जयललिता के जाने के कुछ दिनों के अंदर ही शशिकला ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। वो जया के घर पोएस गार्डन में डेरा डाल कर बैठ गई हैं।
दक्षिण भारत की राजनीति में चेहरों का महत्व हमेशा से रहा है। अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जयललिता के निधन के बाद उनकी पार्टी मेें कोई ऐसा चेहरा नहीं दिख रहा है जो पूरी पार्टी को एकजुट कर सके। इसी के साथ अब जयललिता के करीबी लोगों ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। शशिकाल जो जया की करीबी मानी जाती है उन्होंने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। अन्नाद्रमुक में इसी बात को लेकर चर्चा है कि क्या शशि पूरी पार्टची को हाईजैक कर रही है। जिस तरह से जया के निधन के कुछ ही दिनों के अंदर वो पार्टी में अपनी पैठ बना रही हैं उस से तो यही लगता है। शशिकला तमिलनाडु में सत्ता का केंद्र बनती जा रही है। मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम भी उनसे मिलने के लिए पोएस गार्ड पहुंचे थे। उनके अलावा लगातार कई मंत्री शशिकला से मिलने के पहुंच रहे हैं।खास बात ये है कि शशिकला ने जयललिता के घर पोएस गार्डन में डेेरा डाल दिया है। जयललिता के जीवित रहते शशिकला के पति नटराजन को पोएस गार्डन में घुसने की अनुमति नहीं थी। लेकिन जया के जाते ही शशिकला का पूरा कुनबा पोएस गार्डन में जुट गया है। वहीं पार्टी में इस बात को लेकर भी अटकलें लग रही हैं कि क्या शशिकला पार्टी में फूट डालने की कोशिश कर रही हैं। इसके पीछे भी कई तर्क हैं। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम शशिकला के साथ अपनी नजदीकी बढ़ा रहे हैं। ये भी कहा जा रहा है कि शशिकला के पास पार्टी के कई सारे विधायकों का समर्थन है। ऐसे में सत्ता के लिए संघर्ष आने वाले दिनों में तेज हो सकता है। पोएस गार्डन में लगातार नेताओ और विधायकों का पहुंचना जारी है।
बताया जा रहा है कि शशिकला की निगाहें पार्टी के जनरल सेक्रेटरी पोस्ट पर है। इस पद पर जयललिता काबिज थी। उनके जाने के बाद ये पद खाली है। इस पद पर अगर शशिकला बैठती हैं तो पार्टी पर उनका नियंत्रण हो जाएगा। पार्टी काउंसिल आने वाले समय में सर्वसहमति से जनरल सेक्रेटरी का चुनाव कर सकती है। शशिकला का पार्टी पर कितना प्रभाव है इसका अंदाजा पन्नीरसेल्वम की ताजपोशी से लग जाता है। जयललिता के निधन के दो घंटे के अंदर ही उन्हे मुख्यमंत्री पद की शफथ दिलाई गई थी। सभी विधायकों को अस्पताल बुलाया गया था। वहीं पर सभी से शपथपत्र पर दस्तखत कराए गए थे कि वो पन्नीरसेल्वम का समर्थन करेंगे। इसके लिए शशिकला ने पार्टी विधायकों को तैयार किया था। कुल मिलाकर तमिलनाडु में आने वाले दिनों में सत्ता और पार्टी पर नियंत्रण के लिए संघर्ष हो सकता है।
तमिलनाडु के हालात पर बीजेपी और कांग्रेस की भी नजरें हगैं। डीएमके सुप्रीमों करुणानिधि तो पहले से इस मौके का फायदा उठाने के लिए तैयार बैठे हैं। बता दें कि शशिकला को जयललिता की करीबी माना जाता है। हालांकि 2012 में जया ने शशिकला से विवाद के बाद उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। लेकिन अब जया के जाने के बाद पार्टी में शशिकला का जलवा और रुतबा बढ़ता दिख रहा है। ऐसे में इस बात की प्रबल संभावना है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो ये अन्नाद्रमुक के लिए ठीक नहीं होगा। ये भी कहा जा रहा है कि कई विधायक पन्नीरसेल्वम से खुश नहीं है। वहीं मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम अपनी कुर्सी बचाने के लिए शशिकला से मुलाकात कर रहे हैं। इसी से जाहिर हो रहा है कि शशिकला जया के जाने के बाद अन्नाद्रमुक में सत्ता के केंद्र के रूप में उभर रही हैं।
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