क्या आप जानते है कि One Rank One Pension (OROP) कब का लागू हो चुका है और सैनिको को बढ़ी हुई पेंशन पहले ही मिलनी शुरू हो चुकी है।
ज्ञात हो कि सेना में 15 साल से कम की नौकरी (except disabled on duty) करने वालो को और हर राज्य/ केंद्र सरकारो में काम करने Civilians को 20 साल से कम की नौकरी पर (अपवादों को छोड़ कर) पेंशन नही मिलती। ये नियम शुरू से और पुराना है जो कांग्रेस राज़ में ही लागू हुआ था और सही भी है।
ऐसा कैसे संभव है कि कोई एक दिन भी नौकरी करे और उसे पेंशन मिलनी चाहिए। बस यहीबेकार का विवाद केजरीवाल-राहुल गांधी अपने राजनैतिक फायदे के लिए पैदा कर, देश-सेना को गुमराह कर रहे है जिससे सेना और देश की सिर्फ बदनामी हो रही है। इन जैसे नेता सिर्फ सत्ता पाने के लिए देश को बर्बाद करने की कुटिल चाल चल रहे है।
जो काम कांग्रेस 40 साल में नही कर सकी वो मोदी सरकार ने करीब डेढ़ साल में कर दिखाया और OROP लागू कर दिया।
जनता को राहुल गांधी से सवाल पूछना चाहिए कि उन्होंने 40 साल से इस मामले को अपने राज़ में क्यों नही लागू किया वरन् इंदिरा गांधी ने तो OROP को पूरी तरह नकार कर रद्द कर दिया था।
पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल के परिजनों से मिलने पर अड़े दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली पुलिस ने देर रात रिहा कर दिया। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने उसके सामने शर्त रखी थी कि रिहा होने के बाद केजरीवाल ग्रेवाल के परिजनों से न मिलें। इसके विरोध में केजरीवाल आरकेपुरम थाने में ही रुक गए। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी थाने पहुंच गए। देर रात थाने से रिहा होते ही उन्होंने फिर मोदी सरकार पर हमला बोला। इस बीच दिल्ली पुलिस ने दिनभर के हंगामे की पूरी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी है।

दिल्ली की राजनीति एक बाद फिर से गर्म हो गयी है, पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल की आत्महत्या ने आम आदमी पार्टी को मोदी सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा मिल गया है, राम किशन ग्रेवाल ने आज जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या खाकर अपनी जान दे दी, कुछ लोग कह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी के नेताओं ने ही उन्हें जबरजस्ती जहर खिलवाया ताकि वे मोदी सरकार को फ़ौज विरोधी साबित कर सकें, आज ऐसा हुआ भी, जैसे ही राम किशन ग्रेवाल की मौत हुई, केजरीवाल ने मोदी के विरोध में ट्वीट करना शुरू कर दिया। अगर इसके लिए किसी पूर्व सैनिक का बलिदान भी करना पड़े तो केजरीवाल कर सकते हैं.. साजिश करके ही सही...समस्त मोदी सरकार विरोधी दल सर्जिकल स्ट्राइक से जनता में सरकार की होती वाह-वाही से परेशान हो चुके हैं। इसलिए आभास होता है कि उस मुद्दे से जनता का ध्यान परिवर्तित करने के लिए किसी की जान गंवाकर षड्यंत्र खेल गया हो? प्रदेशों में होने वाले चुनावों में मोदी को नीचा दिखाने विरोधी साम, धाम, दण्ड, भेद अपनाने में कोई दल पीछे नहीं रहना चाहेगा।
ऐसा लगता था कि केजरीवाल और आप नेता राम किशन ग्रेवाल की मौत का इन्तजार कर रहे थे, जैसे ही केजरीवाल और उनके साथियों को राम किशन की मौत की खबर मिली उन्होंने मोदी के विरोध में ट्वीट करना शुरू कर दिया। सरकार को चाहिए कि ऐसे लोगों को मिलने वाली समस्त सुविधाएं छीन गम्भीरता से जाँच कर रामकिशन को भड़काने वालों पर सख्त कार्यवाही की जाए। गोलियाँ किन-किन लोगों के सामने खायीं? क्यों नहीं गोलियाँ खाने से रोका ? क्या यह आत्महत्या किसी षड्यंत्र के पूर्व नियोजित इधर आप नेता कुमार विश्वास और राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आज का घटनाक्रम हमारे लिए शर्म की बात है। ये आपातकाल का काला दिन है। राघव चड्ढा ने कहा कि लोकतान्त्रिक तरीके से चुने गए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री जी को किस आईपीसी की धारा के तहत घंटों बंधक बना कर रखा गया। पीएम मोदी ने देश से ओआरओपी पर झूठ बोला। रक्षा मंत्री और पीएम को इसके लिए देश से माफ़ी मागनी चाहिए।
