शासन करने वाली जयललिता ने एक बार राज्य की विधानसभा में पुराने इतिहास को लिख दिया था। अक्सर लोग महाभारत की 'द्रोपदी' की बात करते हैं कि उन्होंने अपने चीरहरण यानी की अपमान का बदला लेने के लिए प्रतिज्ञा की थी कि  जब तक वह दुशासन के खून से अपने बाल नहीं धोएगींं, तब तक वह अपने बाल नहीं बांधेगींं।
सीएम जे. जयललिता ने भी साल 1989 में ली थी एक प्रतिज्ञा ठीक उसी तरह से सीएम जे. जयललिता ने भी साल 1989 में तमिलनाडु विधानसभा में अपने अपमान के एवज में प्रतिज्ञा की थी कि वो तब तक यहां कदम नहीं रखेंगी, जब तक ये सदन महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं हो जाता। क्या था मामला बात 1989 की है, जब विपक्ष की नेता जयललिता ने स्पीकर से कहा कि मुख्यमंत्री करूणानिधि के उकसाने पर पुलिस ने उनके फोन को टैप किया है इसलिए इस पर बहस होनी चाहिए लेकिन उस दिन बजट पेश होना था इसलिए स्पीकर ने कहा कि वे इस मुद्दे पर बहस की अनुमति नहीं दे सकते क्योंकि बजट पेश किया जा रहा है लेकिन एआईडीएमके के नेता इस बात पर गुस्सा हो गए और स्पीकर के सामने हल्ला मचाने लग गए।
बजट भाषण फाड़ दिया गया और हंगामा मच गया
बजट भाषण फाड़ दिया गया और हंगामा मच गया बहस काफी बढ़ गई, बजट भाषण फाड़ दिया गया और हंगामा मच गया, जिसे देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को स्थगित कर दिया लेकिन इसके बाद जैसे ही जयललिता सदन से निकलने के लिए तैयार हुईं, डीएमके के एक सदस्य ने उन्हें रोकने की कोशिश की, उसने उनकी साड़ी इस तरह से खींची कि उनका पल्लू गिर गया। 
अपने अपमान के लिए बनी थीं 'द्रोपदी'
अपने अपमान के लिए बनी थीं 'द्रोपदी' जयललिता सबके सामने ज़मीन पर गिर पड़ीं और उसके बाद उन्होंने कसम खाई कि वो यहां तभी कदम रखेंगी जब वो महिलाओं के लिए सुरक्षित हो जाएगा। जयललिता के साथ ये शर्मनाक हरकत करने वालों को एआईडीएमके के नेताओं ने काफी पीटा था और इसके बाद जयललिता सीएम बनकर ही विधानसभा भवन पहुंची थीं।

जया ने परिवार से दूरी क्यों बनाए रखी? 
32 वर्षों से अंतिम संमय तक हमज़ुल्फ़ की तरह रही शशिकला (जयललिता के शरीर पर हाथ रखे), लेकिन परिवार का कोई सदस्य नहीं  
जयललिता भले ही करोड़ों लोगों के लिए अम्‍मा थीं लेकिन दो महीने से ज्‍यादा समय तक जब वे अस्‍पताल में थीं तो उनके पास परिवार का कोई सदस्‍य नहीं था। जयललिता के भाई जयकुमार की बेटी दीपा ने अस्‍पताल में उनसे मिलने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने वापस भेज दिया। जब उन्‍होंने बताया कि वह कौन हैं तो पुलिस ने कहा, ”हम आपसे वापस बात करेंगे।” लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। गौरतलब है कि जयललिता का पांच दिसंबर को रात साढ़े 11 बजे अपोलो अस्‍पताल में निधन हो गया। वे 74 दिन से अस्‍पताल में भर्ती थीं। 4 दिसंबर को उन्‍हें कार्डिएक अरेस्‍ट हुआ था इसके बाद से वह उबर नहीं पाईं।
अक्‍टूबर 2014 में जब जयललिता जेल से बाहर आर्इं थी तो दीपा और उनके पति माधवन ने मिलने की कोशिश की थी। दीपा और माधवन अन्‍नाद्रमुक के समर्थकों के बीच बारिश में जया का स्‍वागत करने को खड़े थे। बाद में दोनों ने जयललिता के घर के पास से कई घंटों तक नजर बनाए रखी। दीपा ने बताया, ”उन तक पहुंचने और बात करने में कई बाधाएं थीं। मुझे नहीं पता इतनी रूकावटें कैसे आ गर्इं।” दीपा का जन्‍म जयललिता के पोएस गार्डन स्थित घर में ही हुआ था।
जयललिता का शुरुआती जीवन कर्नाटक के मैसुरु में नान-नानी के पास बीता। बाद में वह चेन्‍नई चली लेकिन ननिहाल से संपर्क बरकरार रहा। सितंबर 1995 में दत्‍तक बेटे वीएन सुधाकरन की शाही शादी के बाद उनके परिवार से रिश्‍ते खराब हो गए। जया की मां वेदा का जन्‍म नेल्‍लोर में हुआ। उनकी शादी जयरमन से हुई। जयरमन मैसूर महाराजा के सर्जन थे। जयललिता अपने मामा श्रीनिवासन की काफी इज्‍जत करती थीं। वह उन्‍हें चीनी मामा कहकर बुलाती थीं। उनकी मां की बड़ी बहन विद्यावती बेंगलुरु में निशक्‍तों के लिए स्‍कूल चलती थीं। वह एक्‍टर भी थीं। उनकी बेटियां अमिता और जयंती ऑस्‍ट्रेलिया और अमेरिका में रहती हैं। वेदा की दूसरी बहन अंबुजा और उनके पति कन्‍नन की कोई संतान नहीं है और वे कई साल तक जयललिता के साथ रहते थे। वेदा की सबसे छोटी बहन पदमिनी बेंगलुरु में रहती थीं और साल 2011 में उनका निधन हो गया। दीपा ने बताया, ‘नवंबर 2012 में उनमें से कुछ मेरी शादी में आए थे। हालांकि जयललिता नहीं आईं थी।”

दीपा ने ब्रिटेन में पढ़ाई की। उनके भाई दीपक ने अमेरिका से एमबीए किया है और अब वह चेन्‍नई में अपनी कंपनी चलाते हैं। साल 1995 में जब दीपा के पिता की मौत हुई थी तब जयललिता आईं थी लेकिन दीपा की मां के निधन के समय वह नहीं आईं। दीपा ने बताया, ”मैंने रिश्‍ते को बनाए रखने के लिए पूरी कोशिश की। हो सकता है उन्‍हें(जयललिता) को समय ना मिला हो।”

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