बात यह है कि अब पंजाब में केजरीवाल की हवा समाप्त हो चुकी है, पहले जो लोग केजरीवाल को इमानदार और साफ़ सुथरा नेता समझ रहे थे, और अब केजरीवाल को सबसे बड़ा बेईमान और सबसे बड़ा मक्कार नेता समझते हैं। केजरीवाल जिस तरह से नोटबंदी का विरोध कर रहे हैं और कालेधन का समर्थन कर रहे हैं उसे देखकर पंजाब के लोगों ने अचानक अपना मन बदल लिया। हर घर में चर्चा हो रही है कि केजरीवाल तो बड़ा बेईमान है, ये तो सीधा सीधा और खुलेआम बेईमानों का समर्थन कर रहा है। हर गरीब देख रहा है कि नोटबंदी से अमीर लोग और बेईमान लोग परेशान हैं, नोटबंदी से हर वो आदमी परेशान है जिसने गलत तरीके से और गरीबों को लूटकर धन जमा किया था, यह सब देखकर कौन गरीब केजरीवाल को वोट देना चाहेगा।
जब केजरीवाल ने देखा कि पंजाब में अचानक उनकी हवा समाप्त हो गयी और उनकी नैया डूबनी तय है तो उन्होंने झट से दलित पॉलिटिक्स खेल दी और घोषणा कर दी कि अगर पंजाब में उनकी जीत हुई तो दलित समुदाय से उप-मुख्यमंत्री बनाएंगे। केजरीवाल का यह दांव भी फेल होने वाला है क्योंकि इसके बाद सिख लोग उन्हें और वोट नहीं देंगे क्योंकि इससे उन्हें केजरीवाल में जातिवाद की भी बू आएगी।
यह भी वादा किया गया है कि दलितों के लिए आरक्षित सभी पद भरे जाएंगे।
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