आम आदमी पार्टी पूरे देश में ओआरओपी और रामकिशन की शहादत को न्याय दिलाने के लिए, सैनिकों के सम्मान के लिए आन्दोलन करेगी। उन्होंने कहा कि जय जवान, जय किसान को इस सरकार ने मर जवान मर किसान में तब्दील कर दिया है।
आइबीएन की रिपोर्ट के मुताबिक, कुमार विश्वास ने कहा कि वर्दी में किसी भी जवान के शहीद होने पर सबसे ज्यादा मुआवजा देने वाले सीएम और उपमुख्यमंत्री को जेल में बंद किया गया। दिल्ली की सड़कों पर घुमाया गया। ये गुजरात जैसी स्थिति है। जो करके गुजरात में ये सफल हो गए, वो यहां नहीं चलेगा। यहां लोकतंत्र की जड़ें काफी मजबूत हैं।
हरियाणा के भिवानी के रहने वाले रक्षा सुरक्षा कोर (डीएससी) के जवान सूबेदार रामकिशन ग्रेवाल द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले पर रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसे छठे वेतन आयोग के हिसाब से पेंशन और वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) का लाभ मिल रहा था। इसके अलावा जहां तक सातवें वेतन आयोग के आधार पर वेतन बढ़ोतरी न मिलने का मुद्दा है, तो इस पर मंत्रालय यह स्पष्ट करना चाहता है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिए जाने की वजह से इसका लाभ सशस्त्र सेनाओं को नहीं मिल पा रहा है। डीएसी भी सशस्त्र सेनाओं का ही हिस्सा है।
मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि इस मामले की जानकारी मिलने के बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने मंत्रालय के आला अधिकारियों से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी, जो उन्हें दे दी गई है। गौरतलब है कि मंगलवार को पर्रिकर और सेनाप्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर गए हुए थे। बीते सप्ताह के अंत में ओआरओपी को लेकर पूर्व सैनिकों द्वारा जो कमियां बतायी गई थीं, उनके लिए गठित जस्टिस एल.नरसिंम्हा रेड्डी आयोग ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी है। मंत्रालय में इसका अध्ययन चल रहा है।
आत्महत्या से पहले 70 वर्षीय रामकिशन यहां राजधानी के 10 अकबर रोड़ स्थित रक्षा मंत्री के आवास पर उनसे मिलने भी गए थे। लेकिन सुरक्षा गार्ड्स ने उन्हें मिलने नहीं दिया। इसके बाद ही जवाहर भवन के लॉन में रामकिशन ने आत्महत्या की। इस तथ्य को नकारते हुए रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार जवान द्वारा रक्षा मंत्री से मिलने का कोई अनुरोध नहीं किया गया था। ग्रेवाल को छठे वेतन आयोग और ओआरओपी का लाभ डीएसी में नौकरी के आधार पर दिया जा रहा है। जबकि सेना में उनकी नौकरी की शुरूआत परंपरागत सेना (टीए) की 105 इंफेंट्री बटालियन (राज-राइफल ग्रूप) में हुई थी।
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| इस दृश्य पर मनीष, केजरीवाल और संजय क्या "शोले" फिल्म का आनन्द ले रहे हैं? |
‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरणा दे रहे पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल के आत्महत्या करने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा चुका है। किसी को भी मृत सैनिक के परिवार वालों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। सबसे पहले दिल्ली के डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया पीड़ित के परिवार वालों से मिलने के लिए राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल पहुंचे तो उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया।
इसके बाद ये मामला यहीं शांत नहीं हुआ। पुलिस ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी अस्पताल में जाने से रोका गया। इससे वो भड़क गए। उन्होंने केंद्र सरकार पर अलोकतांत्रिक होने का आरोप लगाते हुए कहा, 'यह कैसा देश है?... कैसा हिंदुस्तान बनाया जा रहा है?' बाद में राहुल गांधी अस्पताल के बाहर ही डट गए। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक के परिजन उनसे मिलने के लिए बाहर आ रहे हैं। वह अस्पताल के बाहर उनसे मुलाकात करेंगे। हालांकि, जब परिजन बाहर नहीं आए तो राहुल लौट गए।
