मुलायम के कहने पर वह अपनी पार्टी का सपा में विलय जरूर करते, मगर अब इसके लिये वक्त नहीं है। यादव ने कहा कि सपा मुखिया के बुलावे पर वह, रालोद अध्यक्ष अजित सिंह, राजद अध्यक्ष लालू यादव और जनता दल सेक्युलर के प्रमुख एच. डी. देवेगौड़ा गत पांच नवम्बर को सपा के रजत जयन्ती समारोह में गये थे। उस वक्त ऐसा लगा कि गठबंधन का सिलसिला शुरू हुआ है लेकिन बात फिर नहीं बनी। उन्होंने कहा कि वह जनता से अपील करते हैं कि नया गठबंधन उत्तर प्रदेश की राजनीति को सही रास्ते पर लाना चाहता है, लिहाजा वह इसका सहयोग करे। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव के. सी. त्यागी ने इस अवसर पर कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन में शामिल दलों ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की हर बात मानी थी, लेकिन इसके बावजूद वह गठजोड़ से अलग हो गए। उन्होंने कहा कि अब नये सिलसिले के तहत मुलायम ने अजित और शरद से सीटों के बंटवारे को लेकर बात की लेकिन फिर विलय की बातें करने लगे। नवगठित गठबंधन में कांग्रेस को भी शामिल किये जाने की सम्भावना के बारे में पूछे जाने पर अजित ने कहा कि अभी इस बारे में कांग्रेस से कोई बात नहीं हुई है। मालूम हो कि गत पांच नवम्बर को सपा के रजत जयन्ती समारोह में पार्टी मुखिया मुलायम के बुलावे पर रालोद अध्यक्ष अजित सिंह, जदयू नेता शरद यादव, राजद अध्यक्ष लालू यादव और जनता दल सेक्युलर के प्रमुख एच. डी. देवेगौड़ा ने शिरकत की थी। उस वक्त ऐसा लगा था कि विधानसभा चुनाव से पहले सपा की अगुवाई में महागठबंधन बनेगा। मुलायम की अजित और शरद यादव के साथ बातचीत से उम्मीदें परवान चढ़ते देखी गयीं, लेकिन सपा मुखिया ने गत 10 नवम्बर को मीडिया से साफ कहा कि सपा किसी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। अगर कोई पार्टी सपा में विलय करना चाहती है तो वह तैयार हैं।
हकीकत यह है कि कोई भी मुख्य दल अपना अस्तित्व दांव पर नहीं लगाना चाहता। उन्हें डर है कि विलय होने से छोटी-छोटी पार्टियां अपनी पहचान बनाकर आने वाले समय में इन्हीं के भावी एवम प्रभावी नेताओं के भविष्य को ही अंधकारमय न कर दे। यही कारण है कि समाजवादी एवं बहुजन समाजवादी गढ़बंधन को तैयार तो है,लेकिन विलय को नहीं।
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