जापान से लौटने के बाद प्रधानमंत्री गोवा पहुंचे तो भाषण में काले धन के कुबेरों को चैन से न सोने देने की बात कही। संकेत दिया कि अगला निशाना अब कालेधन का ऐशगाह बन चुका रियल एस्टेट का धंधा होगा। क्योंकि कालेधन के कुबेर पैसे को या तो जमीनों के धंधे में लगाते हैं या फिर हीरा-मोती, सोना-चांदी खरीदने में। सूत्रों के अनुसार, मोदी ने अभी सिर्फ कैश में मौजूद कालेधन पर ही सर्जिकल स्ट्राइक की है। अगली सर्जिकल स्ट्राइक बेनामी संपत्तियों के खिलाफ होने जा रही है। पकड़ में आने पर नेताओं-अफसरों, व्यापारियों की बेनामी संपत्तियां जब्त होंगी। कहा जा रहा है कि मोदी सरकार इसी मंशा से रियल एस्टेट बिल लेकर आई है। जिससे न केवल बिल्डरों की मनमानी रोककर उपभोक्ताओं को राहत दी जाने की कोशिश है बल्कि कैश की बजाए चेक सिस्टम से भुगतान अनिवार्य कर रियल एस्टेट में कालेधन पर अंकुश लगाने की भी तैयारी है।
कैश से सिर्फ 20 प्रतिशत कालेधन पर अंकुश
अर्थव्यवस्था से जुड़े जानकार बताते हैं कि पीएम मोदी ने आठ नवंबर को पांच सौ-एक हजार रुपये के जो बड़े नोट बंद किए हैं, उससे सिर्फ 20 प्रतिशत कालेधन पर ही अंकुश लग सकता है। क्योंकि कैश में करीब 20 प्रतिशत कालाधन छुपाकर रखने के आंकड़े अनुमानित किए गए हैं।
बिल्डर्स की इनवेंट्री से खंगाला जाएगा कालेधन के कुबेर का पता
मोदी सरकार ने कुछ यूं रियल एस्टेट में कालेधन का पता लगाने की रणनीति बनाई है। जितने भी बिल्डर हैं उनकी इनवेंट्री केंद्रीय एजेंसियों के अफसर खंगालेंगे। दरअसल हर बिल्डर अपनी इन्वेंट्री में खरीदार का विवरण रखता है। मगर कालेधन के कुबेर चूंकि दूसरे नाम से प्रापर्टी खरीदते हैं, इस नाते इनवेंट्री में प्रापर्टी के मालिक के दर्ज नाम-पते को खंगाला जाएगा। संबंधित व्यक्ति से पूछताछ होगी कि क्या यह प्रापर्टी उसी की है। अगर वह इन्कार करता है तो उससे असली वारिस का नाम पूछा जाएगा। इस प्रकार केंद्रीय एजेंसियों के हाथ कालेधन के कुबेर तक आसानी से पहुंच जाएंगे।
रहते हैं दिल्ली में खरीद रखे हैं गोवा-मुंबई में दूसरों के नाम फ्लैट
दरअसल नेता, अफसर, व्यापारी, इंजीनियर, डॉक्टर, ज्वेलर्स टैक्स बचाने के लिए पहले तो बैंक में पैसा जमा नहीं करते। कैश रखते हैं। मगर हमेशा घर में कैश रखना सुरक्षित नहीं होता तो वे रियल एस्टेट में पैसा लगा देता हैं। अपने नाम से ही सारी संपत्तियां नहीं खरीद सकते। ऐसे में अपने घर के सदस्यों या फिर करीबियों के नाम पर फ्लैट, घर खरीद लेते हैं।
पुलिस पर भी लगे अंकुश
सरकार के इस कदम से रियल एस्टेट ही नहीं, अदालती मुकद्दमों पर भी चोट पड़ेगी। संभावनाएं व्यक्त की जा रही है कि बिल्डर माफिया कोर्ट में दर्ज मुकद्दमें वापस ले ले या ठीले पड़ जाएं क्योंकि अदालतों में ऐसे अनेको मुकद्दमें हैं। बिल्डर माफिया विवादित संपत्तियां खरीद ईमानदार को पुलिस अथवा झूठे मकद्दमें दर्ज कर धमकाने में बहुत ही शातिर होते हैं। वैसे भी आज कदम-कदम पर यह बहुत सक्रिय है। धराधर फ्लैट बनाकर मोटी कीमत पर बेच देते हैं। पुरानी दिल्ली, विशेष कर मुस्लिम क्षेत्रों, में यह माफिया जरुरत से ज्यादा सक्रिय है। इस माफिया के सक्रिय होने से पूर्व मकान स्वामी द्धारा अपने घर में दीवारों, फर्श, या छतों की मरम्मत करवाने पर पुलिस कभी तंग नहीं करती थी, लेकिन अब बिना पुलिस को रिश्वत दिए बिना घर में कुछ कर नहीं सकते। हमारे जैसे, वेतनभोगी, तो लताड़ भेज देते हैं वापस, कि "अनाधिकृत निर्माण कर रहा हूँ, फोटो खींच नगर निगम भवन विभाग को भेज दो। कानून दायरे से बाहर होगी, भवन विभाग तोड़ देगा, नहीं तो जय राम। " फिर मोहल्ले वाले ही बोल देते हैं, "कुछ नहीं मिलने वाला, लालाजी प्रेस में हैं।" एक शताब्दी पुराना लखोडि ईंट का मकान है, जेब के अनुसार कुछ न कुछ ठीक करवाते रहते हैं, कुछ भी करवाओ, आ जाएगी पुलिस, भवन विभाग ने कभी परेशान नहीं किया, जबकि वहाँ भी रिश्वत का बाजार पुलिस के भांति गर्म ही रहता है।
मोहल्लावासी की शिकायत
पुलिस का रिश्वत खाने का एक बहुत बढ़िया तरीका है, कि "आपके मौहल्ला से शिकायत आयी है।" जब बोलो " दिखाओ शिकायत।" जवाब मिलता है "तुझे क्यों दिखाएं, गवर्नर है तू " यानि जब "तू" बोलने पर बदतमीज़ी से जवाब मिलता है, फिर भागते हैं। एक बार तो मोहल्लावासी की झूठी शिकायत लेकर आ गए, झूठी भी ऐसी की "मौहल्ले की गालियाँ खाईं और पैर छूकर माफ़ी मांगनी पड़ी।" क्योंकि जो नाम पुलिस ने लिया उस मकान में उस नाम का कोई नवजात बच्चा तक नहीं। कहने का तात्पर्य है कि पुलिस पर भी लगाम लगनी चाहिए। दरअसल,बिल्डर माफिया का ही पुलिस को रिश्वतखोर बनाने में योगदान हैं। क्योंकि जब तक बिल्डर माफिया सक्रिय नहीं था, पुलिस ने कभी परेशान नहीं किया। यह जो काम शुरू हुआ, माफिया के आने से। घर का मलवा उठाने में 100 रूपए तो पुलिस के ही होते हैं। एक फ्लोर पर लेन्टर का 50,000 रूपए पुलिस के। यही कारण है कि बिल्डर ऊँची कीमत पर फ्लैट बेचता है।
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