AAP का मोदी पर निशाना
मनीष सिसोदिया ने ट्वीट करके कहा, 'एक पूर्व सैनिक केंद्र सरकार की हरकतों की वजह से आत्महत्या कर लेता है और उसके परिवार से बात करने पर मुझे हिरासत में ले लिया जाता है। हद है!' उन्होंने ट्विटर पर यह भी कहा, 'सैनिक की बहादुरी पर सीना ठोककर अपनी वाहवाही में लगे प्रधानमंत्री जी! आज एक पूर्व सैनिक ने आत्महत्या कर ली है। इसकी जवाबदेही किसकी है?' बता दें कि इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी पूर्व सैनिक की मौत के लिए मोदी सरकार को कोसा था। उन्होंने पहले ट्वीट और फिर विडियो मेसेज जारी कर मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया था।
तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली में कथित रूप से आत्महत्या करने वाले पूर्व सैनिक के परिवार से मिलने के लिए अस्पताल में जाने से रोकने के कदम की आलोचना की। वहीं दूसरी ओर पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को हटाने की मांग की।
ममता ने ट्वीट कर कहा कि एक तरफ हमारे जवान सूइसाइड कर रहे हैं वहीं दूसरी और राहुल गांधी और मनीष सिसोदिया को मृतक के परिवार वालों से मिलने से रोका जा रहा है। ममता ने यह ट्वीट सिसोदिया और राहुल को पुलिस द्वारा डिटेन किए जाने के बाद किए।
ममता ने लगातार ट्वीट कर इस मामले में अपनी बात कही। ममता ने कहा कि दिल्ली पुलिस को उन्हें मिलने की अनुमति देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, 'यह सब क्या हो रहा है? अपनी ही स्टेट में एक सीएम को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्हें आजादी से घूमने भी नहीं दिया जा रहा। यह बिलकुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।'
इस पूरे मामले को लेकर चल रही राजनीतिक गहमागहमी के बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य नेताओं को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिये जाने पर सवाल खड़ा करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को हटाने की मांग की है।
एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम ने एक ट्वीट में कहा, 'गृह मंत्री को दिल्ली पुलिस आयुक्त को हटा देना चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं कर सकते है तो उन्हें स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए।'
गौरतलब है कि रामकिशन नामक एक पूर्व सैनिक ने वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना के मुद्दे पर दिल्ली में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद राहुल तथा सिसोदिया अस्पताल पहुंचे जहां उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने अंदर जाने से रोक दिया गया।
लाशों पर खेलते राजनीति
वीके सिंह नें राहुल गांधी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकारें 40 साल तक वन रैंक वन पेंशन को टालती रही। उन्ही के कारण ये मामला इतना उलझ गया। और अब राहुल गांधी इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल को तो इस मुद्दे पर बोलने का कोई हक़ ही नहीं है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ने कहा कि राहुल गांधी और केजरीवाल मौत पर राजनीति करते हैं। उन्होने राहुल गांधी के लिए कहा कि राहुल पार्ट टाइम राजनीति करते हैं। जब 40 सालों तक कांग्रेस की सरकार ने वन रैंक वन पेंशन लागू नहीं किया तब तो राहुल गांधी ने कुछ भी नहीं कहा।
अरविन्द केजरीवाल के लिए बीजेपी नेता बोले कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास तो दुनिया की सारी समस्याओं का हल है, बस उनसे उनके विधायक ही नहीं संभल रहे। इस मुद्दे पर राजनीति गरमाई हुई है। राहुल गांधी पुलिस की हिरासत में हैं।
अब आपकी बारी
क्या आपको लगता है कि मौत पर सियासत करने वाले ऐसे नेताओं को पहचान कर जनता को इनका बहिष्कार कर देना चाहिए?




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